प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने पिछले एक दशक में स्पेस, कूटनीति, योग, विज्ञान, संस्कृति, खेल और सुरक्षा के हर क्षेत्र में नई वैश्विक पहचान बनाई है। कभी दुनिया के सामने संभावनाओं वाला देश माना जाने वाला भारत आज उपलब्धियों का आत्मविश्वासी केंद्र बन चुका है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से लेकर G20 की वैश्विक मेजबानी तक, डिजिटल भुगतान से लेकर कोरोना वैक्सीन मैत्री तक और महाकुंभ की सांस्कृतिक शक्ति से लेकर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई तक, भारत ने हर मोर्चे पर अपनी ताकत का परचम लहराया है। पीएम मोदी के तीन कार्यकाल केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, सक्षम और विश्व नेतृत्व की ओर बढ़ते नए भारत के गौरवशाली युग का दस्तावेज बन चुके हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश नित नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। पीएम मोदी का मंत्र है- ये नया भारत है और वैश्विक स्तर पर हर बार कुछ बड़ा ही करेगा।
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत किस तरह एक के बाद एक रिकार्ड कायम कर रहा है उस पर एक नजर-
गौरवशाली उपलब्धि -20
खेल इतिहास का स्वर्णिम वर्ष साबित, नारी शक्ति ने भी दिखाई ताकत
देश ने विश्व मंच पर अपनी खेल क्षमता और गहराई का जबरदस्त प्रदर्शन किया। 2025 में सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने हासिल की, जिसने ICC वनडे वर्ल्ड कप में अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए पहली बार यह खिताब जीता। इसी साल कोलंबो में आयोजित ब्लाइंड महिला क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम ने इतिहास रचा तथा नेपाल को सात विकेट से हराकर यह ट्रॉफी भी अपने नाम की। भारत ने इसी साल सितंबर में एशिया कप (T20) का खिताब जीता। फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 5 विकेट से रोंदकर 9वीं बार एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम की। क्रिकेट के अलावा 2025 में भारत ने खेलो इंडिया अभियान, सांसद खेल महोत्सव के फलस्वरूप और भी कई खेलों में अपनी ताकत दिखाई। विशेष रूप से भारतीय महिला कबड्डी टीम ने दुनिया भर में अपनी दबदबा बनाए रखा और कबड्डी विश्व कप का खिताब जीत कर यह दर्शाया कि पारंपरिक खेलों में भी भारत का दबदबा बरकरार है।
गौरवशाली उपलब्धि -19
डिजिटल भुगतान में दुनिया को पीछे छोड़ा, 129 अरब ट्रांजैक्शन
भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इस साल दुनिया को पीछे छोड़ दिया। यूपीआई ने 129 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन के साथ वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में शीर्ष स्थान हासिल किया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तक ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म माना। फ्रांस, यूएई, सिंगापुर सहित कई देशों में यूपीआई की पहुंच भारत की डिजिटल कूटनीति का प्रमाण बनी। अगस्त 2025 तक सरकारी सेवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ चुका था। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिये करोड़ों रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँचे। इससे बिचौलियों की भूमिका घटी और पारदर्शिता बढ़ी। डिजिटल गवर्नेंस मोदी सरकार की सबसे स्थायी विरासतों में गिनी जाने लगी।
गौरवशाली उपलब्धि -18
चंद्रयान-4 की सफलता से चंद्र मिशन को नई दिशा मिली
स्पेस के क्षेत्र में एक और छलांग लगाते हुए इसरो ने जुलाई 2025 में चंद्रयान-4 मिशन की अहम टेस्ट फ्लाइट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा से सैंपल वापस लाने की तकनीक को परखना था। लैंडिंग, सैंपल कलेक्शन और रिटर्न मॉड्यूल से जुड़े परीक्षणों की सफलता ने भारत को डीप-स्पेस मिशनों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल सपना नहीं, ठोस वास्तविकता बन चुकी है। यह मिशन चंद्रमा से सैंपल वापस लाने की दिशा में भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम है। भारत ने सफल परीक्षण से यह साबित किया कि वह अब डीप-स्पेस मिशनों के लिए पूरी तरह तैयार है।
गौरवशाली उपलब्धि -17
