देश इस समय ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा बचत जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केवल जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील भर नहीं की, बल्कि स्वयं अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी है। यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि वीआईपी संस्कृति पर सीधा प्रहार और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश है। प्रधानमंत्री की इस पहल का असर अब राज्यों तक पहुंच चुका है, जहां भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी अपने काफिलों में कटौती कर रहे हैं। यह पहली बार है जब सत्ता का शीर्ष वर्ग जनता-जनार्दन से त्याग की अपील करने के साथ स्वयं भी उसी रास्ते पर स्पष्ट रूप से चलता दिखाई दे रहा है। पेट्रोल-डीजल की बचत पीएम मोदी की पिछले दिनों की गई सात अपीलों में से एक है।
सबसे पहले काफिले में कटौती करके पीएम ने दिया उदाहरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में पहले लगभग 18 से 20 वाहन चलते थे, लेकिन हालिया बदलाव के बाद इसे घटाकर करीब 8 से 10 वाहनों तक सीमित कर दिया गया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखते हुए यह कटौती इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन के लिए संकल्पबद्ध है। अनुमान है कि केवल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के काफिले में ईंधन और रखरखाव खर्च में कटौती से हर वर्ष करोड़ों रुपये की बचत संभव होगी। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव भी घटेगा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है।
कैबिनेट की बैठक में दो गाड़ियों के साथ पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन खपत कम करने की अपील का असर राजधानी दिल्ली से राज्यों तक दिखाई दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अपने काफिले में 50 प्रतिशत कटौती कर दी। वे कैबिनेट की बैठक में मात्र दो गाड़ियों के साथ पहुंचे। इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी आदि कई मंत्रियों ने अपने काफिले में 50 फीसदी से ज्यादा वाहन कम कर दिए। दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार समेत अन्य राज्यों में मुख्यमंत्रियों से लेकर मंत्रियों ने भी काफिलों में कमी कर दी है। मंत्रालयों व राज्यों के विभागों समेत बड़े औद्योगिक संस्थानों में कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग व सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
PM मोदी के काफिले में केवल दो गाड़ियां!
PM मोदी ने अपने काफिले को पूरी तरह कट कर दिया है, साथ ही पूरे देश से भी उन्होंने अपील किया है। pic.twitter.com/FQtqKbzwho
— Panchjanya (@epanchjanya) May 13, 2026
गृह मंत्री अमित शाह ने की काफिले में काफी कटौती
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में भी उल्लेखनीय कटौती की गई है। पहले जहां उनके साथ लगभग 15 से 16 वाहन चलते थे, अब यह संख्या घटकर 7 से 8 रह गई है। यह संदेश साफ है कि राष्ट्रहित के सामने राजनीतिक शानो-शौकत का कोई महत्व नहीं। सुरक्षा और सादगी के बीच संतुलन बनाकर सरकार जनता के सामने एक नई कार्यसंस्कृति प्रस्तुत कर रही है।
PM मोदी की अपील पर गृहमंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले से हटा दी गाड़ियां।
केवल 4 गाड़ियों के साथ अपने कार्यक्रम स्थल के लिए निकले गृहमंत्री अमित शाह। pic.twitter.com/va0z3F0MS5
— Panchjanya (@epanchjanya) May 13, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ ने मुख्यमंत्री के साथ कार शेयर की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपने काफिले को सीमित किया है। गुरुवार को राजस्थान के मेड़ता (नागौर) में मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के काफिले में केवल 6 गाड़ियां थी। राजनाथ सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री एक ही कार में बैठे थे। राजनाथ सिंह के काफिले में सामान्यत: 10 से ज्यादा गाड़ियां होती हैं। इनमें आर्मी के भी 3 सिक्योरिटी व्हीकल होते हैं। गुरुवार को उनके काफिले में आर्मी की गाड़ियां भी नहीं थी।
#WATCH | Delhi: Defence Minister Rajnath Singh leaves for Jodhpur in a downsized convoy.
Defence Minister downsized his convoy size to less than half, following PM Modi’s appeal.
