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अर्थव्यवस्था मजबूत: मई में मैन्युफैक्चरिंग PMI 3 महीने के टॉप पर, GST कलेक्शन 3.2% बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मई का महीना दोहरी खुशखबरी लेकर आया है। मजबूत घरेलू मांग, नए बिजनेस ऑर्डर्स और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दम पर देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और टैक्स कलेक्शन दोनों में ही शानदार तेजी दर्ज की गई है। ताजा आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के बावजूद भारत का बाजार पूरी मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग PMI 3 महीने के टॉप पर
मई में HSBC India Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) बढ़कर 55.0 पर पहुंच गया, जो अप्रैल के 54.7 से ज्यादा है। यह लगातार विस्तार का संकेत देता है और पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत स्तर भी है। 50 से ऊपर का PMI बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ जारी है। इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह नए ऑर्डरों में तेजी और मजबूत घरेलू मांग रही। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नए बिजनेस के चलते उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को देखते हुए भारतीय कंपनियां किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए पहले से ही कच्चे माल और तैयार माल का अतिरिक्त स्टॉक जमा कर रही हैं।

GST कलेक्शन 3.2% बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये
मई के महीने में देश का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 3.2 फीसदी बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल मई 2025 में 1.88 लाख करोड़ रुपये था। यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों और मांग में सुधार का संकेत देती है। घरेलू लेनदेन से लेकर आयात तक, सभी हिस्सों में टैक्स संग्रह मजबूत रहा। साथ ही GST रिफंड के बाद भी नेट रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई। यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था में खपत और कारोबार दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ रही हैं। मई के दौरान केंद्रीय GST (CGST) संग्रह 37,397 करोड़ रुपये और राज्य GST (SGST) संग्रह 45,143 करोड़ रुपये रहा। वहीं, एकीकृत GST (IGST) संग्रह 51,990 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। आयात से प्राप्त IGST संग्रह में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई में यह 19.1 फीसदी बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। GST रिफंड भी मई में 2.6 फीसदी बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध GST राजस्व लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.3 फीसदी अधिक है।

कर संग्रह में उछाल मजबूत आर्थिक विकास का संकेत
भारत के कर संग्रह में लगातार वृद्धि देश के बढ़ते आधार और बेहतर अनुपालन उपायों को दर्शाता है। इसके साथ ही कर संग्रह में यह उछाल आय में वृद्धि, रोजगार और आय के बढ़ते स्तर को रेखांकित करता है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर संग्रह दोनों में मजबूत वृद्धि बताता है कि भारत का आर्थिक सुधार महत्वपूर्ण गति प्राप्त कर रहा है। भारत की आर्थिक मजबूती विकास को भी गति देने में कारगर साबित होगी। आखिरकार इसका लाभ टैक्सपेयर को ही मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश-प्रतिदिन नई उपलब्धियों को हासिल कर रहा है। आइए एक नजर डालते हैं प्रमुख उपलब्धियों पर…

रिकॉर्ड 709.413 अरब डॉलर पर विदेशी मुद्रा भंडार
देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.053 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 709.413 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। यह भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू इस अवधि में 2.367 अरब डॉलर बढ़कर 562.885 अरब डॉलर हो गई। वहीं, गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई और यह 5.635 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 123.088 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.737 अरब डॉलर हो गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की रिजर्व पोजिशन 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.703 अरब डॉलर हो गई।

इसके पहले 16 जनवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 14.167 बिलियन डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ 701.360 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार सरकार की आर्थिक नीतियों, बेहतर पूंजी प्रवाह, निर्यात में सुधार और आरबीआई की प्रभावी मुद्रा प्रबंधन रणनीति का परिणाम है। मजबूत रिजर्व से न केवल रुपये को स्थिरता मिलती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में भी देश की क्षमता बढ़ती है। बजट से पहले विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना मोदी सरकार के आर्थिक प्रबंधन की एक और बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

इसके पहले देश का मुद्रा भंडार 27 सितंबर 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान 12.59 अरब डॉलर उछलकर 700 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। विदेशी मुद्रा भंडार ने 4 जून, 2021 को 6.842 अरब डॉलर बढ़कर 600 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार किया था। इसके पहले विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था। मोदी राज में विदेशी मुद्रा भंडार दो गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। मोदी राज में देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और इसी वजह से ये भंडार भी बढ़ता जा रहा है, जो हमारे देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करता है। जब देश के पास इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो हमारा पैसा भी मजबूत रहता है और व्यापार और निवेश के लिए अच्छा माहौल बनता है।

