वर्ष 2014 के बाद से ही भारतीय राजनीति की धारा और जनमत जिस तेजी से बदला है, उसने वामपंथी-उदारवादी (लेफ्ट-लिबरल) इकोसिस्टम और उसके पोषित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जड़ें हिलाकर रख दी हैं। अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन और अप्रासंगिकता से बौखलाए इस तंत्र ने अब निष्पक्षता का चोला उतारकर खुले तौर पर देशविरोधी और सनातन-विरोधी एजेंडे को हवा देना शुरू कर दिया है।
इसी छटपटाहट और वैचारिक शून्यता के बीच जन्म हुआ है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का—एक ऐसा संगठन जिसके पास न कोई ठोस नीति है और न ही विकास का एजेंडा। जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में नाकाम रहने के बाद, इस पार्टी ने सत्ता पाने के लिए उस वामपंथी सोशल मीडिया तंत्र की शरण ली है जो लंबे समय से राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का काम कर रहा था।
अपनी घटती साख को बचाने के लिए इस संगठन ने ऐसे ‘गालीबाज इन्फ्लुएंसर्स’ को अपनी कमान सौंपी है, जिनकी पहचान ही अभद्र भाषा, फेक न्यूज और समाज में जहर घोलने से बनी है। मर्यादाओं को ताक पर रखकर इन चेहरों को साथ लाना यह साफ दर्शाता है कि यह इकोसिस्टम अब किस हद तक देश के युवाओं को गुमराह करने पर आमादा है।
दूसरी ओर, युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं। हाल ही में पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार ने इसके लिए संसद में कड़ा कानून भी लागू किया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज हासिल करने वाले पीएम मोदी के इस महत्वपूर्ण वीडियो संदेश को विदेशी प्लेटफॉर्म्स द्वारा सेंसर और ब्लॉक किए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रवादी समर्थकों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि सरकार की सख्त कार्रवाई को दबाया जा सके।
लेकिन लोकतांत्रिक बहसों को किनारे करने वाले इस वामपंथी नेक्सस और CJP के ‘गालीबाज ब्रिगेड’ मॉडल को अब भारत के सजग नागरिक और राष्ट्रवादी डिजिटल योद्धा पूरी तरह बेनकाब कर चुके हैं। सोशल मीडिया को हथियार बनाकर फैलाए जा रहे इस जहरीले नैरेटिव का जवाब अब देश की जनता अपने विवेक से दे रही है।
1. विपक्ष और विदेशी ताकतों का राजनीतिक षड्यंत्र
वामपंथी इकोसिस्टम, कांग्रेस और विदेशी ताकतें भारत में एक लंबे और गहरे राजनीतिक खेल की तैयारी में जुटी हुई हैं। सांस्कृतिक और सभ्यतागत स्तर पर देश को कमजोर करने के प्रयासों के साथ-साथ, राजनीतिक व चुनावी हितों को ध्यान में रखते हुए भी सरकार को अब इन राष्ट्रविरोधी मंसूबों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है।

2. सीजेपी (CJP) को छूट और पीएम के वीडियो पर सेंसरशिप
सोशल मीडिया दिग्गजों की मनमानी पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पत्रकारों ने रेखांकित किया है कि जहां सीजेपी (CJP) जैसी विवादित और प्रायोजित मुहीमों को प्लेटफॉर्म्स पर खुली छूट मिलती है, वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड तोड़ संदेश को ब्लॉक कर दिया जाता है। भारतीय विज्ञापन राजस्व से अरबों कमाने वाले ये अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स अब भारतीय लोकतंत्र को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं, जिन पर मोदी सरकार को तुरंत सख्त ‘रेडलाइन्स’ तय करनी चाहिए।

