प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने पिछले 12 वर्षों में प्रगति की एक नई परिभाषा लिखी है। वर्ष 2014 के बाद से देश के कोने-कोने में विकास की जो बयार बही है, उसका सबसे बड़ा आधार हमारी मजबूत होती आधारभूत संरचना (Infrastructure) है। परिवहन, आवास, शुद्ध पेयजल, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल नेटवर्क जैसे हर अहम क्षेत्र में देश ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रफ्तार हासिल की है। यह बदलते भारत की वह सुनहरी तस्वीर है जिसने न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि देश के आम नागरिक के जीवन को भी बेहद सुगम और सम्मानजनक बना दिया है।

आइए जानते हैं इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की 24 प्रमुख उपलब्धियों के बारे में, जिन्होंने इन 12 वर्षों में देश की तकदीर और तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।
1. भारतीय रेलवे का कायाकल्प: बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है और पिछले 12 वर्षों में इस जीवनरेखा को अत्याधुनिक, सुरक्षित और बेहद आरामदायक बनाने के लिए क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। सरकार ने रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अपने बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2014-15 में रेलवे के लिए बजटीय सहायता जहां केवल 32,000 करोड़ रुपये के आसपास हुआ करती थी, वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में इसे लगभग नौ गुना बढ़ाकर 2.78 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। इस भारी-भरकम निवेश का सीधा असर आज पटरियों पर दिखाई दे रहा है।
2. शत-प्रतिशत रेल विद्युतीकरण
रेलवे के क्षेत्र में सबसे बड़ी और पर्यावरण के अनुकूल उपलब्धियों में से एक शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर बढ़ना है। साल 2014 से पहले देश का केवल 20 प्रतिशत रेल नेटवर्क ही बिजली से चलता था, लेकिन मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कुल 69,873 किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है। विद्युतीकरण के कारण डीजल पर निर्भरता कम हुई है, जिससे ईंधन आयात लागत में कमी आई है और कार्बन उत्सर्जन भी घटा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक ट्रेनों की गति और परिचालन दक्षता बेहतर होने से यात्रियों और माल ढुलाई दोनों को लाभ मिला है। यह उपलब्धि रेलवे को अधिक हरित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
3. वंदे भारत, वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस
स्वदेशी तकनीक से बनी ‘वंदे भारत’ ट्रेनें देश के गौरव का प्रतीक बन चुकी हैं। अपनी रफ्तार, ऑनबोर्ड तकनीक और बेहतरीन सुख-सुविधाओं के दम पर इन ट्रेनों ने भारतीयों के सफर करने के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। अप्रैल 2026 तक देश भर में 162 वंदे भारत सेवाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही लंबे सफर को आरामदायक बनाने के लिए जनवरी 2026 में शुरू हुई ‘वंदे भारत स्लीपर’ ने सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आम और मध्यम वर्गीय परिवारों की सहूलियत के लिए सरकार ने ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ की शुरुआत की है, जो बेहद किफायती किराए में लंबी दूरी का आरामदायक सफर प्रदान करती है। वर्तमान में ऐसी 60 ट्रेन सेवाएं देश के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ रही हैं।
4. बुलेट ट्रेन परियोजना और नए कॉरिडोर
देश की पहली हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन का काम मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर (MAHSR) पर बहुत तेजी से चल रहा है। यह 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों के लिए तैयार किया जा रहा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई है। इसके तहत देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की विस्तृत योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे आने वाले समय में पूरा देश बुलेट ट्रेन से जुड़ जाएगा।