हमारे विंग कमांडर शुभ्रांशु शुक्ला की अंतरिक्ष में ऐतिहासिक उड़ान
भारत के अंतरिक्ष इतिहास में 25 जून 2025 को स्वर्णिम अध्याय जुड़ा, जब भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शुभ्रांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुए। वे किसी कमर्शियल मिशन में पायलट की भूमिका निभाने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए और 15 जुलाई को सुरक्षित धरती पर लौटे। यह उपलब्धि भारत की मानव अंतरिक्ष क्षमताओं और वैश्विक तकनीकी साझेदारी में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। पीएम मोदी ने अंतरिक्ष में तकनीक के जरिए विंग कमांडर शुभ्रांशु शुक्ला से अद्भुत संवाद किया।
गौरवशाली उपलब्धि -16
ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को दिखाया आतंक के खिलाफ दम
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया कि अब जवाब केवल कूटनीतिक बयान नहीं होंगे। 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। इस अभियान के तहत पीओके में स्थित लश्कर, जैश और हिज्बुल के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। चार दिनों तक चले ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने न केवल दुश्मन के हमलों को विफल किया, बल्कि यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ नीति अब ‘सहनशीलता’ नहीं बल्कि ‘निर्णायक प्रतिकार’ की है। यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री मोदी के उस सिद्धांत का प्रतीक बना कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
गौरवशाली उपलब्धि -15
महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने बनाया महा रिकॉर्ड
पीएम मोदी के नेतृत्व में इस साल की शुरूआत आस्था के उस पर्व से हुई, जिसे पूरी दुनिया ने आश्चर्य और आस्था के मिले-जुले भावों से देखा। 13 जनवरी 2025 से प्रयागराज में शुरू हुआ महाकुंभ भारत की सांस्कृतिक शक्ति का विराट प्रदर्शन बन गया। 26 फरवरी 2025 तक चले इस आयोजन ने दुनिया को दिखाया कि आस्था और आधुनिक प्रबंधन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। 38 दिनों में लगभग 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में यह महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और मानवीय प्रबंधन प्रयोग बना। महाकुंभ ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ आत्मविश्वास से आगे बढ़ा सकता है। यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा। इसी साल यूनेस्को द्वारा दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया जाना भारत की सांस्कृतिक जीत रही। यह निर्णय भारतीय सभ्यता के मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने वाला साबित हुआ।
गौरवशाली उपलब्धि -14
लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर मोदी ने रचा इतिहास
लगातार दो कार्यकाल पूरा करने के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उन्होने 2014 में 26 मई को पहली और 30 मई 2019 को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। बता दें कि नरेंद्र मोदी आजादी के बाद जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। इसी के साथ लगातार 10 साल बहुमत के साथ केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार चलाने वाले मोदी इकलौते नेता हैं। रोचक तथ्य यह है कि 1962 के बाद पहली बार कोई सरकार अपने दो कार्यकाल पूरे करने के बाद तीसरी बार सत्ता में आई है। इसी के साथ मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नेताओं की सूची में शामिल हो चुके हैं। उनसे पहले नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इंदिरा गांधी ने 1966 में पहली, 1967 में दूसरी और 1971 में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने भी तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, इंदिरा और वाजपेयी ने पांच-पांच साल के पहले दो कार्यकाल पूरे नहीं किए।
गौरवशाली उपलब्धि -13
भारत मंडपम में नटराज की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा
भारत मंडपम में लगाई गई नटराज की यह मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसकी ऊंचाई 27 फीट और चौड़ाई 21 फीट है। वहीं इस मूर्ति का वजन लगभग 18 टन है। इस मूर्ति को लॉस्ट वैक्स तकनीक के माध्यम से अष्टधातु से बनाया गया है। इस मूर्ति का निर्माण श्री राधाकृष्णण की अगुआई में शिल्प शास्त्र में लिखे गए सभी नियमों और सिद्धातों का पालन करते हुए किया गया है। इस प्रतिमा को जिस लॉस्ट वैक्स तकनीक के माध्यम से बनाया गया है, उसका पालन चोल काल से किया जा रहा है। शिव नटराज की यह मूर्ति अनंत शक्ति का प्रतीक है। ईश्वर का यह स्वरूप धर्म, दर्शन, कला, शिल्प और विज्ञान का समन्वय है।
गौरवशाली उपलब्धि -12
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना भारत
चंद्रयान-3 14 जुलाई 2023 को 41 दिन की चंद्रमा की यात्रा पर रवाना हुआ था और 23 अगस्त 2023 को इसने सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की। इसके साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इसके साथ ही चंद्रमा की सतह पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। भारत से पहले चांद पर पूर्ववर्ती सोवियत संघ, अमेरिका और चीन ही सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ कर पाए हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कोई भी देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ नहीं कर पाया है, और अब भारत के नाम इस उपलब्धि को हासिल करने का रिकॉर्ड हो गया है। 4 साल में भारत के दूसरे प्रयास में चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के लैंडर ‘विक्रम’ ने 26 किलोग्राम के रोवर ‘प्रज्ञान’ के साथ योजना के मुताबिक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में सफलतापूर्वक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की। इस तरह इस टेक्नोलॉजी में भारत ने महारत हासिल कर ली और इसको लेकर पूरे देश में जश्न का माहौल है।
गौरवशाली उपलब्धि -11
ITPO कन्वेंशन कॉम्प्लेक्स दुनिया के टॉप 10 कॉम्प्लेक्स में शामिल
दिल्ली के प्रगति मैदान में स्थित भारत का ITPO कॉम्प्लेक्स दुनिया के टॉप 10 कन्वेंशन कॉम्प्लेक्स में शामिल हो गया है। यह जर्मनी के हनोवर एग्जीबिशन सेंटर और शंघाई के नेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर को टक्कर देता है। यह कॉम्प्लेक्स ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक सिडनी ओपेरा हाउस से अधिक बड़ा है। ओपेरा हाउस में जहां तकरीबन 5,500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है वहीं ITPO कॉम्प्लेक्स में 7,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। इस तरह यह जर्मनी के हनोवर एग्जीबिशन सेंटर और शंघाई के नेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर को टक्कर देता है। इस कन्वेंशन सेंटर को वैश्विक पैमाने पर बड़े सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थान बनाती है। प्रदर्शनी सभागारों में उत्पाद, नवोन्मेष और नये विचारों का प्रदर्शन करने के लिए यह आधुनिक स्थल हैं।
गौरवशाली उपलब्धि -10
सूरत की डायमंड एक्सचेंज दुनिया की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग
गुजरात का सूरत शहर वैसे तो अपने डायमंड कारोबार के लिए जाना जाता है लेकिन अब सूरत के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। सूरत में चार साल में तैयार हुए सबसे बड़े डायमंड एक्सचेंज के ऑफिस ने अमेरिका के पेंटागन की बिल्डिंग को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका के पेंटागन को अभी तक दुनिया की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग माना जाता था। यानि कि इस बिल्डिंग में सबसे ज्यादा कर्मचारी एक साथ काम करते थे लेकिन अब सूरत के डायमंड एक्सचेंज को ये तमगा मिला है। पेंटागन को पीछे छोड़कर डायमंड एक्सचेंज की बिल्डिंग दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग बन गई है।

गौरवशाली उपलब्धि -9
G20 भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का बड़ी मिसाल
जी20 का नई दिल्ली में 9-10 सितंबर 2023 को सफल समिट का आयोजन हुआ। इसके साथ ही भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता का बड़ा उदाहरण बना। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन पर सभी देशों की सहमति बनी, जिसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया। “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” की थीम के साथ भारत ने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंच दिया। अफ्रीकी संघ को G20 की स्थायी सदस्यता दिलाना भी इस सम्मेलन की ऐतिहासिक उपलब्धियों में शामिल रहा।
