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Expose: कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में 1956 से 2014 तक पेपर लीक का पूरा काला चिठ्ठा

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भारत में पेपर लीक की समस्या कोई नई नहीं है। इसे केवल वर्तमान समय की चुनौती बताना पेपर लीक के इतिहास के साथ अन्याय ही होगा। आज जब परीक्षा की गोपनीयता और युवाओं के भविष्य पर चर्चा होती है, तब यह समझना आवश्यक है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं दशकों पहले भी सामने आती रही हैं। खासकर कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में केंद्र से लेकर राज्यों तक में बड़ी-बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। स्वतंत्र भारत में समय-समय पर ऐसी अनेक घटनाएं हुईं, जिन्होंने न केवल लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित किया, बल्कि सरकारों की प्रशासनिक क्षमता और परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगे। 1956 से लेकर 2014 तक का इतिहास इस बात का साक्षी है कि केंद्र में कांग्रेस राज के दौरान विभिन्न स्तरों की बोर्ड परीक्षाओं, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रशासनिक सेवाओं और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं तक प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं सामने आती रहीं। कई मामलों में परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, कई में दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। पेपर लीक के कई अहम मामले तब ने संसद तथा विधानसभाओं तक गूंजे। लेकिन कांग्रेस सरकारों ने पेपर लीक के मामने कोई सख्त कदम उठाने या ऐसा कानून बनाने की जरूरत ही नहीं समझी, जिनसे इन पर रोक लग सके।

आइए, पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल (2004 से 2014 तक) में पेपर लीक के उन मामलों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए….

2014: मुंबई विश्वविद्यालय की बीकॉम परीक्षा का पेपर लीक 
अप्रैल 2014 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के अंतिम चरण में मुंबई विश्वविद्यालय की बी.कॉम. (मार्केटिंग एवं ह्यूमन रिसोर्स) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना सामने आई। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता पर सवाल खड़े किए और विद्यार्थियों में भ्रम एवं असंतोष का माहौल पैदा किया।

2014: महाराष्ट्र बोर्ड की एसएससी अलजेब्रा परीक्षा में सेंध
मार्च-अप्रैल 2014 में महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के गठबंधन की सरकार थी, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कर रहे थे। मार्च 2014 में महाराष्ट्र राज्य बोर्ड की एसएससी (दसवीं) अलजेब्रा परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस पेपर लीक ने राज्य बोर्ड की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

2014: मणिपुर में सीबीएसई कक्षा 12 भौतिकी का पेपर आउट
मार्च 2014 में सीबीएसई की कक्षा 12 की भौतिकी परीक्षा का प्रश्नपत्र मणिपुर में लीक होने की खबर सामने आई। राष्ट्रीय स्तर की बोर्ड परीक्षा प्रभावित होने से सीबीएसई की गोपनीयता व्यवस्था पर व्यापक चर्चा हुई और छात्रों में चिंता का वातावरण बना। उस समय भी केंद्र में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ही थे।

2014: औरंगाबाद–मुंबई में एचएससी अंग्रेजी बोर्ड परीक्षा लीक
फरवरी 2014 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद एवं मुंबई क्षेत्र में एचएससी (बारहवीं) अंग्रेज़ी बोर्ड परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। उस समय महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने राज्य बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।

2013: महाराष्ट्र पॉलिटेक्निक की बेसिक मैथ्स परीक्षा लीक
नवंबर 2013 में महाराष्ट्र राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड (MSBTE) की पॉलिटेक्निक छात्रों की बेसिक मैथ्स परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। तब छात्रों और युवाओं ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार और बोर्ड की कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने भी कई तरह के सवाल उठाए।

2013: राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) प्रारंभिक परीक्षा विवाद
अक्टूबर 2013 में आरएएस जैसी बेहद अहम परीक्षा का भी पेपर लीक हो गया। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मुद्दा विधानसभा में भी उठा। उस समय राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। प्रतिष्ठित राज्य सिविल सेवा परीक्षा में हुई इस घटना ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।2013: एसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक
अप्रैल 2013 में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित करने वाली इस घटना ने केंद्र सरकार की भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। तब अभ्यर्थियों और युवाओं ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

2013: असम लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा में अनियमितता
जनवरी 2013 में असम लोक सेवा आयोग (APSC) की कृषि विकास अधिकारी तथा संयुक्त प्रतियोगी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। उस समय असम में तरुण गोगोई मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने राज्य की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को पूरी तरह से प्रभावित किया।

