मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर अगर किसी एक विचार को उसकी सबसे बड़ी पहचान कहा जाए, तो वह है—‘अंत्योदय’। यानी समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना, जो दशकों तक सरकारी योजनाओं और अवसरों से दूर रहा। बीते 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने इस सोच को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे शासन व्यवस्था का आधार बनाया। परिणामस्वरूप आदिवासी, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, घुमंतु समुदाय, अल्पसंख्यक और सफाईकर्मी जैसे वर्ग विकास की कहानी के केंद्र में दिखाई देने लगे हैं।
कभी जिन बस्तियों तक सड़क, बिजली और सरकारी सेवाएं पहुंचना मुश्किल माना जाता था, आज वही क्षेत्र विकास योजनाओं की प्राथमिकता बन चुके हैं। सरकार का फोकस अब केवल योजनाएं बनाने पर नहीं, बल्कि अंतिम छोर तक उनकी डिलीवरी सुनिश्चित करने पर रहा है। यही वजह है कि अंत्योदय आज एक सामाजिक दर्शन से आगे बढ़कर एक प्रभावी गवर्नेंस मॉडल बन चुका है।
आइए, 12 प्वाइंट्स में देखते हैं कि मोदी सरकार ने किस तरह ‘अंत्योदय’ यानी समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति के उदय को सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि गवर्नेंस का मुख्य आधार बनाया।
1. गवर्नेंस का नया ढांचा और सैचुरेशन पर फोकस
पिछले 12 वर्षों में भारत की विकास यात्रा में एक बड़ा वैचारिक बदलाव आया है। अब सरकार यह मानकर काम नहीं करती कि विकास की किरणें ऊपर से छनकर नीचे तक पहुंचेंगी, बल्कि जो सबसे पीछे थे, उन्हें देश के संसाधनों और विकास की रेस में सबसे आगे खड़ा किया गया है। ध्यान बिखरी हुई डिलीवरी से हटकर अधिकतम लोगों तक सेवाओं को शामिल करने (सैचुरेशन) पर आ गया है।
2. बदला देश का भूगोल: आकांक्षी जिला और ब्लॉक कार्यक्रम
सरकार ने इस सरल विश्वास पर काम किया कि भूगोल को भाग्य का निर्धारण नहीं करना चाहिए। साल 2018 में शुरू हुए ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ ने देश के 112 सबसे पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर बदल दी। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए 2023 में ‘आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम’ शुरू किया गया, जो अब 329 जिलों के 500 पिछड़े ब्लॉकों में अंतिम छोर तक विकास की सीधी निगरानी कर रहा है।
3. पीएम जनमन: सबसे कमजोर आदिवासी समूहों (PVTGs) की सुध
नवंबर 2023 में 24,104 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ शुरू हुआ ‘पीएम जनमन’ अभियान देश के 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 75 विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (PVTGs) के लिए संजीवनी बनकर आया है। 9 मंत्रालयों के साझा प्रयासों से इन बेहद अलग-थलग रहने वाले समुदायों तक पहली बार पक्के घर, साफ पानी, बिजली और सड़कें बड़े पैमाने पर पहुंच रही हैं।

4. वन धन विकास केंद्र: आजीविका और कौशल विकास
आदिवासी समाज को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने के लिए ‘वन धन विकास केंद्रों’ (VDVKs) का नेटवर्क खड़ा किया गया है, जो वन उत्पादों को इकट्ठा करने और बेचने में मदद करते हैं। अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 500 के लक्ष्य में से 491 केंद्र पूरी तरह चालू हो चुके हैं। इसके तहत एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम के जरिए 38,391 से अधिक आदिवासी सदस्यों को बेहतरीन ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
5. पीएम-जुगा: आदिवासी विकास का एकीकृत महामिशन
अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ (PM-JUGA) आदिवासी कल्याण में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसके तहत पुराने ढर्रे को तोड़ते हुए सरकार के 17 मंत्रालयों के प्रयासों को एक साथ जोड़ा गया है। अब अलग-अलग योजनाएं अकेले-अकेले काम नहीं करतीं, बल्कि पूरा सरकारी अमला एक साथ मिलकर आदिवासी बहुल गांवों की कमियों को दूर कर रहा है।
6. एकलव्य मॉडल स्कूल: शिक्षा की नई क्रांति
आदिवासी बहुल इलाकों में कक्षा 6 से 12वीं तक के ‘एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों’ (EMRS) ने पढ़ाई का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बदल दिया है। वर्ष 2026 तक देश के 499 स्कूलों में 1.56 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं, और 323 नए स्कूल बन रहे हैं। स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के दम पर यहां पढ़ने वाले बच्चे अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी बन रहे हैं।

