लोकतंत्र में संसद को देश की सबसे बड़ी पंचायत माना जाता है, जहाँ जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जनहित के विधेयकों, बजट और राष्ट्रीय नीतियों पर तथ्यपरक और गंभीर चर्चा करें। देश की जनता संसद की कार्यवाही इसलिए देखती है ताकि उसे अपने अधिकारों, समस्याओं के समाधान और देश के भावी विकास का रोडमैप मिल सके। लेकिन दुर्भाग्य से, बीते एक दशक में लोकसभा के पटल पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का रवैया संसदीय परंपराओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें धराशायी करता हुआ दिखा है।
संसदीय नियमों और मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाते हुए राहुल गांधी का एक निश्चित राजनीतिक पैटर्न बन चुका है। सदन में चर्चा का विषय चाहे कुछ भी हो—चाहे शिक्षा व परीक्षा सुधार हों, रक्षा बजट हो, चुनाव सुधार हों या देश की अर्थव्यवस्था—राहुल गांधी मूल मुद्दे को किनारे रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस पर व्यक्तिगत व मनगढ़ंत हमले शुरू कर देते हैं। तथ्यात्मक साक्ष्यों के बिना गंभीर दावे करना, मनगढ़ंत कहानियाँ गढ़ना और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सनसनी फैलाना उनकी शैली का मुख्य हिस्सा बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विषय-आधारित चर्चा से भागना और लगातार ‘मोदी-शाह’ केंद्रित आरोप लगाना राहुल गांधी की वैचारिक शून्यता को दर्शाता है। जब भी सत्ता पक्ष तथ्यों के साथ उनके दावों को खारिज करता है, तो वे विक्टिम कार्ड खेलने लगते हैं। कई बार तो स्थिति इतनी चिंताजनक हो जाती है कि संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को उनके दिए गए बयानों को रिकॉर्ड (Expunge) से हटाना पड़ता है।

आइए, जानते हैं 2026 से लेकर 2015 तक के ऐसे सभी अवसरों के बारे में जब राहुल गांधी ने संसद में विषय से भटककर गंभीर और अनर्गल आरोप लगाए।
1. 29 जुलाई 2026 — पेपर लीक बिल बहस में अमित शाह पर पेलेट गन का आरोप
29 जुलाई 2026 को एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने संसद का ध्यान मुख्य मुद्दे से भटका दिया। परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे निशाना साधा। राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस साक्ष्य के आरोप लगा दिया कि गृह मंत्री ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट गन चलाने और लाठीचार्ज करने का सीधा आदेश दिया था। सत्ता पक्ष द्वारा आपत्ति जताए जाने पर उन्होंने विषय छोड़कर हंगामा किया।
LIVE: Discussion on the Public Examinations Amendment Bill 2026 | Lok Sabha https://t.co/OjeWBr9q5H
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 29, 2026
2. 9 दिसंबर 2025 — चुनाव सुधार बहस में संस्थाओं पर निष्पक्षता न रखने का आरोप
9 दिसंबर 2025 को लोकसभा में नियम 193 के तहत चुनाव सुधारों पर अल्पकालिक चर्चा चल रही थी। राहुल गांधी को मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों पर अपनी बात रखनी थी। लेकिन उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सुधारवादी सुझाव देने के बजाय सीधे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर हमला बोला और बिना सबूत आरोप लगाया कि मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से जनादेश की चोरी कर रही है।
3. 29 जुलाई 2025 — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राष्ट्रीय सुरक्षा की जगह पीएम पर निशाना
