प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने विकास, अर्थव्यवस्था, तकनीक, आधारभूत संरचना, रक्षा, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, वहीं रक्षा निर्यात, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और सौर ऊर्जा क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। तीसरे कार्यकाल के दौरान बने ये रिकॉर्ड केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को भी दर्शाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज हुई ये उपलब्धियां विकसित भारत की दिशा में बढ़ते नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं।
Record No-100
‘विकसित भारत 2047’ की प्रगति मापने के 385 मैक्रो संकेतक तैयार कर रचा कीर्तिमान
भारत सरकार ने ‘विकसित भारत संकल्प Indicator Framework’ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अंतर्गत लगभग 385 मैक्रो संकेतकों पर आधारित एक व्यापक निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है, जो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी। इस ढांचे का समन्वय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) कर रहा है तथा इसमें 7 प्रमुख निर्माण-स्तंभ (Building Blocks) और 25 विषयगत क्षेत्रों (Themes) को शामिल किया गया है। प्रस्तावित रूप से इसे 2031 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहली बार है जब विकसित भारत के लिए इतने बड़े पैमाने पर परिणाम-आधारित (Outcome-based) राष्ट्रीय संकेतक ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। यह पहल केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि रोज़गार, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सामाजिक समावेशन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों की वास्तविक प्रगति को मापने का आधार बनेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ढांचा नीति-निर्माण को अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा तथा केंद्र और राज्यों को समान मानकों पर अपनी प्रगति का मूल्यांकन करने में सहायता करेगा। यह संस्थागत व्यवस्था ‘विकसित भारत 2047’ विजन को केवल एक राजनीतिक घोषणा न रखकर, मापनीय लक्ष्यों और नियमित समीक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक नवाचार है। साथ ही, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने भी विकसित भारत के लक्ष्य के लिए दीर्घकाल तक 7–8% वार्षिक आर्थिक वृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे इस निगरानी तंत्र का महत्व और बढ़ जाता है।

Record No-99
नीतिगत माइलस्टोन : ‘विकसित भारत 2047’ की राष्ट्रीय दृष्टि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक युग द्रष्टा के रूप में ‘विकसित भारत 2047’ को दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास-दृष्टि के रूप में स्थापित किया है। प्रधानमंत्री के नीतिगत विजन के तहत भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी अर्थव्यवस्था को 30-40 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने से लेकर आर्थिक समृद्धि, सामाजिक उन्नति और आधुनिक शासन पर केंद्रित है। समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए युवा, गरीब, महिलाएं और किसान जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर निर्भरता के माध्यम से इस विज़न को साकार किया जा रहा है। विभिन्न सरकारी संवादों, बजटीय प्राथमिकताओं, राज्य-स्तरीय विजन दस्तावेजों और क्षेत्रीय योजनाओं से जोड़ा गया। इसका लक्ष्य 15 अगस्त 2047 तक भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर देश को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। इस विजन को संस्थागत रूप देने का अर्थ है कि मंत्रालयों और राज्यों की योजनाओं को केवल वार्षिक लक्ष्यों तक सीमित न रखकर 2047 के व्यापक विकास-लक्ष्य से जोड़ा जाए। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश ने “विकसित उत्तर प्रदेश–समर्थ उत्तर प्रदेश @2047” के माध्यम से तकनीक, उद्योग, शिक्षा, कृषि और समावेशी विकास के लिए परामर्श एवं रोडमैप प्रक्रिया शुरू की। केंद्र स्तर पर भी कौशल, AI, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे की नीतियों को दीर्घकालिक क्षमता निर्माण से जोड़ा गया है। इस दृष्टि की वास्तविक सफलता लक्ष्य-निर्धारण, सार्वजनिक जवाबदेही, राज्यों की भागीदारी और मापनीय परिणामों पर निर्भर करेगी।

