देश के किसी भी शहर के व्यस्त बाजार में चले जाइए—नुक्कड़ पर चायवाला, ठेले पर सब्जी बेचती महिला या फुटपाथ पर जूते ठीक करता मोची जरूर दिख जाएगा। ये वही लोग हैं जो सुबह से देर रात तक मेहनत करके हमारी शहरी जिंदगी को चलाते हैं। इनके बिना शहर की रफ्तार थम सी जाएगी, लेकिन इन्हें मुख्यधारा की आर्थिक व्यवस्था में वह जगह नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार थे।
लंबे समय तक इनकी सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बैंक से आसान लोन नहीं मिलता था। मजबूरी में ये लोग ऊंचे ब्याज वाले अनौपचारिक कर्ज पर निर्भर रहते थे, जिससे कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता था। इसी स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1 जून 2020 को ‘पीएम स्वनिधि’ योजना शुरू की। इस योजना ने अब छह साल पूरे कर लिए हैं।
PM SVANidhi ने रेहड़ी-पटरी और छोटे विक्रेताओं के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है। ✨
सुलभ ऋण, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा और वित्तीय सशक्तिकरण के माध्यम से लाखों स्ट्रीट वेंडर्स ने अपने कारोबार को नई गति दी, आय बढ़ाई और आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाए।
देखिए देशभर से बदलाव,… pic.twitter.com/VyqrH7wJVw
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पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य सिर्फ वित्तीय सहायता देना नहीं था, बल्कि रेहड़ी-पटरी वालों को स्वरोजगार, स्वावलंबन और स्वाभिमान से जोड़ना था। यह योजना शहरी गरीबों को सम्मान और अवसर दोनों देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी गई। कोरोना महामारी के समय शुरू हुई यह योजना आज करोड़ों परिवारों की आजीविका का सहारा बन चुकी है। इसके मजबूत प्रभाव को देखते हुए मोदी सरकार ने इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है, जिससे साफ है कि यह पहल अब लंबे समय तक शहरी अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहने वाली है।
6 years of empowering street vendors!
Launched in 2020, the #PMSVANidhi scheme has proved to be more than financial support for street vendors and has given them a sense of identity & formal recognition for their contribution to the economy.#6YearsOfPMSVANidhi @MoHUA_India… pic.twitter.com/rYdkctFiSZ
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आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की यह प्रमुख माइक्रो-क्रेडिट योजना अब देशभर में बड़ा असर दिखा रही है। अब तक 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को इसका लाभ मिला है और 1 करोड़ 12 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। यह योजना छोटे विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन चुकी है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत बिना गारंटी लोन है, जिसने लाखों लोगों के लिए बैंकिंग सिस्टम के दरवाजे खोल दिए हैं। सरकार की क्रेडिट गारंटी के सहारे अब छोटे विक्रेता आसानी से लोन ले पा रहे हैं और धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं। पहले जो लोग बैंक से दूर थे, अब बैंकिंग उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।
सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लाखों परिश्रमी साथियों को आत्मनिर्भर बनाने में #6YearsOfPMSVANidhi योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बिना गारंटी ऋण, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा और सम्मानजनक आजीविका, ये नए भारत के सशक्तिकरण की यात्रा है। pic.twitter.com/WzyFITSbqT
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योजना के तहत तीन चरणों में लोन उपलब्ध कराया जाता है—15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक। समय पर भुगतान करने पर ब्याज सब्सिडी और आगे बड़े लोन का अवसर मिलता है, जिससे छोटे कारोबारियों को अपना काम बढ़ाने में मदद मिल रही है। यह मॉडल छोटे व्यापार को धीरे-धीरे मजबूत बनाने पर आधारित है।
गाजियाबाद में एक मंदिर के पास छोटे से स्टॉल से शुरुआत करने वाली बबीता शर्मा की कहानी आज #PMSVANidhi योजना के प्रभाव को दर्शाती है। सरकार से मिले वित्तीय सहयोग से बबीता ने अपने व्यवसाय का विस्तार कियाआय में बढ़ोतरी की। #6YearsofPMSVANidhi pic.twitter.com/6twHyJCB70
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पीएम स्वनिधि ने डिजिटल भारत की दिशा में भी बड़ा बदलाव किया है। अब रेहड़ी-पटरी वाले भी UPI और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनका कारोबार ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित हो गया है। नकद पर निर्भरता कम होने से उनकी आर्थिक व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है।
कभी संघर्षों से घिरी ज़िंदगी, आज आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही है।
करनाल के इस मेहनतकश उद्यमी की कहानी बताती है कि #PMSVANidhi योजना सिर्फ़ ऋण नहीं, बल्कि नए सपनों, नए अवसरों और आत्मनिर्भरता का भरोसा देती है।
छोटे कारोबारियों की बड़ी उड़ान, विकसित भारत की मजबूत… pic.twitter.com/JOvWaMYpXt
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करीब 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है और उनके जरिए 841 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनका मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा बताता है कि यह योजना सिर्फ कर्ज देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।

डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए कैशबैक प्रोत्साहन भी दिया जाता है, जिसके तहत विक्रेताओं को साल में 1,600 रुपये तक का लाभ मिलता है। इसके अलावा ब्याज सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों तक पहुंचे हैं, जिससे उनकी आय पर सकारात्मक असर पड़ा है।

दूसरे चरण का लोन चुकाने के बाद वेंडर्स को UPI-linked RuPay क्रेडिट कार्ड भी मिलता है, जिसकी सीमा 30,000 रुपये तक होती है। यह कार्ड आपातकालीन जरूरतों और थोक खरीद में मदद करता है, जिससे छोटे व्यापारियों की आर्थिक निर्भरता कम होती है और उन्हें तुरंत वित्तीय सहारा मिल जाता है।
रांची के इस छोटे व्यवसायी की कहानी बताती है कि अवसर मिलने पर सपने कैसे नई उड़ान भरते हैं।#PMSVANidhi योजना से मिले सहयोग ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का रास्ता भी खोला।
छोटे व्यापारियों का सशक्तिकरण ही विकसित भारत की मजबूत… pic.twitter.com/UMJQgMG3I3
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इस योजना का एक बड़ा असर महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में सामने आया है। अब तक 34.81 लाख महिला रेहड़ी-पटरी वालों को इसका लाभ मिला है, यानी इस योजना के कुल लाभार्थियों में से एक बड़ा हिस्सा लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे शहरी अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक स्वतंत्रता दोनों बढ़ी हैं।

करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी समाज के हाशिए पर रहने वाले कमजोर वर्गों से आते हैं, जिससे यह साफ होता है कि योजना का फोकस समावेशी विकास पर रहा है। यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।

लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है और वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं। कई लोग अब अपने छोटे कारोबार का विस्तार भी कर रहे हैं। योजना का असर जमीन पर साफ दिखाई देता है। लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से ऋण लिया। जिससे उनकी वित्तीय साख मजबूत हुई है। करीब 30 प्रतिशत लोगों ने बाद में अतिरिक्त ऋण लेकर अपने व्यवसाय को और बढ़ाया, जो उनके आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है।

‘स्वनिधि से समृद्धि’ पहल के तहत लाभार्थियों और उनके परिवारों को आठ प्रमुख सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य, बीमा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। इससे पूरा परिवार एक मजबूत सुरक्षा कवच के दायरे में आ रहा है और जीवन अधिक स्थिर हो रहा है। इसके साथ ही वित्तीय साक्षरता और डिजिटल ट्रेनिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। FSSAI के सहयोग से स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे छोटे विक्रेताओं के उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ी है और ग्राहकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
6 वर्षों में भारत की सड़कों पर कारोबार करने वाले लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की कहानी बदल गई है।
जो कारोबार कभी केवल नकद लेन-देन तक सीमित था, वह आज QR कोड, बैंक खातों और औपचारिक ऋण व्यवस्था से जुड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है। #PMSVANidhi के माध्यम से 75 लाख से अधिक स्ट्रीट… pic.twitter.com/72MTqS4Xs1
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शहरों की गलियों से लेकर कस्बों तक, पीएम स्वनिधि ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है। अब रेहड़ी-पटरी वाले सिर्फ रोजगार नहीं चला रहे, बल्कि औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनकर सम्मान के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनकी सामाजिक और आर्थिक पहचान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।
वाराणसी की सुशीला जी की मुस्कान, आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान है। #PMSVANidhi योजना से मिले सहयोग ने उनके छोटे व्यवसाय को नई मजबूती दी, आय बढ़ाई और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने का अवसर दिया।
जब छोटे उद्यमी सशक्त होते हैं, तभी विकसित भारत का सपना साकार होता है। 🇮🇳… pic.twitter.com/JG2c6nBsM3
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यह योजना शहरी विकास की सोच में बड़े बदलाव का संकेत देती है, जहां छोटे विक्रेताओं को अब हाशिए पर नहीं बल्कि विकास के साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव भारत के समावेशी और आत्मनिर्भर विकास मॉडल को और मजबूत करता है। यह छह साल की यात्रा दिखाती है कि सही नीति, भरोसा और अवसर मिलें तो छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। पीएम स्वनिधि ने रेहड़ी-पटरी वालों को सिर्फ आर्थिक सहारा नहीं दिया, बल्कि उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और एक नई पहचान भी दी है।









