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फौज की तैनाती पर 7 सवाल: सुरक्षा पर चिंता या हार की हताशा?

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण टीएमसी नेताओं की हिंसा  के साथ ही एक बार फिर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर सियासत तेज हो गई है। टीएमसी नेता ममता बनर्जी, कांग्रेस के कपिल सिब्बल समेत कुछ विपक्षी नेता यह आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग मतदाताओं को डराने के लिए भारी संख्या में फोर्स भेज रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन आरोपों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। राज्य के संवेदनशील इतिहास, पूर्व चुनावों में हिंसा की घटनाओं और बूथ कैप्चरिंग जैसे आरोपों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार 2550 कंपनियों की तैनाती की है, ताकि हर मतदाता निर्भय होकर अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। औसतन 1500 मतदाताओं पर एक जवान की मौजूदगी सुरक्षा का भरोसा देती है, न कि डर का माहौल बनाती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई हो। चुनाव आयोग का यह कदम मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है, न कि किसी को भयभीत करने के लिए। ऐसे में जरूरी है कि सुरक्षा को सियासी चश्मे से देखने के बजाय लोकतंत्र की मजबूती के रूप में स्वीकार किया जाए।

आइए, आपको बताते हैं कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए केंद्रीय फोर्सेज की तैनाती पर भी कौन-कौन नेता और क्या सवाल उठा रहे हैं…

फोर्स पर सवाल -1
भारी फोर्स से डराने की कोशिश की जा रही- ममता बनर्जी
बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती पर ममता बनर्जी ने पूछा- क्या डराने की है कोशिश की रही है। ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘चुनाव लोकतंत्र का त्योहार है, किसी की हत्या करने का नहीं।’’ उन्होंने समर्थकों से कहा कि अगर उन्हें किसी भी तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़े तो वे प्राथमिकी दर्ज कराएं। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान कई टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने और चुनावी माहौल को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।

फोर्स पर सवाल -2
भारी केंद्रीय फोर्स के साथ चुनाव की जरूरत क्या- सिब्बल
पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल में मताधिकार छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और भारी मात्रा में सुरक्षा बलों की तैनाती व वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। सिब्बल ने चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह “डिसएनफ्रैंचाइजमेंट का प्रयोग” है। उन्होंने भारी सुरक्षा तैनाती और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा—“फिर चुनाव कराने की जरूरत ही क्या है?”

फोर्स पर सवाल -3
सेंट्रल फोर्स से निर्भय वोट डालेंगे, इसकी क्या गारंटी-माकपा
माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ये जो फौज लेकर आ रहे हैं। तो सेंट्रल फोर्स आने से ही निष्पक्ष चुनाव होगा। लोग निर्भय होकर वोट डालेंगे, ऐसा कोई गारंटी नहीं है। बंगाल में सेवंटीज में कांग्रेस के जमाने में सीआरपीएफ की शुरुआत हुई थी। तब जम्हूरियत को रोंदा गया था। इसलिए लोग उसे नफरत की निगाह से देखते हैं।

फोर्स पर सवाल -4
CRPF से मिलिट्री स्टाइल से सत्ता हथियाने की योजना-मोइत्रा
टीएमसी (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों (2026) के मद्देनजर केंद्रीय बलों की भारी तैनाती पर कड़ा एतराज जताते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मोइत्रा ने एक एक्स पर कहा कि गृह मंत्रालय कश्मीर, मणिपुर और सभी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात सीआरपीएफ की संख्या कम कर रहा है ताकि उन्हें बंगाल में तैनात किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भारी तैनाती के जरिए बंगाल में “मिलिट्री स्टाइल” से सत्ता हथियाने की योजना बना रही है।

फोर्स पर सवाल -5
बंगाल में केंद्र ने टैंक उतारे, युद्ध नहीं चुनाव है- कुलदीप
आम आदमी पार्टी के नेता कुलदीप कुमार ने कहा कि मुझे लगता है कि जिस प्रकार से आज केंद्र सरकार अपनी पावर का मिसयूज कर रही है, एक स्टेट का चुनाव जीतने के लिए। वहां के सारे अफसर रातोंरात बदल दिए जाते हैं। वहां पर छापे पड़ते हैं। चुनाव देख रही एजेंसी पर छापे डाले जाते हैं। वहां CRPF की कंपनियां लगा रही है। टैंक उतार रही है। वहां युद्ध नहीं हो रहे, चुनाव हो रहे हैं। इससे पहले आम आदमी पार्टी के ही नेता अनुराग ढांडा ने भी अपने एक बयान में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सेंट्रल फोर्सेज की तैनाती पर सवाल उठाए थे।

फोर्स पर सवाल -6
पश्चिम बंगाल में ये कैसी कड़ाई है- सुदीप चौधरी
बंगाल चुनाव को लेकर अलग-अलग पार्टियों के नेता तो नेता एंकर भी पार्टी बन गए। एबीपी के एंकर संदीप चौधरी तो निष्पक्षता की बात करते-करते खुद ही टीएमसी के पक्ष में बह गए। चौधरी ने साफ कहा कि पारदर्शी निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए। पर जो पश्चिम बंगाल में हो रहा है, क्या वो और जगह भी हुआ। और ये किस तरह की लड़ाई है और पश्चिम बंगाल में ये कैसी कड़ाई है।

फोर्स पर सवाल -7
वहां कोई आतंकवादी नहीं कि हमला हो जाएगा- पाराशर
इंडिया टीवी की प्राची पाराशर ने एंकरिंग के दौरान कहा कि ऐसा भी क्या है पश्चिम बंगाल में क्या 2550 कंपनियां तैनात कर रहे हैं आप तो ऐसा ऐसा कर रहे हैं जैसे ये यहां पर कोई आतंकवादी हैं जैसे यहां कोई हमला हो जाएगा जैसे युद्ध करने जा रहे हैं। औसत 100 से 150 वोटर्स पर एक जवान तैनात हैं। ऐसा भी क्या है कि हिंसा होती है तो उस पर रोक भी लगती है। टीएमसी वाले आरोप लगाते हैं कि जब से यहां बीजेपी एक्टिव हुई है, तब से पश्चिम बंगाल का माहौल और ज्यादा बिगड़ गया है। इसलिए चुनाव आयोग के लिए शांतिपूर्ण चुनाव कराना अभूतपूर्व चुनौती है।

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