5. अमृत भारत स्टेशन योजना
स्टेशनों को आधुनिक और सुंदर बनाने के लिए साल 2023 में ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ शुरू की गई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देश भर के 1,338 रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है, जिनमें से 208 स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य सफलतापूर्वक पूरा भी किया जा चुका है। अब इन स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं, बड़े वेटिंग लाउंज, साफ-सफाई और फूड कोर्ट आम यात्रियों को मिल रहे हैं, जिससे यात्रा सुखद हो गई है।
6. ‘कवच’ प्रणाली से अचूक रेल सुरक्षा
सुरक्षा के मामले में भारतीय रेलवे ने मोदी सरकार के नेतृत्व में एक नया और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। भारत ने अपनी स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ विकसित की है, जो मानवीय चूक से होने वाली दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकती है। कवच प्रणाली को अब तक 3,103 किलोमीटर मार्ग पर लागू किया जा चुका है और देश के प्रमुख रेल गलियारों में 24,427 किलोमीटर मार्ग पर इसका काम युद्धस्तर पर जारी है। इन कड़े सुरक्षा उपायों का ही सुखद परिणाम है कि देश में ट्रेन दुर्घटनाएं साल 2014-15 के 135 से घटकर वर्ष 2025-26 में सिर्फ 16 रह गई हैं।
7. दुर्गम और रणनीतिक क्षेत्रों में सुलभ कनेक्टिविटी
मोदी सरकार के बीते 12 वर्षों की एक और शानदार विशेषता यह रही है कि देश के उन हिस्सों को मुख्यधारा की रेल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है, जहां पहले रेल पहुंचाना एक सपने जैसा माना जाता था। इस कड़ी में गर्व से भर देने वाला नाम है ‘चेनाब ब्रिज’ का, जिसे साल 2025 में पूरी तरह तैयार कर लिया गया। यह पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्क ब्रिज है। इस पुल के चालू होने से जम्मू और श्रीनगर के बीच वर्ष भर संपर्क मजबूत हुआ है। जम्मू-कश्मीर में ही देश का पहला केबल पर टिका रेलवे पुल ‘अंजी खड़ पुल’ भी साल 2025 में बनकर तैयार हो गया है। दक्षिण भारत की बात करें, तो तमिलनाडु में ‘पंबन पुल’ भी साल 2025 में आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बड़ा गवाह बना है। यह भारत का पहला वर्टिकल-लिफ्ट रेलवे समुद्री पुल है। पूर्वोत्तर भारत को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ने के संकल्प के तहत ‘बैराबी-सैरांग’ रेलवे लाइन परियोजना (2025) एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। 51.38 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन बेहद चुनौतीपूर्ण और ऊंचे-नीचे पहाड़ी इलाकों से गुजरते हुए मिजोरम तक पहुंचती है।
8. सड़कों और राजमार्गों का जाल: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क
साल 2014 के बाद से भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का जो जाल बिछा है, उसने देश के परिवहन की रफ्तार को दोगुना कर दिया है। आज भारत 63.73 लाख किलोमीटर के कुल सड़क नेटवर्क के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश बन चुका है। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई में 61 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मार्च 2014 में हमारे पास 91,287 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग थे, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 1,46,566 किलोमीटर हो चुके हैं। चार लेन और उससे अधिक चौड़े राजमार्गों की लंबाई 2014 के 18,371 किलोमीटर से ढाई गुना बढ़कर 45,516 किलोमीटर हो गई है। इसके साथ ही, देश में कुल 3,644 किलोमीटर लंबे नियंत्रित-प्रवेश वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे चालू किए जा चुके हैं।

9.प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सफलता
