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पेपर लीक रोकने को लेकर गंभीर नहीं विपक्ष: ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर हंगामा, दोहरे रवैये पर उठे सवाल

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देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने संसद में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। इस कड़े कानून के तहत पेपर लीक और संगठित धांधली में शामिल माफियाओं के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, मामलों की जांच 2 महीने और विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए सुनवाई 3 महीने में पूरी करने की समय-सीमा तय की गई है।


युवा हितैषी बिल पर भी विपक्ष की राजनीति और हंगामा
जहाँ एक तरफ मोदी सरकार युवाओं के सपनों पर डाका डालने वाले माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए यह ऐतिहासिक बिल लेकर आई, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने जनहित के इस संवेदनशील मुद्दे पर भी जमकर हंगामा और नारेबाजी की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बार-बार सार्थक चर्चा की अपील करने के बावजूद विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल (Well) में आकर नारेबाजी की और कार्यवाही को बाधित किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाला कानून बना रही है, तब विपक्ष समाधान तलाशने के बजाय केवल राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त है।

सपा-कांग्रेस का दोहरा रवैया उजागर
संसद में हुए इस हंगामे ने साबित कर दिया है कि विपक्षी दल परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर ज़रा भी गंभीर नहीं हैं। भाजपा सांसद संबित पात्रा सहित कई सत्ता पक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी नेता परीक्षाओं में सुधार के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि वे भ्रामक बयानबाजी कर देश के युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जब संसद में इस कानून के प्रावधानों पर सुझाव देने और स्वस्थ चर्चा करने का मौका था, तब विपक्ष चर्चा से भागता नज़र आया।

अपने राज्यों में विफल, अब माफियाओं का ढाल बन रहा विपक्ष
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के इस रवैये पर हमला बोलते हुए याद दिलाया कि जब-जब कांग्रेस, सपा या अन्य विपक्षी दलों की राज्यों में सरकारें रहीं, तब-तब राजस्थान और उत्तर प्रदेश (अखिलेश यादव कार्यकाल) जैसे राज्यों में दर्जनों बार पेपर लीक हुए। उस समय इन दलों ने माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया। आज जब केंद्र की मोदी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत देश भर के युवाओं को सुरक्षा चक्र दे रही है, तो यही दल संसद में हंगामा करके अप्रत्यक्ष रूप से पेपर लीक माफियाओं की ढाल बनने की कोशिश कर रहे हैं।

युवाओं के भविष्य पर घटिया राजनीति बंद करे विपक्ष
सदन में जारी व्यवधान पर निशाना साधते हुए सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये से चलने वाली संसद का समय बर्बाद करना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुका है। हालाँकि, केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और विपक्ष की तमाम रुकावटों के बावजूद मोदी सरकार देश के लाखों छात्रों के अधिकारों और सपनों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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