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सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का बढ़ा अहंकार, सु्प्रीम कोर्ट को दिखाई आंखें, कहा- फैसला मंजूर नहीं

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यह बात बिल्कुल सही है कि कम समय में मिलने वाली सफलता को लोग अक्सर संभाल नहीं पाते हैं, क्योंकि इसके मुख्य कारण अचानक बदलाव, अनुभव की कमी और अहंकार हैं। देश की शांति, सुरक्षा और छात्रों के व्यापक हित को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मांगों को मान लिया। इससे सीजेपी को प्रवक्ताओं का अहंकार अब सर चढ़कर बोल रहा है। उन्हें लग रहा है कि वो सरकार, सुप्रीम कोर्ट और देश से भी ऊपर हो गए हैं। अब वो सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को चुनौती देने लगे हैं। 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं- सौरव दास
सीजेपी (CJP) प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें हिंसक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर (FIR) में जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को राहत न देने की बात है। सौरव दास को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला रास नहीं आया। उनका हौसल इतना बढ़ चुका है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों या आपराधिक रिकॉर्ड का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों की अनदेखी या रिहाई से इनकार करने का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरे देश के लिए खतरे की घंटी- सौरव
सौरव दास ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर लिखा, “सीजेपी (CJP) विरोध प्रदर्शन से संबंधित जनहित याचिकाओं (PILs) पर एकसाथ सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित किया है, जो पूरे देश के लिए ख़तरे की घंटी बजाने वाला है। विशेष रूप से, निर्देश संख्या 4, जो सरकारों को मौजूदा प्राथमिकियों (FIRs) पर कार्रवाई जारी रखने और जांच करने की अनुमति देता है, अत्यंत गंभीर चिंताएं उत्पन्न करता है। यह निर्देश 25 जुलाई 2026 को भारत सरकार द्वारा इस देश के युवाओं को दिए गए उस औपचारिक आश्वासन और गारंटी के सीधे विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि प्राथमिकियों (FIRs) को वापस लिया जाएगा और शांतिपूर्ण आंदोलन में भाग लेने के लिए किसी भी प्रदर्शनकारी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं बनाया जाएगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने जांच को दिखाई हरी झंडी
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बिना किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सभी नाबालिगों और युवाओं को रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि मामलों की गंभीरता को देखते हुए सबकी निष्पक्ष जांच भी जारी रहे। ये निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए, जिनमें छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया गया था। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य स्थानों हुए हिंसक प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और केरल तक फैले छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से CJP में खलबली
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास हिंसक प्रदर्शन में शामिल 2873 आरोपियों और अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिनमें हत्या के 101, हत्या के प्रयास के 62, चोरी करने वाले 284, रेप के 61, आर्म्स एक्ट के 229 और अन्य आरोपी शामिल है। इनके ही बदौलत सीजेपी आज सफलता का जश्न मना रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपनी सफलता पर जश्न मना रहे सीजेपी के खेमे में खलबली मच गई है। उन्हें डर सता रहा है कि हिंसक और आपराधिक प्रवृति के प्रदर्शनकारियों के साथ उन पर भी शिकंजा कस सकता है। प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए भड़काने के मामले में जवाब देना पड़ा सकता है। पुलिस जिस तरह से जांच कर रही है, उससे लगता है कि प्रदर्शन के पीछे की साजिश बेनकाब हो सकती है। इसलिए सीजेपी के नेता सभी एफआईआर एकमुश्त वापस लेने व सभी कि रिहाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें आपराधिक प्रवृत्ति के प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं। 

पहले एंटी सोशल बताया, अब बचाव में देशव्यापी प्रदर्शन की धमकी
दिल्ली पुलिस फेस रिकग्निशन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के माध्यम से जिस तरह कार्रवाई कर रही है, उससे लगता है कि उपद्रवियों का बचना मुश्किल है। पुलिस की जांच अपनी तरफ आते देख सीजेपी के नेता अब केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सरकार और प्रशासन को धमकी दी है कि अगर प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे (FIR) वापस नहीं लिए गए, गिरफ्तारियां बंद नहीं हुईं, उनकी मांगें न मानी गईं तो देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। जबकि यही सौरव दास ने हिंसा के बाद कहा था, ” ऐसे एंटी सोशल एलिमेंट्स ने मीडिया के खिलाफ, लोगों के खिलाफ, जिन्होंने भड़काया, जिन्होंने हिंसा की, ऐसे लोग सीजेपी के समर्थक नहीं है। एंटी सोशल एलिमेंटस घुसाए गए हैं।” जब ऐसे एंटी सोशल एलिमेंट्स के खिलाफ कार्रवाई हो रही तो सीजेपी नेताओं को इतनी परेशानी क्यों हो रही है? 