शहरों के साथ-साथ गांवों की तरक्की के लिए ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY) को मोदी सरकार ने एक नई ताकत दी है। गांवों को हर मौसम में चालू रहने वाली पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए इस योजना का बजटीय आवंटन साल 2014-15 के मात्र 386 करोड़ रुपये से बढ़ाकर साल 2026-27 में 19,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बड़े प्रयास का नतीजा यह हुआ है कि आज देश के 99.6 प्रतिशत पात्र ग्रामीण घर पक्की सड़कों से जुड़ चुके हैं। साल 2000 से 2014 के बीच जहां 3.86 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनी थीं, वहीं मोदी सरकार के 2014 से 2026 के कार्यकाल में 4.11 लाख किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गईं। सबसे बड़ी क्रांति पुलों के निर्माण में आई, जहां पहले के 14 सालों में सिर्फ 484 पुल बने थे, वहीं पिछले 12 सालों में 10,293 ग्रामीण पुलों का निर्माण किया गया। देश के भीतर माल ढुलाई को सुगम बनाने और तटीय व सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने के लिए साल 2017 में ‘भारतमाला परियोजना’ को हरी घंडी दिखाई गई थी, जिसके तहत 22,590 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
10. सामरिक और ऐतिहासिक सुरंगे: जिसने दूरियों को किया कम
सड़क बुनियादी ढांचे के विकास के तहत पिछले 12 वर्षों में कई ऐसी टनल और पुल बनाए गए हैं, जिन्होंने न केवल दो जगहों के बीच की दूरी और समय को आधा कर दिया, बल्कि दुर्गम मौसम में भी जीवन को रुकने नहीं दिया। इस कड़ी में जम्मू और कश्मीर की ज़ेड-मोर / सोनमर्ग सुरंग (2025) अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो 12 किमी लंबी है और हिमस्खलन व भूस्खलन वाले इलाकों में हर मौसम में लद्दाख और सोनमर्ग के लिए सुरक्षित रास्ता प्रदान करती है। हिमाचल प्रदेश में बनी अटल सुरंग (2020) 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है। 9.02 किमी लंबी यह सुरंग मनाली से सरचू की दूरी को 46 किमी कम करती है और सर्दियों में भी जनजातीय क्षेत्रों को देश से जोड़े रखती है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर की 9 किमी लंबी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग (2017) ने जम्मू और श्रीनगर के बीच की दूरी को 31 किमी और यात्रा के समय को 2 घंटे कम कर दिया है, जिससे 2,000 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
11. देश को जोड़ने वाले रणनीतिक पुल
सुरक्षा और व्यापार को गति देने के लिए देश में कई बड़े रणनीतिक पुल बनाए गए हैं। गुजरात में बना सुदर्शन सेतु (2024) ओखा को बेत द्वारका से जोड़ता है। 2.32 किमी लंबा यह पुल तीर्थयात्रियों और तटीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। त्रिपुरा में फेनी नदी पर बना 1.9 किमी लंबा मैत्री सेतु (2021) भारत और बांग्लादेश को जोड़कर पूर्वोत्तर के व्यापार की रसद दूरी कम करता है। असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाला धोला-सादिया पुल (2017) भी सामरिक दृष्टि से बेजोड़ है। 9.15 किमी लंबा यह पुल दोनों राज्यों के बीच पहला स्थायी सड़क संपर्क है, जो सेना के भारी वाहनों की आवाजाही को बेहद सुगम बनाता है।
12. हाल ही में पूरे हुए मेगा रोड प्रोजेक्ट्स
पिछले कुछ समय में देश के विभिन्न राज्यों में कई बड़े सड़क और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को पूरा करके जनता को समर्पित किया गया है। गुजरात में बना अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे (2026) इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। 109 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे अहमदाबाद और धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के बीच की दूरी और समय को बहुत कम कर चुका है। इसी तरह, दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर (2026) ने तो यात्रा की परिभाषा ही बदल दी है। 213 किलोमीटर लंबे इस शानदार कॉरिडोर के बन जाने से दिल्ली से देहरादून का सफर जो पहले 6 घंटे का होता था, वह अब घटकर मात्र ढाई घंटे रह गया है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर बनाया गया है।

