देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर, जो लंबे समय से जन-आंदोलनों और असहमति की आवाज़ उठाने का केंद्र रहा है, हाल ही में एक भीषण हिंसात्मक टकराव का गवाह बना। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पेपर लीक को लेकर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया था। हालांकि, ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान उग्र हुई भीड़ और उसके बाद सामने आए तथ्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों पर जानलेवा हमले हुए, जिनमें 180 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस दौरान भारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े गए, पत्थरबाजी हुई और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया। इस पूरी घटना ने उस समय एक नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया, जब ड्यूटी पर घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती साझा की।
घायलों के परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रों के अधिकारों की आड़ में आए उपद्रवियों द्वारा ऑन-ड्यूटी सुरक्षा बलों पर बर्बर हमले किए गए और बाद में सोशल मीडिया पर पुलिस को ही खलनायक बनाकर पेश करने की कोशिश की गई। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि वर्दी पहनने का मतलब मानवाधिकारों का त्याग करना नहीं होता। इस मामले में अब पुलिस कर्मियों के परिवारों ने भी देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जिससे इस मुद्दे ने सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से एक बड़ा आकार ले लिया है।

घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की आपबीती: “जब खून से लथपथ घर पहुंचे हमारे अपने”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों ने अपनी आपबीती साझा की। सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों, अधिकारियों की पत्नियों और युवा छात्रों ने मीडिया के सामने घटना वाले दिन के जो संस्मरण रखे, वे दिल दहला देने वाले थे।
मरीन कमांडो रहे सब-इंस्पेक्टर की बेटी: “पिता की लिंचिंग की कोशिश की गई”
नेवी में 15 वर्षों तक मरीन कमांडो के रूप में देश सेवा करने के बाद दिल्ली पुलिस में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता मुख्य बैरिकेड्स पर तैनात थे। उन्होंने कहा: “मेरे पिता अक्सर कहते थे कि यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। 25 तारीख को दोपहर लगभग 2 बजे जंतर-मंतर मंच के पास उग्र भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और उनकी लिंचिंग की कोशिश की। वह RML अस्पताल में चार घंटे तक बेहोश रहे और जब देर रात उनके साथी उन्हें घर लाए, तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी… जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो देखा कि मेरे ही पिता को क्रिमिनल कहा जा रहा था। जिन लोगों ने उन पर हमला किया, वही सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसलिए हमने भी न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।”
सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने यह भी दोहराया कि उनके पिता अक्सर घर आकर यह चिंता जताते थे कि आंदोलन को उग्र तत्वों द्वारा हायजैक कर लिया गया है। 25 तारीख को हुए लिंचिंग के प्रयास और 4 घंटे तक बेहोश रहने के बाद जब उन्हें घर लाया गया, तो परिवार पूरी तरह सदमे में था।
#WATCH | Delhi | Daughter of a Delhi Police SI (Sub-Inspector) who sustained injuries during the clash between Police and protesters in Delhi, says, “…Before joining the police, my father served as a Marine Commando in the Indian Navy. He dedicated 15 years of his life to the… pic.twitter.com/aevnbcdNyQ
— ANI (@ANI) July 31, 2026
Delhi: Family members of Delhi Police personnel injured during the Jantar Mantar protest addressed a press conference.
The daughter of a Delhi Police officer injured during the Jantar Mantar protest says, “My father is an SI in Delhi Police… He was deployed at the main protest… pic.twitter.com/DzUqI9RRit
— IANS (@ians_india) July 31, 2026
घायल एसीपी (ACP) की पत्नी: “दो साल की बच्ची और मेरे लिए वह पल दर्दनाक था”
20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए एक घायल एसीपी की पत्नी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा: 20 जुलाई की देर रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर लौटे, तो वह क्षण मेरे और हमारी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। हम यहां अपने परिवार का दर्द साझा करने आए हैं क्योंकि पुलिसकर्मियों के परिवारों का भी इस देश में न्याय पाने का बराबर अधिकार है।”
#WATCH | Delhi | Wife of a Delhi Police ACP, who sustained injuries during the clash between Police and CJP protesters in Delhi on 20th July says, “The moment he returned home late on the night of July 20, injured as he was, was incredibly painful and traumatic for both me and my… pic.twitter.com/lI40EMWnRI
— ANI (@ANI) July 31, 2026
युवा पीढ़ी की अपील: “हम भी जेन-जी हैं, हमारी बात भी सुनी जाए”
हिंसा में घायल जवानों के बच्चों, जो स्वयं छात्र और जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का हिस्सा हैं, ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने देश के नागरिकों और मीडिया से अपील की कि वे हिंसा का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों का दर्द भी समझें।
Children of police personnel who were injured during Cockroach protest have come forward demanding support for their parents.
