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गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर मुश्किल में भगवंत मान, अकाल तख्त पर मंत्रिमंडल और विधायकों की पेशी

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पंजाब में धार्मिक भावनाओं और राजनीति के केंद्र में एक बार फिर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा आ गया है। पंजाब विधानसभा द्वारा पारित किए गए नए बेअदबी कानून को लेकर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त साहिब ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनके पूरे मंत्रिमंडल और सभी सिख विधायकों को तलब किया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया है। अकाल तख्त का कहना है कि कानून में कुछ ऐसे प्रावधान और शब्द शामिल किए गए हैं, जो सिख मर्यादा और गुरुओं की परंपरा के खिलाफ हैं। आप नेता की मुश्किल का दूसरा कारण मुख्यमंत्री भगवंत मान का वह वीडियो बना, जिसमें उन्होंने नए कानून की जानकारी देते हुए कथित तौर पर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे अकाल तख्त ने गुरु साहिबान की मर्यादा के विरुद्ध माना। अकाल तख्त के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कानून के प्रचार के दौरान गुरु ग्रंथ साहिब को एक सामान्य पुस्तक की तरह प्रस्तुत करने और उससे जुड़े कुछ शब्दों का गलत संदर्भ देने की भूल की, जो सिख परंपरा के अनुसार अस्वीकार्य है।गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम और शाश्वत गुरु का दर्जा दिया
दरअसल, पंजाब सरकार ने हाल ही में गुरुग्रंथ साहिब और गुरुओं की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से एक कानून पारित किया है। इस कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद्गीता, कुरआन और बाइबिल सहित विभिन्न पवित्र ग्रंथों के अपमान पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इसे सभी धर्मों की आस्था की रक्षा का प्रयास बताया है, लेकिन अकाल तख्त की आपत्ति इसी समान श्रेणीकरण पर है। अकाल तख्त और कई सिख विद्वानों का तर्क है कि सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब कोई पुस्तक मात्र नहीं, बल्कि साक्षात जीवित गुरु परंपरा हैं। सिख परंपरा में दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम और शाश्वत गुरु का दर्जा दिया था। ऐसे में किसी कानून में गुरु ग्रंथ साहिब को अन्य धार्मिक पुस्तकों के साथ “पवित्र ग्रंथ” की श्रेणी में रखकर उल्लेख करना, अकाल तख्त के अनुसार, गुरुओं द्वारा प्रदान की गई सर्वोच्च स्थिति को कमतर करने जैसा है।सरकार ने संवेदनशील और धार्मिक कानून के लिए किसी से राय नहीं ली
अकाल तख्त विशेष रूप से इस बात से भी नाराज है कि सरकार ने इतना संवेदनशील कानून बनाने से पहले सिख धार्मिक संस्थाओं, विद्वानों और जत्थेदारों से व्यापक चर्चा करने तक की जरूरत महसूस नहीं की। अकाल तख्त का मानना है कि सिख पंथ से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक निर्णय लेने से पहले धार्मिक नेतृत्व की राय लेना आवश्यक था। मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के बाद अब दलील दे रहे हैं कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि लगातार हो रही बेअदबी की घटनाओं को रोकना है। लेकिन उनके पास इसका कोई जवाब नहीं कि उनकी सरकार ने साक्षात जीवित गुरु गुरु ग्रंथ साहिब की अन्य धार्मिक ग्रंथों से तुलना कैसे कर दी? सभी धर्मों के प्रति सम्मान दिखाते-दिखाते आप सरकार और मुख्यमंत्री ने सिख धर्म की परंपराओं की बेअदबी कैसे कर दी?सभी सिख विधायकों की 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेशी
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अकाल तख्त ने नए बेअदबी कानून को लेकर पंजाब के मंत्रिमंडल और सभी सिख विधायकों को तलब किया है। अकाल तख्त ने यह फैसला उस कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भी लिया, जिसके संबंध में मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया है। अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च सांसारिक (टेम्पोरल) पीठ मानी जाती है। अकाल तख्त ने इसके साथ ही पंजाब के सभी सिख विधायकों, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, और पंजाब मंत्रिमंडल को भी 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया है। यह समन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी विरोधी कानून के संबंध में जारी किया गया है।सीएम भगवंत मान का वीडियो फोरेंसिक लैब की जांच में प्रामाणिक
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने अमृतसर में ‘पांच सिंह साहिबानों’ की बैठक के बाद अकाल तख्त की फसील (मंच) से यह आदेश सुनाया। भगवंत मान पर ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे के दान पात्र) पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सिख गुरुओं के अपमान का आरोप है। ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वह वीडियो, जिसमें एक व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसा दिखाई देता है, वो फोरेंसिक लैब की जांच में प्रामाणिक पाया गया है। उन्होंने कहा कि वीडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई और न ही यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया है। गर्गज ने बताया कि जनवरी में अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वीडियो की जांच के संबंध में संपर्क किया था। उस समय भगवंत मान ने स्वयं कहा था कि वह वीडियो की फोरेंसिक जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि, सचिवालय को उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।अकाल तख्त सचिवालय ने वीडियो की दो लैब से जांच करवाई
