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मोदी सरकार के 12 साल: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता बनी नारी शक्ति के 24 बड़े कदम

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मोदी सरकार के 12 वर्षों में भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में व्यापक और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2014 से 2026 के बीच महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें विकास की साझेदार, निर्णयकर्ता और नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, तकनीक और राजनीति जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस परिवर्तन की साफ तस्वीर पेश करती है।

आइए एक नजर डालते हैं 12 वर्षों में उठाए गए 24 बड़े कदमों पर, जिन्होंने न केवल देश की करोड़ों महिलाओं को सशक्त बनाया है, बल्कि नए भारत के विकास की तस्वीर भी बदल दी है:

1. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: सोच बदलने का राष्ट्रीय अभियान
22 जनवरी 2015 को शुरू हुई बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने का काम किया। इसका उद्देश्य घटते बाल लिंगानुपात को सुधारना और लड़कियों को समान अवसर उपलब्ध कराना था। इस अभियान के परिणामस्वरूप संस्थागत प्रसव बढ़े और स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के अनुसार देश में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 943 से बढ़कर 1,020 तक पहुंच गई है, जो ऐतिहासिक सामाजिक बदलाव का संकेत है।

2. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: मातृत्व को आर्थिक संबल
मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए 2017 में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शुरू की गई। इसके तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। 30 अप्रैल 2026 तक लगभग 4.92 करोड़ महिलाओं ने इस योजना का लाभ प्राप्त किया। लाभार्थियों तक 20,150 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचाई गई, जिससे मातृ स्वास्थ्य को नई मजबूती मिली।

3. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान: सुरक्षित मातृत्व की गारंटी
हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की व्यवस्था ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी। इसके तहत देश भर के 22 हजार से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच (ANC) प्रदान की जाती है। इस पहल के अंतर्गत अब तक 7.4 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की जा चुकी है। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान और निगरानी से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। भारत में मातृ मृत्यु दर जो 2014-15 में प्रति लाख जीवित जन्मों पर 130 थी, वह 2021-2023 में घटकर अब मात्र 88 रह गई है।

4. जननी सुरक्षा योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का प्रभाव
गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने वाली इन योजनाओं ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में बड़ा योगदान दिया है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा गया। इससे घर पर होने वाले असुरक्षित प्रसव के जोखिमों में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप देश में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 79 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

5. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: शिक्षा में लैंगिक समानता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा व्यवस्था में लैंगिक समावेशन को केंद्र में रखा। एनईपी के तहत स्थापित ‘लैंगिक समावेशन कोष’ (Gender Inclusion Fund) विशेष रूप से वंचित और पिछड़े क्षेत्रों की लड़कियों को लक्षित सहायता प्रदान करता है, जिससे स्कूलों में लड़कियों की ड्रॉपआउट (स्कूल छोड़ने की) दर में भारी कमी आई है। इस नीति ने यह सुनिश्चित किया कि लड़कियां उच्च शिक्षा और करियर की दिशा में आगे बढ़ सकें।

6. समग्र शिक्षा अभियान से बदली स्कूलों की तस्वीर
समग्र शिक्षा अभियान ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। इसके तहत सुरक्षित परिसर, अलग शौचालय, बिजली, पुस्तकालय और डिजिटल शिक्षा सुविधाओं का विस्तार हुआ। देश में छात्राओं का नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ (32%) से बढ़कर 2024-25 तक 11.93 करोड़ (48%) तक पहुंच चुका है। साथ ही, व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले विद्यालयों की संख्या 9,477 से बढ़ाकर 25,000 की जा चुकी है।

7. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय: वंचित बेटियों का सहारा
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की लड़कियों को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने वाले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है। देश भर में कार्यरत केजीबीवी की संख्या साल 2022 के 4,996 से बढ़कर साल 2026 में 5,316 हो गई। इसके चलते इन आवासीय विद्यालयों में छात्राओं का कुल नामांकन 6.07 लाख से बढ़कर 7.58 लाख के पार पहुंच गया है। इससे हजारों बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिला।

8. छात्रवृत्ति योजनाओं से उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन
कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए केंद्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति में 50% सीटें मेधावी लड़कियों के लिए आरक्षित की गई हैं। साल 2023-24 में शुरू की गई ‘स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति’ के तहत चयनित छात्राओं को 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, एआईसीटीई (AICTE) की ‘प्रगति छात्रवृत्ति योजना’ के तहत तकनीकी डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष 10,000 छात्रवर्द्धियां दी जा रही हैं, जिससे अब तक लगभग 36 हजार छात्राओं को लाभ मिल चुका है।

