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वादा नंबर 20 : सपा का घोषणा पत्र केवल झूठे चुनावी वादों का मायाजाल

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साल 2012 में उत्तर प्रदेश की जनता के सामने समाजवादी पार्टी ने वादों का ऐसा रंगीन सपना परोसा था, जिसने युवाओं, किसानों, बेरोजगारों, बुनकरों और अल्पसंख्यकों तक को यह विश्वास दिला दिया कि सत्ता में आते ही उनकी जिंदगी बदल सकती है। मुफ्त लैपटॉप से लेकर बेरोजगारी भत्ते तक, किसानों की कर्जमाफी से लेकर मुस्लिम आरक्षण तक और सच्चर समिति की सिफारिशों से लेकर मुफ्त बिजली तक, घोषणा-पत्र में ऐसे वादों की लंबी फेहरिस्त थी जिनके दम पर समाजवादी पार्टी ने बहुमत तो हासिल कर लिया, लेकिन सत्ता के गलियारों में पहुंचने के बाद इन वादों के पूरा होने के जनता का सपना चूर-चूर हो गया। जनता से किए गए वादे चुनावी मंचों पर गूंजने वाले और केवल वोट बटोरने का राजनीतिक हथियार साबित हुए। आज, एक दशक से अधिक समय बाद जब उन घोषणाओं को हकीकत की कसौटी पर परखा तो तस्वीर उतनी चमकदार दिखाई नहीं दी, जितनी तब चुनावी पोस्टरों और भाषणों में दिखाई गई थी।उम्मीदें तो आसमान पर, लेकिन वादे जमीन पर
लोकतंत्र में घोषणा-पत्र जनता के साथ किया गया एक सार्वजनिक अनुबंध होता है। दरअसल, 2012 का सपा का घोषणा-पत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे दस्तावेज के रूप में दर्ज हुआ, जिसने उम्मीदें तो आसमान तक पहुंचा दीं, लेकिन कई वादे जमीन पर उतरने से पहले ही दम तोड़ते नजर आए। कुछ योजनाएं आधी-अधूरी रहीं, कुछ सीमित दायरे में सिमट गईं और कुछ ऐसे वादे थे जो कानूनी तथा प्रशासनिक वास्तविकताओं के सामने टिक ही नहीं सके। सवाल यह है कि यदि कोई वादा संवैधानिक रूप से संभव नहीं था तो उसे घोषणा-पत्र में शामिल ही क्यों किया गया? यदि किसानों, युवाओं और अल्पसंख्यकों के लिए बड़े-बड़े दावे किए गए थे, तो उनके परिणाम अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं आए?आइए, समाजवादी पार्टी के 2012 के घोषणा-पत्र की परत-दर-परत पड़ताल करते हैं और इस पर नजर डालते हैं कि चुनावी वादों और हकीकत में कितना अंतर है….वादा नंबर-20 : फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ेगा
किसानों के लिए किसान आयोग का गठन किया जाएगा और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उनकी उत्पादन लागत में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर तय किया जाएगा।
हकीकत: अधिकारियों का कहना था कि MSP तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है, इसलिए राज्य सरकार केवल इसकी सिफारिश ही कर सकती थी। गन्ने के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) सरकार के पहले वर्ष में सामान्य किस्म के लिए 240 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 280 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। लेकिन चीनी मिलों की आर्थिक समस्याओं के कारण अगले तीन वर्षों तक इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। बाद में नवंबर 2016 में इसे बढ़ाकर 305 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। हालांकि राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के विधान परिषद सदस्य चौधरी मुश्ताक के अनुसार, उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद के अध्ययन के मुताबिक गन्ने की उत्पादन लागत लगभग 354 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी किसानों को उनकी वास्तविक लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल सका और वे आर्थिक दबाव झेलते रहे।वादा नंबर-19 : किसानों की कर्जमाफी और जमीन कुर्क नहीं होगी
किसानों द्वारा अपनी जमीन गिरवी रखकर लिए गए ऋण माफ किए जाएंगे और जमीन कुर्क करने या जब्त करने की प्रथा समाप्त की जाएगी।
हकीकत: सरकार ने कुछ किसानों के ऋण माफ किए, लेकिन यह राहत सीमित दायरे में रही। केवल उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से लिए गए कुछ ऋणों को ही माफी के दायरे में रखा गया। व्यापक स्तर पर सभी किसानों के भूमि-आधारित ऋण माफ नहीं हुए। हालांकि जमीन कुर्की की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने राहत देने की बात कही, लेकिन किसानों के सभी कर्जों के पूर्ण समाधान का वादा पूरी तरह साकार नहीं हो पाया। इसके अलावा अधिकतम 50,000 रुपये तक का ही ऋण माफ किया गया। यह लाभ भी केवल उन किसानों को मिला जिन्होंने अपने ऋण का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा पहले ही जमा कर दिया था। लाखों किसानों को इसका लाभ ही नहीं मिला।वादा नंबर-18 : छोटे और सीमांत किसानों को पेंशन दी जाएगी
हकीकत: दरअसल, कम आय वाले किसानों को किसान पेंशन योजना के तहत पेंशन मिलती रही, लेकिन यह योजना समाजवादी पार्टी की सरकार आने से पहले ही लागू थी। यह योजना केंद्र सरकार की सहायता से संचालित होती थी, इसलिए इसे नई उपलब्धि के रूप में नहीं देखा गया।