2012: पीजीआई चंडीगढ़ की एमडी/एमएस का पेपर लीक
नवंबर 2012 में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) की प्रतिष्ठित एमडी/एमएस परीक्षा का प्रश्नपत्र एक संगठित रैकेट द्वारा लीक किए जाने का मामला सामने आया। इस घटना ने देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाओं की परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे।

2012: जम्मू-कश्मीर मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रभावित
इसी साल जम्मू-कश्मीर में भी एक अहम पेपर लीक हुआ। जून 2012 में जम्मू-कश्मीर कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (JKCET) की एमबीबीएस और बीडीएस प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। उस समय राज्य में उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इससे चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे।2012: मुंबई में बीएमएस (अंतरराष्ट्रीय वित्त) परीक्षा लीक
मई 2012 में मुंबई विश्वविद्यालय की बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (BMS) के इंटरनेशनल फाइनेंस विषय का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। उस समय महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे। इस घटना से विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

2012: एसआरएम विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा पर सवाल
मई 2012 में चेन्नई स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना सामने आई। उस समय आंध्र प्रदेश में एन. किरण कुमार रेड्डी मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने निजी विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा पर भी बहस छेड़ दी।

2012: मुंबई विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग का पेपर लीक
मई 2012 में मुंबई विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के ‘बेसिक इलेक्ट्रिकल्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषय का प्रश्नपत्र लीक हो गया। उस समय महाराष्ट्र में पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे। परीक्षा की गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठे और विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना हुई।

2012: कमर्शियल पायलट लाइसेंस परीक्षा प्रभावित
मार्च 2012 में कमर्शियल पायलट लाइसेंस परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। उस समय केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने बेहद अहम विमानन क्षेत्र की लाइसेंसिंग परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए।

2012: कर्नाटक सेकेंड पीयू बोर्ड परीक्षा का पेपर आउट
मार्च 2012 में कर्नाटक सेकेंड पीयू (कक्षा 12) बोर्ड परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इससे राज्य की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और गोपनीयता पर व्यापक सवाल उठे। उस समय भी देश के प्रधानमंत्री पद पर डॉ. मनमोहन सिंह ही आसीन थे।

2011: अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (AIEEE) लीक
मई 2011 में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान ही अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (AIEEE) का प्रश्नपत्र उत्तर प्रदेश में लीक हो गया। लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित करने वाली इस घटना के कारण परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठे और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विवाद हुआ। तब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और मायावती राज्य की मुख्यमंत्री थीं।

2011: अंडमान-निकोबार में सीबीएसई का पेपर लीक
मार्च 2011 में केंद्र शासित अंडमान-निकोबार में सीबीएसई का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना सामने आई। इसने राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षा की सुरक्षा प्रणाली पर चिंता बढ़ाई। तब भी केंद्र में यूपीए की सरकार थी। इससे पहले फरवरी 2011 में सीबीएसई कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक की घटनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की। परीक्षा की निष्पक्षता और गोपनीयता को लेकर व्यापक बहस हुई।

2010: भारतीय नौसेना की एलडीसी परीक्षा लीक
सितंबर 2010 में भारतीय नौसेना की लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इससे रक्षा प्रतिष्ठानों की भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठे। पेपर लीक होने से अभ्यर्थियों में परीक्षा प्रणाली को लेकर काफी रोष देखा गया।

2010: रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा का पेपर हुआ आउट 
जून 2010 में रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) मुंबई की सहायक लोको पायलट एवं सहायक स्टेशन मास्टर भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। युवाओं को रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा का बेसब्री के इंतजार था, लेकिन पेपर लीक होने से उनके सपने चकनाचूर हो गए। इस घटना ने रेलवे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

2010: भारतीय नौसेना भर्ती परीक्षा में पेपर लीक
अप्रैल 2010 में मुंबई में भारतीय नौसेना की परीक्षा का ही प्रश्नपत्र लीक हो गया। उस समय महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस अहम पेपर लीक के मामले ने रक्षा सेवाओं की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर प्रश्न उठाए।

2009: फरीदकोट में सिपाही भर्ती परीक्षा पर विवाद
नवंबर 2009 में फरीदकोट में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। सिपाही भर्ती के लिए तब लाखों युवा कतार में थे, लेकिन पेपर लीक से उनके हाथ निराशा ही लगी। तब केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे।