Record No-98
भविष्य की प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कौशल ढांचा का विकास
भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने 18 मार्च 2026 को संसद को बताया कि Skill India Mission के अंतर्गत AI, डेटा साइंस और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए राष्ट्रीय स्तर का कौशल ढांचा विकसित किया गया है। राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद ने AI और डेटा साइंस के पाठ्यक्रमों के मानकीकरण के लिए National Programme on Artificial Intelligence (NPAI) Skilling Framework तैयार किया। साथ ही प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 में “Future Skills” श्रेणी के अंतर्गत AI, मशीन लर्निंग, डिजिटल मार्केटिंग तथा अन्य नई तकनीकों से जुड़े जॉब रोल शामिल किए गए। यह भारत की कार्यशक्ति को नई औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण विस्तार है। कौशल भारत कार्यक्रम को 2025-26 तक जारी रखने के लिए 8,800 करोड़ रुपये की लागत के साथ पुनर्गठित किया गया। इसके अंतर्गत PMKVY 4.0, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और जन शिक्षण संस्थान को एकीकृत ढांचे में रखा गया है। ड्रोन तकनीक के लिए 12 मार्च 2025 को NIELIT और Indian Institute of Drone Technology के बीच प्रशिक्षण एवं नवाचार सहयोग का समझौता हुआ। राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में ड्रोन पायलट, सेमीकंडक्टर तकनीशियन और AI प्रोग्रामिंग जैसे पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए। यह पहल उद्योग-आधारित प्रशिक्षण, रोजगारयोग्यता और उन्नत विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में उपयोगी आधार बनाती है।
भविष्य की प्रौद्योगिकियों तथा रोजगार नियोजन में कौशल विकास
कौशल भारत मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से कौशल, पुनः कौशल और अप-कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।… pic.twitter.com/R8BozBgtQp
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 6, 2025
Record No-97
राष्ट्रीय AI ने कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने में रचा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 30 मई 2025 को IndiaAI Mission के अंतर्गत भारत की साझा राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग क्षमता 34,000 GPU से अधिक होने की घोषणा की। यह आंकड़ा मिशन की मूल परिकल्पना 10,000 GPU की सार्वजनिक AI कंप्यूट अवसंरचना—से तीन गुना से अधिक क्षमता का विस्तार था। यह आंकड़ा अपनेआप में एक कीर्तिमान है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये की लागत से IndiaAI Mission को मंजूरी दी थी। इस प्रकार भारत ने स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और सार्वजनिक उपयोग के लिए बड़े पैमाने पर साझा कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। इस विस्तार का उद्देश्य महंगे कंप्यूट संसाधनों तक केवल बड़ी कंपनियों की पहुंच सीमित न रहने देना है। मिशन के तहत भारतीय भाषाओं, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, शासन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मई 2025 में तीन और स्टार्टअप्स को भारतीय फाउंडेशन मॉडल विकसित करने के लिए चुना गया। यह पहल AI नवाचार, डेटा-आधारित अनुसंधान और जिम्मेदार AI के लिए आधार तैयार करती है। हालांकि दीर्घकालिक सफलता का आकलन मॉडल की गुणवत्ता, वास्तविक उपयोग और निजी नवाचार तक पहुंच से होगा।

Record No-96
सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन विस्तार बना मील का पत्थर
1 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) ने घोषणा की कि DigiLocker और e-District प्लेटफॉर्मों के माध्यम से देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग 2,000 सरकारी सेवाओं का एकीकृत डिजिटल विस्तार हो चुका है। प्रमाण-पत्र, कल्याणकारी योजनाएं, उपयोगिता भुगतान और नागरिक सेवाओं सहित यह उपलब्धि भारत में ऑनलाइन सार्वजनिक सेवा वितरण के सबसे व्यापक चरणों में से एक है। इससे नागरिकों को अनेक सेवाएं “कभी भी, कहीं भी” डिजिटल माध्यम से प्राप्त करने का अवसर मिला। इस विस्तार का महत्व केवल सेवाओं की संख्या में नहीं, बल्कि शासन-प्रक्रिया को कागजरहित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने में है। DigiLocker के जरिए प्रमाण-पत्रों का सुरक्षित डिजिटल भंडारण और सत्यापन संभव हुआ, जबकि e-District प्रणालियों ने राज्य एवं जिला स्तर की सेवाओं को नागरिकों के निकट पहुंचाया। इससे कार्यालयों के चक्कर, दस्तावेजों की भौतिक प्रतियों और मध्यस्थों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। डिजिटल समावेशन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता और सहायता केंद्रों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है। लगभग 2,000 सेवाओं का यह एकीकरण भारत के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