वादा नंबर-17 : किसानों के लिए फसल बीमा योजना लागू की जाएगी
हकीकत: फसल बीमा योजना पहले से ही लागू थी और इसके संचालन तथा नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास थी। इसलिए यह कोई नई योजना नहीं थी जिसे समाजवादी पार्टी सरकार ने शुरू किया हो।

वादा नंबर-16 : सांप्रदायिक दंगों को नहीं होने दिया जाएगा
हकीकत: वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में देश के सबसे गंभीर सांप्रदायिक दंगों में से एक हुआ। इस हिंसा में 62 लोगों की मौत हुई और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। इसके बाद सरकार की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठे।वादा नंबर-15 : अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को मेडिकल शिक्षा में आरक्षण दिया जाएगा
हकीकत: राज्य के मेडिकल कॉलेजों में ऐसा कोई आरक्षण प्रावधान लागू नहीं किया गया। अर्थात् घोषणा-पत्र में किया गया यह वादा हकीकत में साकार नहीं हो सका और मेडिकल शिक्षा में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अलग आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं हुई।

वादा नंबर-14 : मुस्लिम समुदाय लगभग 18 प्रतिशत अलग आरक्षण
हकीकत: सरकार इस वादे को लागू नहीं कर सकी, क्योंकि इसके लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता थी। संविधान में संशोधन राज्य सरकार के अख्तियार में ही नहीं था। सिर्फ अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए ऐसा वादा कर दिया गया, जिसे कानूनी बाध्यता के चलते हकीकत नहीं बनना था। इसलिए मुस्लिमों के लिए अलग से 18 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा व्यवहार में लागू नहीं हो पाई।

वादा नंबर-13 : ‘आतंकी’ मुस्लिम युवकों को रिहा किया जाएगा

आतंकवाद के मामलों में फंसाए गए मुस्लिम युवकों को न केवल तुरंत रिहा किया जाएगा, बल्कि उन्हें न्याय दिलाया जाएगा, मुआवजा दिया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हकीकत: सरकार ने आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहे कुछ लोगों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का प्रयास किया, लेकिन यह कदम सरकार के लिए ही उल्टा पड़ा। एक ओर अदालतों ने इस कदम पर रोक लगा दी, दूसरी ओर समाजवादी पार्टी पर आतंकियों की हिमायत करने का आरोप लगा। सरकार अपने इस वादे को लागू नहीं कर सकी। घोषणा-पत्र में किए गए मामलों की वापसी, मुआवजा और दोषी अधिकारियों को दंडित करने जैसे वादे अपेक्षित रूप से पूरे नहीं हो सके।