2009: पेपर लीक के चलते कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) रद्द
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कमोबेश सभी अहम परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन वे चुप्पी साधे रहे। मई 2009 में तो कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। देशभर के विधि अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।2009: राजस्थान बोर्ड की संस्कृत परीक्षा लीक
अप्रैल 2009 में राजस्थान के सीकर में इंटरमीडिएट बोर्ड की संस्कृत परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। उस समय राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। घटना ने राज्य की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाए।

2009: रेलवे भर्ती बोर्ड का एएसएम का पेपर लीक
फरवरी 2009 में राजस्थान में रेलवे भर्ती बोर्ड की सहायक स्टेशन मास्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इस घटना ने रेलवे भर्ती प्रणाली की निष्पक्षता और सुरक्षा पर सवाल उठाए। उस समय राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे।

2009: एम्स फॉरेंसिक साइंस पीएचडी प्रवेश परीक्षा विवाद
जनवरी 2009 में एम्स की फॉरेंसिक साइंस पीएचडी प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक होने का मामला सामने आया। उस समय दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए।2008: पुणे विश्वविद्यालय बी.कॉम. प्रथम वर्ष परीक्षा लीक
मार्च 2008 में पुणे विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष बी.कॉम. का प्रश्नपत्र लीक हुआ। उस समय महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। घटना के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे।

2007: सीए कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (CPT) लीक
अगस्त 2007 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (CPT) परीक्षा का प्रश्नपत्र दिल्ली में लीक हो गया। इसके चलते परीक्षा को पुनर्निर्धारित करना पड़ा। उस समय दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।

2007: आईआरडीए परीक्षा पर भी लगा प्रश्न चिह्न
जून 2007 में भारतीय बीमा संस्थान द्वारा आयोजित बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इस घटना ने पेशेवर परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाए। उस समय केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।

2006: हिमाचल प्रदेश संयुक्त प्री-मेडिकल पेपर लीक
जून 2006 में हिमाचल प्रदेश संयुक्त प्री-मेडिकल टेस्ट (HP-CPMT) का प्रश्नपत्र लीक हुआ। उस समय हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इस घटना ने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए।

2006: लीक से रेलवे भर्ती  ग्रुप-डी परीक्षा पर सवाल
फरवरी 2006 में रेलवे भर्ती सेल की ग्रुप-डी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया, जिसमें लगभग 16 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। यह अपने समय की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक थी। घटना ने रेलवे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

2006: विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग परीक्षा लीक
जनवरी 2006 में विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग प्रथम सेमेस्टर की गणित परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। उस समय कर्नाटक में धरम सिंह मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।

2005: पेपर लीक से चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षा स्थगित
मई 2005 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की कॉरपोरेट लॉ एवं सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस परीक्षा का प्रश्नपत्र ठाणे में लीक होने के कारण परीक्षा स्थगित करनी पड़ी। उस समय महाराष्ट्र में विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।

2004: एआईपीएमटी (CBSE-PMT) का प्रश्नपत्र लीक
नवंबर 2004 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) का प्रश्नपत्र लीक हो गया। चिकित्सा शिक्षा की इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा में हुई घटना ने देशभर में व्यापक चिंता पैदा की। उस समय केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।

2004: पेपर आउट के चलते इग्नू परीक्षा रद्द करनी पड़ी
जून 2004 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर फंडामेंटल्स परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। उस समय दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री और केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। यह यूपीए सरकार के शुरुआती महीनों में सामने आए प्रमुख पेपर लीक मामलों में से एक था।

आइए, अब मनमोहन सिंह से पहले कांग्रेस की सरकारों के दौरान हुए पेपर लीक के मामलों पर एक नजर डालते हैं….

1997: आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) का पेपर लीक
मई 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के कार्यकाल के दौरान देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा आईआईटी-जेईई का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। इसके कारण परीक्षा को स्थगित करना पड़ा और बाद में जुलाई 1997 में दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी, समय और मानसिक संतुलन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि पहली बार देश की सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उठे।

1995: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) भर्ती परीक्षा में सेंध
दिसंबर 1995 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और आयकर निरीक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आई। इस घटना ने केंद्र सरकार की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया। सरकारी नौकरियों के इच्छुक हजारों युवाओं में असंतोष फैला और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे।

1993: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग भर्ती पेपर लीक
दिसंबर 1993 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल और महाराष्ट्र में शरद पवार के मुख्यमंत्री रहते महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की सब-इंस्पेक्टर, सेल्स टैक्स इंस्पेक्टर और अन्य पदों की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। यह मामला राज्य की भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हुआ और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर बहस छिड़ गई।

