मई 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब देश एक बड़े राजनीतिक बदलाव का गवाह बना था। आज साल 2026 है। वक्त का पहिया घूम चुका है और पीएम मोदी के कार्यकाल को पूरे 12 साल हो गए हैं। भारतीय राजनीति के इतिहास में यह एक ऐसा पड़ाव है, जिसे सिर्फ ‘सत्ता में रहने’ के तौर पर नहीं, बल्कि ‘व्यवस्था को बदलने’ के तौर पर देखा जाएगा। मोदी सरकार ने इन 12 सालों में ‘गवर्नेंस’ के मायने बदल दिए हैं। कहा जाता है कि पहले भारत दो हिस्सों में बंटा था- एक ‘इंडिया’ जो चमक रहा था, और दूसरा ‘भारत’ जो बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा था। पिछले 12 सालों में मोदी सरकार ने इस खाई को पाटने के लिए ‘कल्याणकारी योजनाओं’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। पीएम मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ का बड़ा हिस्सा उन्हीं योजनाओं के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई देता है, जिन्होंने सीधे आम आदमी की जिंदगी को छुआ। गांव की रसोई से लेकर शहर के अस्पताल तक, बैंक खाते से लेकर स्टार्टअप तक- मोदी सरकार ने ऐसी योजनाओं पर जोर दिया, जिन्हें ‘डायरेक्ट बेनिफिट’ और ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ का मॉडल कहा गया। न्यू इंडिया की इस बुनियादी सोच ने देश की राजनीति और विकास की भाषा को हमेशा के लिए बदल दिया है।

आइए एक नजर डालते हैं उन 12 बड़ी योजनाओं पर, जिन्होंने पिछले 12 सालों में न सिर्फ देश की तस्वीर बदली, बल्कि आम भारतीय के जीने का सलीका और उसका आत्मविश्वास भी बदल दिया-
1. प्रधानमंत्री जन धन योजना- हर गांव-जेब तक बैंकिंग
2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना मोदी सरकार की सबसे बड़ी वित्तीय क्रांति मानी जाती है। पहले गांवों में करोड़ों लोगों का बैंक से कोई रिश्ता नहीं था। जन धन योजना ने ‘जीरो बैलेंस अकाउंट’ खोलने का रास्ता आसान किया। सरकार के प्रयासों से करोड़ों बैंक खाते खोले गए और वित्तीय समावेशन को नई रफ्तार मिली। इस योजना ने उस ‘वित्तीय छुआछूत’ को खत्म किया, जहां गरीब बैंक के दरवाजे पर चढ़ने से डरता था। आज इन खातों में करोड़ों रुपये जमा हैं और सबसे बड़ी बात- सरकारी मदद (डीबीटी) सीधे इसी खाते में आती है, जिससे बिचौलियों का धंधा पूरी तरह बंद हो गया। इस योजना का असर कोरोना काल में सबसे ज्यादा दिखाई दिया, जब सरकार ने सीधे महिलाओं और जरुरतमंदों के खातों में पैसे भेजे। DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की रीढ़ यही योजना बनी।

2. उज्ज्वला योजना- धुएं वाली रसोई से गैस चूल्हे तक
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को मोदी सरकार की सबसे सफल सामाजिक योजनाओं में गिना जाता है। पहले गांवों की महिलाएं लकड़ी और उपले के धुएं में खाना बनाने को मजबूर थीं। उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन दिए गए। इससे महिलाओं की सेहत सुधरी, समय बचा और पर्यावरण को भी फायदा मिला। आज ग्रामीण महिलाएं कहती हैं कि अब खाना बनाना आसान है, घर साफ रहता है, और धुएं से होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिल गई है। स्वास्थ्य और समय की बचत दोनों जमीन पर साफ दिखते हैं। आज यह योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे चमकता हुआ उदाहरण है, जिसने ग्रामीण रसोई का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया।

3. आयुष्मान भारत (PM-JAY)- गरीब के इलाज की गारंटी
आयुष्मान भारत योजना ने भारत के हेल्थ सेक्टर का ढांचा ही बदल दिया है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का सालाना मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर दिया गया। गांवों और छोटे शहरों में ऐसे लाखों परिवार थे जो बीमारी के कारण कर्ज में डूब जाते थे। इस योजना ने गरीब को इलाज के खर्च के कारण कर्जदार होने और स्वाभिमान खोने से बचा लिया है। आयुष्मान भारत ने उन्हें देश के बड़े और निजी अस्पतालों तक पहुंच दी। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। यह योजना खासकर कैंसर, हार्ट, और जटिल सर्जरी जैसे खर्चीले मामलों में गरीबों के लिए राहत साबित हुई। आज देश का कोई भी गरीब किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में जाकर बिना एक भी पैसा दिए सम्मान के साथ अपना इलाज करवा सकता है।