2012 के बाद सबसे निचले स्तर 0.25 प्रतिशत पर खुदरा महंगाई
महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया मंदी और महंगाई से जूझ रही है, भारत में मोदी सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाकर बड़ी कामयाबी हासिल की है। सरकार की संतुलित आर्थिक नीतियों, तेजी पकड़ती अर्थव्यवस्था और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट के चलते अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर में जबरदस्त कमी दर्ज की गई है। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर से बोझ हल्का हुआ है और घरेलू बजट को भी थोड़ी राहत की सांस मिली है। देश में खुदरा महंगाई दर अक्टूबर 2025 में गिरकर सिर्फ 0.25 प्रतिशत रह गई है, जो 2012 के बाद का सबसे निचला स्तर है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में रिटेल इंफ्लेशन मात्र 0.25 प्रतिशत पर आ गया, जो कि सितंबर में 1.44 प्रतिशत था। यह मौजूदा Consumer Price Index- CPI सीरीज की अब तक की सबसे कम दर है। सबसे ज्यादा राहत खाद्य वस्तुओं से मिली है यानी खाने-पीने की चीजें सस्ती हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों में कमी, तेल, सब्जियों, फलों, अंडों, फुटवियर, अनाज और ट्रांसपोर्ट की कीमतों में गिरावट से महंगाई में भारी कमी आई है।

थोक महंगाई में भी गिरावट
थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर (WPI) सितंबर 2025 में घटकर 0.13 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार ने सितंबर में थोक महंगाई दर 0.13 प्रतिशत रही है। पिछले महीने अगस्त 2025 में थोक महंगाई दर 0.52 प्रतिशत थी। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार खाद्य, ईंधन और प्राथमिक वस्तुओं सहित ज्यादातर श्रेणियों में महंगाई कम हुई है। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई में भी कमी दर्ज की गई। महंगाई दर में गिरावट का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई नरमी है, जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिल रहा है। दाल, सब्जियां, फल, अनाज, चीनी, अंडे और घरेलू वस्तुओं की कीमतों में गिरावट से महंगाई में यह राहत आई है।

आम आदमी को राहत, अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर कम होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। इससे आम जरूरत की चीजें सस्ती होने लगती हैं। जो आम जनता के जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करती है। यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है। महंगाई से मिली राहत के लिए मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ की जा रही है। अमेरिकी टैरिफ वॉर, कोरोना महामारी, हमास- इजरायल संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से इस समय पूरा विश्व मंदी और महंगाई से जूझ रहा है। अमेरिका जैसे सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देश भी महंगाई को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे में भारत ने महंगाई पर लगाम लगाकर आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, अर्थव्यवस्था में आई तेजी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी से महंगाई दर में खासी गिरावट देखने को मिली है। इससे मोदी सरकार और देश की जनता को बड़ी राहत मिली है।

20 करोड़ अधिक हुई डीमैट खातों की संख्या
देश में डीमैट खातों की संख्या लगातार रिकॉर्ड बना रही है और अब यह बढ़कर 20 करोड़ के पार पहुंच गई है। शेयर बाजार में तेजी और और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वालों की संख्या में इजाफा होने के साथ ही डीमैट अकाउंट की संख्या भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ट्रेडिंग और शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने के लिए ये खाते जरूरी होते हैं। डिपॉजिटरी फर्म एनएसडीएल और सीडीएसएल के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सितंबर 2025 तक डीमैट खातों की संख्या 20 करोड़ से भी अधिक हो गई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और यह कई देशों की आबादी से ज्यादा है। जुलाई 2025 तक सीडीएसएल के पास करीब 16.1 करोड़ और एनएसडीएल के पास करीब 4.05 करोड़ डीमैट खाते थे, जिन्हें जोड़कर कुल संख्या 20.16 करोड़ तक पहुंच गई है। बीते एक साल में डीमैट खातों की सालाना वृद्धि दर करीब 8.8 प्रतिशत रही है, जिसमें युवाओं का प्रमुख योगदान रहा है।