7. सांस्कृतिक गौरव: आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को सच्चा सम्मान
विकास के साथ-साथ सरकार ने वंचितों के आत्मसम्मान और गौरव को बहाल किया है। इतिहास के गुमनाम आदिवासी नायकों की याद में 10 राज्यों में 11 स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 4 का उद्घाटन हो चुका है। हर साल 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया जा रहा है, और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ मनाया गया।
8. पीएम-अजय: अनुसूचित जातियों का आर्थिक और सामाजिक उत्कर्ष
साल 2021 में शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (PM-AJAY) देश के 26 राज्यों के 597 जिलों में फैले 47,334 गांवों को कवर कर रही है। इसका लाभ सीधे 4 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के 83 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंच रहा है। इसके तहत अब तक 25,000 से अधिक गांवों में बुनियादी ढांचे का आकलन पूरा कर सड़कें, पानी, शिक्षा और स्वयं सहायता समूहों के जरिए आजीविका के नए रास्ते खोले गए हैं।
9. श्रेष्ठ और श्रेयस योजना: उच्च शिक्षा से पूरे होते सपने
वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए ‘श्रेयस’ (SHREYAS) योजना के तहत वर्ष 2025-26 में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे शीर्ष संस्थानों में पढ़ने वाले 4,156 अनुसूचित जाति के छात्रों को वित्तीय सहायता दी गई, जिसमें छात्राओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। वहीं ‘श्रेष्ठ’ (SHRESHTA) योजना के जरिए कम आय वाले परिवारों के मेधावी छात्रों को राष्ट्रीय परीक्षा के माध्यम से देश के बेहतरीन प्राइवेट आवासीय स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाई जा रही है, जिससे 2025-26 में 19,754 छात्र लाभांवित हुए।

10. डिजिटल स्कॉलरशिप और उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड नामांकन
प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों को पूरी तरह डिजिटल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जोड़ने से बिचौलिए खत्म हो गए हैं। साल 2025-26 में प्री-मैट्रिक योजना के तहत 359.47 करोड़ रुपये सीधे 17.14 लाख छात्रों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से भेजे गए। इसी का नतीजा है कि उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के छात्रों का नामांकन 2014-15 के मुकाबले 44 प्रतिशत बढ़कर 66.23 लाख हो गया है, जिसमें अनुसूचित जाति की महिला छात्रों के नामांकन में 51 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
11. पीएम-यशस्वी, पीएम-दक्ष और सीड: पिछड़ों और घुमंतुओं को संबल
ओबीसी, ईबीसी और गैर-अधिसूचित व घुमंतु जनजातियों (DNTs) के लिए ‘पीएम-यशस्वी’ योजना के जरिए स्कॉलरशिप और ‘पीएम-दक्ष’ योजना के तहत 2.08 लाख से अधिक युवाओं को मुफ्त कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। घुमंतु समाजों के लिए समर्पित ‘सीड’ (SEED) योजना के तहत साल 2025-26 में 64,701 लोगों को सीधे वित्तीय मदद और उनके परिवारों को 73,569 ‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड’ जारी किए गए, ताकि उन्हें सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके।
12. पीएम विकास और नमस्ते योजना: अल्पसंख्यकों का हुनर और सफाईकर्मियों की गरिमा
अल्पसंख्यक समुदायों के कौशल को बाजार के अनुकूल बनाने के लिए वर्ष 2025 में 5 पुरानी योजनाओं को मिलाकर ‘पीएम विकास’ (PM VIKAS) योजना शुरू की गई, जिसमें अब तक 73,200 से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हो चुके हैं और ड्रोन इंजीनियरिंग व एविएशन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में ट्रेनिंग पा रहे हैं। वहीं, सफाई कर्मचारियों के जीवन से जोखिम खत्म करने के लिए ‘नमस्ते’ (NAMASTE) योजना लागू की गई है, जिसके तहत सीवर की खतरनाक मैनुअल सफाई को मशीनीकृत प्रणालियों में बदला जा रहा है, और जून 2024 से इसमें कचरा बीनने वालों को भी शामिल कर उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिया गया है।

पिछले 12 वर्षों में अंत्योदय सरकार की कल्याणकारी सोच से आगे बढ़कर एक व्यापक गवर्नेंस मॉडल के रूप में उभरा है। आदिवासी, अनुसूचित जाति, पिछड़े, घुमंतु, अल्पसंख्यक और सफाईकर्मी समुदायों तक शिक्षा, कौशल, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान पहुंचाने के प्रयासों ने समावेशी विकास की नई नींव रखी है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश में इन समुदायों की भागीदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।