वादा नंबर-12 : मुस्लिमों की भर्ती के लिए विशेष शिविर लगाएंगे

सरकारी सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती के लिए विशेष भर्ती शिविर आयोजित किए जाएंगे।
हकीकत: इस वादे के अनुरूप न तो विशेष भर्ती अभियान चलाया गया और न ही ऐसे भर्ती शिविर आयोजित किए गए। इसलिए यह वादा व्यवहार में लागू होता दिखाई नहीं दिया।

वादा नंबर-11 : मेधावी मुस्लिम लड़कियों को आर्थिक सहायता
दसवीं कक्षा पास करने वाली उन मुस्लिम लड़कियों को 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 36,000 रुपये से अधिक नहीं है। यह राशि उनकी आगे की पढ़ाई या विवाह के लिए दी जानी थी।
हकीकत: सरकार ने “हमारी बेटी उसका कल” योजना शुरू की। बाद में इसका दायरा बढ़ाकर सभी अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों को शामिल कर लिया गया। शुरुआत में 30,000 रुपये की सहायता दी गई, लेकिन वर्ष 2013-14 में इसे घटाकर 20,000 रुपये कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2014-15 से यह योजना बंद कर दी गई। इस प्रकार घोषणा-पत्र में किए गए मूल वादे के अनुरूप योजना लंबे समय तक नहीं चल सकी।वादा नंबर-10 : बुनकरों और किसानों को मुफ्त बिजली दी जाएगी
हकीकत: सरकार ने बुनकरों और किसानों के लिए कुछ बिजली रियायतों और सब्सिडी संबंधी कदम उठाए, लेकिन पूरे प्रदेश में सभी बुनकरों और किसानों को सार्वभौमिक रूप से मुफ्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इसलिए घोषणा-पत्र में किया गया मुफ्त बिजली का वादा पूर्ण रूप से साकार नहीं हो पाया।

 

वादा नंबर-9 : बेरोजगार युवकों को हर महीने एक हजार का भत्ता
अखिलेश यादव ने युवाओं को आकर्षिक करने के लिए यह वादा किया था। इसके तहत 35 वर्ष से अधिक आयु के बेरोजगार लोगों को प्रति वर्ष 12,000 रुपये का बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
हकीकत: बेरोजगारी भत्ता केवल वर्ष 2012-13 और 2013-14 में वितरित किया गया। इसके बाद इस योजना को बंद कर दिया गया। यानी यह योजना पूरे कार्यकाल में लगातार नहीं चल सकी और वादा सीमित अवधि तक ही लागू रहा।

वादा नंबर-8 : हर रिक्शा चालक को सौर ऊर्जा वाला मुफ्त रिक्शा
समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि प्रत्येक रिक्शा चालक को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मोटर चालित या सौर ऊर्जा से चलने वाला मुफ्त रिक्शा दिया जाएगा।
हकीकत: सरकार ने नगर निकायों में पंजीकृत लोगों को लगभग 8,000 ई-रिक्शा वितरित किए। लेकिन सभी रिक्शा चालकों को मुफ्त रिक्शा देने का वादा पूरा नहीं हो सका और लाभ केवल सीमित संख्या तक ही पहुंचा।

वादा नंबर-7 : 17 पिछड़ी जाति SC की सूची में शामिल करेंगे
हकीकत: सरकार ने वर्ष 2013 में इस संबंध में केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी। दिसंबर 2016 में राज्य सरकार ने इन 17 जातियों को पहले से मौजूद अनुसूचित जातियों की उपजातियों के रूप में अधिसूचित किया। हालांकि अधिकारियों का कहना था कि उन्हें प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवश्यक सरकारी आदेश प्राप्त नहीं हुए थे। इसलिए यह वादा पूरी तरह लागू नहीं हो सका।वादा नंबर-6 : बसपा राज के भ्रष्टाचारियों को जेल भेजेंगे
समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में यह दावा किया था कि उनकी सरकार बनने के बाद बहुजन समाज पार्टी के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी। इसमें दोषियों को जेल भेजा जाएगा।
हकीकत: लोकायुक्त द्वारा सौंपी गई अधिकांश जांच रिपोर्टें सरकार के पास लंबित पड़ी रहीं। बसपा के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ सतर्कता (विजिलेंस) विभाग की रिपोर्टों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपित बसपा विधायक और पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति संबंधी विजिलेंस रिपोर्ट गृह विभाग में लंबित रही। इसी तरह पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामवीर उपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगने वाली रिपोर्टें भी महीनों तक लंबित रहीं।