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सैन्य जवाब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में बहस हो रही थी। राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के पराक्रम पर एकजुटता दिखाने के बजाय राहुल गांधी ने सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। उन्होंने बिना किसी नीतिगत तर्क के कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह केवल अपनी छवि बनाने के लिए रक्षा अभियान संचालित कर रहे हैं, जिससे सेना के शौर्य पर सवाल खड़ा हुआ।
4. 3 फरवरी 2025 — राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिशाहीन भाषण और व्यक्तिगत आक्षेप
3 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए राहुल गांधी ने सरकार के विज़न की बिंदुवार समीक्षा करने के बजाय भाषण को उबाऊ और “पुरानी लिस्ट” करार दिया। उन्होंने रोजगार और आर्थिक नीतियों पर ठोस आंकड़े पेश करने के बजाय प्रधानमंत्री और UPA बनाम NDA के अंतर को व्यक्तिगत आरोपों की शैली में पेश किया।
5. 29 जुलाई 2024 — बजट चर्चा में ‘चक्रव्यूह’ की कहानी और फोटो ड्रामा
29 जुलाई 2024 को देश के केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान आर्थिक आंकड़ों पर बोलने के बजाय राहुल गांधी ने महाभारत के ‘चक्रव्यूह’ का किस्सा सुनाना शुरू कर दिया। उन्होंने बजट हलवा सेरेमनी की तस्वीर लहराते हुए आरोप लगाया कि देश का बजट केवल 6 लोगों के फायदे के लिए बनाया गया है। बिना किसी आर्थिक डेटा के केवल नाटकीय अंदाज में भाषण देकर उन्होंने संसद का बहुमूल्य समय बर्बाद किया।
6. 1 जुलाई 2024 — राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हिंदू समाज पर विवादित टिप्पणी
1 जुलाई 2024 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने अभय मुद्रा दिखाते हुए कहा कि “जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे 24 घंटे हिंसा करते हैं और नफरत फैलाते हैं।” इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत खड़े होकर कड़ा ऐतराज जताया और उनसे देश से माफी माँगने की मांग की।
7. 1 जुलाई 2024 — अग्निवीर योजना पर रक्षा बजट के दौरान तथ्यहीन दावे
उसी 1 जुलाई 2024 के भाषण में राहुल गांधी ने अग्निवीर योजना को लेकर भ्रामक दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शहीद अग्निवीरों को कोई मुआवजा नहीं देती और उन्हें ‘यूज एंड थ्रो’ की तरह इस्तेमाल कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत पटल पर आंकड़े रखते हुए स्पष्ट किया कि शहीद अग्निवीर के परिवार को ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
8. 20 सितंबर 2023 — महिला आरक्षण विधेयक चर्चा में जातिगत जनगणना का भटकाव
20 सितंबर 2023 को संसद के विशेष सत्र में ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक (‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’) पर चर्चा हो रही थी। महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस विधेयक का स्वागत करने के बजाय राहुल गांधी ने विषय भटका दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के सचिवों में ओबीसी अफसरों की संख्या का मुद्दा उठाकर जातिगत जनगणना का राग अलापना शुरू कर दिया।
9. 9 अगस्त 2023 — अविश्वास प्रस्ताव में ‘भारत माता की हत्या’ वाला विवादित बयान
मणिपुर हिंसा पर 9 अगस्त 2023 को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी से समाधान का खाका पेश करने की उम्मीद थी। लेकिन उन्होंने संसदीय मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए आरोप लगाया कि “बीजेपी सरकार ने मणिपुर में भारत माता की हत्या की है।” उनके इस देशविरोधी बयान को बाद में रिकॉर्ड से हटाना पड़ा।
10. 7 फरवरी 2023 — राष्ट्रपति के अभिभाषण में अडानी-मोदी की तस्वीरें दिखाना