1993: पेपर लीक से EAMCET प्रवेश परीक्षा पर प्रश्नचिह्न
इसी वर्ष जुलाई 1993 में आंध्र प्रदेश में आयोजित इंजीनियरिंग, कृषि एवं चिकित्सा कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (EAMCET) का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया। उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और राज्य में मुख्यमंत्री कोटला विजय भास्कर रेड्डी थे। इस घटना से हजारों विद्यार्थियों को भारी असुविधा हुई और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े हुए।1993: DU परीक्षा लीक का मामला संसद तक पहुंचा
मई 1993 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया। यह विवाद इतना गंभीर था कि इसकी गूंज संसद तक पहुंची। विपक्ष ने उच्च शिक्षा संस्थानों की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और जवाबदेही की मांग की। लेकिन कांग्रेस सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।

1993: पेपर लीक के चलते आंध्र प्रदेश इंटरमीडिएट परीक्षा रद्द
अप्रैल 1993 में आंध्र प्रदेश इंटरमीडिएट परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और मुख्यमंत्री कोटला विजय भास्कर रेड्डी के कार्यकाल में हुई इस घटना ने लाखों विद्यार्थियों की शैक्षणिक समय-सारिणी को प्रभावित किया और परीक्षा दोबारा आयोजित करनी पड़ी।

1991: लीक से यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं बच सकी
जून 1991 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। बाद में सितंबर 1991 में परीक्षा दोबारा आयोजित की गई। देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा परीक्षा में हुई यह घटना भारतीय परीक्षा प्रणाली के इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में गिनी जाती है।1989: राजीव के कार्यकाल में इंजीनियरिंग परीक्षा रद्द
मई 1989 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान पुणे विश्वविद्यालय की प्रथम वर्ष इंजीनियरिंग परीक्षा के ‘एप्लाइड मैकेनिक्स’ विषय का प्रश्नपत्र लीक हो गया। परिणामस्वरूप परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके लोकेर इंजीनिरिंग छात्रों और युवाओं में खासा रोष देखा गया। विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।

1988: मुंबई विश्वविद्यालय की बी.कॉम. परीक्षा प्रभावित
अप्रैल 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में मुंबई विश्वविद्यालय की बी.कॉम. परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए और छात्रों में व्यापक असंतोष पैदा किया।

1986: तकनीकी शिक्षा बोर्ड की लगातार दो घटनाएं
जून और अगस्त 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी तथा गुजरात के मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी के कार्यकाल में राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड की कंप्यूटर डिप्लोमा परीक्षा के प्रश्नपत्र दो अलग-अलग अवसरों पर लीक हुए। एक ही वर्ष में लगातार दो बार हुई इन घटनाओं ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया।1985: बॉम्बे विश्वविद्यालय की बी.कॉम. परीक्षा विवाद
जुलाई 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर के कार्यकाल में बॉम्बे विश्वविद्यालय की बी.कॉम. (बिजनेस प्लानिंग) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे और परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।

1984: उत्तर प्रदेश में CPMT का प्रश्नपत्र दो बार लीक
सितंबर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में अवध विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संयुक्त प्री-मेडिकल टेस्ट (CPMT) का प्रश्नपत्र दो बार लीक हुआ। इसके कारण परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई और चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई।1982: बॉम्बे विश्वविद्यालय की बी.ए. परीक्षा का पेपर लीक
अप्रैल 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बाबासाहेब भोसले के कार्यकाल में बॉम्बे विश्वविद्यालय की बी.ए. परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। तब छात्रों ने इसके विरोध में प्रदर्शन भी किया।

1982: पेपर लीक से सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में बड़ी सेंध
मार्च 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान सीबीएसई की अखिल भारतीय सीनियर स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (AISSCE) के गणित, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषयों के प्रश्नपत्र लीक हो गए। यह उस समय की सबसे चर्चित राष्ट्रीय परीक्षा घटनाओं में से एक थी। इससे हजारों विद्यार्थियों की परीक्षा प्रभावित हुई और बोर्ड की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उठे।

1975: इंदिरा की इमरजेंसी में भी ISC हिंदी प्रश्नपत्र लीक
इंदिरा गांधी ने जून 1975 में आपातकाल लगा दिया था। लेकिन इमरजेंसी के बावजूद कांग्रेस के कार्यकाल में पेपर लीक जारी रहा। दिसंबर 1975 में इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) परीक्षा का हिंदी प्रश्नपत्र लीक हो गया। इस घटना ने निजी बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए।