गौरवशाली उपलब्धि -8
हुबली स्टेशन पर दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म
दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे प्लेटफार्म भारत के कर्नाटक राज्य के हुबली में है, जिसकी कुल लम्बाई 1,505 मीटर है। इससे पहले उत्तरप्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म था जिसकी लंबाई 1366.33 मीटर है लेकिन अब यह प्लेटफार्म दूसरे नंबर पर आ गया है। हुबली रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 8 दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है। इसकी लंबाई 1507 मीटर है। यानी यह डेढ़ किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा है। पीएम मोदी ने 12 मार्च 2023 को इस प्लेटफॉर्म को देश को समर्पित किया है। इस रेलवे स्टेशन का पूरा नाम सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली स्टेशन है। कर्नाटक के हुबली रेलवे स्टेशन का नाम दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज हो गया है। यह भारतीय रेलवे में दक्षिण-पश्चिम रेलवे जोन का जंक्शन है। पीएम मोदी ने इस पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन को देश को समर्पित किया है।
गौरवशाली उपलब्धि -7
कोरोना काल में वैक्सीन से वैश्विक मानवता की सेवा
भारत ने जनवरी 2021 में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू किया और “वैक्सीन मैत्री” पहल के तहत दुनिया के अनेक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई। Serum Institute of India और Bharat Biotech द्वारा निर्मित वैक्सीन 100 से अधिक देशों तक पहुंची। भारत में 220 करोड़ से अधिक डोज लगाई गईं, जिससे करोड़ों लोगों की जान बचाने में मदद मिली। इस पहल ने साबित किया कि संकट के समय भारत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए खड़ा रहने वाला राष्ट्र है।
गौरवशाली उपलब्धि -6
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’
देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में तैयार 182 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे विशालकाय प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का 31 अक्टूबर 2018 को अनावरण किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की जयंती पर इसका अनावरण किया। खास बात ये है कि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के अनावरण के लिए देशभर की 30 छोटी-बड़ी नदियों का जल लाया गया था, जिसमें गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी और ब्रह्मपुत्र आदि शामिल हैं। पीएम मोदी ने इन्हीं 30 नदियों के जल से प्रतिमा के पास स्थित शिवलिंग का अभिषेक किया। इस दौरान 30 ब्राह्मणों ने मंत्रों का जाप भी किया। मूर्ति के निर्माण में 70,000 टन सीमेंट, 18,500 टन मजबूत लोहा, 6,000 टन स्टील और 1,700 मीट्रिक टन कांसे का प्रयोग किया गया है।
गौरवशाली उपलब्धि -5
विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, नरेंद्र मोदी स्टेडियम
विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम है। इसका उद्घाटन 2020 में किया गया और इसमें 1,32,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता है, जो दुनिया के किसी भी क्रिकेट स्टेडियम की तुलना में सबसे अधिक है। यह भारत का सबसे बड़ा स्टेडियम है। नरेन्द्र मोदी स्टेडियम को 700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है जो कि 63 एकड़ पर फैला एक विशाल मैदान है। इस मैदान में 76 कार्पोरेट बॉक्स, 4 ड्रेसिंग रूम के अलावा 3 प्रेक्टिस ग्राउंड भी बनाया गए हैं। एक साथ 4 ड्रेसिंग रूम वाला यह दुनिया का पहला स्टेडियम हैं, बारिश का पानी को बाहर निकलने के लिए यहां आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया हैं, जिसके चलते यहां बारिश बंद होने के आधे घंटे के भीतर मैच मैच शुरू किया जा सकता है।
गौरवशाली उपलब्धि -4
दस हजार फीट की ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी सुरंग अटल सुरंग
