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मोदी सरकार के 12 साल: 24 बड़े कदम, जिन्होंने कर दिया भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य का कायाकल्प

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती, तकनीक-सक्षम और व्यापक बनाने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर काम किया। सरकार ने स्वास्थ्य को केवल बीमारी के इलाज तक सीमित न रखकर होलिस्टिक वेलनेस, प्रिवेंटिव केयर और डिजिटल हेल्थ को जोड़कर एक मजबूत हेल्थ इकोसिस्टम तैयार किया है। परिणामस्वरूप स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक बढ़ी है और करोड़ों नागरिक विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं।

आइए नजर डालते हैं स्वास्थ्य क्षेत्र की उन 24 प्रमुख पहलों पर, जिन्होंने पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य को नई दिशा दी-

1. स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक बजट में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट की सीमाओं को पूरी तरह बदल दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत स्वास्थ्य पर होने वाले सरकारी खर्च में निरंतर ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। इस बड़े बजटीय सहयोग के कारण ही देश के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक मुफ्त इलाज, दवाइयां और आधुनिक जांच सुविधाएं पहुंचना संभव हो सका है। स्वास्थ्य अब देश के विकास एजेंडे का एक मुख्य और मजबूत स्तंभ बन चुका है।

2. आयुष्मान भारत (AB-PMJAY): दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा
साल 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना आज देश के करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों के लिए सबसे बड़ी जीवनरेखा बन चुकी है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज मिलता है। इस क्रांतिकारी पहल ने गरीब परिवारों को इलाज के भारी-भरकम खर्च और कर्ज के जाल से हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया है। अब तक देश भर में 44.14 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।

3. आयुष्मान वय वंदना: बुजुर्गों को मिला मुफ्त इलाज का अधिकार
अक्टूबर 2024 में सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का एक ऐतिहासिक और मानवीय विस्तार करते हुए ‘आयुष्मान वय वंदना’ की शुरुआत की। इसके तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया गया है। चाहे बुजुर्ग अमीर हों या गरीब, इस योजना के अंतर्गत उन्हें अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ उपचार के लिए सुरक्षा मिली है। अब तक 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिक इस योजना में नामांकित हो चुके हैं।

4. आयुष्मान ऐप: चुटकियों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं
पीएम-जेएवाई लाभार्थियों की सुविधा के लिए लॉन्च किया गया ‘आयुष्मान ऐप’ आज 19 क्षेत्रीय भाषाओं में आईओएस और एंड्रॉइड दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके जरिए मरीज अपनी पात्रता की जांच खुद कर सकते हैं। इस ऐप की मदद से देश का कोई भी नागरिक अपना ई-कार्ड डाउनलोड कर सकता है, बीमा राशि पर नजर रख सकता है और पास के सूचीबद्ध अस्पतालों का पता लगा सकता है। यह ऐप पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाता है।

5. आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM): गांवों में प्राथमिक इलाज की नई क्रांति
जमीनी स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए देश भर में 1.86 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण भारत में सामुदायिक स्वास्थ्य की मजबूत रीढ़ बन चुके हैं। इन केंद्रों में मातृत्व देखभाल, शिशु स्वास्थ्य, दंत चिकित्सा, नेत्र विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य सहित 12 प्रकार की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल मुफ्त दी जा रही हैं।

6. पीएम-एबीएचआईएम: महामारी से निपटने की अभेद्य तैयारी
25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन’ (PM-ABHIM) देश का सबसे बड़ा स्वास्थ्य मिशन है। 64,180 करोड़ रुपये के बजट वाले इस मिशन का उद्देश्य देश को भविष्य की महामारियों के लिए तैयार करना है। इस मिशन के तहत सभी जिलों में 744 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और 631 क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। यह आत्मनिर्भर नेटवर्क देश के प्रवेश द्वारों से लेकर जिला स्तर तक मजबूत रोग निगरानी तंत्र विकसित कर रहा है। यह मिशन स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक लचीला और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

7. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): कागज-रहित डिजिटल हेल्थ ईकोसिस्टम
सितंबर 2021 में शुरू किए गए इस मिशन ने देश के प्रत्येक नागरिक को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड का असली मालिक बना दिया है। इसके तहत नागरिकों को 14-अंकीय विशिष्ट ‘आभा’ (ABHA) यानी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता संख्या दी जाती है। जून 2026 में आभा से जुड़े डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स की संख्या 100 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर गई है। मरीज की सहमति से डॉक्टर देश के किसी भी कोने से पुराने मेडिकल पर्चे देख सकते हैं, जिससे इलाज सटीक और तेज होता है।

8. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): लक्षित और प्रभावी स्वास्थ्य आपूर्ति
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अपने दो प्रमुख उप-मिशनों (ग्रामीण और शहरी) के माध्यम से देश की विशिष्ट स्वास्थ्य चुनौतियों पर सीधा प्रहार किया है। इसके अंतर्गत आशा कार्यकर्ताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। एनएचएम के प्रभावी क्रियान्वयन से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, संक्रामक रोगों की रोकथाम और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है, जिससे अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी मदद पहुंच रही है।

9. सुरक्षित मातृत्व और संस्थागत प्रसव का महाभियान
‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ (PMSMA) और ‘जननी सुरक्षा योजना’ (JSY) के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सुविधाएं दी जा रही हैं। योजना के तहत अब तक 7.47 करोड़ से अधिक महिलाओं की जांच हो चुकी है। इसके साथ ही ‘जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम’ (JSSK) के तहत सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन, दवाएं, भोजन और एम्बुलेंस परिवहन पूरी तरह मुफ्त है। इन योजनाओं के कारण देश में संस्थागत प्रसव की दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।

10. शिशु स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन की गारंटी
नवजात बच्चों को सुरक्षा देने के लिए ‘सुरक्षित मातृत्व आश्वासन’ (SUMAN) और ‘गृह-आधारित नवजात शिशु देखभाल’ जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। आशा कार्यकर्ता बच्चों के घर जाकर उनके पोषण, विकास और एनीमिया (खून की कमी) की नियमित जांच करती हैं। वहीं ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (RBSK) के तहत देश भर के बच्चों में जन्मजात दोषों, विकासात्मक विलंब और गंभीर बीमारियों की मुफ्त स्क्रीनिंग की जाती है। इस सक्रिय कदम से रोके जा सकने वाले बाल रोगों में भारी कमी आई है।

11. मिशन इंद्रधनुष: जानलेवा बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा कवच
दिसंबर 2014 में शुरू किए गए ‘मिशन इंद्रधनुष’ ने देश के उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण पहुंचाया, जो पहले इससे छूट गए थे। इस सघन अभियान के तहत अब तक 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ महिलाओं का मुफ्त टीकाकरण किया जा चुका है। इसी का परिणाम है कि साल 2023 में बिना टीके वाले (शून्य-खुराक) बच्चों की संख्या जो 0.11% थी, वह 2024 में घटकर मात्र 0.06% रह गई है। भारत को डब्ल्यूएचओ द्वारा मातृ एवं नवजात टेटनस के पूर्ण उन्मूलन का गौरव भी प्राप्त हो चुका है।

12. यू-विन (U-WIN) प्लेटफॉर्म: टीकाकरण का डिजिटल कायाकल्प
अक्टूबर 2024 में लॉन्च किया गया ‘यू-विन’ डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम को पूरी तरह पेपरलेस और स्मार्ट बना चुका है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 11.87 करोड़ बच्चे और 3.96 करोड़ गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। इस तकनीक के जरिए परिवारों को एसएमएस अलर्ट के माध्यम से आगामी टीकों की तारीख पता चल जाती है और उनका डिजिटल सर्टिफिकेट हमेशा सुरक्षित रहता है। अब देश का कोई भी नागरिक अपने बच्चे का टीकाकरण रिकॉर्ड नहीं खोता।

13. राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन: ‘टीबी मुक्त भारत’ की ओर कदम
प्रधानमंत्री मोदी के ‘2025 तक टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प के तहत राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। भारत में टीबी के मामलों में गिरावट की गति वैश्विक औसत दर से दोगुनी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस मिशन को जन आंदोलन बनाने के लिए ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत 3.78 लाख से अधिक ‘नि-क्षय मित्र’ सामने आए हैं। इन स्वयंसेवकों ने 20 लाख से अधिक टीबी मरीजों को मुफ्त पौष्टिक भोजन और सामाजिक सहायता प्रदान की है।