3. फेसबुक का घोर पक्षपात और डिजिटल संप्रभुता पर प्रहार
फेसबुक द्वारा प्रधानमंत्री के पोस्ट को सेंसर करना भारत के लोकतंत्र और डिजिटल संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप है। यह कोई सामान्य ‘कंटेंट मॉडरेशन’ नहीं है, बल्कि एक विदेशी प्लेटफॉर्म द्वारा यह तय करने की तानाशाही कोशिश है कि भारतीय नागरिक क्या देख सकते हैं। फेसबुक को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि उसने किस कानूनी अनुरोध या दबाव के तहत भारत के प्रधानमंत्री का संदेश रोका।
4. राइट-विंग अकाउंट्स का दमन और मेटा पर अस्थायी प्रतिबंध की मांग
मेटा (Meta) लगातार राष्ट्रवादी और राइट-विंग पेजों को निशाना बनाकर डिलीट या शैडोबैन करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी के पेपर लीक पर दिए गए सख्त रुख वाले वीडियो को भारत में ब्लॉक करके फेसबुक ने अपनी हदों को पार कर दिया है। जब तक सरकार ऐसे पक्षपाती विदेशी प्लेटफॉर्म्स को कम से कम 7-8 दिनों के लिए प्रतिबंधित नहीं करेगी, तब तक इन्हें सबक नहीं मिलेगा।
🚨 मेटा प्लेटफॉर्म पर सख्त एक्शन लेने का समय आ गया है
इस बार फेसबुक ने सारी हदें पार कर दी है!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई वाले पोस्ट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
क्या इस विदेशी प्लेटफॉर्म को अधिकार है कि वो भारत के प्रधानमंत्री के पोस्ट को… pic.twitter.com/BuQpdlUoqL
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 28, 2026
5. फेसबुक व व्हाट्सएप पर कड़े प्रतिबंध की सिफारिश
पीएम मोदी के वीडियो को सेंसर किए जाने की घटना के बाद भारतीय यूजर्स द्वारा फेसबुक और व्हाट्सएप को भारत में स्थायी रूप से ब्लॉक करने की मांग उठाई जा रही है। इनका मुकाबला करने के लिए स्वदेशी ऐप्स (जैसे अरट्टई / Arattai) को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि विदेशी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके युवाओं और देश के माहौल को भड़काया न जा सके।
Meta has reportedly restricted/blocked visibility of PM .@narendramodi Ji’s 1st selfie video on Facebook in Bharat.
If True, I strongly suggest Modi Sarkar to block Facebook & WhatsApp in Bharat. Don’t touch Instagram. That may be used to instigate Gen-Z further. But Facebook &… pic.twitter.com/3kcKaF5570
— BhikuMhatre (@MumbaichaDon) July 28, 2026
6. अमेरिकी कॉर्पोरेट्स का कंट्रोल और स्वदेशी विकल्पों की जरूरत
अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियां दुनिया भर में नैरेटिव तय करके सरकारें बदलने का खेल खेलती रही हैं। पीएम मोदी की पोस्ट पर रोक लगाना इस बात का प्रमाण है कि उपभोक्ता जो देख रहे हैं, वह ये कॉर्पोरेशन तय करते हैं। चीन, रूस और जापान की तर्ज पर भारत को भी इन अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स पर अपनी निर्भरता खत्म कर स्वदेशी डिजिटल ढांचा खड़ा करना होगा।
रेड अलर्ट: US कंपनी मेटा ने सबसे बड़े लोकतंत्र के पीएम @narendramodi की फेसबुक पोस्ट कुछ घंटों के लिए रोक दी. मोदी एक कॉरपोरेशन के शिकार बन गए.
