Home समाचार उमर खालिद के बाद अब अराजक प्रदर्शनकारियों को बचाने उतरे कपिल सिब्बल,...

उमर खालिद के बाद अब अराजक प्रदर्शनकारियों को बचाने उतरे कपिल सिब्बल, एक करोड़ रुपये का किया ऐलान, उपद्रवी जानते थे बचाने वाले तैयार बैठे हैं

SHARE

कॉकरोच जनता पार्टी के हिंसक प्रदर्शन के दौरान सवाल उठ रहे थे कि आखिर इन प्रदर्शनकारियों के बढ़ते हौसले का राज क्या है ? कौन इनका हौसला बढ़ा रहा है ? कहां से इनको इतना आत्मविश्वास मिल रहा है? इनको कौन फंडिंग कर रहा है ? कौन कौन ताकतें इनके पीछे खड़ी हैं, जिनके बल पर ये पुलिस और केंद्र सरकार को चुनौती दे रहे हैं? अब इन सारे सवालों के जवाब एक एककर मिलने लगे हैं। जो पर्दे के पीछे काम कर रहे थे, अब उनके चेहरे सामने आ रहे हैं। जब कपिल सिब्बल जैसे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील का राजनीतिक और एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद प्राप्त हो तो फिर कॉकरोच जनता पार्टी जैसा नवजात शिशु भी पहलवान बन जाता है। उसके हौसले इतने बढ़ जाते हैं कि खुद को देश के कानून से ऊपर समझने लगता है।

26 जुलाई को कपिल सिब्बल से मिले अभिजीत दीपके
केंद्र सरकार द्वारा मांग मानने के बाद CJP ने शनिवार 25 जुलाई,2026 को 36 दिनों तक चले अपने प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा की। इसके बाद रविवार 26 जुलाई को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके कानूनी संरक्षण और समर्थन हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी समर्थित राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के घर पहुंच गए। कपिल सिब्बल से मुलाकात के बाद अभिजीत दीपके ने बताया कि मेरी प्राथमिकता आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर है। मेरा प्रयास है कि किसी भी छात्र के खिलाफ कार्रवाई न हो।

27 जुलाई को कपिल सिब्बल से मिले सौरव दास
इसके बाद दूसरे दिन सोमवार 27 जुलाई,2026 को सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने पूर्व कांग्रेस सांसद रहे कपिल सिब्बल से मुलाकात की। सौरव दास ने बताया कि राज्यसभा सांसद और देश के सबसे वरिष्ठ वकीलों में से एक कपिल सिब्बल भी उनके साथ हैं। कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रुपये भी दिए हैं। इन पैसों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद दिलाने में किया जाएगा। सौरव दास ने फिर धमकी दी कि अगर मंगलवार तक गिरफ्तार छात्र नहीं छोड़े गए तो सीजेपी दोबारा प्रदर्शन शुरू करेगी। 

कपिल सिब्बल- लीगल हेल्प के लिए देंगे एक करोड़ रुपये  
इस दौरान कपिल सिब्बल ने ऐलान किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता दी जाएगी। इसके लिए उन्होंने एक करोड़ रुपये का योगदान दिया। कपिल सिब्बाल ने कहा, “हमलोग ने तय किया है, जहां-जहां इनके खिलाफ मामले होंगे वहां-वहां इनको लीगल हेल्प दूंगा। मैं अपनी ओर से एक करोड़ रुपया दूंगा, ताकि कानूनी लड़ाई लड़ी जा सके। दूसरों से भी कहूंगा कि वे कंट्रीब्यूट करें। दिल्ली की पुलिस फेशियल रिकग्नाइजेशन के जरिये लोगों को टारगेट करेगी ऐसा लगता है। इसमें कम्युनल एंगल भी लाया जा सकता है। हम सब को ये तय करना है कि इनको टारगेट न किया जाए।”

सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कराएंगे- सौरव दास
कपिल सिब्बल से एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और कानूनी संरक्षण मिलने के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर करने की धमकी दी। उन्होंने कहा, “हम एक ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च करेंगे ताकि हम लोगों तक पहुंच सकें। हम रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर करेंगे। सीजेपी ने लोगों से अपील की है कि जिनके पास प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो, फोटो या अन्य सबूत हैं, वे उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड करें। “