Record No-95
ई-कोर्ट और न्यायिक डिजिटलीकरण का सबसे बड़ा विस्तार
31 दिसंबर 2025 तक ई-कोर्ट परियोजना के अंतर्गत देश के उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के 637.85 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका था। इनमें उच्च न्यायालयों के लगभग 236.96 करोड़ और जिला न्यायालयों के 400.89 करोड़ पृष्ठ शामिल थे। साथ ही 30 सितंबर 2025 तक 3.81 करोड़ से अधिक ऑनलाइन/वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई आयोजित हुईं, 92.08 लाख मामले ई-फाइलिंग के माध्यम से दर्ज हुए तथा 29 वर्चुअल कोर्टों ने 7.84 करोड़ चालानों का निस्तारण किया। यह भारतीय न्यायपालिका में डिजिटल प्रक्रियाओं के उपयोग का अब तक का सबसे व्यापक विस्तार है। ई-कोर्ट चरण-III का उद्देश्य न्यायालयों को अधिक कागजरहित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन केस-स्टेटस, ई-फाइलिंग, ई-पेमेंट, वीडियो सुनवाई और न्यायिक सूचना प्रणालियों ने वादियों तथा वकीलों को कोर्ट तक पहुंच के नए साधन उपलब्ध कराए हैं। हालांकि डिजिटल अवसंरचना के साथ प्रशिक्षण और समान पहुंच भी आवश्यक है, फिर भी यह विस्तार न्यायिक प्रशासन को तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

Record No-94
डिजिटल हेल्थ मिशन का सबसे बड़ा विस्तार
वित्त वर्ष 2025-26 तक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक ABHA (Ayushman Bharat Health Account) हेल्थ आईडी बनाई जा चुकी थीं, जबकि 50 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड नागरिकों की सहमति (Consent-based System) के आधार पर मिशन से जोड़े गए। साथ ही लाखों स्वास्थ्य संस्थान और स्वास्थ्य पेशेवर भी डिजिटल स्वास्थ्य नेटवर्क का हिस्सा बने। यह भारत के इतिहास में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का सबसे बड़ा विस्तार माना जाता है और विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्मों में से एक के रूप में उभरा है। 27 सितंबर 2021 को शुरू किए गए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आईडी प्रदान करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और कागजरहित बनाना है। ABHA के माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी जानकारी को आवश्यकता पड़ने पर देश के किसी भी अधिकृत अस्पताल या चिकित्सक के साथ साझा कर सकते हैं। डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली भविष्य में टेलीमेडिसिन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति निर्माण के लिए भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

Record No-93
आयुष्मान भारत मिशन लाभार्थी में वरिष्ठ नागरिक शामिल
29 अक्टूबर 2024 को केंद्र सरकार ने 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (AB PM-JAY) के अंतर्गत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की पहल का विस्तार किया। इसके साथ ही करोड़ों अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिकों को प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवरेज का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली के विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी गई। आयुष्मान भारत योजना के विस्तार से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ-साथ बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में आए। देशभर के हजारों सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया। यह पहल भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Record No-92
देश में जनधन खातों के विस्तार से बना नया रिकॉर्ड
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के अंतर्गत खोले गए बैंक खातों की संख्या 56 करोड़ से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि इन खातों में जमा राशि ₹2.6 लाख करोड़ से अधिक हो गई। 28 अगस्त 2014 को शुरू हुई यह योजना दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के रूप में लगातार विस्तार करती रही। खातों की संख्या और जमा राशि—दोनों का नए उच्च स्तर पर पहुंचना इस योजना की बढ़ती प्रभावशीलता और लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। जनधन योजना ने करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन खातों के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान सेवाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा है। महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंकिंग सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार जनधन खातों में बढ़ती जमा राशि इस बात का संकेत है कि यह योजना केवल खाता खोलने तक सीमित नहीं रही, बल्कि वित्तीय बचत और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन गई है।