अगर वो ये कर सकते हैं तो क्या उन्होंने एक खास इंस्टा पोस्ट को वायरल नहीं किया होगा? क्या आप यकीन से कह सकते हैं कि ये नहीं हुआ होगा?… pic.twitter.com/TDZa5O0c3z
— Dilip Mandal (@Profdilipmandal) July 28, 2026
7. मेटा की ‘तकनीकी गलती’ वाली सफाई पर उठते सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Gen Z को संबोधित वीडियो हटाने के बाद विवाद बढ़ने पर मेटा ने इसे ‘लीगल रिक्वेस्ट’ के बजाय ‘तकनीकी गलती’ (Technical Error) करार देकर बहाल किया। हालाँकि, मेटा की इस सफाई से देश में संतोष नहीं है और पश्चिमी प्लेटफॉर्म्स के तरीकों पर भारी सवाल खड़े करते हुए भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मांग तेज हो गई है।
Meta ने हटाया पीएम मोदी का वीडियो, बाद में इसे बताया ‘गलती’
मनीकंट्रोल के अनुसार मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो को हटा दिया जिसमें उन्होंने Gen Z को संबोधित किया था। हालांकि बाद में इसे बहाल कर दिया गया।
कंपनी ने पहले तो कहा कि कानूनी अनुरोध के आधार पर वीडियो… pic.twitter.com/0fshJHV70o
— RT Hindi (@RT_hindi_) July 28, 2026
8. विवाद के बाद मेटा का रुख और माफीनामा
नीट (NEET) पेपर लीक पर देश के युवाओं और छात्रों को आश्वस्त करते प्रधानमंत्री मोदी के सेल्फी वीडियो के फेसबुक से गायब होते ही देशभर में हंगामा मच गया। इस गंभीर विवाद और जनता के आक्रोश के बाद अंततः मेटा ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी चूक स्वीकार की और पीएम मोदी का वीडियो दोबारा बहाल करते हुए माफी मांगी।

सोशल मीडिया CEO का कार्यकाल और वामपंथी एजेंडा
वर्ष 2014 के बाद से ही सोशल मीडिया के दिग्गज प्लेटफॉर्म्स (ट्विटर, मेटा, इंस्टाग्राम) और भारत सरकार के बीच लगातार तनातनी देखने को मिली है। वामपंथी और लिबरल इकोसिस्टम ने इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने और अपनी सहूलियत का नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया, जिसके जवाब में समय-समय पर भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के तहत कड़े कदम उठाए। विभिन्न सीईओ के कार्यकाल के दौरान इस पूरे घटनाक्रम और सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का तिथिवार विवरण इस प्रकार है:
डिक कॉस्टोलो कार्यकाल (2014 – जून 2015) (ट्विटर)
वामपंथी/लिबरल आरोप: इस दौर में प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम की भूमिका सीमित थी और पोस्ट समयक्रम में दिखते थे। 2014 चुनाव के बाद दक्षिणपंथी खातों की बढ़ती सक्रियता देखकर लिबरल मीडिया ने “राइट-विंग प्रोपेगैंडा” बढ़ने की चिंता जताई थी।
अगस्त 2014: असम हिंसा और पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ फैलाई जा रही अफवाहों व भड़काऊ पोस्ट्स को हटाने के लिए भारत सरकार ने निर्देश दिए, जिसके तहत दर्जनों फर्जी और भड़काऊ हैंडल ब्लॉक किए गए।
जैक डोर्सी कार्यकाल (अक्टूबर 2015 – नवंबर 2021) (ट्विटर)
वामपंथी/लिबरल आरोप: डोर्सी के कार्यकाल में ट्विटर पर वामपंथी पूर्वाग्रह के सबसे कड़े आरोप लगे। 2018 में भारत दौरे पर डोर्सी की “Smash Brahminical Patriarchy” पोस्टर के साथ फोटो पर भारी विवाद हुआ। इसके अलावा, दक्षिणपंथी ट्रेंड्स को ‘शैडोबैन’ करने और डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट बैन करने को लेकर भी आलोचना हुई।
फरवरी 2021: किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने हिंसा भड़काने और भ्रामक हैशटैग चलाने वाले 250 से अधिक ट्विटर हैंडल को IT एक्ट की धारा 69A के तहत हटाने का आदेश दिया। ट्विटर ने पहले इन्हें ब्लॉक किया, फिर अनब्लॉक कर दिया, जिससे सरकार और प्लेटफॉर्म में तनातनी बढ़ी।