13. दिल्ली-एनसीआर को जाम से मुक्ति
देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए द्वारका एक्सप्रेसवे का दिल्ली खंड (2025) चालू किया गया। 10.1 किलोमीटर लंबे इस अत्याधुनिक खंड में आठ लेन की विशाल सुरंग बनाई गई है जो यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर और सीधे आईजीआई हवाई अड्डे को बेहतरीन और सीधी कनेक्टिविटी देती है। इसके साथ ही, 76 किलोमीटर लंबी शहरी विस्तार सड़क-II (UER-II, 2025) को दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के रूप में विकसित किया गया है। इसने शहर के भीतर आने वाले भारी वाहनों के दबाव और ट्रैफिक जाम को बहुत कम कर दिया है।
14. आम आदमी का हवाई सफर का सपना हुआ सच
मोदी सरकार की “उड़े देश का आम नागरिक” यानी ‘उड़ान’ (UDAN) योजना ने हवाई चप्पल पहनने वाले आम इंसान को भी हवाई जहाज की यात्रा करने का अवसर दिया है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भारी निवेश किया गया, जिसके परिणामस्वरूप देश में चालू हवाई अड्डों की संख्या साल 2014 के मात्र 74 से बढ़कर साल 2026 में 165 हो गई है। उड़ान योजना के तहत 665 हवाई मार्ग पूरी तरह सक्रिय हैं जो देश के 95 क्षेत्रीय हवाई अड्डों को जोड़ते हैं। इस सुलभ व्यवस्था से अब तक 1.64 करोड़ से ज्यादा आम यात्रियों ने हवाई सफर का आनंद लिया है। साल 2026 में 28,840 करोड़ रुपये के बड़े बजट के साथ ‘संशोधित उड़ान योजना’ को लॉन्च किया गया है।
15. ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स, डिजी यात्रा और अत्याधुनिक विमानन तकनीक
हवाई अड्डों को आधुनिक बनाने के लिए देश में बड़े स्तर पर ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। 2014 के बाद से 25 नए हवाई अड्डों को विकसित करने का काम शुरू हुआ, जिनमें गोवा का मोपा, केरल का कन्नूर, अरुणाचल प्रदेश का होलोंगी, नवी मुंबई और उत्तर प्रदेश का नोएडा (जेवर) अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल हैं। ये हवाई अड्डे आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और पर्यटन के बहुत बड़े केंद्र बनने जा रहे हैं। हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों के अनुभव को सुगम और पूरी तरह से पेपरलेस बनाने के लिए ‘डिजी यात्रा’ (Digi Yatra) जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणाली की शुरुआत की गई है। मई 2026 तक यह सुविधा देश के 38 प्रमुख हवाई अड्डों पर काम कर रही है और 9.3 करोड़ से ज्यादा यात्री इसका लाभ उठा चुके हैं। इसके अलावा, साल 2015 से देश में ‘गगन’ (GAGAN) नामक भारत की अपनी पहली सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली काम कर रही है, जिसने उड़ानों की सुरक्षा और नेविगेशन की सटीकता को दुनिया में सबसे बेहतरीन बना दिया है।
16. मेट्रो और रैपिड रेल क्रांति: वैश्विक रोल मॉडल बना भारत
भारत के बड़े शहरों में बढ़ती आबादी को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, प्रदूषण मुक्त और तेज बनाना बेहद जरूरी था। पिछले 12 वर्षों में भारत ने मेट्रो प्रणालियों के विकास में जो लंबी छलांग लगाई है, उसने देश को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बना दिया है। साल 2014 में देश के भीतर कुल मेट्रो नेटवर्क केवल 248 किलोमीटर का था, जो साल 2026 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 1,155 किलोमीटर से अधिक हो चुका है। साल 2014 में केवल देश के 5 शहरों में मेट्रो चलती थी, लेकिन साल 2025 तक मेट्रो वाले शहरों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है।

17. परिवहन में वैश्विक नवाचार: अंडरवॉटर और वाटर मेट्रो