हिंसा करने वालों को पता था बचाने वाले तैयार 
फीस के तौर पर अपने मुवक्किल से बड़ी मोटी रकम वसूलने वाले कपिल सिब्बल की इस दरियादिली पर सवाल उठ रहे हैं। सीजेपी नेताओं की कपिल सिब्बल से मुलाकात और काफी तत्परता से एक करोड़ रुपये के ऐलान ने स्पष्ट कर दिया है कि सीजेपी का प्रदर्शन पूरी तरह स्क्रिप्टेड था। एक सोची समझी रणनीति के तहत इनको जंतर मंतर पर बैठाया गया। विभिन्न असामाजिक ग्रुप्स को फंडिंग कर अराजक तत्वों की भीड़ जुटाई गई। जब प्रदर्शनकारियों को कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकीलों का समर्थन प्राप्त हो तो वो पुलिस से कैसे डर सकते हैं। उन्हें पता था कि हिंसा करने के बाद उन्हें बचाने वाले तैयार है। इसलिए दिल्ली की सड़कों पर दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवानों पर पत्थराव किया गया। कनॉट प्लेस के एसीपी विवेक भगत की मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई।

कपिल सिब्बल उन सभी लोगों को कानूनी संरक्षण देते हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी को गाली देते हैं और देश के खिलाफ काम करते हैं… 

दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के बचाव में पैरवी 
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल दिल्ली दंगों में आरोपी और जेल में बंद उमर खालिद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, और अप्रैल 2026 में उनकी पुनर्विचार याचिका भी ठुकरा दी गई। उमर खालिद की जमानत पर सुनवाई के दौरान सिब्बल ने दलील दी थी कि दिल्ली पुलिस की कहानी मनगढ़ंत है और 8 जनवरी 2020 की कथित गुप्त मीटिंग कभी हुई ही नहीं थी। उन्होंने देरी को जमानत का मुख्य आधार बनाया था। कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि फरवरी 2020 में जब दंगे भड़के थे तब उनका मुवक्किल दिल्ली में नहीं था और उसे इस तरह कैद में नहीं रखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते। 

विवादित टिप्पणी मामले में नेहा सिंह राठौर की पैरवी
प्रधानमंत्री मोदी और देश विरोधी बयान देने पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर पर केस दर्ज किया गया था। इसके बाद नेहा सिंह राठौर ने कपिल सिब्बल से मुलाकात की थी और सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा कर उनका आभार जताया था। नेहा सिंह राठौर के खिलाफ यह FIR लखनऊ के हजरतगंज थाने में अभय प्रताप सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत में नेहा पर एक खास धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने और धार्मिक आधार पर समुदायों के बीच नफरत फैलाने का आरोप लगाया गया। कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर पैरवी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए उन्हें ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया था।

अब आपको दिखाते हैं, कपिल सिब्बल किस तरह खुद को संविधान और सुप्रीम कोर्ट से ऊपर समझते हैं, अपने मुवक्किल को जमानत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट को धमकाने से बाज नहीं आते…

जमानत ना देने पर सुप्रीम कोर्ट को कपिल सिब्बल की धमकी
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के. कविता की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में 22 मार्च,2024 को तीखी बहस हुई थी। कविता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने यहां तक कह दिया कि ‘इस कोर्ट का इतिहास स्वर्णिम काल में नहीं लिखा जाएगा।’ हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल की सभी दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि कृपया, इसे राजनीतिक मंच न बनाएं… आप हमसे जो करने के लिए कह रहे हैं वह संभव नहीं है। आप हमसे अनुच्छेद 32 के तहत किसी याचिका पर सीधे विचार करने के लिए सिर्फ इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वह व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट आ सकता है। ऐसा नहीं हो सकता। नियम सभी के लिए एक समान होंगे। उसके लिए सभी लोग एक समान हैं और किसी खास व्यक्ति के लिए कानून को नदरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

600 वकीलों ने CJI को लिख था लेटर
कपिल सिब्बल की धमकी के बाद 28 मार्च, 2024 को 600 वकीलों ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिख कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि पत्र में किसी खास समूह या वकील का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन माना गया कि यह पत्र कपिल सिब्बल की ‘स्वर्णिम काल’ की टिप्पणी के विरोध में था। 

देश के करीब 600 नामी वकीलों ने चिट्ठी में आरोप लगाया कि एक खास समूह देश की न्यायपालिक पर दबाव बनाना चाहता है और उसकी संप्रभुता एवं स्वायत्तता पर हमले कर रहा है। यह चिट्ठी लिखने वाले वकीलों में हरीश साल्वे, मनन कुमार मिश्रा, अदीश अग्रवाला, चेतन मित्तल, पिंक आनंद, हितेश जैन, उदय होल्ला शामिल हैं।

