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पीएम मोदी के विजन से कॉकपिट से खेल के मैदान तक मिसाल बन रही महिलाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की नारी शक्ति राष्ट्र का चौथा आधार स्तंभ मानते हैं। यह केवल एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि एक व्यापक विजन का प्रतीक है, जिसमें महिलाओं को अवसर, सम्मान और नेतृत्व का समान अधिकार प्राप्त हो रहा है। यही कारण है कि आज भारतीय महिलाएं एक ओर एविएशन सेक्टर में दुनिया के सामने नई मिसाल कायम कर रही हैं, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में तिरंगे का गौरव बढ़ा रही हैं। कॉकपिट से लेकर खेल के मैदान तक, इंजीनियरिंग से लेकर वैश्विक उपलब्धियों तक भारतीय नारी आज उस आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी है, जो विकसित भारत की सबसे सशक्त पहचान बनने की ओर अग्रसर है। आज भारत ऐसे ही परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, जहां नारी शक्ति केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त धुरी बनकर उभरी है।

हिस्सेदारी में अमेरिका से आगे निकली महिला कमर्शियल पायलट
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां महिला कमर्शियल पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है। इस साल 30 जून तक जारी हर चार नए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) में लगभग एक महिला को लाइसेंस मिला है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में यह जानकारी दी है। इसके अनुसार, 30 जून तक देश में कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 26.14% रही। 1331 लाइसेंस जारी हुए, जिनमें 348 महिलाओं को मिले। 2021 में 862 लाइसेंस जारी हुए, जिनमें 166 महिलाओं को मिला था। बता दें कि अमेरिका में महिला पायलटों की हिस्सेदारी केवल 5 से 8 प्रतिशत के बीच ही है।

 

देश में हर चार में से एक नई कमर्शियल पायलट महिला
एविएशन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी पायलट तक सीमित नहीं है। एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर और ग्राउंड स्टाफ की भूमिका में भी भागीदारी बढ़ी है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की परीक्षाओं में महिलाओं को फीस में छूट दी जाती है। एएआई ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और नेशनल स्किल डेवलपमेंट फंड के साथ मिलकर चंडीगढ़ और मुंबई में मल्टी-स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी स्थापित किए हैं। देश में एविएशन सेक्टर का तेजी से विकास हो रहा है। पायलट बनने के लिए युवाओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। सरकार ने संसद में बताया कि भारत में साल 2026 के पहले छह महीनों में जो कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए हैं, उनमें हर 10 में से चार नए लाइसेंस वाले पायलटों ने विदेश में ट्रेनिंग ली थी।

घरेलू एयरलाइंस कर रही अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार
एविएशन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी साझा की है। यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि घरेलू एयरलाइंस लगातार अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। मुरलीधर मोहोल ने कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने 30 जून तक भारतीय फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन में ट्रेनिंग लेने वाले 791 कैडेट्स और विदेशी FTOs में ट्रेनिंग लेने वाले 540 कैडेट्स को लाइसेंस जारी किए। इसका मतलब है कि नए लाइसेंस वाले कमर्शियल पायलटों में से लगभग 41 प्रतिशत ने विदेश में ट्रेनिंग ली है। ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, जिससे पायलटों की मांग बढ़ रही है। मोहोल ने कहा कि भारत में अभी DGCA से मंजूर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन हैं, जो 63 बेस पर 400 से ज्यादा ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट के बेड़े के साथ काम कर रहे हैं।

आइए, अब ग्लास्गो में चल रहे कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेता भारतीय महिला प्लेयर्स पर एक नजर डालते हैं….

मीराबाई चानू: लगातार तीसरे स्वर्ण से रचा इतिहास
मणिपुर की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 48 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि प्रतियोगिता का नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले भी वह 2018 और 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीत चुकी हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने वाली मीराबाई आज दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की पहचान बन चुकी हैं। उनका यह स्वर्ण भारतीय भारोत्तोलन की निरंतर सफलता का प्रतीक भी है।

ज्ञानेश्वरी यादव: संघर्ष से रजत तक का सफर
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर अपने राज्य और देश का नाम रोशन किया। एक साधारण परिवार से आने वाली ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। यह रजत पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।
हरजिंदर कौर: पंजाब की शक्ति, भारत का गौरव
पंजाब की हरजिंदर कौर ने महिलाओं की 69 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारतीय दल को एक और बड़ी सफलता दिलाई। हरजिंदर पिछले कई वर्षों से भारतीय भारोत्तोलन की मजबूत स्तंभ रही हैं और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन करती रही हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता दबाव की परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखना है। यह रजत पदक इस बात का प्रमाण है कि भारतीय महिला भारोत्तोलन अब केवल कुछ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं, बल्कि विभिन्न भार वर्गों में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
बिंद्यारानी देवी: खेल बदला, लेकिन जुनून नहीं
मणिपुर की बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं की 58 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अपनी निरंतरता का परिचय दिया। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने खेल जीवन की शुरुआत ताइक्वांडो से की थी, लेकिन बाद में भारोत्तोलन को अपना करियर बनाया। उनके इस निर्णय ने भारतीय खेलों को एक अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता दिया। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका लगातार दूसरा पदक है। पहले रजत और अब कांस्य जीतकर उन्होंने साबित किया है कि निरंतर प्रदर्शन ही किसी खिलाड़ी की सबसे बड़ी पहचान होता है।
शर्मिला धनखड़: साहस, संघर्ष और स्वर्ण की कहानी
हरियाणा की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉटपुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया। बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। कठिन संघर्ष, निरंतर अभ्यास और अदम्य आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने विश्व मंच पर भारत का तिरंगा लहराया। उनका यह स्वर्ण पदक केवल खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि इच्छाशक्ति किसी भी शारीरिक चुनौती से कहीं अधिक शक्तिशाली होती है। उनकी सफलता लाखों दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
शिल्पा के. शायला: धैर्य व संयम ने दिलाया कांस्य
कर्नाटक की पैरा एथलीट शिल्पा के. शायला ने महिलाओं की शॉटपुट F57 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और उपलब्धि डाली। प्रारंभिक परिणामों में वह पदक से बाहर थीं, लेकिन बाद में प्रतियोगिता के आधिकारिक निर्णय के बाद उन्हें कांस्य पदक मिला। उन्होंने पूरे प्रतियोगिता के दौरान धैर्य और संयम बनाए रखा। इस स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर पैरा एथलेटिक्स में अपनी बढ़ती ताकत का शानदार प्रदर्शन किया।

 

 

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