शहरी परिवहन के क्षेत्र में भारत ने कई ऐसे अनूठे नवाचार किए हैं जो दुनिया में मिसाल बन गए हैं। कोलकाता अंडरवॉटर मेट्रो (2024) के तहत कोलकाता में हुगली नदी के नीचे भारत की पहली जलमग्न मेट्रो सुरंग का सफल संचालन शुरू किया गया, जो इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। केरल का कोच्चि वाटर मेट्रो (2021) से कोच्चि दुनिया का ऐसा पहला शहर बना जिसने मुख्य भूमि को आस-पास के 10 द्वीपों से जोड़ने के लिए बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नावों के जरिए ‘वाटर मेट्रो’ की शुरुआत की। इसके साथ ही दिल्ली-मेरठ रूट पर देश की पहली रीजनल रैपिड रेल ‘नमो भारत’ (2025) भी शुरू हो चुकी है।
18. बंदरगाह और समुद्री व्यापार: सागरमाला से दोगुनी हुई देश की तटीय क्षमता
भारत की तीन तरफ फैली विशाल समुद्री सीमा देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का सबसे बड़ा द्वार है। वर्तमान में मात्रा के हिसाब से लगभग 95 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 70 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते ही होता है। इसे देखते हुए मोदी सरकार ने साल 2014 से अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज हमारे प्रमुख बंदरगाहों की कुल कार्गो हैंडलिंग क्षमता साल 2014 के 873 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) से लगभग दोगुनी होकर साल 2026 में 1,726 MMTPA तक पहुंच गई है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि जहाजों का टर्नअराउंड समय- यानी जहाज के बंदरगाह पर आने, माल उतारने और वापस जाने का समय जो पहले 94 घंटे हुआ करता था, वह घटकर अब मात्र 48.8 घंटे रह गया है। साल 2015 में लॉन्च की गई ‘सागरमाला परियोजना’ ने बंदरगाह आधारित विकास को एक नई दिशा दी है। इसके तहत बंदरगाहों को देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों और रेलवे-रोड नेटवर्क से सीधे जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही देश के भीतर मौजूद नदियों को परिवहन का जरिया बनाने के लिए सरकार ने अंतर्देशीय जलमार्गों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। साल 2014 में देश के पास केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, जिनकी संख्या को बढ़ाकर अब 111 कर दिया गया है। मार्च 2026 तक इनमें से 32 जलमार्ग पूरी तरह चालू हो चुके हैं।
19. औद्योगिक और विनिर्माण इंफ्रास्ट्रक्चर: ‘प्लगे-एंड-प्ले’ मॉडल से ग्लोबल हब बनता भारत
भारत को दुनिया का सबसे पसंदीदा विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) बनाने के उद्देश्य से औद्योगिक बुनियादी ढांचे का पूरी तरह से आधुनिकीकरण किया गया है। देश के भारतीय औद्योगिक भूमि बैंक (IILB) में 4,220 औद्योगिक पार्क पूरी तरह से सूचीबद्ध हैं। सरकार ने उद्योगों को तुरंत काम शुरू करने की सुविधा देने के लिए ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत 272 औद्योगिक पार्क चालू हैं। मार्च 2026 में सरकार ने ‘भव्य योजना’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत देश भर में 100 नए औद्योगिक पार्कों का जाल बिछाया जाएगा। राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत देश के सात प्रमुख आर्थिक गलियारों में 20 नए औद्योगिक स्मार्ट सिटीज और विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का विकास बहुत तेजी से किया जा रहा है।
20. नेशनल लॉजिस्टिक्स और पीएम गतिशक्ति: व्यापार में आई अभूतपूर्व तेजी
प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2021 में ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ की शुरुआत की। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो देश के विकास से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों को एक मंच पर लाता है। जून 2026 तक इस जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म पर 58 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को जोड़ा जा चुका है और यह 3,202 से अधिक डेटा लेयर्स का उपयोग करके किसी भी नई परियोजना की प्लानिंग को बेहद सटीक और तेज बना रहा है। इसके साथ ही, सितंबर 2022 में लागू की गई ‘राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति’ का ही नतीजा है कि विश्व बैंक के ‘लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स’ (LPI) में भारत की