Record No-91
‘लखपति दीदी’ अभियान ने भारत में रचा नया इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में महिलाओं को सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी प्रेरणा से देश में संचालित ‘लखपति दीदी’ अभियान के अंतर्गत 2 करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति बन गई हैं जो देश में एक रिकॉर्ड है। इतना ही नहीं वर्ष 2025-26 तक ‘लखपति दीदी’ अभियान के अंतर्गत 2 करोड़ से अधिक महिलाओं को लखपति (वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक) बनाने की दिशा में अभियान का व्यापक विस्तार किया गया है। अब केंद्र सरकार ने 3 करोड़ लखपति दीदी तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के माध्यम से लाखों महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कौशल विकास, वित्तीय सहायता, बैंक ऋण और उद्यमिता प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया। यह भारत में महिला आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा संगठित अभियान माना जाता है। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाएं कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, डिजिटल सेवाओं और सूक्ष्म उद्यमों से जुड़ रही हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। यह पहल महिला सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
Record No-90
विश्व में सुपर फूड बनकर श्री अन्न ने रचा इतिहास
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ (International Year of Millets) घोषित किए जाने के बाद 2025-26 में भी भारत ने श्री अन्न (मिलेट्स) अभियान को वैश्विक स्तर पर निरंतर आगे बढ़ाया। भारत विश्व का सबसे बड़ा मिलेट उत्पादक और प्रमुख निर्यातक देशों में बना रहा। वर्ष 2025-26 में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों, व्यापार मेलों और द्विपक्षीय सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से भारत ने श्री अन्न को वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पोषण और जलवायु-अनुकूल कृषि के प्रभावी विकल्प के रूप में स्थापित करने के प्रयास जारी रखे। भारत की पहल के परिणामस्वरूप मिलेट्स के प्रति वैश्विक जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मिड-डे मील, पोषण अभियान और कृषि विविधीकरण कार्यक्रमों में भी श्री अन्न को बढ़ावा दिया। इससे किसानों के लिए नए बाजार विकसित हुए और पोषण सुरक्षा को भी बल मिला। विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने मिलेट्स को केवल एक कृषि उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि ‘सुपर फूड’ और सतत कृषि मॉडल के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है। यह अभियान कृषि, स्वास्थ्य, पोषण और जलवायु परिवर्तन जैसे अनेक क्षेत्रों में भारत की सॉफ्ट पावर का भी प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है।

Record No-89
प्राकृतिक खेती के लिए संस्थागत समर्थन का उल्लेखनीय विस्तार
वर्ष 2025-26 तक देश के अनेक राज्यों में प्राकृतिक खेती को संस्थागत समर्थन देने की दिशा में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। केंद्रीय बजट 2025-26 में प्राकृतिक खेती को विशेष प्राथमिकता दी गई तथा राष्ट्रीय स्तर पर 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य घोषित किया गया। यह भारत में रसायन-मुक्त और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में अब तक की सबसे व्यापक सरकारी पहल मानी जाती है। प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय संसाधनों पर आधारित टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करना है। इस दिशा में विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों के गठन और तकनीकी सहायता का विस्तार किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और कृषि लागत में सुधार संभव है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण दोनों को लाभ मिल सकता है। यह पहल जलवायु-अनुकूल कृषि और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भारत की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

Record No-88
दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रम DBT से लाभ हस्तांतरण का रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना की 23वीं किस्त के अंतर्गत 18.880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली में की गई इस किस्त के अंतर्गत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों वित्तीय मदद मिली है। इनमें से 2.18 करोड़ महिला किसान हैं। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सहायता राशि भेजी गई। योजना शुरू होने (24 फरवरी 2019) से लेकर जून 2026 तक किसानों को 4.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। यह दुनिया के सबसे बड़े प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। पीएम-किसान योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रतिवर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। आधार-आधारित प्रमाणीकरण और डिजिटल भुगतान प्रणाली के कारण सहायता राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था ने पारदर्शिता बढ़ाई, भुगतान में विलंब कम किया और किसानों की नकदी उपलब्धता में सुधार किया है। यह योजना कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है।

Record No-87
दुनिया के सबसे बड़े रूफटॉप सोलर अभियान की शुरुआत
13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना शुरू किए जाने के बाद 2025-26 तक लाखों परिवारों को रूफटॉप सोलर प्रणाली से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। इस योजना के तहत 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जो दुनिया के सबसे बड़े घरेलू रूफटॉप सोलर अभियानों में से एक है। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को सब्सिडी और आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य घरेलू बिजली बिल कम करना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनाना है। योजना के माध्यम से परिवार अपनी छतों पर सौर पैनल स्थापित कर अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भी उपलब्ध करा सकते हैं। इससे न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम सूर्य घर योजना भारत में विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन का सबसे बड़ा अभियान बनकर उभरी है। इससे सौर उद्योग, स्थानीय रोजगार और हरित ऊर्जा निवेश को भी नई गति मिली है।

