भारतीय राजनीति और मीडिया के गठजोड़ का सबसे नग्न और शर्मनाक दौर वर्ष 2004 से 2014 के बीच यूपीए (UPA) शासनकाल में देखने को मिला। निष्पक्षता और ‘लोकतंत्र के चौथे स्तंभ’ का ढोंग रचने वाले मीडिया घरानों के दिग्गजों को कांग्रेस सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों (पद्म पुरस्कारों) की रेवड़ियाँ बाँटकर अपनी ढाल बनाया। पत्रकारिता के नाम पर कांग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने, उनके घोटालों को छिपाने और तुष्टीकरण की राजनीति को सही ठहराने वाले इन पत्रकारों को सरकारी पुरस्कारों, राज्यसभा सीटों और सत्ता के विशेषाधिकारों से उपकृत किया गया।
कांग्रेस की इस पूरी ‘इकोसिस्टम’ ने पत्रकारिता की साख को पूरी तरह नीलाम कर दिया। उस दौर में निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बजाय 10 जनपथ के इशारों पर नेरेटिव तय किए जाते थे और इसके बदले संपादकों व मीडिया मालिकों को पद्म सम्मानों से नवाजा जाता था। आइए, 2005 से 2014 के बीच यूपीए सरकार से पुरस्कार पाने वाले इन चेहरों और उनकी कांग्रेस-परस्त भूमिकाओं के काले सच को विस्तार से समझते हैं।
एन. राम (N. Ram) – 2013
‘द हिंदू’ (The Hindu) समूह के एन. राम को वर्ष 2013 में UPA सरकार ने पद्म भूषण से नवाजा। एन. राम का वामपंथी झुकाव और कांग्रेस के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर हमेशा जगजाहिर रहा। वे लगातार भाजपा और राष्ट्रवादी नीतियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने तथा कांग्रेस के बड़े घोटालों पर पर्दा डालने वाली रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए जाने गए। सरकार के प्रति इसी वफादारी के ईनाम के तौर पर उन्हें यह बड़ा नागरिक सम्मान दिया गया।
सुरेश कलमाड़ी (Suresh Kalmadi) – 2012
वर्ष 2012 की सूची में शामिल सुरेश कलमाड़ी खुद कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और सांसद थे, जिन्हें खेल मीडिया व प्रशासन के नाम पर पद्म श्री की सूची में जगह दी गई। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) महाघोटाले के मुख्य आरोपी होने के बावजूद और मीडिया में कांग्रेस-प्रायोजित छवि चमकाने के खेल के तहत उन्हें यह सम्मान दिया जाना, कांग्रेस के भ्रष्ट तंत्र का सबसे बड़ा सबूत था।
शेखर गुप्ता (Shekhar Gupta) – 2009
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पूर्व संपादक शेखर गुप्ता को वर्ष 2009 में पद्म भूषण मिला। शेखर गुप्ता ने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार और सोनिया गांधी के फैसलों का बचाव करने के लिए कई नैरेटिव गढ़े। वर्ष 2012 में भारतीय सेना के खिलाफ ‘तख्तापलट’ (Coup Plot) की झूठी और भ्रामक खबर छापकर सेना को बदनाम करने और कांग्रेस सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।
फरीद जकारिया (Fareed Zakaria) – 2009
अंतरराष्ट्रीय पत्रकार और CNN के कमेंटेटर फरीद जकारिया को वर्ष 2009 में पद्म श्री दिया गया। विदेश में बैठकर भारत और हिंदू धर्म से जुड़े मुद्दों को नकारात्मक तरीके से पेश करना तथा कांग्रेस सरकार की वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग करना फरीद जकारिया का मुख्य काम रहा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के लिए UPA सरकार ने उन्हें इस पुरस्कार से उपकृत किया।

राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) – 2008
‘CNN-IBN’ के तत्कालीन मुख्य संपादक राजदीप सरदेसाई को वर्ष 2008 में पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया। गुजरात दंगों से लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिशों में राजदीप की भूमिका सबसे आगे रही। 2004 से लगातार कांग्रेस का पक्ष लेने और भाजपा के खिलाफ झूठे एजेंडे चलाने के बदले UPA सरकार ने उन्हें यह नागरिक सम्मान सौंपा था।
विनोद दुआ (Vinod Dua) – 2008
वामपंथी विचारधारा के समर्थक और दूरदर्शन/टीवी पत्रकार विनोद दुआ को वर्ष 2008 में पद्म श्री दिया गया। अपने दौर में विनोद दुआ ने लगातार राष्ट्रवादी विचारधारा और भाजपा का विरोध किया। कांग्रेस की कमियों को नजरअंदाज करके उनके लोकलुभावन एजेंडे को ‘जनता का एजेंडा’ बनाकर पेश करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य पैमाना था।