4. स्वच्छ भारत मिशन- शौचालय से बदली सामाजिक सोच
2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा सामाजिक बदलाव का माध्यम बना। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद झाड़ू उठाकर इसे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बना दिया। इस योजना के तहत देश भर में गांव और शहरों में करोड़ों शौचालयों का निर्माण किया गया। शुरुआत में इसे सिर्फ स्वच्छता से जोड़ा गया था, लेकिन जमीन पर इसका सबसे बड़ा असर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बच्चों के स्वास्थ्य पर दिखाई दिया। यह योजना देश की सबसे चर्चित और प्रभावी सरकारी मुहिमों में शीर्ष पर रही है। स्वच्छ भारत सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं रही, यह हर भारतीय की आदत और सोच में शामिल हो गई।

5. जल जीवन मिशन- नल से हर घर पानी पहुंचाने का मिशन
जल जीवन मिशन यानी “हर घर नल” योजना का मकसद गांवों तक पाइप से शुद्ध पीने का पानी पहुंचाना था। 2019 में शुरू हुई इस योजना ने ग्रामीण भारत के दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले महिलाएं कई किलोमीटर दूर से पानी लाने के मजबूर थीं। इस मिशन के जरिए करोड़ों ग्रामीण घरों तक सीधे नल का पानी पहुंचाया जा चुका है। अब न ही किसी को पानी के लिए बाहर जाना पड़ता है और न ही घंटों लाइन में लगना पड़ता है। इससे महिलाओं की शारीरिक मेहनत कम हुई, समय बचा और दूषित पानी से होने वाली बीमारियां अब तेजी से कम हुई हैं। यह योजना सीधे तौर पर ग्रामीण जीवन स्तर को ऊपर उठाने वाली साबित हुई है।

6. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना- छोटे कारोबार को बड़ा सहारा
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं के लिए बड़ी योजना साबित हुई। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी छोटे लोन दिए गए ताकि लोग अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकें। चाय की दुकान, सिलाई सेंटर, बुटीक से लेकर मोबाइल रिपेयरिंग शॉप तक — मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा। शिशु, किशोर और तरुण कटेगरी में मिलने वाले इस लोन ने देश करोड़ों लोगों को स्वरोजगार की ताकत दी। आज देश के कोने-कोने में जो आत्मनिर्भरता की ताकत दिखती हैं, उसके पीछे मुद्रा योजना की ताकत खड़ी है। इसने युवाओं को ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ में बदल दिया।

7. स्टार्टअप इंडिया- युवाओं को नया आत्मविश्वास
2016 में लॉन्च हुई स्टार्टअप इंडिया योजना ने भारत के युवाओं की सोच को एक नई उड़ान दी। पहले भारत में सिर्फ पारंपरिक नौकरियों को ही सुरक्षित भविष्य माना जाता था। लेकिन स्टार्टअप इंडिया के बाद देश में एक नया ‘उद्यमी कल्चर’ पैदा हुआ। सरकार ने टैक्स छूट, आसान रजिस्ट्रेशन और फंडिंग सपोर्ट जैसे कदम उठाए। नतीजा यह हुआ कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। अब सिर्फ दिल्ली-मुंबई ही नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी अपनी कंपनियां खड़ी कर रहे हैं। इस योजना ने भारत को वैश्विक मंच पर इनोवेशन के हब के रूप में स्थापित किया है।

8. प्रधानमंत्री आवास योजना- गरीब का अपना पक्का घर
एक अदद पक्के घर की छत… यह हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। पीएम आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) ने इस सपने को करोड़ों लोगों के लिए हकीकत में बदला। सरकार ने इसमें पारदर्शिता का बड़ा उदाहरण पेश करते हुए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में करोड़ों पक्के घर बनाए गए। कई परिवार जो पीढ़ियों से कच्चे मकानों में रहते थे, उन्हें पहली बार अपना पक्का घर मिला। बिजली, शौचालय और गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी इस घर से जोड़ा गया। इस योजना की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि घरों का मालिकाना हक घर की महिला के नाम पर या संयुक्त रूप से दिया गया, जिसने करोड़ों महिलाओं को गृहस्वामिनी बनाकर समाज में उनका सम्मान बढ़ा दिया।