नए शिखर की ओर सेंसेक्स और निफ्टी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय शेयर बाजार की रिकॉर्डतोड़ रफ्तार जारी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी रोज नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। गुरुवार 26 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी नए शिखर पर पहुंच गए। बाजार खुलने के कुछ देर बाद ही सेंसेक्स 85,425 और निफ्टी 26,065 पर पहुंच गया। इसके पहले बुधवार 25 सितंबर को सेंसेक्स 85000 के ऐतिहासिक स्तर के पार 85,169 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 26000 के लेवल से ऊपर 26,004 के रिकॉर्ड हाई पर बंद हुआ। इसके पहले 20 सितंबर 2024 को सेंसेक्स 84000 के स्तर को पार कर 84544.31 पर बंद हुआ।

मार्केट बंद होने के हिसाब से अगर शेयर बाजार के रिकॉर्ड पर नजर डाला जाए तो सेंसेक्स पहली वार 17 सितंबर को 83 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 83, 079.66 पर बंद हुआ। 29 अगस्त 2024 को सेंसेक्स 82,134.61 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ। जबकि, निफ्टी 25,151.95 के लेवल पर बंद हुआ। इसके पहले 18 जुलाई को सेंसेक्स 81000 का लेवल पार कर 81,343.46 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। जबकि, निफ्टी 24,800.85 के लेवल पर बंद हुआ। इसी महीने 04 जुलाई, 2024 को सेंसेक्स 62.87 अंक मजबूत होकर 80,049.67 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 15.66 अंक उछलकर 24,302.15 के लेवल पर बंद हुआ। इससे पहले 27 जून सेंसेक्स 79000 के लेवल को पार कर 79243 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 25 जून को 78000 के लेवल को पार कर 78053 पर और निफ्टी 23700 का लेवल पार कर 23721 पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 18 जून को 77,301 पर बंद हुआ। 3 जून, 2024 को बीएसई सेंसेक्स 76000 के स्तर को पार करते हुए 76,469 पर बंद हुआ। इसके पहले 10 अप्रैल, 2024 बीएसई का सेंसेक्स 75,000 के पार 75,038.15 पर बंद हुआ। जबकि एनएसई का निफ्टी 111.05 अंक की बढ़त के साथ 22,753.80 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले 6 फरवरी को सेंसेक्स पहली बार 74000 के पार 74,085.99 के स्तर पर बंद हुआ।

इसके पहले 15 जनवरी, 2024 को बीएसई का सेंसेक्स पहली बार 73,000 के पार 73,327 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 22,082 के लेवल पर पहुंच गया। इससे पहले 27 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 72,000 के पार निकल 72,038 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 21654 अंक पर बंद हुआ। 15 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 71,483 के लेवल पर, जबकि निफ्टी 21456 के लेवल पर बंद हुआ। एक दिन पहले ही 14 दिसंबर को सेंसेक्स 70000 का लेवल पार करते हुए 70514 पर बंद हुआ और निफ्टी भी 21000 से ऊपर जाकर 21,182 पर बंद हुआ। इसके पहले 5 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 69,000 के लेवल को पार कर 69,168 के स्तर पर खुला और निफ्टी भी अपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 20,000 के पार 20,702 पर पहुंच गया।

इसके पहले सेंसेक्स 4 दिसंबर, 2023 को 68 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 68865.12 पर बंद हुआ। इससे पहले 19 जुलाई, 2023 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 67,097.44 के स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले सेंसेक्स 14 जुलाई, 2023 को 66 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 66060.90 पर बंद हुआ। इसके पहले सेंसेक्स 3 जुलाई, 2023 को 65 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 65, 205.05 पर बंद हुआ था और 30 जून, 2023 को 64 हजार के पार पहुंच 64,718.56 के लेवल पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास पर नजर डालें तो सेंसेक्स पहली बार 30 नवंबर, 2022 को 63000 के पार बंद हुआ। यह 24 नवंबर,2022 को 62000 के आंकड़े के पार जाकर बंद हुआ है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने 01 नवंबर, 2022 को नया रिकॉर्ड कायम करते हुए 61 हजार के ऊपर बंद हुआ। इसके पहले 24 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स 60,000 के पार, 16 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स 59,000 के पार, 03 सितंबर, 2021 को 58,000 और 31 अगस्त, 2021 को 57,000 के पार गया था।

