केंद्र की राजनीति में नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नैतिक आधार पर इस्तीफे ने देश की राजनीति में एक अभूतपूर्व नजीर पेश की है। लेकिन इस घटनाक्रम का सबसे तीव्र और गहरा असर अब पंजाब से लेकर कर्नाटक तक के सियासी गलियारों में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। राजनीतिक दलों और विश्लेषकों को अब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की राज्य सरकारों को घेरने का एक अचूक राजनीतिक और नैतिक हथियार मिल गया है। स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि पंजाब और कर्नाटक में बैठे हुक्मरान अपनी सरकारों में पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर क्यों पर्दा डाल रहे हैं? वे जिस नैतिक आधार पर धर्मेंन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, उसी समान नैतिक जवाबदेही के आधार पर अपनी सरकारों के संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे क्यों नहीं ले रहे हैं? यह सवाल आज भारत के युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र पूछ रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल तो ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ की कहावत चरितार्थ करने में लगे हैं।
पंजाब में साख तार-तार, कर्नाटक में नौकरियों की खुली बोली
संसद से लेकर सड़क तक नीट के मुद्दे पर केंद्र को पानी पी-पीकर कोसने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बोलती आज अपने ही राज्यों में हुए शर्मनाक भर्ती घोटालों पर बंद है। पंजाब में एक के बाद एक लगातार सात परीक्षाओं की साख तार-तार हो चुकी है, वहीं कर्नाटक में सरकारी नौकरियों की खुली बोली लग रही है। राजनीति में जब ‘सिलेक्टिव आउटरेज’ यानी चुनिंदा गुस्से का खेल शुरू होता है, तो शुचिता का मुखौटा उतर जाता है। यदि केंद्र सरकार ने शुचिता के मानक तय करते हुए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया है, तो आखिर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार अपने दागी मंत्रियों को किस फेविकोल के मजबूत जोड़ से बचाने में जुटे हैं?
आइए, पहले जानते हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान किन-किन परीक्षाओं में पेपर लीक हुए और इससे भर्ती घोटाले के आरोप सामने आए…
1.फॉर्मेसी का पेपर लीक, कीमत 3.5 लाख से 13 लाख रुपये
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत 454 फार्मेसी अफसरों की भर्ती के लिए हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) द्वारा परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें करीब 7,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। ये परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस और पुलिस की फ्लाइंग टीमों ने फरीदकोट, फिरोजपुर और कोट कपूरा के सेंटरों पर छापेमारी की। इसमें 28 उम्मीदवारों सहित कुल 35 लोगों को धर दबोचा। अभ्यर्थी पगड़ी, जुराबों और अंडरगारमेंट्स में बटन और छोटे वायरलेस ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर लाए थे। फिरोजपुर के एक सेंटर से पेन कैमरे से प्रश्नपत्र स्कैन कर व्हाट्सएप पर लीक करके भेजा गया, जहां हरियाणा और राजस्थान से ऑपरेट हो रहे कंट्रोल रूम से अभ्यर्थियों को उत्तर बोले जा रहे थे। खबरों के मुताबिक ये गैंग प्रति कैंडिडेट 3.5 लाख से 13 लाख रुपये वसूल रहा था। इस भारी सुरक्षा चूक और धांधली के बाद स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग उठना बेहद लाजिमी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ हुआ एक खिलवाड़ है।

2.कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती: अन्नदाताओं से छल
पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां कृषि विकास अधिकारी (ADO) की भर्ती सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र मानी जानी चाहिए थी, वहां भी धांधली की दीमक ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया। परीक्षा के आयोजन से लेकर उसके प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने में पंजाब का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ। जब इस परीक्षा के पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर की खबरें आम हुईं, तो योग्य उम्मीदवारों का मनोबल पूरी तरह टूट गया। आम आदमी पार्टी जो ‘बदलाव’ के बड़े-बड़े दावे कर सत्ता में आई थी, उसकी नाक के नीचे कृषि विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली इस परीक्षा का सौदा हो गया, लेकिन सरकार आज भी जांच के नाम पर लीपापोती करने में व्यस्त है। विपक्ष ने इसे सीधा पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी करार देते हुए राज्य के जिम्मेदार मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

3.नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा: प्रशासनिक साख पर बट्टा
राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक, नायब तहसीलदार की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होना पंजाब सरकार के माथे पर एक गहरा कलंक है। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा केंद्रों से ब्लूटूथ के जरिए नकल के तार सीधे तौर पर बड़े रसूखदारों से जुड़े पाए गए थे। इस घोटाले ने यह साबित कर दिया कि पंजाब में पीपीएससी (PPSC) जैसी संवैधानिक संस्थाओं की गोपनीयता को भी बड़े सिंडिकेट्स ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके बावजूद जिम्मेदार मंत्रियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी व्यवस्था को ढंकने की पुरजोर कोशिश की गई, जो सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
4.PSTET बोर्ड परीक्षा: खुद ही नकल की थाली परोसी
पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) 2023 के दौरान जो ऐतिहासिक ब्लंडर सामने आया, उसने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के सभी दावों की धज्जियां उड़ा दी थीं। परीक्षा में सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र में 50 से अधिक प्रश्नों के सही उत्तर पहले से ही बोल्ड अक्षरों में छाप दिए गए थे। यह किसी पेपर लीक से भी बदतर प्रशासनिक अक्षमता का उदाहरण था, जहां पेपर सेट करने वालों ने खुद ही नकल की थाली परोस दी थी। इस भयंकर लापरवाही के बाद पूरी परीक्षा को रद्द करना पड़ा, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हुए, लेकिन इस ब्लंडर के मुख्य राजनीतिक जिम्मेदार आज भी अपने पदों पर शान से बरकरार हैं।

5.पंजाब बोर्ड का 12वीं कक्षा का अंग्रेजी विषय का पेपर लीक
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की 12वीं कक्षा की अंग्रेजी (अनिवार्य) परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से ऐन पहले लीक हो गया था। इस पेपर लीक में पंजाब बोर्ड मुख्य प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। यह परीक्षा दोपहर 2:00 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सोशल मीडिया (व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स) पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद परीक्षा शुरू होने से महज एक से डेढ़ घंटा पहले इसे रद्द कर दिया गया। इसके चलते लाखों छात्र प्रभावित हुए। परीक्षा केंद्रों पर पहुंच चुके लगभग 3 लाख छात्रों को ऐन वक्त पर मायूस होकर लौटना पड़ा था। परीक्षा रद्द होने के बाद भी बोर्ड की एक और शर्मनाक लापरवाही सामने आई। लुधियाना और फिरोजपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर स्टाफ ने नया प्रश्नपत्र देने के बजाय गलती से बैंक लॉकर से पुराना लीक हो चुका प्रश्नपत्र ही दोबारा बांट दिया। इसके चलते उन केंद्रों के छात्रों को तीसरी बार परीक्षा में बैठना पड़ा था।
6.पंजाब एक्साइज एंड टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती में फर्जीवाड़ा
पंजाब एक्साइज एंड टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती (197 पद) की मेरिट लिस्ट में गंभीर और तकनीकी विसंगतियां सामने आने के बाद यह पूरी भर्ती प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) द्वारा जारी की गई आधिकारिक मेरिट लिस्ट में भारी प्रशासनिक लापरवाही और फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। विपक्षी नेताओं और उम्मीदवारों द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के अनुसार, मेरिट लिस्ट में अभ्यर्थियों के असली नामों की जगह SBI, GIPS और यहां तक कि Photo जैसे फर्जी नाम दर्ज पाए गए। इस डेटाबेस विसंगति, पारदर्शिता की कमी और व्यापक धांधली के खिलाफ उम्मीदवारों (अलका और अन्य) ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत में चौतरफा घिरने के बाद, पंजाब सरकार को हाई कोर्ट में अंडरटेकिंग (लिखित आश्वासन) देना पड़ा कि वे फिलहाल इस आबकारी निरीक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएंगे और इस पर रोक लगा दी गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के स्थानीय विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की ‘आम आदमी पार्टी’ सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब में मेरिट पर नौकरी देने के दावे पूरी तरह खोखले हैं और यह सीधे तौर पर होनहार युवाओं के भविष्य के साथ हुआ एक बड़ा ‘सिस्टमैटिक विश्वासघात’ है।
7.PSSSB की ग्रुप-बी संयुक्त भर्ती परीक्षा गंभीर धांधलियां
पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की दो परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे। (PSSSB) द्वारा आयोजित ग्रुप-बी (Group-B) संयुक्त भर्ती परीक्षा गंभीर धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के कारण बड़े विवाद में है। यह कंबाइंड परीक्षा 408 उच्च पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य के लगभग 1 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। इस भर्ती की कई धांधलियों में से एक बठिंडा से असामान्य टॉपर लिस्ट रही। परीक्षा के नतीजे जारी होने के बाद सबसे बड़ा विवाद इसके मेरिट पैटर्न को लेकर हुआ। राज्य की अंतिम टॉप-100 उम्मीदवारों की सूची में से 22 अभ्यर्थी अकेले बठिंडा क्षेत्र से थे। इस संदेहास्पद सूची में एक ही परिवार के करीबी रिश्तेदार (पति-पत्नी, भाई-बहन और चचेरे भाई-बहन) एक साथ टॉपर लिस्ट में चयनित हुए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पेपर परीक्षा से एक दिन पहले ही बठिंडा में लीक होकर चुनिंदा सेंटरों तक पहुंच गया था। बठिंडा के परीक्षा केंद्रों से यह गंभीर शिकायत सामने आई कि उम्मीदवारों को बांटे जाने से पहले ही प्रश्नपत्रों और सील में व्हाइटनर लगाकर बदलाव किए गए थे। दिलचस्प तथ्य यह भी रहा कि इसकी पूर्व की परीक्षाओं में फेल छात्र अब टॉपर बन गए थे। चौतरफा विरोध और मुख्यमंत्री भगवंत मान तक मामला पहुंचने के बाद, चयन बोर्ड (SSSB) ने खुद पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को पत्र लिखकर इस महाघोटाले की उच्च स्तरीय जांच सौंप दी।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग में 80 लाख में वेटरिनरी ऑफिसर का सौदा
पंजाब की तरह ही दक्षिण भारत में ईमानदारी का राग अलापने वाली कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का चेहरा भी तब बेनकाब हो गया, जब कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की 400 वेटरिनरी ऑफिसर पदों की भर्ती में भ्रष्टाचार के बेहद संगीन आरोप सामने आए। अभ्यर्थियों ने बाकायदा स्टिंग ऑपरेशन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग्स सार्वजनिक कीं, जिनमें बिचौलियों द्वारा एक-एक नौकरी के लिए 70 से 80 लाख रुपये की मोटी घूस मांगी जा रही थी। इतना ही नहीं, परीक्षा से पहले चुनिंदा उम्मीदवारों को आलीशान रिजॉर्ट्स में ठहराकर पेपर रटवाने और ओएमआर (OMR) शीट बदलने के भी पुख्ता सबूत मिले हैं। चौतरफा फजीहत और पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद केपीएससी को चयन सूची पर रोक लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है, लेकिन इस महाघोटाले के असली राजनीतिक आकाओं पर हाथ डालने से सरकार हिचक रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं कांग्रेस शासित कर्नाटक सहित कई राज्यों में सामने आई हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे विरोध का चयनात्मक दृष्टिकोण बताया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं कांग्रेस शासित कर्नाटक सहित कई राज्यों में सामने आई हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे चयनात्मक दृष्टिकोण बताया।
जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने… https://t.co/IZpiujyjq6
— DD News Bihar | डीडी न्यूज बिहार (@ddnewsBihar) July 23, 2026
पंजाब में पेपर लीक पर एक्शन को लेकर दीपके की चुप्पी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले अभिजीत दीपके से जब पंजाब में हाल के दिनों में हुए पेपर लीक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पहले सवाल टालने की कोशिश की। बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी। दरअसल, पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और आप संयोजक केजरीवाल ही अभिजीत दीपके के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं। दीपके ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के चुनाव अभियान के लिए भी काम किया था।
Abhijeet Dipke went silent for a moment when someone asked him, There’s been a paper leak in Punjab too. Will you demand Kejriwal’s resignation? pic.twitter.com/D9nZb6amu0
— Spider Update (@SpiderAlert24) July 24, 2026
पंजाब में पेपर लीक पर चुप्पी और दिल्ली में घड़ियाली आंसू
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा निशाना साधते हुए हरसिमरत कौर बादल ने सवाल उठाया कि पंजाब में लगातार हो रहे पेपर लीक के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक किसी की जवाबदेही तय क्यों नहीं की है। हरसिमरत कौर ने मीडिया से कहा, “पंजाब में बीते चार सालों के भीतर छह प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। वहां तो सरकार जीरो एक्शन मोड में रहती है और पूरी तरह चुप्पी साधे बैठी है, जबकि दिल्ली में आकर घड़ियाली आंसू बहाए जा रहे हैं। बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर ने पंजाब में कथित तौर पर हुए सिलसिलेवार परीक्षा घोटालों की सूची सामने रखी। उन्होंने नाइब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) का अंग्रेजी विषय का पेपर लीक, कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा और हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाहर एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। ब्लूटूथ डिवाइस और हिडन कैमरों के जरिए नकल कराने के लिए उम्मीदवारों से 10 लाख से 13 लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे। इस गंभीर मामले के उजागर होने के तीन दिन बाद भी पंजाब सरकार ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला नहीं लिया है।









