हिंदी के महान कवि दुष्यंत कुमार की कविता की दो पंक्तियां हैं, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।” इन पंक्तियों से प्रेरणा लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में भाषण देने आते हैं, लेकिन उनका मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना होता है, इससे अभी तक ना सूरत बदली और ना ही सीरत। राहुल गांधी ने 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान 50 मिनट तक भाषण दिया। इस दौरान राहुल गांधी ने अपनी परंपरा को जारी रखा और इडियट जैसे असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। लेकिन देश की पालतू मीडिया इसे राहुल के नए अवतार के रूप में पेश कर रही है।
राहुल गाँधी के बयान का मतलब क्या है?
राहुल गांधी ने संसद में देश मे तीन श्रेणियों के बारे में बताया है
कुल मिला कर इन्हें सुनकर एक ही बात समझ मे आयी ,उसका मतलब यही है कि..
“जो काग्रेस को वोट नही देता ,राहुल गाँधी को पसंद नही करता है कांग्रेस से लड़ता है ,वह नेता उनके समर्थक… pic.twitter.com/qnuzfeYObB
— Suresh Singh (@sureshsinghj) July 29, 2026
राहुल गांधी के बचाव में उतरी पालतू मीडिया
अब आपको दिखाते हैं, किस तरह पालतू मीडिया राहुल गांधी के असंसदीय भाषा का बचाव कर रही है। उनके बचाव में नए-नए तथ्य गढ़ रही है। क्योंकि उन्हें राहुल गांधी को देखकर पुराने दिन याद आने लगते हैं, जब सत्ता की मलाई चाटने, पुरस्कार पाने, जमीन और फ्लैट पाने, विदेश यात्रा पर जाने, मंत्रिमंडल में अपने पसंद के लोगों को मंत्री बनाने का मौका मिलता था, जो मोदी सरकार में बंद हो गया है। इससे परेशान पत्रकार राहुल गांधी का कवच बनकर सामने आते हैं और नमक का हक अदा करते हैं। ऐसे में ही एक तथाकथित राजनीतिक विश्लेषक कुमार आशुतोष हैं, जो पहले पत्रकार से राजनेता और राजनेता से फिर पत्रकार बनकर गोदी मीडिया पर ज्ञान देते हैं। लेकिन पालतू पत्रकार बनकर राहुल गांधी का बचाव करने का कोई मौका नहीं चुकते हैं।
राहुल दोषी होते अगर वो किसी का नाम लेते । नाम नहीं लेने पर लोग नाराज क्यों हो रहे हैं ?
— ashutosh (@ashutosh83B) July 29, 2026
राहुल गांधी ऐसे मुद्दे उठाते हैं जिन्हें कोई अन्य नेता नहीं उठाता, यही राहुल गांधी की ताकत है।
– राजदीप सरदेसाई
भारत की जनता राहुल गांधी को अपना जननायक मानती है। pic.twitter.com/0gdtqOCkKP
— Sandeep Khasa (@SamKhasa_) February 15, 2026
कांग्रेस राज में पालतू पत्रकारों को मिला पद्म श्री पुरस्कार
पालतू मीडिया के पत्रकार अपने निजी स्वार्थ के लिए ना सिर्फ पत्रकारिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि दूसरों पत्रकारों की जान का दुश्मन बन गए हैं। ऐसे पत्रकार अपनी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता खो चुके हैं। इसलिए दूसरों की विश्वसनीयता खत्म करना चाहते हैं। पालतू मीडिया के पत्रकार गांधी परिवार को छोड़कर किसी दूसरे की तारीफ नहीं सुनना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि उनकी तरह गांधी परिवार की गुलामी सभी पत्रकार करें। क्योंकि कांग्रेस सरकार से मिली सुविधाओं की कीमत पर अपनी निष्ठा बेच दी और पालतू पत्रकार बन गए। पालतू पत्रकारोंं की नजरों में नेहरू-गांधी परिवार इस देश का पालनहार है। नेहरू-गांधी परिवार का वारिस ही इस देश पर राज करने के लिए पैदा हुए हैं। कांग्रेस ने भी अपने पालतू पत्रकारों का पूरा ख्याल रखा। उनकी निष्ठा को देखते हुए कांग्रेस राज में पद्म श्री पुरस्कार से समानित किया था।

अब आपको दिखाते हैं किस तरह पालतू पत्रकार राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बचाव और उनके गुणगान में सारी हदें पर कर जाते हैं…