इसके पहले सेंसेक्स ने 18 अगस्त 2021 को 56,000 और 13 अगस्त, 2021 को 55,000 अंक के स्तर के पार किया। सेंसेक्स इसी महीने 4 अगस्त को पहली बार 54000 के आंकड़े को पार किया। यह 22 जून को 53,000 के लेवल को पार कर नए शिखर पर पहुंचा था। इसके पहले 15 फरवरी, 2021 को शेयर बाजार के बीएसई सेंसेक्स ने 52,000 के लेवल को पार कर रिकॉर्ड बनाया था। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सेंसेक्स ने जून 2014 में पहली बार 25 हजार के स्तर को छुआ था। मोदी राज में पिछले 6 साल में 25 हजार से 50 हजार तक के सफर तय कर सेंसेक्स दो गुना हो गया है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद कोरोना काल में भी आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।

हांगकांग को पछाड़ भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत हर मोर्चे पर नए-नए रिकार्ड बना रहा है। 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन भारतीय शेयर बाजार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बााजार बन गया। भारत ने यह स्थान हांगकांग के स्टॉक मार्केट को पछाड़कर प्राप्त किया है। 22 जनवरी को बाजार बंद होने पर हांगकांग के स्टॉक मार्केट का कुल मार्केट कैप 4.29 ट्रिलियन डॉलर था। जबकि भारतीय स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप 4.33 ट्रिलियन डॉलर था। इसी के साथ भारतीय शेयर बाजार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बन गया। इसके पहले 29 नवंबर 2023 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज- BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर के पार निकला था। भारत मई 2021 में तीन ट्रिलियन डॉलर के क्लब में शामिल हुआ था। मई 2007 में बीएसई-लिस्टेड कंपनियों ने 1 ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप की उपलब्धि हासिल की थी। इसे दोगुना होने में 10 साल का समय लग गया और जुलाई 2017 में मार्केट कैप 2 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा। मई 2021 में मार्केट कैप 3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया था। 

वैश्विक बाजारों में भारतीय शेयर बाजार मार्केट के लिहाज से अब अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथे स्थान पर है। अब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। लगभग 50.86 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी बाजार है। इसके बाद 8.44 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन दूसरे और 6.36 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे स्थान पर है।

भारत में निवेश करना चाहते हैं दुनिया भर को अरबपति
ईरान- इजरायल और रूस-यूक्रेन संकट के कारण जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था डांवाडोल हाल में है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था तमाम चुनौतियों के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, जिससे विदेशी निवेशकों की भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। दुनिया भर के अरबपतियों के लिए भारत एक प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हाल ही में आई यूबीएस बिलियनेर एंबिशंस रिपोर्ट के अनुसार भारत जल्द ही निवेश का एक गढ़ बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के अरबपति लोग अपना ज्यादा से ज्यादा पैसा भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में लगाना चाहते हैं क्योंकि यहां की अर्थव्यवास्था मजबूत होने के साथ उनके अनुकूल है। स्विस बैंक की यह रिपोर्ट 75 बाजारों में 2,500 से अधिक अरबपतियों के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें 58 प्रतिशत अरबपतियों ने निवेश के लिए अपने चुने हुए बाजारों के रूप में भारत और दक्षिण पूर्व एशिया को चुना।

दुनिया पर मंडरा रही मंदी की आशंका, लेकिन भारत को खतरा नहीं- ब्लूमबर्ग
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए ताजा सर्वे के अनुसार अगले एक साल में दुनिया के कई देशों के सामने मंदी का संकट मंडरा रहा है। सर्वे की माने तो एशियाई देशों के साथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है। कोरोना लॉकडाउन और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका, जापान और चीन जैसे देशों में मंदी का खतरा कहीं ज्‍यादा है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत को मंदी के खतरे से पूरी तरह बाहर बताया गया है। ब्लूमबर्ग सर्वे के अनुसार भारत ही ऐसा देश है जहां, मंदी की संभावना शून्य यानी नहीं के बराबर है। ब्लूमबर्ग सर्वे में एशिया के मंदी में जाने की संभावना 20-25 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका के लिए यह 40 और यूरोप के लिए 50-55 प्रतिशत तक है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के अगले वर्ष मंदी की चपेट में जाने की 85 प्रतिशत संभावना है।

जापान को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में इस समय भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी रह गए हैं। देश के लिए अच्छी खबर यह भी है कि भारत जल्द ही जर्मनी को पछाड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।

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