7 फरवरी 2023 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए राहुल गांधी ने सरकार की उपलब्धियों पर बहस करने के बजाय उद्योगपति गौतम अडानी और पीएम मोदी के संबंधों पर पूरा भाषण केंद्रित कर दिया। वे नियमों के खिलाफ जाकर तस्वीरें लहराने लगे और बिना किसी सबूत के भ्रष्टाचार के मनगढ़ंत दावे करने लगे।
11. 2 फरवरी 2022 — ‘दो भारत’ और ‘तमिलनाडु पर राज नहीं कर सकते’ का भड़काऊ बयान
2 फरवरी 2022 को संसद में भाषण देते हुए राहुल गांधी ने विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर बोलने के बजाय भारत के ताने-बाने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि भारत दो भागों (अमीर व गरीब) में बंट चुका है और कहा कि “आप तमिलनाडु पर कभी राज नहीं कर सकते।” गृह मंत्री ने उनके इस भाषण को देश को तोड़ने वाली मानसिकता का प्रतीक बताया।
12. 17 दिसंबर 2021 — लखीमपुर खीरी मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव का दुरुपयोग
17 दिसंबर 2021 को लखीमपुर खीरी घटना पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाते हुए राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री की बर्खास्तगी की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। जब सरकार ने बताया कि मामला कोर्ट के अधीन है, तब भी राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट और अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर होने वाली चर्चा को लगातार बाधित किया।
13. 7 दिसंबर 2021 — मृत किसानों के मुआवजे पर बिना सबूत के आंकड़े पेश करना
7 दिसंबर 2021 को किसान आंदोलन पर बोलते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास 700 से अधिक मृत किसानों की सूची है और केंद्र सरकार झूठ बोल रही है। जब कृषि मंत्रालय ने उनसे वह सत्यापित सूची सदन के पटल पर रखने को कहा, तो वे कोई भी आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।
14. 29 जुलाई 2021 — पेगासस विवाद पर मानसून सत्र को ठप करना
29 जुलाई 2021 को मानसून सत्र के दौरान राहुल गांधी ने बिना किसी फॉरेंसिक साक्ष्य के सीधे प्रधानमंत्री पर अपने और अन्य नेताओं के फोन टैप कराने का आरोप लगाया। उन्होंने संसद की कार्यवाही ठप रखी। बाद में सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति में भी पेगासस का कोई प्रमाण नहीं मिला।
15. 11 फरवरी 2021 — बजट भाषण में ‘हम दो, हमारे दो’ का राजनीतिक नारा
11 फरवरी 2021 को केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने बजट के प्रावधानों या आंकड़ों पर एक शब्द भी नहीं बोला। इसके बजाय उन्होंने नारा दिया कि “यह सरकार ‘हम दो, हमारे दो’ की तर्ज पर चल रही है” और कृषि कानूनों को केवल चार उद्योगपतियों के लाभ के लिए बताया।
16. 18 दिसंबर 2020 — कृषि कानूनों पर चर्चा में उद्योगपतियों के नाम पर राजनीति
18 दिसंबर 2020 को नए कृषि कानूनों पर बोलते हुए राहुल गांधी ने किसानों के कल्याण और फसल विविधीकरण जैसे मूल पहलुओं पर बात नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों कानून केवल प्रधानमंत्री के दो-तीन उद्योगपति मित्रों की जेब भरने के लिए बनाए गए हैं, जिससे किसानों में भ्रम फैला।
17. 13 दिसंबर 2019 — ‘रेप इन इंडिया’ बयान पर संसद में हंगामा
13 दिसंबर 2019 को राहुल गांधी ने मेक इन इंडिया योजना का मजाक उड़ाते हुए बाहर बयान दिया कि “मेक इन इंडिया अब ‘रेप इन इंडिया’ बन चुका है।” जब लोकसभा में महिला सांसदों ने इस बयान पर माफी माँगने को कहा, तो उन्होंने इनकार कर दिया और संसद में हंगामा हुआ।
18. 8 जनवरी 2019 — राफेल बहस में एआईसीसी टेप लहराना और पीएम पर सीधा आक्षेप