इन वकीलों ने साफ तौर पर लिखा कि एक खास ग्रुप है, जो अदालत पर दबाव डालना चाहता है और उसकी स्वायत्तता को कम करने की कोशिश में है। पत्र में निहित स्वार्थी समूहों पर न्यायपालिका की अखंडता को कमजोर करने, न्यायिक प्रक्रियाओं में हेरफेर करने, अदालती फैसलों को प्रभावित करने, निराधार आरोपों और राजनीतिक एजेंडे के साथ न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश का आरोप लगाया गया था।

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का सिब्बल पर बड़ा आरोप
पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल पर एक बड़ा आरोप लगाया था। एक न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में जस्टिस गोगोई ने आरोप लगाया कि साल 2018 में जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, तब सिब्बल तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर समर्थन मांगने उनके आवास गए थे। लेकिन उन्होंने कपिल सिब्बल को घर में घुसने नहीं दिया था।

यूपीए शासन के दौरान कपिल सिब्बल ने 29 मई 2009 से 28 अक्टूबर 2012 तक केंद्रीय मानव संसाधन विकास (शिक्षा) मंत्री के रूप में कार्य किया था। अब आपको दिखाते हैं कि इस दौरान कैसे पेपर लीक हुआ था….

सिब्बल के शिक्षा मंत्री रहते AIIMS का पेपर लीक
कपिल सिब्बल जब केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास (HRD/शिक्षा) मंत्री थे, तब जनवरी 2012 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ऑल इंडिया पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें देश की इस बेहद प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए थे। इस परीक्षा घोटाले में एक सुनियोजित रैकेट काम कर रहा था, जिसने परीक्षार्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए मोटी रकम वसूली थी।

सिब्बल के शिक्षा मंत्री रहते मुंबई में हुआ था पेपर लीक
मुंबई पुलिस ने मई 2012 में मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित तीन इंजीनियरिंग परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लीक होने के मामले में एक कॉलेज के दो प्रोफेसरों, मुंबई विश्वविद्यालय के चार चपरासियों और पांच छात्रों सहित चौदह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 26 मई को एटीकेटी (ATKT) छात्रों के लिए आयोजित ‘बेसिक इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग’, मुंबई विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए क्रमशः 23 मई और 18 मई को आयोजित ‘अप्लाइड फिजिक्स-II’ और ‘मैथ्स-II’ के पेपर निर्धारित समय से कुछ घंटे पहले लीक हो गए थे। हालांकि, परीक्षाएं तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की गई थीं।

इंजीनियरिंग का पेपर लीक, 11 लाख छात्र प्रभावित

2011 में कपिल सिब्बल के शिक्षा मंत्री रहते इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। लखनऊ में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद देशभर में वार्षिक ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (AIEEE) का 10वां संस्करण ढाई घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया। इसने इसके 11.18 लाख परीक्षार्थियों को उम्मीद से कहीं अधिक परेशान किया, क्योंकि जब दोपहर में उन्होंने आखिरकार लिखना शुरू किया, तब तक उनकी सारी ऊर्जा खत्म हो चुकी थी। भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली एआईईईई (AIEEE), जो सुबह 9:30 बजे शुरू होनी थी, उसे दोपहर 12 बजे तक के लिए टाल दिया गया। यह कदम तब उठाया गया जब उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा प्रश्नपत्र की एक प्रति सीबीएसई (CBSE) प्रमुख को फैक्स की गई।

शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल ने किया था अंबेडकर का अपमान
वर्ष 2012 में कांग्रेस के शासन में एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के एक पुराने कार्टून को लेकर संसद में भारी हंगामा हुआ था। आज धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने वाले कपिल सिब्बल तब तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री थे। कपिल सिब्बल ने इस विवाद पर देश से माफी मांगी थी और उस कार्टून को किताबों से हटाने के निर्देश दिए थे।

शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल ने आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव को बताया जिम्मेदार 
कपिल सिब्बल ने सदन के पटल पर NCERT की किताबों में बने कार्टून के लिए आदोलनजीवी योगेंद्र यादव को जिम्मेदार ठहराया था। गौरतलब है कि 2006 में, केंद्र की कांग्रेस सरकार ने इतिहास की किताबों में बदलाव के लिए एक समिति का गठन किया था और योगेंद्र यादव को, NCERT के सदस्य न होने के बावजूद, इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

 

Leave a Reply