1973: रविशंकर विश्वविद्यालय की एम.ए. परीक्षा रद्द
अप्रैल 1973 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी के कार्यकाल में रायपुर स्थित रविशंकर विश्वविद्यालय की एम.ए. परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। तब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ अलग-अलग नहीं हुए थे। पेपर लीक होने के चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी और विद्यार्थियों को पुनः परीक्षा देनी पड़ी।

1956: स्वतंत्र भारत की शुरुआती दर्ज घटनाओं में एक
मार्च 1956 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में त्रावणकोर-कोचीन विश्वविद्यालय की इंटरमीडिएट परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। यह स्वतंत्र भारत में दर्ज शुरुआती पेपर लीक घटनाओं में से एक मानी जाती है। उस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन था। यद्यपि उस दौर में परीक्षा प्रणाली का दायरा आज की तुलना में सीमित था, फिर भी इस घटना ने परीक्षा गोपनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए।

कांग्रेस सरकारों का राज पेपर लीक का स्वर्णिम काल

इन दिनों देश में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका वाड्रा निर्लज्जता के साथ सत्ता पक्ष पर हमलावर तो हैं, लेकिन वह भूल रहे हैं कि उपरोक्त पेपर लीक्स कांग्रेस के ही युवाओं को दिए गए गहरे जख्म हैं। कांग्रेस सरकारों का राज पेपर लीक का स्वर्णिम काल रहा है। देश में पेपर लीक कोई नई बात नहीं है, बल्कि इसने कांग्रेस के केंद्र और राज्यों के शासनकाल में तो एक स्थायी नासूर का रूप ले लिया था। यह एक कड़वी सच्चाई है कि जब-जब केंद्र में यूपीए या राज्यों में कांग्रेस की सरकारें रहीं, तब-तब देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं की गोपनीयता तार-तार हुई। राजस्थान में गहलोत राज में एक नहीं 16 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा खुद सवालों के घेरे में आए, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया। प्रियंका गांधी तक ने राजस्थान में पेपर लीक में असहायता दर्शाते हुए हाथ खड़े कर दिए थे। इससे पहले वर्ष 2006 में केंद्र की कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के दौरान देश के सबसे बड़े स्कूली बोर्ड सीबीएसई की विश्वसनीयता को गहरा धक्का लगा था। तब भी किसी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था।राहुल गांधी को अपनी सरकारों की नाकामियों के दाग दिखाई नहीं देते
राष्ट्रीय स्तर की इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं से लेकर राज्यों की शिक्षक और प्रशासनिक भर्तियों तक, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा, जब कांग्रेस राज में शिक्षा माफिया ने सेंध न लगाई हो। अपनी सरकारों के दौरान परीक्षा तंत्र को सुरक्षित रख पाने में पूरी तरह नाकाम रही कांग्रेस के नेताओं द्वारा आज वर्तमान व्यवस्था पर उंगली उठाना राजनीतिक अवसरवाद की पराकाष्ठा है। खुद के दामन पर दाग होने के बावजूद दूसरों पर कालिख मढ़ने का यह प्रयास पूरी तरह से खोखला नजर आता है। विपक्ष का यह दावा अत्यंत कमजोर और विरोधाभासी है। दूसरों पर कीचड़ उछालने से पहले कांग्रेस को अपने अतीत के पन्नों को जरूर पलट लेना चाहिए, क्योंकि जनता की स्मृति इतनी धुंधली नहीं होती। उसे याद है कि कांग्रेस सरकारों में युवाओं के साथ भर्ती और परीक्षा के नाम पर कैसा विश्वासघात हुआ है।

प्रियंका गांधी ने स्वीकारा था गहलोत सरकार में पेपर लीक ज्यादा
वर्ष 2024 में प्रियंका वाड्रा ने स्वयं स्वीकार किया था कि अशोक गहलोत सरकार के दौरान राजस्थान में पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही थीं और इस समस्या से निपटने में उन्होंने अपनी असहायता भी व्यक्त की थी। अब वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र पर नजर डालिए। परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के सबसे अधिक मामले उन राज्यों से सामने आए हैं, जहां I.N.D.I. गठबंधन की सरकारें हैं।
• जम्मू-कश्मीर – सर्विस सिलेक्शन बोर्ड परीक्षा
• हिमाचल प्रदेश – एचपी बोर्ड कक्षा 12वीं अंग्रेज़ी परीक्षा
• झारखंड – जेएसी (JAC) कक्षा 10वीं हिंदी एवं विज्ञान परीक्षा
• तेलंगाना – इंटरमीडिएट भाषा परीक्षा
• तेलंगाना – एसएससी उर्दू माध्यम परीक्षा
• तमिलनाडु – टीएनटीईयू (TNTEU) बी.एड. परीक्षा
• पश्चिम बंगाल – पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (तृणमूल कांग्रेस सरकार)
• पंजाब – पीएसएसएसबी (PSSSB) ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा
• केरल – पीएससी-26 परीक्षा में अनियमितताएं
• कर्नाटक – एसएसएलसी (SSLC) एवं द्वितीय पीयूसी (2nd PUC) प्रारंभिक परीक्षाएं