9. STEM में महिलाओं का बढ़ता दबदबा
सरकार की ‘विज्ञान ज्योति योजना’ ने कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को मार्गदर्शन और प्रयोगशाला अनुभव देकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों को चुनने के लिए प्रेरित किया है। दिसंबर 2019 में अपनी शुरुआत के बाद से यह योजना 300 जिलों में 1.12 लाख से अधिक छात्राओं तक पहुंच चुकी है। आईआईटी (IIT) और एनआईटी (NIT) में अतिरिक्त सीटें सृजित करने से महिलाओं की भागीदारी 10 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है और वर्तमान में यूजीसी नेट-जेआरएफ के स्टेम स्कॉलर्स में 53 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।

10. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में महिलाओं की भागीदारी
युवा महिलाओं की शिक्षा को व्यावहारिक आजीविका और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बदलने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के विभिन्न चरणों के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें महिला लाभार्थियों की संख्या लगभग 45 प्रतिशत है। योजना का वर्तमान चरण (PMKVY 4.0) व्यावहारिक और भविष्य के उभरते क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर केंद्रित है, जिसके तहत पिछले तीन वर्षों में ही 27 लाख से अधिक उम्मीदवारों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

11.’नव्या’ कार्यक्रम: किशोरियों के लिए भविष्य के तकनीकी कौशल
PMKVY 4.0 के तहत साल 2025 में एक विशेष पहल ‘नव्या’ (युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण) की शुरुआत की गई है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से 16 से 18 वर्ष की आयु की किशोरियों पर केंद्रित है और उन्हें डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, एआई-आधारित सेवाओं और पर्यावरण के अनुकूल नौकरियों के नए अवसरों से परिचित कराता है। यह देश के 19 राज्यों के 27 आकांक्षी और उत्तर-पूर्वी जिलों में लागू की जा रही है।

12. आयुष्मान भारत: 21 करोड़ महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुरक्षा
साल 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना ने देश के गरीब परिवारों की महिलाओं को गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज के खर्च से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। फरवरी 2026 तक देश भर में जारी किए गए 43.52 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्डों में से लगभग 49 प्रतिशत यानी 21 करोड़ कार्ड अकेले महिलाओं के नाम पर हैं। योजना के तहत सूचीबद्ध 36,229 अस्पतालों में कुल इलाज प्रविष्टियों में से लगभग 48 प्रतिशत यानी 4.97 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थी हैं।

13. आयुष्मान आरोग्य मंदिर: घर के पास स्वास्थ्य सेवाएं
देशभर में 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) महिलाओं को उनके घर के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत देश भर में 95 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए जा चुके हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 49.75 प्रतिशत है, जो महिलाओं को अपने चिकित्सा इतिहास को सुरक्षित रखने और टेली-परामर्श की अद्भुत सुविधा देता है।

14. सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: ‘पोषण भी पढ़ाई भी’
0-6 वर्ष के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य और पोषण को मजबूत करने के लिए ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ कार्यक्रम के तहत जमीनी स्तर पर व्यापक निवेश किया गया है। इसके तहत देश के 1.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को ऑडियो-विजुअल एड्स और स्मार्ट लर्निंग टूल्स से लैस आधुनिक ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ में बदल दिया गया है और 10.58 लाख कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ पहल को धरातल पर उतारा गया है।

15. मिशन इंद्रधनुष: सुरक्षित मातृत्व और बचपन
दिसंबर 2014 में शुरू मिशन इंद्रधनुष ने टीकाकरण को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। यू-विन (U-WIN) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 18 मार्च 2026 तक, 11.87 करोड़ से अधिक बच्चों और 3.96 करोड़ गर्भवती महिलाओं ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। इसके तहत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया जा चुका है। इसके अलावा, 17 फरवरी 2026 तक 8.73 करोड़ महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा (सर्विकल) कैंसर की जांच की जा चुकी है।

16. सुकन्या समृद्धि योजना: बेटियों के भविष्य की वित्तीय नींव
साल 2015 में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के एक प्रमुख वित्तीय स्तंभ के रूप में ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ की शुरुआत की गई थी। डाकघरों और अधिकृत बैंकों में 10 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए खोले जाने वाले इन खातों में न्यूनतम 250 रुपये से जमा राशि शुरू की जा सकती है, जिस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत का आकर्षक वार्षिक ब्याज और आयकर की धारा 80C के तहत पूर्ण कर-मुक्त रिटर्न का लाभ मिल रहा है, जिसने बेटियों के प्रति समाज के नजरिए और उनकी वित्तीय योजना को पूरी तरह बदल दिया है।

17. स्वयं सहायता समूह: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक क्रांति
स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण भारत की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (DAY-NRLM) आज देश भर के 7,627 ब्लॉकों तक फैल चुका है, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने बैंकों से 12.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्राप्त किया है। इससे लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

18. लखपति दीदी: आत्मनिर्भरता की नई पहचान
लखपति दीदी पहल का उद्देश्य महिलाओं को सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की स्थायी आय तक पहुंचाना है। आज 10.07 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क से जुड़ी हैं। सरकार ने देश भर में 6 करोड़ लखपति दीदियों के सृजन का लक्ष्य रखा है। इन पहलों ने महिलाओं को केवल आय अर्जित करने का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामुदायिक नेतृत्व का महत्वपूर्ण केंद्र भी बनाया।

