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लाठीचार्ज नंबर-9: पंजाब में वादे पूरे करने की बजाए जनता पर लाठियों की बौछार

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आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल का चुनावी फंडा है कि जनता से रैलियों के मंच से बड़े-बड़े वादे करो और जब सत्ता की मखमली कुर्सी मिल जाए तो उसे भूल जाओ। पंजाब में आप की मान सरकार इसी मंत्र पर ना सिर्फ चल रही है, बल्कि वह तो दो कदम आगे निकलकर वादे पूरे करने की मांग करने वालों पर लाठियां बरसाने में मशगूल है। पंजाब की सरजमीं पर साल 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) ने ‘इंकलाब’ और ‘बदलाव’ के जिस नारे के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया था, आज वह नारा प्रदेश के बेरोजगार युवाओं, संविदा कर्मियों, मनरेगा कर्मियों, किसानों और सफाई कर्मचारियों के खून से सराबोर हो रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान जो राजनीतिक दल खुद को आम आदमी की आवाज बताता था, आज वही दल सत्ता के मद में इतना अंधा हो चुका है कि हक मांगने वाली जनता की आवाज को बंदूक की बट और लाठियों के दम पर खामोश किया जा रहा है। पंजाब में भगवंत मान सरकार की नीतियां अब ‘कल्याणकारी’ नहीं, बल्कि ‘दमनकारी’ ज्यादा नजर आ रही हैं, जहां लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को बदले में केवल बेरहम लाठीचार्ज और पुलिसिया बर्बरता मिल रही है।पंजाब में बदलाव की रक्तरंजित हकीकत, निहत्थे पर लाठियां
चुनावी समर में जनता को गारंटियों की रेवड़ियां बांटने वाले अरविंद केजरीवाल के नक्शेकदम पर चलते हुए मान सरकार अपने वादों को पूरा करने के बजाय टालमटोल और टरकाने की नीति पर उतर आई है। हद तो तब हो जाती है जब अपने जायज हक, पक्की नौकरी और सम्मानजनक वेतन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पुलिस की लाठियां बरसाई जाती हैं। 22 जुलाई को सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को खत्म करने के लिए मान सरकार ने उन पर लाठीचार्ज करा दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले से लेकर पंजाब के कोने-कोने तक, बीते चार वर्षों में दमन का एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है जिसने औपनिवेशिक काल की यादें ताजा कर दी हैं। जब विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार हो गईं, तो चौतरफा घिरी सरकार को दिखावे के लिए अपने ही प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज गिरानी पड़ी।

आइए, पंजाब में पिछले चार साल में आप सरकार के दौरान जनता-जनार्दन पर हुए लाठीचार्जों पर एक नजर डालते हैं…

लाठीचार्ज नंबर-9: जुलाई 2026
वेतन मांग रहे सफाई कर्मचारियों को निर्ममता से पीटा
बरनाला में सफाई कर्मचारी स्थायी नौकरी और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर गत आठ जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। हाल ही में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को खत्म करने के लिए मान सरकार ने उन पर लाठीचार्ज करा दिया । जिससे सफाई कर्मचारियों में आक्रोश और तेज हो गया। हालात बिगड़ते देख लाठीचार्ज के मामले में मान सरकार को डीएसपी सतवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करना पड़ा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाएगी। दूसरी ओर सफाई कर्मचारियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा व कांग्रेस ने आप सरकार को घेरा है और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। भाजपा के नेताओं ने कहा कि इस अत्याचार ने आप सरकार का गरीब और दलित विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।

