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मोदी सरकार के 12 साल: डिजिटल बाजार से ग्लोबल टेक पावर बनने तक, तकनीकी उड़ान की 12 बड़ी उपलब्धियां

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भारत में पिछले 12 वर्षों के दौरान तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं रही, बल्कि देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई डिजिटल परिवर्तन की यात्रा ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल उपभोक्ता देशों में से आगे बढ़ाकर एक उभरती हुई वैश्विक टेक्नोलॉजी शक्ति के रूप में स्थापित किया है। पिछले एक दशक में किए गए बड़े नीतिगत फैसले और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सुपरकंप्यूटिंग और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में हुए निवेश ने भारत की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

आइए, एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के इन 12 सालों की उन 12 बड़ी तकनीकी उपलब्धियों पर, जिन्होंने देश की तस्वीर बदल दी।

1. डिजिटल इंडिया बना तकनीकी क्रांति की नींव
2015 में शुरू हुआ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम देश के डिजिटल बदलाव की सबसे बड़ी आधारशिला साबित हुआ। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार 19.35 लाख रूट किलोमीटर से बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर तक पहुंच गया। इसके साथ ही इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ी, जिसने देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार किया। आज गांवों में भी इंटरनेट की विश्वसनीयता और स्पीड शहरों जैसी हो गई है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्ट दिया है।

2. इंटरनेट कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक विस्तार
दमदार नेटवर्क कनेक्टिविटी के चलते देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भारी उछाल आया है। 2014 में जहां देश में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 25.15 करोड़ थी, वहीं 2026 तक यह बढ़कर 102.86 करोड़ हो गई। ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी 6.1 करोड़ से बढ़कर लगभग 100 करोड़ तक पहुंच गए। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान हुई।

3. दुनिया के सबसे तेज 5G रोलआउट में शामिल भारत
भारत ने रिकॉर्ड समय में 5जी नेटवर्क का विस्तार किया और इसकी सेवाएं देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच गईं। बेहतर नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट ने एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, फिनटेक और डेटा आधारित उद्योगों को नई गति दी है। ये हमारे उन्नत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत को दिखाता है।

4. सस्ता डेटा, बढ़ता डिजिटल सशक्तिकरण
आज भारत में हर नागरिक के हाथ में इंटरनेट है, और इसका सबसे बड़ा कारण है दुनिया का सबसे सस्ता डेटा टैरिफ। एक दशक पहले जहां 1 जीबी डेटा की कीमत लगभग 269 रुपये थी, वहीं आज यह घटकर 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है। मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी तक पहुंच गई है। सस्ते इंटरनेट ने ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स को आम लोगों तक पहुंचाया है। इसी का नतीजा है कि आज देश में नए-नए स्टार्टअप्स और डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप के लिए एक बहुत बड़ा यूजर बेस तैयार हो गया है।

5. सुपरकंप्यूटिंग में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए गए हैं जिनकी संयुक्त क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है। स्वदेशी ‘परम रुद्र’ सीरीज का विकास भारत की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ये सुपरकंप्यूटर मौसम के पूर्वानुमान, क्लाइमेट मॉडलिंग और दवाइयों की खोज जैसे जटिल कामों को चुटकियों में हल कर रहे हैं।

6. सेमीकंडक्टर मिशन से चिप निर्माण में नई उम्मीद
आधुनिक युग की डिजिटल और उभरती हुई तकनीकों की असली जान सेमीकंडक्टर चिप्स में ही बसती है। 76,000 करोड़ रुपये के सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए भारत ने चिप निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं। जून 2026 तक लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और नौ अत्याधुनिक पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं, जो आयात पर हमारी निर्भरता को कम करेंगी। इससे भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान मिलने की उम्मीद है।