पालतू पत्रकारों द्वारा गुणगान और महिमामंडन
“राहुल गांधी को बॉक्सिंग और जुजित्सु आता है, वो मोहम्मद अली हैं पर अंपायर (चुनाव आयोग) बेईमान है, अमित शाह राहुल से बहस नहीं कर पाये, भाग गये”
राहुल को भगोड़ा बताने वाले राजदीप सरदेसाई को रवीश कुमार का जवाब 😈 https://t.co/KohW6Zr5eg pic.twitter.com/dmFfkL55ev
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) December 12, 2025
सालों की मेहनत से तैयार की गई #पालतू_मीडिया आज भी पूंछ तो हिला रही अपने मालिकों के सामने पर काट कर ज़हर नहीं फैला पा रही ढंग से क्यूँकि उनके ज़हर का एंटीडोट बन गए राष्ट्रवादी पत्रकार।
ऐसे पालतुओं को अब एक्सपोज़ करिए।आपका फ़ेवरेट #PaaltuMedia कौन है इस हैशटैग के साथ ट्वीट कीजिए pic.twitter.com/f4h6I8qm99
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) July 29, 2026
ये देश के निष्पक्ष और क्रांतिकारी पत्रकार हैं, या #PaaltuMedia #पालतू_मीडिया ?
फैसला आप पर। pic.twitter.com/LtFPDI3MmO— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) July 29, 2026
2 अक्टूबर, 2022 को कर्नाटक के मैसूर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने बारिश के बीच जनसभा को संबोधित किया। राजा बारिश में भीगकर भाषण क्या दिया, मानो उसने 2024 की बड़ी जंग जीत ली हो। राजा का शौर्य देखकर पालतू पत्रकार काफी खुश नजर आए। उन्होंने राहुल की शान में किस तरह कसीदे पढ़े उसे आप देख सकते हैं।
ये कच्चे मका है…बारिश का मिज़ाज जानते है !
तुम बैठो कमरे में…ये भीगने का मज़ा जानते है !! pic.twitter.com/UBLFrwvSCb— punya prasun bajpai (@ppbajpai) October 2, 2022
The Cong ‘election’ has been a bit of a dampener in Delhi but on ground in Karnataka @RahulGandhi is sure making a statement in the rain. Netas need to plug on, rain or sunshine. (Recall how Sharad Pawar speech in M’tra in pouring rain in 2019 became a talking point). pic.twitter.com/1JX5bntyCt
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) October 2, 2022
This man. This moment. https://t.co/ZG2jhSmX55
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) October 2, 2022
देखिए राजमाता के कदमों में पालतू मीडिया
What a lovely picture as Rahul Gandhi ties his mother’s shoelaces pic.twitter.com/gEEB4ZsSVj
— Swati Chaturvedi (@bainjal) October 6, 2022
From mothers tying shoelaces of their sons to sons tying the mother’s laces- life comes full circle. Our children outgrow our laps but never our hearts. pic.twitter.com/PJu0cLn7zY
— Rohini Singh (@rohini_sgh) October 6, 2022
देखिए AAP की पालतू मीडिया
इसे कौन सा मीडिया कहेंगे..?#PaaltuMedia #पालतू_मीडिया@SushantBSinha @RubikaLiyaquat @AshokShrivasta6 @sudhirchaudhary pic.twitter.com/2pLi0TLE3T
— अजय प्रताप सिंह (Ajay) (@iAjaySengar) July 29, 2026
सिसोदिया तो एक शुरुआत है..
सवाल एक एक सीट का..
सवाल एक एक नेता का..
सवाल हर फाइल का..
सवाल बचेगा कौन..समूचे विपक्ष पर शिंकजा कसने की तैयारी ? https://t.co/Cejei8unk0 via @YouTube
— punya prasun bajpai (@ppbajpai) February 27, 2023
सबसे बेहतर स्कूल बनाने वाला गिरफ़्तार और सबसे अधिक नफ़रत फैलाने वाला केंद्रीय मंत्री…?
ये है आपका नया भारत?
— Rohini Singh (@rohini_sgh) February 26, 2023
These are the same “Neutral journalists” who takes high Moral ground and call other journalists as Godi Media. pic.twitter.com/2a8XMcVXW4
— Rishi Bagree (@rishibagree) April 5, 2022