एच. के. दुआ (H. K. Dua) – 2008
‘द ट्रिब्यून’ (The Tribune) और ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के पूर्व मुख्य संपादक एच. के. दुआ को वर्ष 2008 में UPA सरकार द्वारा देश के तीसरे सर्वोच्च सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया। केवल पद्म सम्मान ही नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के प्रति लगातार निष्ठा दिखाने के ईनाम स्वरूप उन्हें वर्ष 2009 में UPA सरकार द्वारा राज्यसभा का सांसद (Nominated MP) भी मनोनीत किया गया। अपनी संपादकीय भूमिका के ज़रिए उन्होंने हमेशा लुटियंस मीडिया में कांग्रेस के राजनीतिक हितों को साधने का काम किया।
बरखा दत्त (Barkha Dutt) – 2007
‘NDTV’ की पूर्व समूह संपादिका बरखा दत्त को वर्ष 2007 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। कारगिल युद्ध के समय की गई गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से लेकर Radia Tapes विवाद में दलाली करने के आरोपों तक, बरखा दत्त का नाम कांग्रेस के गलियारों में मंत्रीपद तय करने वाले बिचौलियों के रूप में सामने आया। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नजदीकी के कारण ही उन्हें यह सम्मान मिला।
मृणाल पांडे (Mrinal Pande) – 2006
‘हिन्दुस्तान’ की पूर्व मुख्य संपादिका मृणाल पांडे को वर्ष 2006 में पद्म श्री दिया गया। अपने हिंदी अखबार के संपादकीय पृष्ठों का इस्तेमाल कर उन्होंने हमेशा राष्ट्रवादी ताकतों के खिलाफ लिखा। पुरस्कार पाने के बाद उन्हें कांग्रेस सरकार द्वारा प्रसार भारती का अध्यक्ष भी बना दिया गया, जहाँ से उन्होंने सरकारी खर्च पर कांग्रेस का प्रचार-प्रसार जारी रखा।
सुचेता दलाल (Sucheta Dalal) – 2006
वित्तीय पत्रकारिता का हवाला देकर सुचेता दलाल को वर्ष 2006 में पद्म श्री दिया गया। हालाँकि, वित्तीय विश्लेषक के रूप में उन्होंने UPA कार्यकाल के दौरान बैंकिंग सेक्टर में हुए बड़े-बड़े एनपीए घोटालों और कांग्रेस प्रायोजित क्रोनी कैपिटलिज्म (पूँजीवादी भ्रष्टाचार) पर चुप्पी साधे रखी और सरकार के खिलाफ उठने वाले आर्थिक सवालों को दबाने का काम किया।
शोभना भरतिया (Shobhana Bhartia) – 2005
‘एचटी मीडिया’ (Hindustan Times) की मालिक शोभना भरतिया को वर्ष 2005 में पद्म श्री पुरस्कार दिया गया। केवल पद्म सम्मान ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाकर सत्ता का पूरा सुख भी दिया। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को कांग्रेस के मुख्य पत्र (माउथपीस) की तरह चलाने और हर चुनाव में कांग्रेस का महिमामंडन करने के बदले उन्हें यह बड़ा इनाम मिला था।
मामन मैथ्यू (Mammen Mathew) – 2005
दक्षिण भारत के प्रभावशाली मीडिया हाउस ‘मल्याला मनोरमा’ के प्रबंध निदेशक मामन मैथ्यू को वर्ष 2005 में पद्म श्री प्रदान किया गया। केरल और दक्षिण भारत में कांग्रेस नीत UDF गठबंधन के लिए अनुकूल माहौल बनाने और वामपंथ के साथ-साथ राष्ट्रवादी ताकतों को दबाने में इनके मीडिया समूह ने कांग्रेस के लिए एक मजबूत प्रचार तंत्र के रूप में कार्य किया।
मानस चौधरी (Manas Chaudhuri) – 2005
‘शिलॉन्ग टाइम्स’ के संपादक मानस चौधरी को पूर्वोत्तर में काम करने के नाम पर वर्ष 2005 में पद्म श्री मिला। पूर्वोत्तर भारत में कांग्रेस की कमजोर होती जमीन को बचाए रखने और सरकार के खिलाफ स्थानीय जनता के आक्रोश को दबाने के लिए मानस चौधरी के मीडिया घराने का भरपूर इस्तेमाल किया गया था।
तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) – 2005
‘तहलका’ पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल को वर्ष 2005 में पद्म श्री से नवाजा गया। तरुण तेजपाल की पत्रिका ‘तहलका’ का एकमात्र मकसद फर्जी और प्रायोजित स्टिंग ऑपरेशन करके वाजपेयी सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं को फँसाना था। 2004 में कांग्रेस की सरकार बनते ही तेजपाल को उनके इस षड्यंत्रकारी काम का इनाम ‘पद्म श्री’ देकर दिया गया।