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के अनुसार इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने वीडियो की दो अलग-अलग लैब से जांच करवाई। ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा, “मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक होता है, लेकिन भगवंत सिंह मान ने अकाल तख्त के समक्ष वीडियो के मामले में झूठ बोला।” उन्होंने कहा कि पांच सिंह साहिबानों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री को ‘गुरु दोषी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया है। बेअदबी विरोधी कानून के मुद्दे पर अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के संबंध में सभी सिख विधायक और पंजाब मंत्रिमंडल को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना होगा।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की भी इस कानून पर आपत्ति
इससे पहले अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) इस कानून पर आपत्ति जता चुके हैं। उनका कहना है कि यह कानून सिख पंथ से पर्याप्त परामर्श किए बिना बनाया गया है। अकाल तख्त ने राज्य सरकार से यह भी कहा था कि अधिनियम की उन धाराओं को हटाया जाए जो गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत की भावनाओं के खिलाफ हैं। बता दें कि 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस बीच आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू के इस बयान ने आग में घी का काम किया है कि जिन फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है। पन्नू ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज राजनीतिक हो गए हैं और उन्होंने एक पक्ष चुन लिया है। उन्होंने कहा, “अकाल तख्त साहिब पूरे सिख समुदाय का है। यह न तो शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल का है और न ही अकाली दल का।”अब सबकी निगाहें अकाल तख्त में होने वाली पेशी पर टिकी
हालांकि यह विवाद केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब में धर्म और राजनीति के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। एक ओर सरकार धार्मिक अपमान के खिलाफ कठोर कानूनी ढांचा बनाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर अकाल तख्त यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इस प्रक्रिया में सिख धर्म की मूल मान्यताओं और गुरु परंपरा की गरिमा पर कोई आंच न आए। अब सबकी निगाहें अकाल तख्त में होने वाली पेशी पर टिकी हैं। यह केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान या उनकी सरकार के लिए स्पष्टीकरण का अवसर नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि पंजाब में धार्मिक संवेदनशीलता और संवैधानिक कानून निर्माण के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाता है।नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी कर चुकी हैं सिख गुरुओं की बेअदबी
यह भी सच है कि आम आदमी पार्टी के लिए गुरुओं की बेअदबी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में विशेषाधिकार समिति ने विपक्ष और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। यह मामला 6 जनवरी 2026 को सदन में हुई कार्यवाही से जुड़ा है। जब सदन में प्रदूषण पर चर्चा होनी थी, तब अध्यक्ष के बार-बार मना करने के बावजूद आतिशी हंगामा करती रहीं। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर सिख गुरुओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही बाधित हुई। अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी को मौका दिया था कि वे सदन में आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें, लेकिन वह 8 जनवरी को भी सदन में उपस्थित नहीं हुईं।सिख गुरुओं का अपमान करने के बाद ‘फरार’ हुई आतिशी
आतिशी के इस व्यवहार और सफाई न देने के कारण, अध्यक्ष ने इस मामले को ‘विशेषाधिकार समिति’ को सौंप दिया है। विशेषाधिकार समिति के सभापति ने निर्देश दिया था कि सदस्य इस पूरी घटना पर अपना लिखित बयान 19 जनवरी 2026 तक जमा करें। इस बीच, बीजेपी ने ‘गुरुओं’ के अपमान का आरोप लगाते हुए दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के खिलाफ पोस्टर जारी किया। बीजेपी की दिल्ली इकाई ने कहा कि फरार हुई आतिशी को पार्टी से बर्खास्त करने के बजाय अरविंद केजरीवाल व भगवंत मान उनके कुकृत्य पर लीपापोती कर रहे हैं। दिल्ली बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आतिशी का पोस्टर शेयर किया, जिसमें अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की भी तस्वीर लगाई गई है। पोस्टर पर लिखा है, ” सिख गुरुओं का अपमान करने के बाद फरार हुई आतिशी के बचाव में आई ‘आप-दा’।

 

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