रैंकिंग साल 2014 के 54वें स्थान से सुधरकर साल 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है। परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की निगरानी के लिए प्रधानमंत्री स्वयं ‘प्रगति’ (PRAGATI) प्लेटफॉर्म के जरिए मुख्य सचिवों और अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करते हैं। अब तक इसके तहत 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 382 बड़ी परियोजनाओं की सीधे समीक्षा की जा चुकी है और विभागों के बीच आपसी तालमेल से जुड़े 2,958 जटिल मुद्दों का तुरंत निपटारा किया गया है। इसने देश में कार्य संस्कृति को पूरी तरह बदल दिया है।

21. आवास और घरेलू बुनियादी ढांचा: करोड़ों गरीबों को मिला अपना पक्का घर
साल 2015 में शुरू ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी’ (PMAY-U) के तहत स्वीकृत 125.31 लाख घरों में से मई 2026 तक 98.10 लाख पक्के मकान बन चुके हैं, जबकि साल 2005-14 के बीच सिर्फ 8.04 लाख घर बने थे। इस योजना में 96 प्रतिशत घरों का मालिकाना हक महिलाओं को मिला है और सितंबर 2024 में लॉन्च ‘PMAY-U 2.0’ के तहत साल 2028-29 तक एक करोड़ और नए घर देने का लक्ष्य है। इन मकानों को केवल चार दीवारों तक सीमित न रखकर उज्ज्वला गैस, सौभाग्य बिजली, स्वच्छ भारत शौचालय और जल जीवन मिशन के नल से जोड़कर संपूर्ण घरेलू बुनियादी ढांचा दिया गया है। साल 2016 में शुरू ‘प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण’ (PMAY-G) का लक्ष्य मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ गरीब परिवारों को पक्का घर देना है, जिसमें साल 2024 में अतिरिक्त 2 करोड़ नए घर जोडे गए। इसके अलावा, मध्यम वर्ग के अटके फ्लैटों के लिए साल 2019 में बने 15,531 करोड़ रुपये के ‘स्वामीह फंड’ (SWAMIH Fund) से अब तक 63,000 से अधिक फ्लैट पूरे कर खरीदारों को सौंपे गए हैं, जबकि ‘अमृत’ और ‘अमृत 2.0’ (2015-2026) के तहत शहरी विकास के लिए 2.79 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
22. ऊर्जा सुरक्षा और सार्वभौमिक विद्युतीकरण
साल 2014 के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र ने जो आत्मनिर्भरता हासिल की है, उसकी तारीफ आज पूरी दुनिया कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहले औसतन केवल 12.5 घंटे ही बिजली आती थी, वहीं अब गांवों में रोजाना औसतन 22.6 घंटे बिजली की निर्बाध आपूर्ति हो रही है। भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता साल 2014 के 248 गीगावाट से दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर मार्च 2026 तक 532.74 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। आम नागरिकों के बिजली बिल को हमेशा के लिए खत्म करने के उद्देश्य से साल 2024 में ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ की शुरुआत की गई है। गांवों में कचरे से कंचन बनाने के लिए साल 2018 में ‘गोबरधन योजना’ शुरू की गई थी, जिसके तहत मार्च 2026 तक देश भर में 1,014 से अधिक बड़े बायोगैस संयंत्र सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए साल 2017 में शुरू हुई ‘सौभाग्य योजना’ के तहत रिकॉर्ड समय में 2.86 करोड़ से अधिक घरों में पहली बार बिजली का कनेक्शन देकर पूरे देश का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण सुनिश्चित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत ने पर्यावरण के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व किया है। फ्रांस के साथ मिलकर भारत द्वारा स्थापित ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ (ISA) में आज दुनिया के 125 देश सदस्य बन चुके हैं।
23. स्वच्छ रसोई और एलपीजी क्रांति
ग्रामीण और गरीब परिवारों की महिलाओं को चूल्हे के हानिकारक धुएं से बचाना और उन्हें एक स्वस्थ जीवन देना मोदी सरकार के बुनियादी ढांचा विकास का एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय चेहरा है। साल 2014 से पहले देश के भीतर एलपीजी गैस कनेक्शन लेना एक बहुत बड़ा काम माना जाता था और गैस की पहुंच देश में केवल 55.9 प्रतिशत परिवारों तक ही सीमित थी, जो ज्यादातर शहरों में रहते थे। देश में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या साल 2014 के 14.51 करोड़ से दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर साल 2026 में 33.39 करोड़ हो चुकी है।