8 जनवरी 2019 को लोकसभा में राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर विशेष चर्चा हो रही थी। रक्षा मंत्री द्वारा सभी तकनीकी और वित्तीय बिंदु स्पष्ट करने के बाद भी राहुल गांधी ने एक विवादित ऑडियो टेप लहराने की कोशिश की और सीधे पीएम मोदी पर प्रक्रिया से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी क्लीन चिट दी।
19. 20 जुलाई 2018 — अविश्वास प्रस्ताव में पीएम मोदी से जबरन गले मिलना व आँख मारना
20 जुलाई 2018 को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपना भाषण समाप्त करने के तुरंत बाद राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री की सीट पर पहुँचे और उन्हें जबरन गले लगा लिया। इसके बाद अपनी सीट पर लौटकर उन्होंने साथी सांसद को देखकर आँख मारी, जिससे संसदीय मर्यादा का उपहास उड़ा।
20. 20 जुलाई 2018 — राफेल डील पर फ्रांस के राष्ट्रपति के नाम पर झूठा दावा
उसी 20 जुलाई 2018 के भाषण में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने खुद उनसे कहा था कि राफेल सौदे में गोपनीयता का कोई क्लॉज़ नहीं है। हालांकि, कुछ ही घंटों में फ्रांस सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर राहुल गांधी के दावे को पूरी तरह झूठ करार दिया।
21. 10 अगस्त 2017 — डोकलाम विवाद के समय संसद में भ्रामक दावे और चीन पर ढुलमुल रवैया
10 अगस्त 2017 को डोकलाम गतिरोध पर संसद में विदेश नीति पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय कूटनीति पर सवाल उठाए और सरकार पर मामले को ठीक से न संभालने का आरोप लगाया। जबकि पर्दे के पीछे वे खुद चीनी राजदूत से मिल रहे थे, जिसे लेकर संसद में भारी हंगामा हुआ और सरकार ने उनके रवैये को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया।
22. 14 दिसंबर 2016 — नोटबंदी बहस में ‘भूकंप आ जाएगा’ का खोखला दावा
14 दिसंबर 2016 को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी ने नोटबंदी के मुद्दे पर बहस की मांग करते हुए मीडिया के सामने दावा किया था कि “अगर मुझे संसद में बोलने दिया जाए तो ऐसा भूकंप आएगा कि सरकार हिल जाएगी।” लेकिन जब संसद में उन्हें बोलने का मौका मिला, तो उनके पास न तो कोई आर्थिक आंकड़े थे और न ही कोई ठोस नीतिगत विकल्प।
23. 28 नवंबर 2016 — नोटबंदी पर बिना आंकड़ों के हंगामा और कार्यस्थगन का दुरुपयोग
28 नवंबर 2016 को नोटबंदी पर शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी ने नियम 56 के तहत स्थगन प्रस्ताव लाकर केवल राजनीतिक नारेबाजी की। उन्होंने काले धन के खिलाफ इस कदम के नीतिगत प्रभावों पर रचनात्मक चर्चा करने के बजाय सीधे पीएम मोदी पर उद्योगपतियों की मदद करने का निराधार आरोप लगाया।
24. 2 मार्च 2016 — ‘फेयर एंड लवली’ योजना कहकर काले धन के मुद्दे का मजाक
2 मार्च 2016 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए राहुल गांधी ने सरकार द्वारा लाए गए इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (IDS) का मजाक उड़ाया। उन्होंने इसे ‘फेयर एंड लवली स्कीम’ नाम दिया और आरोप लगाया कि यह काले धन को सफेद करने के लिए मोदी सरकार द्वारा अपने पूंजीपति दोस्तों को दी गई रियायत है।
25. 16 अप्रैल 2015 — भूमि अधिग्रहण विधेयक पर ‘सूट-बूट की सरकार’ का तंज
16 अप्रैल 2015 को जब संसद में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर बहस चल रही थी, तब राहुल गांधी ने किसानों के लिए मुआवजे और पुनर्वास के प्रावधानों पर बात करने के बजाय ‘सूट-बूट की सरकार’ का तंज कसा। उन्होंने पीएम मोदी के सूट का हवाला देकर पूरी नीतिगत बहस को राजनीतिक छींटाकशी में बदल दिया।