सौरव दास ने आपत्तिजनक टिप्पणी और भद्दी गालियों को बताया मजाक
सीजेपी प्रदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भद्दी टिप्पणियां की गई थीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक पोस्ट किए गए थे। दिल्ली पुलिस और देश के अन्य शहरों की पुलिस भी इसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सौरव दास इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उन्हें देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री को गाली देना और आपत्तिजनक टिप्पणियां करना मजाक लगता है। उन्होंने कहा कि क्या ऑफेंसिव है? क्या कोई मजाक ऑफेंसिव है, कोई बयान ऑफेंसिव है। आपके लिए जो ऑफेंसिव है, शायद हमारे लिए ऑफेंसिव नहीं है। इसी तरह जो हमारे लिए ऑफेंसिव है, हो सकता है आपके लिए ना हो। इसलिए अगर पुलिस को इतनी छूट दे दी गई तो इसे सेंसरशिप टूल की तरह ही यूज करेगी। फिलहाल ऐसा ही हो रहा है। अगर किसी ने हल्का सा मजाक कर दिया प्रधानमंत्री के ऊपर, तो क्या प्रधानमंत्री भगवान हैं? लोग मजाक तो करेंगे ही। ये तो लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन ऐसा कॉन्टेंट हटाया जा रहा है।

सीजेपी की धमकी के बावजूद पूरे देश में पुलिस की कार्रवाई तेज
सीजेपी के दोबारा आंदोलन शुरू करने की धमकी के बावजूद दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाली कथित अभद्र भाषा वाले पोस्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और कुछ समाचार पोर्टलों को नोटिस जारी किए हैं। उनसे आपत्तिजनक टिप्पणियों और पोस्ट को लेकर जानकारी मांगी गई है। बताया जा रहा है कि जिन लोगों की जांच की जा रही है, उनमें एक महिला भी शामिल है जिसकी टिप्पणी में कथित तौर पर प्रधानमंत्री के प्रति बार-बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था। जांचकर्ताओं का संदेश है—’गंदी भाषा (गंभीर रूप से अभद्र भाषण) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Free Speech) नहीं है।’ यह कार्रवाई दर्शाती है कि जेन-ज़ी (Gen-Z) द्वारा ऑनलाइन की जाने वाली अभद्र टिप्पणी और नफरत भरे बयानों को सिर्फ इसलिए माफ नहीं किया जाएगा क्योंकि सीजेपी का कहना है कि ‘बूमर अंकल और आंटियां’ ‘जेन-ज़ी की बेबाक/अनादरपूर्ण भावना’ से जुड़ाव महसूस नहीं कर सकते।”

दिल्ली पुलिस को धमकाते नजर आए CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास
राज्यसभा में बुधवार 29 जुलाई को उस वक्त हंगामा मच गया, जब विपक्ष ने CPIM की नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश का मुद्दा सदन में उठाया गया। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास ने सबसे पहले इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया, जिसके बाद कांग्रेस समेत बाकी विपक्षी दलों के सांसदों ने भी इस पर उनका समर्थन किया। जॉन ब्रिटास ने X पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा, “आज राज्यसभा में दिल्ली पुलिस की तरफ से AKG भवन (CPI-M हेडक्वार्टर) में घुसकर पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष और SFI नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कथित कोशिश का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया।” वहीं सोशल मीडिया में एक वीडियो वारयरल हो रहा है, जिसमें जॉन ब्रिटास दिल्ली पुलिस को धमकाते नजर आ रहे हैं कि किससे पूछकर पुलिस नेशनल पार्टी CPI-M के हेडक्वार्टर में प्रवेश की। पुलिस को ऐसा करने की कैसे हिम्मत हो गई।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
वहीं, नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि 2021 के एक मामले में स्थानीय अदालत ने आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। उनके मुताबिक, कई बार अदालत में पेश नहीं होने के कारण वारंट जारी हुआ था और पुलिस सिर्फ अदालत के आदेश का पालन कर रही थी। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होनी है। पुलिस ने बताया कि आइशी घोष के खिलाफ वारंट है। सांसद जॉन ब्रिटास का कहना है कि वारंट की जानकारी फोन पर नहीं, बल्कि आधिकारिक रूप से दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हालिया जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल छात्रों को डराने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

आपत्तिजनक टिप्पणियों और भद्दी गालियों को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ सीजेपी समर्थक सभी पार्टियां आवाज उठा रही हैं। लेकिन उनकी सरकारों में किस तरह से लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की गई, उसके बारे में जानकर हैरानी होती है…. 

  • आदित्य ठाकरे को “पेंगुइन” कहने पर नागपुर के समित ठक्कर को 21 दिन तक जेल में रखा गया।
  • उद्धव ठाकरे की आलोचना करने पर सुनयना होली को भी कई रातें जेल में बितानी पड़ीं।
  • सोनिया गांधी का शादी से पहले का नाम लेने और आलोचना करने पर अर्नब गोस्वामी को भी जेल जाना पड़ा।
  • शरद पवार की आलोचना वाली एक कविता सिर्फ सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए केतकी चितले को 40 दिन से ज्यादा जेल में रहना पड़ा। जबकि उस कविता में शरद पवार का नाम तक नहीं था।
  • केजरीवाल ने अपनी आलोचना करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए पंजाब पुलिस को इंदौर तक भेज दिया था।
  • अपना कार्टून बनाने पर ममता बनर्जी ने एक कार्टूनिस्ट को 15 दिन तक जेल में रखा।
  • लेकिन कॉकरोच चाहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के लिए गंदी भाषा और अपशब्द बोले जाएं, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो।

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