मई 2021: भाजपा नेताओं के कथित ‘कांग्रेस टूलकिट’ वाले ट्वीट्स को ट्विटर ने “Manipulated Media” का टैग दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ट्विटर इंडिया के दफ्तरों पर प्रक्रियात्मक जांच के तहत दौरा किया।
फरवरी 2021: भारत सरकार ने नए मध्यस्थ दिशानिर्देश (IT Rules 2021) लागू किए, जिसका अनुपालन न करने पर ट्विटर की लीगल इम्युनिटी खत्म होने की चेतावनी दी गई।
पराग अग्रवाल कार्यकाल (नवंबर 2021 – अक्टूबर 2022) (ट्विटर)
वामपंथी/लिबरल आरोप: पराग अग्रवाल और विजया गाड्डे (पॉलिसी हेड) के नेतृत्व में मॉडरेशन टीम पर दक्षिणपंथी आवाजों को चुनिंदा रूप से सेंसर करने और डोमिनेंट लिबरल विचारों को प्राथमिकता देने के आरोप बने रहे।
जुलाई 2022: ट्विटर ने भारत सरकार के कई अकाउंट-ब्लॉकिंग ऑर्डर्स के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया।
अगस्त-सितंबर 2022: सरकार के कड़े कानूनी रुख के बाद ट्विटर ने भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े कई खातों को ‘जिओ-ब्लॉक’ (Geo-block) किया।
एलन मस्क कार्यकाल (अक्टूबर 2022 – वर्तमान) (ट्विटर / X)
वामपंथी/लिबरल आरोप: एलन मस्क ने कमान संभालते ही ‘Twitter Files’ लीक कीं, जिससे यह साबित हुआ कि पिछला प्रबंधन राजनीतिक पूर्वाग्रहों के आधार पर कंटेंट सेंसर करता था। मस्क ने खुद को “Free Speech Absolutist” घोषित किया।
जनवरी 2023: पीएम मोदी और 2002 गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री “India: The Modi Question” के लिंक और ट्वीट्स को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश पर प्लेटफॉर्म से ब्लॉक किया गया।
जून 2023: पूर्व CEO जैक डोर्सी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने किसान आंदोलन के समय ट्विटर बंद करने की धमकी दी थी, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज करते हुए केवल कानून पालन का निर्देश बताया।
फरवरी 2024: किसान आंदोलन 2.0 के दौरान गृह मंत्रालय के निर्देशों पर सुरक्षा कारणों से सैकड़ों अकाउंट्स और लिंक्स पर भारत में रोक लगाई गई।
मार्क जुकरबर्ग (मेटा) व एडम मोसेरी (इंस्टाग्राम) कार्यकाल (2014 – वर्तमान) (मेटा एवं इंस्टाग्राम)
वामपंथी/लिबरल आरोप: फेसबुक व इंस्टाग्राम के ‘फैक्ट-चेकिंग’ तंत्र पर दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी पोस्ट्स को सेंसर/डाउनग्रैड करने के आरोप लगे। दूसरी ओर, 2020 की WSJ रिपोर्ट में यह आरोप भी लगा कि फेसबुक की भारत नीति टीम ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं की नफरती बयानबाजी पर ढिलाई बरती, जिससे दोनों पक्षों में विवाद रहा।
2016: ट्राई (TRAI) और भारत सरकार ने फेसबुक की ‘Free Basics’ योजना को नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों का उल्लंघन मानते हुए भारत में प्रतिबंधित कर दिया।
अप्रैल-मई 2021: कोविड की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन संकट और सरकार की आलोचना वाले कुछ हैशटैग्स (जैसे #ResignModi) अस्थायी रूप से ब्लॉक हुए, जिसे बाद में फेसबुक ने “तकनीकी खराबी” बताया।
2021-2023: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेशों के तहत साइबर सुरक्षा, अलगाववादी (खालिस्तानी) और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े सैकड़ों फेसबुक/इंस्टाग्राम पेजों को समय-समय पर बैन किया गया।
फरवरी 2026: भारत सरकार के अद्यतन IT नियमों के तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को भ्रामक और गैर-कानूनी सामग्री 3 घंटे के भीतर हटाने के सख्त निर्देश दिए गए।