14. मलेरिया और संक्रामक रोगों पर निर्णायक विजय
वर्ष 2016 में शुरू की गई ‘राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन रूपरेखा’ के रणनीतिक प्रयासों और “टेस्ट, ट्रीट और ट्रैक” मॉडल के कारण देश में मलेरिया की रुग्णता में 78 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। भारत अब 2027 तक मलेरिया मुक्त होने की राह पर है। इसके अलावा कालाजार, जापानी एन्सेफलाइटिस और डेंगू जैसी बीमारियों के मृत्यु दर में रिकॉर्ड कमी आई है। एचआईवी-एड्स के क्षेत्र में भी वर्ष 2010 से 2024 के बीच मां से बच्चे में होने वाले संक्रमण की दर में 74.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

15. कुष्ठ रोग उन्मूलन में ऐतिहासिक सफलता
मोदी सरकार की सघन खोज और उपचार नीतियों के कारण देश के अधिकांश जिलों से कुष्ठ रोग का पूरी तरह सफाया हो रहा है। प्रति 10,000 की आबादी पर 1 से कम मामले वाले जिलों की संख्या 2014-15 के 542 से बढ़कर 2024-25 में 638 हो गई है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग के नए मामलों की पहचान की दर प्रति 1,00,000 आबादी पर 9.73 से घटकर अब केवल 7.0 रह गई है, जो इस प्राचीन बीमारी के खिलाफ देश की सबसे बड़ी और निर्णायक जीत को प्रदर्शित करती है।

16. ऐतिहासिक कोविड-19 प्रतिक्रिया और विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की त्वरित और सक्रिय प्रतिक्रिया की पूरी दुनिया ने सराहना की। सरकार ने देश में पहला मामला आने से पहले ही एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू की और रिकॉर्ड समय में कोविन (Co-WIN) प्लेटफॉर्म के साथ दो स्वदेशी टीके विकसित किए। देश भर में 220 करोड़ से अधिक मुफ्त वैक्सीन खुराकें प्रदान की गईं। इस दौरान देश में परीक्षण लैब 14 से बढ़कर 3,400 हो गईं, आईसीयू बेड 2,168 से बढ़कर 1.45 लाख हुए और देश पीपीई किट तथा ऑक्सीजन उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनकर उभरा।

17. वैक्सीन मैत्री: भारत बना दुनिया का ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’
संकट के समय पूरी दुनिया के साथ खड़े होकर भारत ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को धरातल पर उतारा। ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत भारत ने लगभग 100 देशों को 30 करोड़ से अधिक स्वदेशी कोविड वैक्सीन की खुराकें उपलब्ध कराईं। इनमें से 48 विकासशील और गरीब देशों को भारत सरकार द्वारा पूरी तरह मुफ्त टीके प्रदान किए गए। इस मानवीय और वैश्विक मदद ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक संवेदनशील और मजबूत वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है।

18. गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) की देशव्यापी मुफ्त स्क्रीनिंग
हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय गैर-संक्रामक रोग कार्यक्रम के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अब तक 60 करोड़ से अधिक लोगों की मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के लिए मुफ्त स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अलावा 41.5 करोड़ लोगों की हाई ब्लड प्रेशर और 41.3 करोड़ लोगों की डायबिटीज के लिए मुफ्त जांच की गई है। इस सक्रिय दृष्टिकोण के कारण करोड़ों लोगों में बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाकर उनका सफल इलाज शुरू किया गया है।

19. सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान
महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के खतरे से बचाने के लिए सरकार ने फरवरी 2026 में तीन महीने का विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। इसके तहत देश भर की 14 वर्ष की आयु की लगभग 1.15 करोड़ बालिकाओं को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का टीका लगाया गया। यह जीवनरक्षक टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से पूरी तरह मुफ्त प्रदान किया गया। भविष्य की पीढ़ी को कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से सुरक्षित करने की दिशा में यह मोदी सरकार का एक बेहद दूरदर्शी और सराहनीय कदम है।

20. कैंसर संस्थानों और एमएससी सुविधाओं का रिकॉर्ड विस्तार
कैंसर के इलाज को हर नागरिक की पहुंच में लाने के लिए ‘तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र योजना’ के तहत देश में 19 राज्य कैंसर संस्थान और 20 विशेष तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र स्थापित किए गए हैं। कैंसर पीड़ितों को अब बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। इसके अलावा, देश के सभी 22 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) में आधुनिक कैंसर चिकित्सा, कीमोथेरेपी और सर्जरी सुविधाओं को मंजूरी देकर चालू किया गया है। 600 से अधिक कैंसर रजिस्ट्री साइटों के जरिए इसकी निगरानी की जा रही है।

21. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम: मरीजों के ₹10,000 करोड़ बचाए
गुर्दा (किडनी) रोगों से पीड़ित गरीब मरीजों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा देने के लिए साल 2016 में ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम’ (PMNDP) शुरू किया गया था। इस योजना के तहत देश भर में अब तक 4 करोड़ से अधिक डायलिसिस सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। इस जनकल्याणकारी योजना से 31.74 लाख से अधिक मरीजों को सीधा लाभ मिला है और उनके इलाज पर खर्च होने वाले लगभग 10,102.25 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई है। देश के 1,816 से अधिक केंद्रों पर यह मुफ्त सेवा निरंतर जारी है।

22. ईट राइट इंडिया और फिट इंडिया: प्रिवेंटिव हेल्थ को बढ़ावा
बीमारियों को मूल कारणों से रोकने के लिए सरकार ने जन-आंदोलनों की शुरुआत की है। जुलाई 2018 में शुरू हुए ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के तहत देश भर में 182 स्वच्छ स्ट्रीट फूड हब, 546 फल-सब्जी बाजार और 411 रेलवे स्टेशनों को ईट राइट प्रमाणित किया गया है। वहीं, साल 2019 में शुरू हुए ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियानों ने देश के 2.8 लाख से अधिक स्थानों पर 30 लाख से ज्यादा नागरिकों को फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर एक स्वस्थ समाज की नींव रखी है।

23. तंबाकू नियंत्रण में वैश्विक मिसाल और ब्लूमबर्ग अवार्ड
तंबाकू की लत से युवाओं को बचाने के लिए चलाए गए ‘तंबाकू मुक्त युवा अभियान’ के तहत देश के 3.09 लाख शैक्षणिक संस्थान और 39,000 गांवों को पूरी तरह तंबाकू-मुक्त घोषित किया गया है। टोल-फ्री हेल्पलाइन के जरिए 34.5% कॉलर्स ने हमेशा के लिए तंबाकू छोड़ दिया है। पिछले एक दशक में देश में तंबाकू के कुल सेवन में 17.3% की रिकॉर्ड गिरावट आई है। इस शानदार और ऐतिहासिक सफलता के लिए भारत सरकार को प्रतिष्ठित ‘ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज़ अवॉर्ड 2025’ से सम्मानित किया गया है, जो हमारी वैश्विक नीतिगत सफलता की मुहर है।

24. जन औषधि और अमृत फार्मेसी: 90% तक सस्ती दवाइयां
दवाइयों के बाजार मूल्य को नियंत्रित करने के लिए देश भर में 18,000 से अधिक ‘जन औषधि केंद्र’ संचालित हैं, जहां जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती मिलती हैं। यह आम आदमी के लिए सबसे बड़ी आर्थिक राहत है। इसके साथ ही, गंभीर बीमारियों के सस्ते इंप्लांट और जीवनरक्षक दवाएं देने के लिए ‘अमृत (AMRIT) फार्मेसी’ के 255 से अधिक आउटलेट्स काम कर रहे हैं। इस योजना से 6.85 करोड़ से अधिक मरीजों को लगभग 8,400 करोड़ रुपये की सीधी आर्थिक बचत हुई है।

सर्वे सन्तु निरामयाः के संकल्प की सिद्धि
पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए ये 24 बड़े कदम केवल योजनाओं और आंकड़ों की कहानी नहीं हैं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन में आए बदलाव की तस्वीर भी पेश करते हैं। साल 2014 से पहले जहां गरीब परिवार एक गंभीर बीमारी के कारण कर्ज के दलदल में डूब जाता था, आज आयुष्मान भारत और जन औषधि जैसी योजनाओं ने उसे एक सम्मानजनक सुरक्षा कवच दिया है। मेडिकल कॉलेजों की सीटों का दोगुना होना, नए एम्स का रिकॉर्ड समय में संचालित होना और डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति (ABDM) का पूरे देश में लागू होना यह दर्शाता है कि भारत अब केवल बीमारियों के इलाज पर नहीं, बल्कि नागरिकों की ‘वेलनेस’ पर ध्यान दे रहा है। 24 बड़ी पहलों का यह सुदृढ़ ताना-बाना आज भारत के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाकर विकसित भारत के बड़े संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

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