9. डिजिटल इंडिया- मोबाइल में सरकार
सब्जी वाले के ठेले से लेकर बड़े मॉल्स तक पर लगा क्यूआर (QR) कोड आज नए भारत की सबसे बड़ी ग्लोबल पहचान बन चुका है। जब डिजिटल इंडिया की बात शुरू हुई थी, तब वैश्विक स्तर पर कई एक्सपर्ट्स को संदेह था कि जहां बुनियादी ढांचा कम है, वहां डिजिटल ट्रांजैक्शन कैसे सफल होगा? लेकिन डिजिटल इंडिया अभियान ने सरकारी सेवाओं को सीधे मोबाइल और इंटरनेट से जोड़कर क्रांति कर दी। ऑनलाइन पेमेंट, डिजिलॉकर, और यूपीआई (UPI) का विस्तार इसी दौर में रिकॉर्ड तेजी से बढ़ा। कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं में इसका असर साफ दिखाई दिया। आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा डिजिटल भुगतान करने वाला देश है। यूपीआई ने छुट्टे पैसों की झंझट को पूरी तरह खत्म कर दिया। इस डिजिटल क्रांति ने न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाया, बल्कि सरकारी सिस्टम से भ्रष्टाचार की गुंजाइश को भी खत्म कर दिया।

10. पीएम किसान सम्मान निधि- अन्नदाता को सीधी मदद
देश के किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना एक बेहद प्रभावी कदम साबित हुई। इसके तहत हर साल किसानों के बैंक खातों में सीधे 6,000 रुपये (2,000 की तीन किस्तों में) भेजे जाते हैं। एक छोटे किसान के लिए बुवाई और खाद-बीज खरीदने के समय यह रकम संजीवनी का काम करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि शत-प्रतिशत टेक्नोलॉजी आधारित होने के कारण इसमें कोई बिचौलिया या दलाल नहीं होता। पैसा सीधे दिल्ली से बटन दबाकर किसान के खाते में पहुंचता है, जिससे किसानों का सम्मान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हुए हैं।

11. मेक इन इंडिया और PLI- फैक्ट्री से रोजगार तक
‘मेक इन इंडिया’ और इसके बाद आई PLI (Production Linked Incentive) स्कीम मोदी सरकार की आर्थिक और औद्योगिक रणनीति का सबसे मजबूत स्तंभ रही है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर तक, भारत में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए इस योजना ने बेहतरीन काम किया। PLI योजनाओं के चलते देश में भारी विदेशी निवेश आया और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए। इसका सबसे बड़ा और सीधा उदाहरण यह है कि जो भारत कभी मोबाइल फोन का बड़ा Importer था, वह आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता और निर्यातक Exporter बन चुका है।

12. पीएम स्वनिधि योजना- रेहड़ी-पटरी वालों का सहारा
कोरोना महामारी के संकटकाल के बाद जब छोटे दुकानदारों का धंधा प्रभावित हुआ था, तब सरकार ‘पीएम स्वनिधि’ योजना लेकर आई। इस योजना ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े रेहड़ी, पटरी, ठेले वाले और स्ट्रीट वेंडर्स को सीधे राहत दी। इसके तहत बिना किसी गारंटी के बहुत आसान किस्तों पर वर्किंग कैपिटल लोन दिया गया ताकि लोग अपना काम दोबारा सम्मान के साथ शुरू कर सकें। इसमें डिजिटल भुगतान करने पर कैशबैक और समय पर लोन चुकाने पर ब्याज में छूट जैसी सुविधाएं भी दी गईं। इस योजना ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी देश के औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़कर उन्हें साहूकारों के चंगुल से हमेशा के लिए मुक्त करा दिया।

मोदी सरकार की इन योजनाओं ने भारतीय राजनीति का फोकस बदल दिया। सरकार की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि उसने योजनाओं को सीधे आम आदमी से जोड़ा और टेक्नोलॉजी के जरिए उन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया। इससे भारत ‘वेलफेयर स्टेट’ से ‘एम्पावरमेंट मॉडल’ की तरफ बढ़ा है। पिछले एक दशक में सरकारी योजनाओं की पहुंच, पैमाना और राजनीतिक असर- तीनों अभूतपूर्व रहे हैं। मोदी सरकार के इन 12 सालों की सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक कामयाबी यह है कि इसने देश के आम नागरिक की ‘उम्मीदों’ को बढ़ा दिया है। आज का भारतीय नागरिक यह मानने लगा है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं रहतीं, बल्कि उनके घर के दरवाजे तक पहुंचती हैं।