लाठीचार्ज नंबर-8: जुलाई 2026
फार्मेसी भर्ती परीक्षा धांधली के खिलाफ युवाओं पर लाठीचार्ज
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) द्वारा आयोजित पंजाब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में हुए बड़े पैमाने पर हाई-टेक घोटाले के बाद शुरू हुआ। परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों द्वारा स्पाई पेन कैमरे, पगड़ी और मोजों में छुपाए गए वायरलेस ब्लूटूथ उपकरणों के जरिए परीक्षा हॉल से बाहर पेपर भेजकर हल कराने का मामला सामने आया था। इस गंभीर धांधली से आक्रोशित हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने 19 जुलाई 2026 को परीक्षा को तुरंत रद्द करने, दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जब युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास और सरकारी परिसरों की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो पंजाब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस की इस बलपूर्वक कार्रवाई और उसके बाद मची भगदड़ में दर्जनों युवा अभ्यर्थी और छात्र नेता घायल हो गए, जिसकी राजनीतिक गलियारों और सामाजिक संगठनों द्वारा तीखी निंदा की गई।

लाठीचार्ज नंबर-7: जून 2026
खन्ना में नियमितीकरण को लेकर कर्मचारियों की पिटाई
पंजाब के खन्ना (लुधियाना) में हुआ यह प्रदर्शन VB-G RAM G (पहले मनरेगा) के संविदा कर्मचारियों और मजदूरों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर किया गया था। राज्य के सभी 23 जिलों से आए हजारों कर्मचारी पिछले 5 से 8 महीनों से रुके हुए बकाया वेतन को जारी करने और अपनी नौकरियों के नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण मार्च निकालते हुए पंजाब के ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद के खन्ना स्थित आवास की तरफ आगे बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के लिए खन्ना जिला पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने समझाइश की बजाए पहले पानी की बौछारें (वाटर कैनन) छोड़ीं और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया गया। इस हिंसक झड़प में महिलाओं सहित 10 से अधिक मुख्य प्रदर्शनकारी चोटिल हो गए।

लाठीचार्ज नंबर-6: अक्टूबर 2024
पटवारी-कानूनगो एसोसिएशन के आंदोलन पर पुलिसिया कार्रवाई
दो साल पहले अक्टूबर में राजस्व विभाग के पटवारियों और कानूनगो ने अपनी लंबित मांगों, नए पदों के सृजन और काम के अत्यधिक बोझ के खिलाफ राज्यव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंका था। अक्टूबर 2024 में जब पटवारी चंडीगढ़ की ओर कूच करने के लिए एकत्रित हुए, तो मोहाली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भारी बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया। प्रशासनिक तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों की मांग थी कि सरकार खाली पड़े हजारों पदों को भरे ताकि जनता के काम न रुकें। इस लाठीचार्ज में कुछ कर्मचारी चोटिल हुए। सरकार ने इसके जवाब में पटवारियों पर ‘एस्मा’ (ESMA – आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून) लगाने की धमकी दी और उनके स्थानांतरण कर दिए, जिससे यह साफ हो गया कि मान सरकार संवाद के बजाय डराने की राजनीति पर भरोसा करती है।

लाठीचार्ज नंबर-5: मार्च 2024
गन्ने के बकाए और मुआवजे को लेकर किसानों पर जुल्म
खेती और किसानों के कल्याण के नाम पर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी का असली चेहरा मार्च 2024 में तब सामने आया, जब संगरूर में अपनी फसलों के लंबित बकाए और बाढ़ से खराब हुई फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने धावा बोल दिया। किसान शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर सरकार के वादों की याद दिला रहे थे। लाठीचार्ज के आदेश मिलते ही पुलिस ने बुजुर्ग किसानों पर भी रहम नहीं खाया, जिसमें कई किसान चोटिल और गंभीर जख्मी हो गए। इस दमनकारी कदम के बाद राज्यभर के किसान संगठनों में उबाल आ गया, जिसे देखते हुए मान सरकार ने दबाव में आकर आनन-फानन में कुछ करोड़ रुपये का फंड जारी किया और मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने का नाटक रचा, ताकि लोकसभा चुनाव में इसका नुकसान न भुगतना पड़े।