वादा नंबर-5 : लोकायुक्त को बहु-सदस्यीय संस्था बनाया जाएगा
लोकायुक्त को बहु-सदस्यीय संस्था बनाया जाएगा और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) को उसके अधीन लाया जाएगा।
हकीकत: तत्कालीन लोकायुक्त एन.के. मेहरोत्रा ने अपने कार्यालय को अधिक अधिकार देने की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके विपरीत, सरकार ने लोकायुक्त कार्यालय को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के दायरे से बाहर कर दिया। बाद में लोकायुक्त का कार्यकाल आठ वर्ष तक बढ़ा दिया गया, जिसे मेहरोत्रा को पद पर बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा गया। नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ और राज्यपाल ने सरकार द्वारा प्रस्तावित नामों को खारिज कर दिया। अंततः सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद नए लोकायुक्त की नियुक्ति हुई।

वादा नंबर-4 : 12वीं कक्षा पास सभी छात्रों को लैपटॉप दिया जाएगा
हकीकत: वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश बोर्ड से वर्ष 2012 में 12वीं पास करने वाले छात्रों को लैपटॉप वितरित किए गए। बाद में सरकार ने योजना में बदलाव करते हुए सभी बोर्डों के केवल मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने का निर्णय लिया। इसके लिए लगभग 100 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट निर्धारित किया गया। यानी “सभी छात्रों” को लैपटॉप देने का मूल वादा बाद में सीमित कर दिया गया।

वादा नंबर-3 : 10वीं कक्षा पास प्रत्येक छात्र को टैबलेट दिया जाएगा
हकीकत: वर्ष 2013 में सरकार ने टैबलेट खरीदने के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित कीं, लेकिन कोई भी कंपनी बोली लगाने के लिए आगे नहीं आई। इसके बाद सरकार ने यह योजना ही समाप्त कर दी और किसी छात्र को टैबलेट वितरित नहीं किया गया। इस प्रकार यह वादा पूरी तरह अधूरा रह गया।

वादा नंबर-2 : 10वीं पास छात्राओं को कन्या विद्याधन दिया जाएगा
हकीकत: पहले दो वित्तीय वर्षों में 12वीं पास उन छात्राओं को 30,000 रुपये की सहायता दी गई, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 35,000 रुपये से कम थी। वर्ष 2014 में योजना में बदलाव किया गया और बाद में यह लाभ केवल जिला स्तर पर मेरिट सूची में आने वाली छात्राओं तक सीमित कर दिया गया। इसके लिए वार्षिक बजट में लगभग 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। यानी योजना के दायरे को काफी सीमित कर दिया गया।

वादा नंबर-1 : गरीब छात्रों की उच्च शिक्षा फीस माफ होगी
समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि जिन गरीब छात्रों के माता-पिता की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम होगी, उन सभी छात्रों की उच्च शिक्षा की फीस को माफ किया जाएगा, ताकि वे उच्च अध्ययन कर सकें और पैसे की कमी इसमें आड़े ना आए।
हकीकत: पहले से ही एक ऐसी योजना मौजूद थी जिसके तहत 2 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति (फीस रीइम्बर्समेंट) मिलती थी। इसलिए घोषणा-पत्र में किया गया नया वादा व्यवहार में लागू नहीं हो पाया और इस दिशा में कोई अलग प्रभावी योजना शुरू नहीं की गई।

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