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परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम, लोकसभा में ‘एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल’ पास, जानें नए कानून की बड़ी बातें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि देश के छात्रों और युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकल्प को पूरा करने के लिए एक के बाद एक बड़े और ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं। इसी कड़ी में उनकी सरकार ने गुरु पूर्णिमा के दिन 29 जुलाई, 2026 को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को लोकसभा से पास करा लिया। बिल पर 9 घंटे तक चर्चा के दौरान विपक्ष के सांसदों ने अवरोध खड़ा करने के लिए हंगामा किया और बाद में सदन से बाहर चले गए। लेकिन सरकार के मंत्री और बीजेपी सांसद इस बिल के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी।

ऐतिहासिक कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करेगा- शिक्षा मंत्री
लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पास होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी का पहला बयान सामने आया। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि “यह ऐतिहासिक कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा, लोकसभा ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।” शिक्षा मंत्री ने आगे कहा,  “इस विधेयक के तहत कड़ी सजा, फास्ट-ट्रैक अदालतें, सशक्त जांच तंत्र और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जिससे पेपर लीक के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। यह ऐतिहासिक कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करने और देश के करोड़ों युवाओं के सपनों एवं मेहनत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।”

हमारे युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा होगी – अमित शाह 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पोस्ट किया, “आज लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ के पास होने पर भारत के सभी छात्रों को बधाई। यह बिल सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करने की हिम्मत करने वालों के लिए सबसे कड़ी सज़ा के कड़े प्रावधान करके हमारे युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा करता है। मोदी सरकार हमारे छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि उन्हें कानून की पूरी सख़्ती का सामना करना पड़े।”

जानिए इस बिल की बड़ी बातें 
‘एंटी-पेपर लीक अमेंडमेंट बिल’ लोकसभा से पास होने के बाद अब राज्यसभा से पास होगा। फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये विधेयक कानून बन जाएगा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि समय-बद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए नए कानून के तहत तेजी से कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल उठ रहे हैं कि यह बिल क्या है? इसमें क्या क्या प्रावधान है ? इसके क्या उद्देश्य है? पेपर लीक होने पर आरोपियों और दोषियों को कितनी सख्त सजा मिलेगी ? कौन इसको लागू करेगा ? तो चलिए इस बिल की बड़ी बातों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

उद्देश- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना
लोकसभा से पारित इस विधेयक का मकसद ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करना है। संशोधन का उद्देश्य सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसका उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि पेपर लीक के संगठित नेटवर्क को तोड़ना और मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करना है।

सख्त सजा – 5 से 10 साल तक जेल, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों के अनुसार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम 7 साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। 

सेवा प्रदाताओं पर सख्ती: 5 करोड़ तक जुर्माना, 8 साल तक बैन
परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी, आईटी कंपनी, प्रिंटिंग एजेंसी या अन्य सेवा प्रदाता यदि पेपर लीक या धोखाधड़ी में शामिल पाए जाते हैं तो उन पर 1 करोड़ की जगह 5 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। पेपर लीक या अनुचित साधनों में शामिल सेवा प्रदाताओं को अब 4 साल की बजाय 8 साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ा काम नहीं दिया जाएगा।

समय सीमा- जांच दो महीने के भीतर, स्थापित होंगी त्वरित अदालतें 
प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी। रोजाना सुनवाई होगी।

पेपर लीक रोकने के लिए विशेष टास्क पोर्स के गठन का प्रावधान
जरूतर पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स बनाकर जांच करा सकेगी। मोदी सरकार पेपर लीक रोकने के उपायों के लिए टास्क फोर्स का गठन कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधारों की सिफारिश करने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुआई में टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें छह विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। 

परीक्षा और प्रश्न पत्रोंं की सुरक्षा के लिए तकनीक पर जोर
इस कानून में आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पर सख्त निगरानी का प्रावधान किया गया है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, एनक्रिप्शन और ऑनलाइन निगरानी, वायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, स्क्रीनिंग, सीट आवंटन, इनविजिलेशन और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय किए जाएंगे।

परीक्षा से जुड़े अपराधों का विस्तृत और स्पष्ट वर्गीकरण
बिल में 15 तरह के अपराध स्पष्ट किए गए हैं। 1.प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, 2. सामग्री तक अनधिकृत पहुंच, 3. ओएमआर और उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, 4. अनधिकृत समाधान देना, 5. अभ्यर्थी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहायता, 6. कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़, 7. दस्तावेजों में हेराफेरी, 8. फर्जी वेबसाइट बनाना, 9. फर्जी परीक्षाएं आयोजित करना, 10. फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना, 11. गोपनीय जानकारी का समयपूर्व खुलासा,12. परीक्षा केंद्रों पर बाधा या व्यवधान,13. परीक्षा अधिकारियों को धमकाना, 14. सुरक्षा मानकों का जानबूझकर उल्लंघन, 15. षड्यंत्र रचना.

किन परीक्षाओं पर लागू होगा?
यह कानून केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है, जिनमें प्रमुख रुप से यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस, एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाएं (जैसे NEET, JEE, CUET आदि) और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल हैं।

छात्रों और युवाओं के लिए कितना महत्वपूर्ण है कानून

  1. ईमानदार छात्रों को समान अवसर मिलेगा।
  2. समय पर परीक्षा की प्रक्रिया संपन्न होगी।
  3. दोबारा परीक्षा देने से मुक्ति मिलेगी।
  4. पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने की घटनाएं कम हो सकती हैं।
  5. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
  6. परीक्षा माफिया पर कानूनी दबाव बढ़ेगा।
  7. समयबद्ध जांच और सुनवाई से दोषियों को जल्दी सजा मिल सकती है।

छात्रों और युवाओं ने कड़ी सजा के प्रावधानों का किया स्वाग
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के लोकसभा में पारित होने पर छात्रों और युवाओं ने कड़ी सजा के प्रावधानों का स्वागत किया है। उन्होने इसे पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

छात्रों को बरगलाने वाला विपक्ष का मुद्दा हो गया खत्म  
विपक्ष जिस पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में था, अब वो मुद्दा ही खत्म हो गया है। छात्रों की मांगों को सरकार ने मान लिया है। अब विपक्ष के पास इस मुद्दे पर बोलने के लिए कोई विषय नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से पहले ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर गोल पोस्ट शिफ्ट करने का आरोप लग चुका है। इसलिए अब विपक्ष अब इस मुद्दे पर कोई नई मांग नहीं रख सकता है।

 

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