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उज्ज्वला योजना के 10 साल: प्रधानमंत्री मोदी के ‘संकल्प से सिद्धि’ ने करोड़ों महिलाओं को दी धुएं से आजादी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘संकल्प से सिद्धि’ के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है। मोदी सरकार की अंत्योदय आधारित कल्याणकारी नीतियों ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी प्रतीक बनी है प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY), जिसने अपने सफलतम 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

बलिया से शुरू हुआ धुआं-मुक्त भारत का अभियान
प्रधानमंत्री मोदी ने 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से उज्ज्वला योजना के रूप में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की थी। जिसका उद्देश्य देश की करोड़ों माताओं-बहनों को लकड़ी और कोयले के जानलेवा धुएं से मुक्ति दिलाना था। 30 अप्रैल, 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि सरकार अब तक 10.55 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध करा चुकी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से देश की 18 वर्ष से अधिक उम्र की एपीएल, बीपीएल तथा राशन कार्ड धारक महिलाओं को रसोई गैस उपलब्ध करवाई जाती है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं।

उज्ज्वला 2.0: और भी आसान हुई राह
योजना की लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने ‘उज्ज्वला 2.0’ लॉन्च किया, जिसके तहत लाभार्थियों को न केवल एलपीजी कनेक्शन, बल्कि पहला रिफिल और चूल्हा भी पूरी तरह निशुल्क प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, गैस स्टोव खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा भी दी गई है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

उज्ज्वला लाभार्थियों को 300 रुपये सस्ता सिलेंडर
मोदी सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के बावजूद आम आदमी की जेब का ख्याल रखा है। वर्तमान में उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर पर 300 रुपये की सीधी सब्सिडी दी जा रही है। उपभोक्ताओं को एक वित्त वर्ष में प्रति वर्ष अधिकतम 9 रिफिल पर 300 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की सब्सिडी दी जा रही है। इस तरह गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन से कम दाम में स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच मिल रही है। इससे लकड़ी, कोयला, गोबर आदि जैसे खाना पकाने के ईंधन के पारंपरिक स्रोतों के उपयोग के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलती है। महिलाओं की खाना बनाने में होने वाली परेशानी अब कम होती है और उनकी सेहत भी अच्छी रहती है। उज्ज्वला योजना आने के बाद देश की लाखों महिलाओं का जीवन न सिर्फ आसान हुआ है, बल्कि एलपीजी गैस कनेक्शन से कई महिलाओं की सेहत में भी सुधार हुआ है।

जहां दुनिया भर में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं भारत में उज्ज्वला लाभार्थियों को 14.2 किलो का सिलेंडर मात्र 613 रुपये में मिल रहा है। पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में रसोई गैस की कीमतें काफी कम और स्थिर हैं। अगर 14.2 किलो के सिलेंडर की बात की जाए तो देश में उज्ज्वला लाभार्थियों को 613 रुपये में मिलने वाला एक सिलेंडर पाकिस्तान में 1046.34 रुपये, नेपाल में 1207.81 रुपये और श्रीलंका में 1241.67 रुपये में मिलता है।

मजबूत होता इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सुधार
पिछले 10 वर्षों में देश में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या 85 प्रतिशत बढ़कर 13,896 से 25,605 हो गई है। इसकी वजह से देश के 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण इलाकों में गैस की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। धुएं से मुक्ति मिलने के कारण महिलाओं में सांस और आंखों से जुड़ी बीमारियों में भारी कमी दर्ज की गई है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैश्विक संकट के बावजूद अडिग मोदी सरकार
रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य-पूर्व के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। इसके बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स में कटौती और तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देकर देश की जनता को महंगाई की आंच से बचाए रखा है। उज्ज्वला योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनशीलता का प्रमाण है, जिसने भारत की ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।

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