भाजपा के पब्लिक एक्जामिनेशन एक्ट में सजा का प्रावधान
यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने-अपने शासित राज्यों में पेपर लीक रोकने का कोई विश्वसनीय मॉडल प्रस्तुत नहीं कर पाई हैं, तो फिर उनके विरोध-प्रदर्शनों का वास्तविक उद्देश्य क्या है? इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने तथा दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत किया है। दरअसल, मुद्दा पेपर लीक नहीं है। अगर सचमुच मुद्दा पेपर लीक होता, तो कांग्रेस के शासनकाल में ये लोग कहां थे, जब 1997 में IIT-JEE का पेपर लीक हुआ, 2006 और 2011 में AIIMS प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक हुआ। पेपर लीक रोकने और इस तरह के संगठित अपराधों में शामिल लोगों को 5 से 10 वर्ष तक की जेल तथा 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करने के लिए 2024 में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम भाजपा सरकार ही लेकर आई है।

ये रही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगने की असल वजह
दरअसल कांग्रेस और इंडी गठबंधन हमारे इतिहास में हुई गलतियों में सुधार को पचा नहीं पा रहा है। लेफ्ट लिबरल गैंग ने वामपंथी सोच और मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते तब मनचाहा इतिहास लिखवा दिया था। जिसे दशकों से हमारे बच्चे स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। अब जब NCERT ने उसमें सुधार करके हकीकत को किताबों में लिखवाया है तो ये बदलाव विपक्ष पचा नहीं पा रहा है। इसीलिए पेपर लीक के बहाने वो शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को टारगेट किया गया। उन्होंने युवाओं के हित में इस्तीफा दे भी दिया है। लेकिन उनका इस्तीफा मांगने के कुछ असली कारण ये हैं…

  • नई NCERT पुस्तकों में कई बदलाव किए गए।
  • क्रूर और निर्दयी शासक के रूप में बाबर का सच दिखाया।
  • औरंगजेब को मंदिरों का विध्वंसक बताया गया।
  • सावरकर की ‘स्वराज’ की मांग को जगह दी गई।
  • 1947 के विभाजन पर कांग्रेस का असली चेहरा उजागर किया।
  • किताब में इमरजेंसी पर एक नया चैप्टर जोड़ा गया।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप के शौर्य को प्रमुखता।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद को जगह मिली।

2004 to 2014 was golden time for students. pic.twitter.com/OUnhuAUlTo

कांग्रेस की राजस्थान में गहलोत सरकार में पेपर लीक में शिक्षा मंत्री गोविंद टासरा पर संलिप्तता के आरोप लगे, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया। राजस्थान में पेपर लीक पर भी एक नजर…

1. राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा – 2018
राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के 5,390 पदों के लिए यह परीक्षा मार्च 2018 में आयोजित की गई थी। इसका मुख्य लीक मॉड्यूल और कानूनी पेचीदगियां 2018 के अंत में तब उजागर हुईं जब गिरोह द्वारा कंप्यूटर लैब हैक करने और हाई-टेक नकल कराने की बात सामने आई। परीक्षा के कुछ हिस्सों को रद्द करना पड़ा था।
2. पुस्तकालयाध्यक्ष (Librarian Grade-III) भर्ती परीक्षा-19
कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा पुस्तकालयाध्यक्ष के 700 पदों के लिए 29 दिसंबर 2019 को परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 55,000 अभ्यर्थी बैठे थे। परीक्षा शुरू होने से मात्र दो घंटे पहले प्रश्नपत्र पूरी उत्तर कुंजी के साथ सोशल मीडिया पर लीक हो गया, जिसके बाद बोर्ड को आनन-फानन में परीक्षा रद्द करनी पड़ी। यह गहलोत सरकार के नए कार्यकाल की पहली बड़ी विफलता थी। जयपुर में कलेक्ट्रेट के सामने बड़ा धरना प्रदर्शन भी हुआ।
3. फार्मासिस्ट सीधी भर्ती परीक्षा – 2019
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट के 1,736 पदों के लिए वर्ष 2019 में लिखित परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया गया था। इस परीक्षा के आयोजन से पहले ही इसके प्रश्नपत्रों की छपाई और वितरण तंत्र में भारी अनियमितताएं और लीक की पुख्ता सूचनाएं लीक हो गईं, जिसके चलते परीक्षा को बार-बार स्थगित करना पड़ा और अंततः यह प्रक्रिया लंबे समय के लिए लटक गई। विपक्षी दल भाजपा ने इसे राज्य के चिकित्सा ढांचे और बेरोजगार फार्मा युवाओं के साथ क्रूर मजाक बताते हुए विधानसभा में जमकर नारेबाजी की।
4. कनिष्ठ अभियंता सिविल डिग्री धारक संयुक्त भर्ती परीक्षा – 2020
पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभागों में कनिष्ठ अभियंताओं के 1,054 पदों के लिए 6 दिसंबर 2020 को इस परीक्षा का आयोजन कराया गया था। परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले ही पूरा प्रश्नपत्र हल सहित सोशल मीडिया पर तैरने लगा, जिसकी पुष्टि बाद में पुलिस जांच में भी हुई और परीक्षा रद्द की गई। तत्कालीन शिक्षा मंत्री और चयन बोर्ड के खिलाफ ‘युवा विरोधी गहलोत सरकार’ के नारे लगे।

5. डांग विकास बोर्ड/सांख्यिकी अधिकारी भर्ती परीक्षा – 2021
आरपीएससी (RPSC) द्वारा सांख्यिकी विभाग और विकास बोर्डों के लिए विभिन्न पदों हेतु 2021 की शुरुआत में परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में भी चुनिंदा कोचिंग सेंटरों और पेपर सॉल्वर गैंग के बीच प्रश्नपत्रों का अग्रिम सौदा होने के सबूत मिले। मुख्य विपक्षी दल ने इस परीक्षा को लेकर आरपीएससी के भीतर बैठे “सफेदपोश मगरमच्छों” की संलिप्तता का आरोप लगाया और इसे छोटे पदों पर भी भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण बताया।
6. मूल्यांकन अधिकारी (Evaluation Officer) भर्ती परीक्षा-21
आयोजना विभाग में मूल्यांकन अधिकारी के पदों के लिए वर्ष 2021 में परीक्षा कराई गई थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने और चुनिंदा चहेतों को फायदा पहुंचाने की शिकायतें खुद अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई थीं। विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि गहलोत सरकार के राज में कोई भी संवैधानिक संस्था (आरपीएससी या आरएसएसबी) बिना धांधली के परीक्षा कराने में सक्षम नहीं रह गई है।
7. राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा – 2021
आरपीएससी द्वारा पुलिस महकमे में सब-इंस्पेक्टर (SI) के 859 महत्वपूर्ण पदों के लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में बीकानेर, जयपुर और जोधपुर के केंद्रों से ब्लूटूथ चप्पलों के जरिए नकल और स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर लीक होने का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें बाद में कई डमी अभ्यर्थी और थानेदार पकड़े गए। इस परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन हुआ।
8. राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET Level-2) – 2021
यह राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा 31,000 पदों का शिक्षक भर्ती घोटाला था, जिसकी परीक्षा 26 सितंबर 2021 को हुई थी। जांच में सामने आया कि शिक्षा संकुल के स्ट्रॉन्ग रूम से ही पेपर निकालकर करोड़ों रुपये में बेचा गया था, जिसके बाद फरवरी 2022 में सरकार को यह परीक्षा रद्द करनी पड़ी। भाजपा के वरिष्ठ नेता किरोड़ी लाल मीणा ने इसके विरोध में जयपुर तक ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली और ‘रीट के ठगों को जेल भेजो’ के नारों के साथ विधानसभा का घेराव किया, जिससे सरकार पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में आ गई।
9. Agriculture Supervisor भर्ती परीक्षा – 2021
कृषि विभाग में पर्यवेक्षकों के 2,254 पदों के लिए सितंबर 2021 में लिखित परीक्षा का आयोजन कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा किया गया था। इस परीक्षा के दौरान भी सॉल्वर गैंग के सक्रिय होने और कई केंद्रों पर ओएमआर शीट (OMR Sheets) खाली छुड़वाने के मामले सामने आए। विपक्ष ने इसे ग्रामीण और किसान पृष्ठभूमि से आने वाले होनहार छात्रों के हक पर डाका करार दिया।
10. वनपाल और वनरक्षक भर्ती परीक्षा – 2022
वन विभाग में वनरक्षक और वनपाल के 2,399 पदों के लिए नवंबर 2022 में परीक्षा आयोजित की गई थी। 12 नवंबर 2022 को हुई दूसरी पारी का पेपर राजसमंद से परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर लीक हो गया, जिसके बाद उस विशिष्ट पाली को रद्द करना पड़ा। प्रतिपक्ष के नेताओं ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि गहलोत सरकार का ‘जादू’ ऐसा है कि हर महीने एक नया पेपर हवा में उड़कर माफियाओं की जेब में पहुंच जाता है।
11. कनिष्ठ अभियंता (JEN) कृषि भर्ती परीक्षा – 2022
कृषि अभियांत्रिकी विभाग में कनिष्ठ अभियंताओं के पदों के लिए सितंबर 2022 में लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा के परिणाम और उत्तर कुंजी जारी होने के बाद पेपर के पहले से लीक होने के साक्ष्य मिले, जिसके चलते बाद में अभिशंसाएं वापस लेनी पड़ीं। इस तकनीकी परीक्षा के लीक पर भी सरकार को घेरा गया।

