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सनातन विरोधी कांग्रेस : प्रियंका गांधी ने फिर किया गौ माता का अपमान, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ विकसित करने वाले वैज्ञानिक का उड़ाया मजाक

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कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की सनातन धर्म में कोई आस्था नहीं है। सनातन संस्कृति, गौ माता और भारतीय वैज्ञानिकों का अपमान करना इनकी आदत बन चुकी है। 7 नवंबर 1966 (गोपाष्टमी) को गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर स्वामी करपात्री जी महाराज और कई हिंदू संगठनों ने संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साधु-संतों पर गोली चलाने का निर्देश दिया था, जिसमें सैकड़ों साधु-संत मारे गए थे। आज फिर इंदिरा गांधी की पोती प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना की याद ताजा कर दी है। उन्होंने संसद में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज और परीक्षा सुधार को लेकर गठित समितियों पर बोलते हुए गौ माता और वैज्ञानिक का अपमान किया।


प्रियंका गांधी ने लोकसभा में गौ माता का किया अपमान
दरअसल नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड रिफॉर्म टास्क फोर्स का गठन किया है। लोकसभा में इस कार्यबल पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इस नई समिति में तो पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक, और एक गौ-मूत्र के विशेषज्ञ भी है। इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा के चेहरे पर कुटिल मुस्कान और लोकसभा में बैठे कांग्रेस सांसदों द्वारा मेज थप-थपाकर हंसना साबित करता हैं कि इन्हें सनातन संस्कृति और गौ-माता का अपमान करने में मजा आता है।

प्रियंका गांधी ने वैज्ञानिक वी.कामकोटि का उड़ाया मजाक
प्रियंका गांधी वाड्रा ने जिस गौ मूत्र विशेषज्ञ पर तंज कसा, उनका नाम प्रो.वी.कामकोटि हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में देश के चुनिंदा शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो.वी.कामकोटि का नाम भी शामिल है। प्रो. कामकोटि सिर्फ एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक भी हैं।

विकसित किया भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’
प्रो. कामकोटि को सबसे ज्यादा पहचान भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर परियोजना से मिली। उन्होंने उस रिसर्च टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। आज SHAKTI को देश की महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है। प्रो.वी.कामकोटि का कंप्यूटर साइंस, साइबर सुरक्षा और टेक्‍नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

प्रो. वी कामकोटी कौन ?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कंप्यूटर वैज्ञानिक कामकोटि ने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में M.S. और PhD की डिग्री हासिल की और 2001 में संस्थान की फैकल्टी में शामिल हुए। वे जनवरी 2022 में IIT मद्रास के डायरेक्टर बने। उनकी विशेषज्ञता कंप्यूटर आर्किटेक्चर, इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी और VLSI डिजाइन के क्षेत्रों में है। वे IIT मद्रास में माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम और इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम के प्रमुख हैं और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं। उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स की अध्यक्षता भी की है।

150 से ज़्यादा रिसर्च पेपर, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित
प्रो. कामकोटि ने 150 से ज़्यादा रिसर्च पेपर लिखे हैं, कई डॉक्टरेट स्कॉलर्स का मार्गदर्शन किया है और लगभग 50 इंडस्ट्री और सरकार द्वारा फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया है। वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की टेक्नोलॉजी कमेटियों में भी शामिल हैं और उन्हें DRDO एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड, अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप, IBM फैकल्टी अवार्ड और VASVIK इंडस्ट्रियल रिसर्च अवार्ड जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं। वी. कामाकोटी को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 के पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

कामकोटि ने की थी गोमूत्र के ‘औषधीय गुणों’ की तारीफ
आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया गया, जिसमें वो गोमूत्र के ‘औषधीय गुणों’ की तारीफ करते दिख रहे हैं। जनवरी 2025 में चेन्नई की एक गौशाला में पारंपरिक ज्ञान और प्रकाशित शोध पत्रों का हवाला देते हुए उन्होंने गोमूत्र के जीवाणुरोधी, कवकरोधी और पाचन संबंधी गुणों का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि गौ मूत्र का इस्तेमाल इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी बीमारियों के लिए किया जाता है। इस बयान को लेकर वैज्ञानिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा और विवाद हुआ था।

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