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गांवों में स्टार्ट-अप की नई क्रांति: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रहा है स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन चुका है। स्टार्ट-अप की सबसे बड़ी पहचान शहरों से जुड़ी रही है, लेकिन अब इसकी सफलता सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में गांवों में भी उद्यमिता की एक नई लहर दिखाई देने लगी है। इस बदलाव के केंद्र में है स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP)। इसने देश के लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने का अवसर दिया है।

यह विशेष योजना दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की एक महत्वपूर्ण उप-योजना के रूप में वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत शुरू इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं और उनके परिवारों को कृषि से इतर नए छोटे उद्यम स्थापित करने में मदद करना है। दीनदयाल अंत्योदय योजना दुनिया की सबसे बड़ी आजीविका पहलों में से एक मानी जाती है। जून 2026 तक इस मिशन के तहत 10.29 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वयं-सहायता समूहों में संगठित किया जा चुका है।

पूरे भारत में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना
एसवीईपी ने एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें महिलाओं, वंचित समुदायों और कम पढ़े-लिखे लोगों को स्वावलंबी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अपनी शुरुआत से लेकर 15 जून 2026 तक, इस कार्यक्रम ने 4.32 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहयोग दिया है। योजना की प्रगति और सामाजिक न्याय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके लगभग 86 प्रतिशत उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों से आते हैं। असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस कार्यक्रम का विशेष प्रभाव देखने को मिला है, जहां हजारों परिवारों ने स्वरोजगार के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।

सिर्फ फंड नहीं, पूरा बिजनेस इकोसिस्टम मिलता है
एसवीईपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। योजना के तहत उद्यम शुरू करने से पहले व्यवसाय की व्यवहार्यता का आकलन किया जाता है। इसके बाद लाभार्थियों को बिजनेस प्लान तैयार करने, वित्तीय प्रबंधन, मार्केटिंग, अकाउंटिंग, डिजिटल टूल्स के उपयोग, सॉफ्ट स्किल और उद्यम संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। हर उद्यमी को अनुभवी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) का मार्गदर्शन मिलता है, जो कारोबार शुरू करने से लेकर उसे आगे बढ़ाने तक लगातार मेंटरिंग करते हैं। एक CRP-EP लगभग 50 उद्यमियों को प्रशिक्षण, बैंकिंग सहायता और बिजनेस सलाह उपलब्ध कराता है। योजना के तहत उद्यमियों को बैंक लिंकेज, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़कर वित्तीय सहायता तक आसान पहुंच भी सुनिश्चित की जाती है।

समुदाय करता है फैसले, इसलिए बढ़ता है भरोसा
एसवीईपी की एक अनूठी विशेषता इसका समुदाय आधारित मॉडल है। गांवों की सामुदायिक संस्थाएं संभावित उद्यमियों की पहचान करती हैं, उनकी जरूरत और क्षमता का आकलन करती हैं और सामुदायिक एंटरप्राइज फंड के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी होने से पारदर्शिता बढ़ती है और उद्यमियों को अपने ही समुदाय का भरोसा और सहयोग मिलता है। यही कारण है कि यह मॉडल केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि गांवों की सामूहिक आर्थिक भागीदारी का उदाहरण बन चुका है।

महिलाएं बनीं बदलाव की सबसे बड़ी ताकत
एसवीईपी ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत कम से कम 60 प्रतिशत लाभार्थियों के महिला होने का लक्ष्य रखा गया है। आज इसका सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई देता है। मिड-टर्म मूल्यांकन के अनुसार करीब 75 प्रतिशत उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने छोटे कारोबार शुरू कर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया। अनेक महिलाएं पहली बार उद्यमी बनीं और अब अपने गांव में दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

समावेशी विकास का मजबूत उदाहरण
एसवीईपी सामाजिक समावेशन को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है। इससे स्पष्ट होता है कि योजना उन लोगों तक पहुंच रही है जिन्हें पहले उद्यमिता के लिए पर्याप्त संसाधन और वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती थी। अब कम पढ़े-लिखे युवाओं, पहली पीढ़ी के उद्यमियों और दिव्यांगजनों को भी योजना में विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इससे गांवों में समान अवसर और समावेशी विकास की नई संस्कृति विकसित हो रही है।

बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से आसान जुड़ाव
एसवीईपी ने स्वयं सहायता समूहों, बैंकों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ प्रभावी तालमेल स्थापित किया है। इससे उद्यमियों के लिए ऋण प्राप्त करना पहले की तुलना में काफी आसान हुआ है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिजनेस प्लान तैयार करना, लोन मूल्यांकन, उद्यम की निगरानी और प्रदर्शन का आकलन भी किया जाता है। इससे योजना अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है।

सरकार का लगातार बढ़ता निवेश
ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार निवेश बढ़ा रही है। फरवरी 2026 तक एसवीईपी के लिए 942.09 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा जारी किया जा चुका है। 2016 में योजना शुरू होने से जनवरी 2018 तक जारी 112.39 करोड़ रुपये की तुलना में फरवरी 2026 तक केंद्रीय हिस्सेदारी बढ़कर 942.09 करोड़ रुपये हो गई, जो लगभग 738 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। प्रति ब्लॉक लगभग 6.50 करोड़ रुपये के प्रावधान और प्रति उद्यम औसतन 27,083 रुपये के निवेश के जरिए गांवों में छोटे व्यवसायों को शुरुआती मजबूती दी जा रही है।

आंकड़े बताते हैं योजना की सफलता
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा किए गए मूल्यांकन में एसवीईपी के परिणाम बेहद उत्साहजनक पाए गए। अध्ययन के अनुसार 99 प्रतिशत उद्यम लाभ में रहे। इन उद्यमों का परिवार की कुल आय में औसतन 57 प्रतिशत योगदान दर्ज किया गया। उद्यमियों की औसत मासिक आय लगभग 39,000 रुपये रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमों की औसत मासिक कमाई 47,800 रुपये तक पहुंची। 96 प्रतिशत उद्यमियों ने अपनी बचत बढ़ने की बात कही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि योजना केवल कारोबार ही नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ा रही है।

रोजगार के साथ सामाजिक बदलाव भी
एसवीईपी का असर केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों ने इस योजना का लाभ लिया, उनमें बच्चों की शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और स्वच्छता पर खर्च बढ़ा। उद्यमियों का आत्मविश्वास बढ़ा और समाज में उनकी पहचान मजबूत हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। इससे पलायन कम करने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिली है। कई उद्यमियों ने अपनी बढ़ी हुई बचत को दोबारा कारोबार में निवेश किया, जिससे उनके उद्यमों का लगातार विस्तार हुआ।

आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव
स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम यह साबित कर रहा है कि यदि गांवों को सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जुड़ने के अवसर मिलें, तो वे भी देश की आर्थिक वृद्धि के मजबूत इंजन बन सकते हैं। यही मॉडल आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर गति दे रहा है।

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