(Source: Defence Minister’s Office) pic.twitter.com/lL2HAVoOVQ
— ANI (@ANI) May 14, 2026
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मेघवाल ने भी दिया बचत का संदेश
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर प्रतीकात्मक ही नहीं, व्यावहारिक संदेश भी दिया। वहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का ई-रिक्शा से सफर करना इस अभियान को जनसरोकार से जोड़ता है। सत्ता का व्यवहार आम नागरिक के करीब आता दिख रहा है। यदि मंत्री और मुख्यमंत्री सार्वजनिक संसाधनों का संयमित उपयोग करेंगे, तो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव जनता पर भी पड़ेगा।
Union Minister Arjun Ram Meghwal travels by e-rickshaw from railway station in Bikaner after PM’s austerity call. pic.twitter.com/PxJzJoJQ93
— News Arena India (@NewsArenaIndia) May 14, 2026
नितिन गडकरी ने बस यात्रा से दिया बड़ा संकेत
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बस से सफर करना केवल एक फोटो अवसर नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के प्रति भरोसे का संदेश है। गडकरी लंबे समय से ग्रीन मोबिलिटी और वैकल्पिक ईंधन के समर्थक रहे हैं। ऐसे में उनका यह कदम प्रतीकात्मक राजनीति से कहीं आगे जाकर व्यवहारिक राष्ट्रवाद का उदाहरण बन गया है।
पुणे, महाराष्ट्र: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संत ज्ञानेश्वर मौली महाराज पालकी मार्ग का निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद, उन्होंने मार्ग का निरीक्षण करने के लिए काफिले का इस्तेमाल करने के बजाय बस से यात्रा की। pic.twitter.com/yhpVGslMox
— IANS Hindi (@IANSKhabar) May 14, 2026
यूपी : नो व्हीकल डे और वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
सीएम योगी आदित्यनाथ, मंत्रियों, अधिकारियों के आधिकारिक वाहनों में 50 प्रतिशत तक कटौती। कई विधायकों ने एस्कॉर्ट गाड़ियां छोड़ीं। लखनऊ मेयर ने दो में से एक गाड़ी लौटाई। सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे, औद्योगिक संस्थानों व कार्यालयों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम, बैठकें वर्चुअल करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट व बिजली बचत को बढ़ावा देने के लिए निर्देश दिए हैं।
हरियाणा: काफिला आधा होने से होगी ईंधन की बचत
हरियाणा के मुख्यमंत्री के काफिले में पहले लगभग 14 वाहन शामिल रहते थे। हालिया निर्णय के बाद इसे घटाकर 6 से 7 वाहनों तक सीमित कर दिया गया है। राज्य सरकार के आंतरिक आकलन के अनुसार, इससे हर वर्ष लाखों लीटर ईंधन की बचत होगी। इसके साथ ही रखरखाव, चालक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स पर होने वाला खर्च भी कम होगा। यह पहल बताती है कि राष्ट्रहित में छोटी-छोटी प्रशासनिक कटौतियां भी बड़ा आर्थिक असर पैदा कर सकती हैं।
#WATCH | Panchkula: Haryana CM Nayab Singh Saini arrives to attend Nikay Chunav Samman Samaroh underway at BJP Office with reduced convoy, earlier today. pic.twitter.com/jhEtVkj4Dw
— ANI (@ANI) May 14, 2026
ओडिशा : अब सरकार की सादगी बनी नई मिसाल
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी अपने काफिले में बड़ी कटौती की है। पहले लगभग 12 वाहन उनके साथ चलते थे, जिन्हें अब घटाकर 5 से 6 कर दिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे सरकारी खर्च में हर वर्ष करोड़ों रुपये तक की अप्रत्यक्ष बचत संभव होगी। यह वही ओडिशा है जहां कभी वीआईपी मूवमेंट आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनता था। अब सरकार जनता के बीच सादगीपूर्ण छवि के साथ नजर आ रही है।
#WATCH | Bhubaneswar: Odisha CM Mohan Charan Majhi reduces convoy size following PM appeal amid fuel concerns. (13.05)
(Visuals Source: Chief Minister’s Office) pic.twitter.com/S7Ly7oHadU
— ANI (@ANI) May 13, 2026
महाराष्ट्र: विधायकों का जापान और फ्रांस का दौरा रद्द
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने काफिलों में कटौती की गई है। वे बुलेट बाइक से विधान भवन पहुंचे। इसके अलावा मंत्री विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सरकारी विमान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। मीटिंग्स वर्चुअल करने, अनावश्यक यात्राएं व दौरे रोकने के निर्देश, विधायकों ने जापान व फ्रांस का दौरा रद्द किया गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का बाइक पर सफर करते दिखाई देना भी इसी बदलती राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा है। यह दृश्य जनता के लिए असामान्य जरूर था, लेकिन इससे एक बड़ा संदेश गया कि जनप्रतिनिधि यदि चाहें तो वे भी सादगी और अनुशासन का पालन कर सकते हैं।
देवेंद्र फडणवीस आज मुंबई स्थित विधान भवन में बुलेट से पहुंचे ,