19. प्रधानमंत्री जन धन योजना: बैंकिंग से जुड़ी नारी शक्ति
जन धन योजना ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री जन धन योजना ने बैंकिंग को सरल, सुलभ और सार्वभौमिक बना दिया है। 2014 में शुरू की गई यह योजना शून्य-बैलेंस खाते खोलने और परिवारों को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ने पर केंद्रित है। इससे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण-DBT, बीमा, बचत और ऋण जैसी सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा मिला है।

20. मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया: महिला उद्यमिता का विस्तार
महिला उद्यमियों के सामने व्यवसाय शुरू करने के समय आने वाली ‘बिना गारंटी लोन’ की समस्या को साल 2015 में शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ ने पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके तहत मार्च 2026 तक 40.07 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है, जिसमें महिला उद्यमियों की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख है। इसके अलावा, विनिर्माण और व्यापार क्षेत्र के बड़े उद्योगों की स्थापना के लिए ‘स्टैंड-अप इंडिया’ योजना के तहत महिलाओं को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का बड़ा ऋण दिया जाता है, जिसने मार्च 2025 तक 2.05 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को मजबूत वित्तीय आधार दिया है।

21. नमो ड्रोन दीदी: कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का महिला नेतृत्व
कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को महिलाओं के हाथों में सौंपने के लिए नवंबर 2023 में ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए आधुनिक ड्रोन उड़ाने का पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाता है। सरकार ने 2023-26 की अवधि के लिए 1,261 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने और उन्हें कृषि सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की मंजूरी दी है।

22. वुमनिया और शी-मार्ट: बाजार तक सीधी पहुंच
महिला उद्यमियों के उत्पादों को सीधे सरकारी खरीद से जोड़ने के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर ‘वुमनिया’ पहल की शुरुआत की गई है, जहां 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत हैं और जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध दिए गए हैं। इसी श्रृंखला में, केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘स्वयं सहायता उद्यमी केंद्र’ यानी शी-मार्ट (She-Mart) योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए समर्पित खुदरा आउटलेट्स बनाए जाएंगे, जिससे देश की 1 करोड़ महिलाओं को सीधे लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

23. उज्ज्वला, आवास और जल जीवन मिशन: सम्मान और सुविधा का नया आधार
मई 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना गरीब परिवारों की महिलाओं को बिना जमा राशि के एलपीजी कनेक्शन प्रदान करती है, जिससे स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन को अपनाने को बढ़ावा मिलता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.55 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए, जिससे महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली। जल जीवन मिशन ने 15.84 करोड़ परिवारों तक नल का जल पहुंचाया। पारंपरिक रूप से, पानी लाने की जिम्मेदारी महिलाओं और लड़कियों पर ही रही है, जिसके लिए उन्हें अक्सर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और प्रतिदिन कई घंटे समर्पित करने पड़ते थे। प्रधानमंत्री आवास योजना ने महिलाओं को घर के स्वामित्व में प्राथमिकता देकर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। पीएमएवाई-ग्रामीण योजना के तहत मार्च 2026 तक, 4.15 करोड़ मकान आवंटित किए जा चुके हैं, 3.90 करोड़ मकान स्वीकृत किए गए हैं और 2.99 करोड़ मकान पूरे हो चुके हैं। इन सभी परियोजनाओं के लिए 4.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

24. महिला आरक्षण: राजनीति और नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी
मोदी सरकार आने के बाद पिछले एक दशक में लोकसभा, राज्यसभा, पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। देशभर में 14.5 लाख से अधिक महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने भविष्य में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दी है। इस अधिनियम ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान किया। इससे विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार हुआ है। वहीं राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में महिला कैडेटों की मौजूदगी ने नए इतिहास की शुरुआत की है।

नारी शक्ति: विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत
पिछले 12 वर्षों में महिला सशक्तिकरण भारत की विकास यात्रा का एक केंद्रीय स्तंभ बनकर उभरा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, उद्यमिता और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्र में उठाए गए कदमों ने करोड़ों महिलाओं को नए अवसर प्रदान किए हैं। आज देश की महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से लेकर स्टार्टअप्स तक, पंचायतों से लेकर संसद तक और कृषि से लेकर विज्ञान एवं तकनीक तक, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ‘महिला विकास’ से आगे बढ़कर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की अवधारणा को मजबूत करती है। मोदी सरकार के 12 वर्षों की यह यात्रा इस बात का संकेत देती है कि विकसित भारत 2047 के संकल्प में नारी शक्ति केवल सहभागी नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रगति की अग्रणी शक्ति के रूप में देश का नेतृत्व करेगी।

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