अटल सुरंग 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित विश्व की सबसे लंबी सुरंग है। यह टनल मनाली को लेह से जोड़ती है। यह सुरंग मनाली और लेह के बीच की दूरी को 46 किलोमीटर तक कम करती है और यात्रा के समय को भी 4 से 5 घंटे कम कर देती है। यह 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जो कि मनाली को पूरे साल लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सुरंग को समुद्र तल से 3,000 मीटर (10,000 फीट) की ऊंचाई पर हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी में आधुनिक तकनीक के साथ बनाया गया है। टनल के भीतर सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया है। यह करीब 10.5 मीटर चौड़ी और 5.52 मीटर ऊंची है। पीएम मोदी ने 3 अक्टूबर 2020 को किया इसका उद्घाटन किया था। यह देश की पहली ऐसी सुरंग है जिसमें मुख्य सुरंग के भीतर ही बचाव सुरंग बनाई गई है। दुनिया की सबसे लंबी अटल सुरंग को आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा 10 हजार फीट से ऊपर दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग’ के रूप में प्रमाणित किया गया है।
गौरवशाली उपलब्धि -3
चिनाब रेल आर्क पुल दुनिया का सबसे ऊंचा पुल
चिनाब रेल पुल आर्क पुल की कैटेगरी में यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल है। चिनाब नदी पर बना रेलवे ब्रिज 3 किलोमीटर लंबा और 1,178 मीटर ऊंचा है। जम्मू कश्मीर के दो हिस्सों को जोड़ते इस पुल का एक हिस्सा रेयासी (Reasi) और दूसरा हिस्सा बक्कल, उधमपुर में है। यह पुल पेरिस के एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है। चेनाब रेल पुल नदी तल से 359 मीटर ऊंचा है। बादलों के ऊपर और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच शान से खड़ा यह पुल 260 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बहने वाले हवा का भी मुकाबला कर सकता है। इस पुल को इस तरह बनाया गया है कि अगर रिक्टर स्केल पर 8 की तीव्रता से भी भूकंप आए तो इसका बाल भी बांका नहीं होने वाला। निर्माण कंपनी का दावा है कि यह पुल करीब 120 साल तक खड़ा रह सकता है। इस पुल पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ सकती है। चिनाब रेलवे पुल में कुल 17 पिलर हैं। इसमें 28,660 मिट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है।
गौरवशाली उपलब्धि -2
दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट ओंकारेश्वर डैम पर
मध्य प्रदेश में दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बन रहा है। यह फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट ओंकारेश्वर डैम पर बनाया जा रहा है। दुनिया में अब तक केवल 10 फ्लोटिंग पावर प्लांट हैं। ओंकारेश्वर दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है, इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक ये भी है कि इसको बनाने में कोई विस्थापन नहीं होगा। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की ये परियोजना 600 मेगावाट क्षमता की होगी। पहले चरण में 278 मेगावॉट का प्रोजेक्ट है। परियोजना का निर्माण दो चरणों में हो रहा है। इस पावर प्लांट से 12 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इस परियोजना में नर्मदा नदी के बैक वाटर पर करीब 2 हजार हेक्टेयर में सोलर पैनल्स लगेंगे। हर साल करीब 1200 मिलियन यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन होगा। इस प्लांट से बिजली के अलावा कई फायदे होंगे। भोपाल को 124 दिन पीने के पानी की जितनी जरूरत होगी उतना पानी बच जाएगा।

गौरवशाली उपलब्धि -1
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से विश्व को जोड़ने वाला भारत
पीएम मोदी की पहल पर 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के उस प्रस्ताव से हुई, जिसे 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा गया था। रिकॉर्ड 177 देशों ने इसका समर्थन किया, जिसके बाद 11 दिसंबर 2014 को UN ने इसे मान्यता दी। योग दिवस ने भारत की प्राचीन संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। आज योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक शांति और मानव कल्याण का वैश्विक अभियान बन चुका है।