They are GenZ too, they are students too,
Listen to them! pic.twitter.com/lOXgKBXCWN
— Facts (@BefittingFacts) July 31, 2026
1971 युद्ध के दिग्गज के पोते व ASI के बेटे का बयान: “अचानक हुआ जानलेवा पथराव”
चार वीरता पुरस्कार प्राप्त कर चुके एक एएसआई (ASI) के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके दादाजी BSF में थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने बताया: “मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे। अचानक उग्र भीड़ ने बिना किसी उकसावे के पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक भारी पत्थर उनके सिर पर लगा। जब मैंने अस्पताल में उनकी तस्वीर देखी, तो उनके सिर पर चार टांके लगे थे।”
Delhi: Family members of Delhi Police personnel injured during the Jantar Mantar protest addressed a press conference.
The son of an injured Delhi Police ASI says, “My name is Lakshya Singh Bisht, and my father is an ASI who has received four gallantry honours during his career.… pic.twitter.com/rRoi1op2NK
— IANS (@ians_india) July 31, 2026
33 साल से सेवारत ASI की पत्नी: “गमले और कांच की बोतलें फेंकी गईं”
33 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत एक अन्य एएसआई की पत्नी ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए तैनात थे। “शाम को मुझे खबर मिली कि वे LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, जूते और कांच की बोतलें फेंकी और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ डाले।”
Delhi: Family members of Delhi Police personnel injured during the Jantar Mantar protest addressed a press conference.
The wife of an injured Delhi Police ASI says, “My husband has been serving in the Delhi Police for 33 years. He joined as a constable and is currently posted as… pic.twitter.com/KBuqlws2ek
— IANS (@ians_india) July 31, 2026
राहुल गांधी से पूछा गया सवाल, तो कहा: “आप बीजेपी से हैं”
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मीडियाकर्मियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से इस संबंध में प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो एक नया विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने सवाल उठाया था कि जिस संसद की रक्षा करते हुए पुलिसकर्मी घायल हुए, उन्हें ‘गुंडे’ कैसे कहा जा सकता है। हालांकि, जब एक पत्रकार ने इस बाबत राहुल गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने सवाल का जवाब देने के बजाय पत्रकार पर ही तंज कसते हुए कह दिया कि “आप बीजेपी से हैं।” आलोचकों और सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया जा रहा है कि जब भी कोई सवाल राजनीतिक रूप से असुविधाजनक होता है, तो पत्रकारों पर किसी खास पार्टी का होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस वाकये के बाद प्रेस की आजादी के बड़े-बड़े दावे करने वाली विपक्षी राजनीति और उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
Today, the families of Delhi Police officers held a press conference.
They asked Rahul Gandhi: “The very Parliament where you sit was protected by our fathers, who were injured in the line of duty. How can you call those same police officers ‘goons’?”
But look at Rahul Gandhi’s… pic.twitter.com/TaKxfCqqaW
— Lala (@FabulasGuy) July 31, 2026
CJP का दावा बनाम पुलिस का पक्ष
जंतर-मंतर पर घटित इस घटनाक्रम ने आयोजकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों और पुलिस प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए जमीनी तथ्यों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर दिया है।
CJP और आयोजकों का दावा: आयोजकों का तर्क है कि उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में सुधारों और छात्र हितों को लेकर पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे छात्र घायल हुए।
दिल्ली पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष: पुलिस जांच और डिजिटल सर्विलांस के आंकड़ों के अनुसार, भीड़ की आड़ में कई उग्र तत्व शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जब भीड़ ने संसद भवन की ओर जबरन बढ़ने और सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुपातिक बल प्रयोग अनिवार्य हो गया था।
सुरक्षा बलों के मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट की कानूनी कार्यवाही
जंतर-मंतर हिंसा का मामला अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले ने सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों पर एक राष्ट्रीय कानूनी बहस शुरू कर दी है:
अनुच्छेद 21 और ऑन-ड्यूटी जवानों के अधिकार: याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और शारीरिक सुरक्षा का अधिकार) जितना आम नागरिकों पर लागू होता है, उतना ही ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों पर भी लागू होता है। भीड़ द्वारा जानलेवा हमला करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, ड्रोन फुटेज और बॉडी-वर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है।
आयोजकों की जवाबदेही: कोर्ट इस पहलू पर भी विचार कर रहा है कि यदि अनुमति प्राप्त प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, तो आयोजकों की नागरिक व आपराधिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में आंदोलनों की आड़ में कानून-व्यवस्था को नुकसान न पहुंचाया जा सके।