7. क्वांटम टेक्नोलॉजी में भविष्य की तैयारी
भविष्य की सुरक्षा और सुपर-फास्ट प्रोसेसिंग के लिए मोदी सरकार के 6,003 करोड़ रुपये से अधिक के नेशनल क्वांटम मिशन ने भारत को अगली पीढ़ी की तकनीकों की दौड़ में आगे बढ़ाया है। देश ने 1,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क का सफल प्रदर्शन किया है और अमरावती में भारत की पहली क्वांटम वैली की नींव रखी गई है। यह वैली आने वाले समय में देश के क्वांटम अनुसंधान, नए स्टार्टअप्स और रणनीतिक क्षमताओं के लिए एक समर्पित गढ़ बनने जा रही है।

8. इंडिया एआई मिशन से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक उभार के बीच 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के इंडिया एआई मिशन ने देश में एआई आधारित नवाचार को नई गति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-एंड जीपीयू की क्षमता को बढ़ाना है। एआई विकास को आसान बनाने के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू की कॉमन कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है, जबकि एआई कोश प्लेटफॉर्म पर हजारों डेटासेट और सैकड़ों एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं। इससे स्टार्टअप और शोध संस्थानों को बड़ा सहयोग मिल रहा है।

9. क्लाउड और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग
डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने साल 2014 में ‘मेघराज’ नेशनल क्लाउड प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इसके बाद आए ‘मेघराज 2.0’ ने हाइब्रिड क्लाउड और मजबूत साइबर सुरक्षा के जरिए सरकारी डेटा को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया है। मेघराज और मेघराज 2.0 जैसे सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म ने डिजिटल गवर्नेंस को नई ताकत दी है। 2015-16 में जहां 342 सरकारी विभाग क्लाउड सेवाओं का उपयोग कर रहे थे, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 2,323 हो गई। डिजिलॉकर, माईगव और नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म इसी डिजिटल ढांचे पर चल रहे हैं।

10. ब्लॉकचेन से पारदर्शी और सुरक्षित गवर्नेंस
क्लाउड, एआई और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को सहेजने के लिए देश में डेटा सेंटर्स का भी तेजी से विस्तार हुआ है। नेशनल ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क के जरिए भारत ने डिजिटल भरोसे की दिशा में अहम कदम उठाया है। अक्टूबर 2025 तक 34 करोड़ से अधिक संपत्ति दस्तावेजों का ब्लॉकचेन आधारित सत्यापन किया जा चुका है। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित हुए हैं और भूमि विवादों में कमी आने लगी है।

11. स्किलिंग और रिसर्च से तैयार हो रही नई टेक पीढ़ी
फ्यूचरस्किल्स प्राइम, NIELIT, एएनआरएफ और चिप्स-टू-स्टार्टअप जैसी योजनाओं ने लाखों युवाओं को एआई, साइबर सिक्योरिटी, ब्लॉकचेन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया है। फ्यूचरस्किल्स प्राइम पर 27.53 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हैं, जबकि बड़ी संख्या में युवा उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

12. वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की तकनीकी साख
भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 2015 के 81वें स्थान से 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया। देश में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर काम कर रहे हैं। वहीं इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, सेमीकॉन इंडिया और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल ने भारत को तकनीक के क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित किया है।

पिछले 12 वर्षों का यह सफर साफ दिखाता है कि भारत अब केवल दूसरों की बनाई तकनीक पर निर्भर रहने वाला देश नहीं है। आज हम अपनी तकनीक खुद बना रहे हैं, अपने चिप खुद डिजाइन कर रहे हैं और दुनिया को सिखा रहे हैं कि कैसे तकनीक के जरिए आम लोगों का जीवन बदला जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए ये कदम आज के युवा इनोवेटर्स, इंजीनियरों और उद्यमियों की एक ऐसी नई फौज तैयार कर रहे हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक ज्ञान और नवाचार के केंद्र के रूप में भारत का झंडा हमेशा बुलंद रखेगी। ‘विकसित भारत 2047’ की नींव अब पूरी तरह से मजबूत हो चुकी है।

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