12. पशुधन सहायक (Livestock Assistant) भर्ती परीक्षा-22
पशुपालन विभाग में पशुधन सहायकों के 1,136 पदों के लिए मई 2022 में परीक्षा कराई गई थी। इस परीक्षा के दौरान जोधपुर और बाड़मेर बेल्ट में परीक्षा से पूर्व ही प्रश्नपत्र हल किए जाने की सूचनाएं पुलिस को मिली थीं। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर पशुपालक परिवारों के बच्चों के साथ हुए अन्याय का मुद्दा उठाया और बाड़मेर-सांचौर के परीक्षा केंद्रों को ‘पेपर लीक का नया हब’ घोषित करते हुए वहां विशेष जांच की मांग की।
13. राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा (द्वितीय पाली) – 2022
कांस्टेबल के 4,588 पदों के लिए 14 मई 2022 की दूसरी पाली की परीक्षा का पेपर जयपुर के एक झोटवाड़ा स्थित केंद्र के स्ट्रॉन्ग रूम से समय से पहले ही बाहर आ गया था, जिसके बाद इस पारी को निरस्त किया गया।
14. आरपीएससी द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा- 2022
आरपीएससी द्वारा वरिष्ठ शिक्षकों के 9,760 पदों के लिए 24 दिसंबर 2022 को सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की जानी थी। उदयपुर पुलिस ने परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले एक चलती बस को पकड़ा जिसमें करीब 40 से अधिक अभ्यर्थी लीक पेपर हल कर रहे थे। इस ‘चलती बस वाले कांड’ ने पूरे देश को चौंका दिया। इससे विधानसभा का शीतकालीन सत्र में व्यवधान आया। तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा की संलिप्तता उजागर होने पर पूरी आरपीएससी को भंग करने की मांग की।
15. तकनीकी शिक्षा (Lecturer/Technical) भर्ती परीक्षा-22
तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रवक्ताओं और इंस्ट्रक्टर्स के पदों के लिए आरपीएससी द्वारा 2022 के अंत में परीक्षाएं ली गई थीं। इन परीक्षाओं में भी आरपीएससी के गोपनीय विंग से ही प्रश्नपत्र लीक माफियाओं (जैसे सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण) तक पहुंचने की कड़ियां जुड़ीं। विपक्षी खेमे ने इसे लेकर ‘राजस्थान बचाओ, पेपर चोर भगाओ’ के अभियान के तहत जिला स्तर पर बड़े प्रदर्शन आयोजित किए।
16. सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) संविदा भर्ती परीक्षा-23 एनएचएम (NHM) के तहत 3,531 पदों के लिए 19 फरवरी 2023 को परीक्षा कराई गई थी, जिसका पेपर परीक्षा से पहले ही सोशल मीडिया पर उत्तर सहित वायरल हो गया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने चुनावी साल होने के कारण इसे लीक नहीं माना, लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे को जिंदा रखा। परिणाम यह हुआ कि दिसंबर 2023 में सत्ता में आते ही नई भाजपा सरकार ने इस परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दोबारा सुनियोजित तरीके से आयोजित कराया।

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