इस पूरी क्रांति का केंद्र बिंदु रही है साल 2016 में शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY), जिसके तहत देश की गरीब माताओं-बहनों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए। सरकार की यह पहल कितनी सफल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उज्ज्वला लाभार्थियों द्वारा कुल 49.21 करोड़ सिलेंडरों की रिफिलिंग कराई गई है, यानी देश में रोजाना औसतन 15.9 लाख सिलेंडर केवल गरीब परिवारों के घरों में डिलीवर हो रहे हैं।
24. डिजिटल इंडिया और सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना
पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल तकनीक और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जो क्रांति की है, उसने पूरी दुनिया को चकित कर दिया है। आज अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देश भी भारत के डिजिटल मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। साल 2014 में हमारे देश का टेली-घनत्व जहां 75.23 प्रतिशत था, वह साल 2025 तक बढ़कर 86.23 प्रतिशत हो चुका है। इसी अवधि में देश के भीतर इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या चार गुना बढ़कर 25.15 करोड़ से 100.29 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के मामले में तो देश ने लंबी छलांग लगाई है, जहां साल 2014 में देश में केवल 6.1 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर थे, वहीं साल 2025 में उनकी संख्या बढ़कर 99.56 करोड़ हो गई है, जो कि 1532 प्रतिशत से भी ज्यादा की रिकॉर्ड वृद्धि है। दूरसंचार के क्षेत्र में भारत ने दुनिया का सबसे तेज 5G रोलआउट करके अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है। साल 2022 में शुरू हुई 5G सेवाओं का बुनियादी ढांचा इतनी तेजी से बिछाया गया कि साल 2026 तक देश के 99.9 प्रतिशत जिलों की लगभग 85 प्रतिशत आबादी को 5G नेटवर्क के दायरे में लाया जा चुका है। भारत के इस डिजिटल साम्राज्य की असली शक्ति है ‘जेएएम ट्रिनिटी’ – जनधन, आधार और मोबाइल की अटूट शक्ति। डिजिटल पहचान प्रणाली के तहत कुल आधार धारकों की संख्या साल 2014 के 63.22 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक 144 करोड़ से अधिक हो चुकी है। गरीबों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने वाले ‘प्रधानमंत्री जन-धन खातों’ की संख्या 2026 में 57.71 करोड़ हो गई है। भारत का अपना यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल भुगतान सिस्टम बन चुका है। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल एक महीने मार्च 2026 के भीतर यूपीआई ने 29.53 लाख करोड़ रुपये के मूल्य वाले रिकॉर्ड 2,264 करोड़ लेनदेन सफलतापूर्वक प्रोसेस किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सफल और ऐतिहासिक 12 वर्षों का यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब इरादे नेक और विजन स्पष्ट हो, तो देश के भीतर बदलाव की कितनी बड़ी गाथा लिखी जा सकती है। इन 12 वर्षों में भारत ने केवल बुनियादी ढांचे का निर्माण नहीं किया है, बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीयों के मन में यह अटूट विश्वास जगाया है कि हमारा देश अब किसी भी मामले में दुनिया के बड़े और विकसित देशों से पीछे नहीं है। मोदी सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में तैयार की गई यह सुदृढ़ आधारशिला ही वह मजबूत नींव है, जिसके दम पर भारत आज पूरी आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के साथ साल 2047 तक एक पूर्ण ‘विकसित भारत’ बनने के अपने महान और ऐतिहासिक संकल्प की ओर बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है।