लाठीचार्ज नंबर-4: दिसंबर 2023
बठिंडा में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मियों पर लाठियों की बौछार
दिसंबर 2023 में बठिंडा में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत काम करने वाले सैकड़ों अस्थायी स्वास्थ्य कर्मचारी (नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ) अपनी नौकरियों को पक्का करने और ‘समान काम-समान वेतन’ की मांग को लेकर वित्त मंत्री के दफ्तर का घेराव करने पहुंचे। कोरोना महामारी के दौरान जान जोखिम में डालने वाले इन योद्धाओं पर मान सरकार की पुलिस ने बेदर्दी से लाठियां बरसाईं। नौकरी पक्की करने की जायज मांग कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों को घसीट-घसीट कर पीटा गया, जिसमें करीब दो दर्जन कर्मचारी घायल हो गए और कई महिला कर्मियों के कपड़े तक फट गए। इस जघन्य लाठीचार्ज के बाद चौतरफा घिरी पंजाब सरकार ने यूनियनों के साथ बैठकों का दौर तो शुरू किया, लेकिन ठोस नीति बनाने के बजाय फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

लाठीचार्ज नंबर-3: फरवरी 2023
मोहाली बॉर्डर पर कौमी इंसाफ मोर्चा पर बल प्रयोग
वर्ष 2023 के शुरुआती महीनों में मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों (सिख कैदियों) की रिहाई की मांग को लेकर ‘कौमी इंसाफ मोर्चा’ का प्रदर्शन चल रहा था। फरवरी 2023 में जब प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने उन पर वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले छोड़े और बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कानूनन अपनी सजा काट चुके कैदियों को रिहा किया जाए। इस हिंसक झड़प और लाठीचार्ज में 30 से अधिक प्रदर्शनकारी और कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इसके बाद मान सरकार ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया, इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बाधित कीं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त मुकदमे दर्ज कर आंदोलन को पूरी तरह कुचलने का प्रयास किया।

लाठीचार्ज नंबर-2: दिसंबर 2022
जालंधर में आशियाना उजड़ने के विरोध पर पीड़ितों पर प्रहार
जालंधर के लतीफपुरा इलाके में दशकों से रह रहे परिवारों के घरों को प्रशासनिक ढर्रे पर ढहा दिया गया था। दिसंबर 2022 में जब बेघर हुए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे कड़ाके की ठंड में अपने पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर उतरे, तो मान सरकार की पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन पर लाठियां भांज दीं। पुनर्वास की मांग कर रहे इन बेसहारा लोगों का कसूर सिर्फ इतना था कि वे खुले आसमान के नीचे मरने के बजाय सरकार से सिर छिपाने की जगह मांग रहे थे। इस क्रूर कार्रवाई में करीब 15 लोग घायल हुए, जिनमें बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल थीं। घटना के बाद जब विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार को आड़े हाथों लिया, तो मुख्यमंत्री मान को आनन-फानन में पीड़ितों के लिए अस्थायी टेंट और बाद में मकान देने का वादा करना पड़ा।

लाठीचार्ज नंबर-1: नवंबर 2022
संगरूर में मुख्यमंत्री आवास के बाहर बेरोजगार अध्यापकों पर बर्बरता
पंजाब में सरकार बनने के पहले साल में ही आप सरकार ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। नवंबर 2022 में संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के निजी आवास के बाहर रोजगार की मांग कर रहे बीएड (B.Ed) और टेट (TET) पास बेरोजगार अध्यापकों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया। ये युवा शिक्षक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने और अपनी भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे थे। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि किसी भी बेरोजगार को धरने पर नहीं बैठना पड़ेगा, लेकिन जब वे अपनी मांग लेकर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इस लाठीचार्ज में महिलाओं सहित 20 से अधिक युवा गंभीर रूप से घायल हो गए, कई के सिर पर चोट आईँ। चौतरफा आलोचना के बाद बैकफुट पर आई सरकार ने केवल खोखला आश्वासन दिया और मामले को शांत करने के लिए एक कागजी पैनल का गठन कर दिया।

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