कल उन्होंने कहा था की सभी अपने काफिले ने कटौयी करे आज बाइक से विधानसभा पहुँच गए
@CMOMaharashtra @dev_fadnavis pic.twitter.com/yLNbe1Ls9e
— Abhishek Pandey – अभिषेक पाण्डेय (@abhishekpandey2) May 14, 2026
दिल्ली और गुजरात में सीएम के वाहनों की संख्या कम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी विभागों, मंत्रियों और विधायकों के आधिकारिक वाहनों की संख्या सीमित कर दी। कार पूलिंग और मेट्रो सहित पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन दिया गया है। उधर गुजरात में राज्यपाल देवव्रत बस-ट्रेन से यात्रा शुरू कर चुके हैं। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और अन्य मंत्रियों के काफिले में 50 प्रतिशत गाड़ियां कम कर दी गई हैं।
आज गुजराज के सीएम भूपेंद्र पटेल का काफिला पांच गुना छोटा नजर आया है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल जब अमरेली से गांधी नगर स्थित अपने आवास पहुंचने तो उनके काफिले में केवल 3 गाड़ियां थीं। एस्कॉर्ट वाहन या रिजर्व वाहन नजर नहीं आया। https://t.co/wYietCDeee
— Jitesh Jethanandani (@jethanandani14) May 13, 2026
बिहार और छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने के निर्देश
बिहार और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री, मंत्री और सरकारी काफिले में कमी करने के अलावा नो व्हीकल डे, वर्क फ्रॉम होम एवं वर्चुअल मीटिंग्स करने के अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक इससे माह में करोड़ों की बचत होगी। राज्यों में ईंधन खपत कम करने के अच्छे प्रयासों के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी बैठक में अपील को दोहराया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन ऊर्जा संरक्षण जरूरी है।
मध्य प्रदेश व गोवा में काफिला घटा, वाहन रैलियों पर रोक
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपने काफिले को सीमित कर साफ संकेत दिया कि छोटी आबादी वाले राज्य में अनावश्यक सरकारी खर्च उचित नहीं है। उधर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने काफिला 13 से घटाकर 8 वाहन कर दिया है। इसके साथ ही वाहन रैलियों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
Good to see BJP CMs practising before preaching, setting an example and following in the footsteps of PM Modi.
Goa CM Pramod Sawant cuts down his convoy to just one car. That’s it. 🙌🏻 pic.twitter.com/tuKnNy5VGO— Mr Sinha (@Mrsinha) May 14, 2026
राजस्थान में सीएम ने घटाया काफिला, WFH पर जोर
सीएम भजन लाल शर्मा ने 75% कटौती के बाद काफिले में 5 वाहन कर दिए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने वर्क फ्रॉम होम, मीटिंग वर्चुअल करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर तेल बचत का स्पष्ट संकेत दिया है। पहले जहां लंबा-चौड़ा काफिला सत्ता के प्रभाव का प्रतीक माना जाता था, अब सीमित और व्यवस्थित काफिला जिम्मेदार प्रशासन का प्रतीक बनता जा रहा है। अनुमान है कि विभिन्न राज्यों में की गई इन कटौतियों से संयुक्त रूप से हर वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बचत संभव है।
अब काफिले में गाड़ियां कम हो गई…
पीएम मोदी की अपील पर राजस्थान के सीएम के काफिले में दिखी 5 गाड़ियां…@BhajanlalBjp @RajasthanNews pic.twitter.com/XKRetVATBa— Fair Report (@fairreportnews) May 13, 2026
विदेशी मुद्रा बचाने का सत्ता से नहीं, सेवा से दिया संदेश
भारत हर वर्ष अरबों डॉलर का कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वीआईपी संस्कृति में सादगी लाने का सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित है। सरकारी वाहनों की संख्या कम होने से ईंधन की खपत घटती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। यही नहीं, इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील का महत्व इसी व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में समझा जाना चाहिए। दरअसल यह पूरा अभियान केवल तेल बचाने का मामला नहीं है। यह उस मानसिकता को बदलने की कोशिश है जिसमें सत्ता का मतलब शानो-शौकत और लंबा काफिला माना जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यवहार और आचरण से यह दिखाया है कि जनप्रतिनिधि यदि सादगी अपनाएं, तो शासन अधिक संवेदनशील और विश्वसनीय बन सकता है। आज जब दुनिया आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, तब भारत का नेतृत्व जनता को केवल उपदेश नहीं दे रहा, बल्कि स्वयं अनुशासन का पालन कर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यही लोकतांत्रिक नेतृत्व की असली पहचान है।
#WATCH | Delhi: Union Minister Ashwini Vaishnaw removes the pilot vehicle from his convoy, reaches at work in just one car. pic.twitter.com/09uECVnhMl
— ANI (@ANI) May 13, 2026