Record No-86
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में निरंतर विस्तार का रिकॉर्ड
भारत की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 31 मार्च 2026 तक 180 गीगावाट से अधिक के स्तर पर पहुंच गई। जबकि सौर, पवन, बायोमास और लघु जलविद्युत सहित कुल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। वर्ष 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 76 गीगावाट थी, जो एक दशक में दोगुने से अधिक स्तर तक पहुंच गई। इस उपलब्धि के साथ भारत विश्व के अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देशों में अपनी स्थिति और मजबूत करने में सफल रहा। भारत ने सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों तथा हरित हाइड्रोजन जैसी पहलों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति दी है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की पहल और 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता के दीर्घकालिक लक्ष्य ने भी इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में यह वृद्धि ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख नेताओं में स्थापित करती है।
⚡ भारत की ऊर्जा यात्रा में नया कीर्तिमान!
25 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:38 बजे देश ने 256.1 GW की रिकॉर्ड पीक पावर डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा कर एक बार फिर अपनी ऊर्जा क्षमता का प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि भारत के मजबूत पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और निरंतर विस्तार करती उत्पादन क्षमता का… pic.twitter.com/mR5SVICXuA
— Mayank Nayak (@MayankNayakBJP) April 30, 2026
Record No-85
कोयला उत्पादन में देश ने रचा नया कीर्तिमान
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल घरेलू कोयला उत्पादन पहली बार 1 अरब टन (1,000 मिलियन टन) के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। 1 अप्रैल 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में लगभग 1.04 अरब टन कोयले का उत्पादन दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि थी। यह भारत के कोयला क्षेत्र के इतिहास का अब तक का सर्वोच्च उत्पादन स्तर माना गया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने तथा आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की। घरेलू उत्पादन में वृद्धि का सीधा लाभ बिजली उत्पादन, इस्पात, सीमेंट और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योगों को मिला। पिछले कुछ वर्षों में वाणिज्यिक खनन, नई खदानों के विकास, आधुनिक खनन तकनीकों के उपयोग और कोयला परिवहन अवसंरचना के विस्तार से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार 1 अरब टन उत्पादन का आंकड़ा केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और औद्योगिक विकास को भी बल मिला है। बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के साथ-साथ ऊर्जा संक्रमण काल में यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Record No-84
निजी अंतरिक्ष उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का निजी अंतरिक्ष उद्योग ने अपने विस्तार को लेकर एक रिकॉर्ड स्थापित किया है। पिछले 12 वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल करते हुए खुद को अग्रणी अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया है। आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 के विजन के तहत देश ने चंद्रमा, सूर्य और मानव अंतरिक्ष मिशनों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। वर्ष 2025-26 तक भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (Space Ecosystem) 300 से अधिक स्टार्टअप्स और अनेक निजी कंपनियों तक विस्तारित हो चुका है, जबकि 2014 में ऐसे संगठित स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या नगण्य थी। IN-SPACe और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद उपग्रह निर्माण, रॉकेट विकास, लॉन्च सेवाओं, पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण और संचार सेवाओं में निजी भागीदारी का अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला। यह भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना गया। इस परिवर्तन ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी एकाधिकार वाली व्यवस्था को प्रतिस्पर्धी और नवाचार-आधारित मॉडल में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भारतीय निजी कंपनियां छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान, पुनः प्रयोज्य रॉकेट तकनीक, उपग्रह समूह (Constellations) और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। कई भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से निवेश प्राप्त हुआ है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह विस्तार भारत को अमेरिका और यूरोप की तर्ज पर एक मजबूत वाणिज्यिक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Record No-83
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य तय
अक्टूबर 2023 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) द्वारा जारी “Indian Space Economy Vision 2040” के तहत भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को वर्ष 2040 तक लगभग 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रिकॉर्ड लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके साथ ही वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को वर्तमान के 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 8–10 प्रतिशत तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की गई है। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के इतिहास में सबसे व्यापक और दीर्घकालिक विकास रोडमैप है। इस लक्ष्यपत्र का उद्देश्य भारत को केवल उपग्रह प्रक्षेपण करने वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाओं, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों, अंतरिक्ष डेटा, संचार, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष-आधारित वाणिज्यिक सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। हाल के वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने, नई स्पेस पॉलिसी लागू करने और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने से इस क्षेत्र में तेजी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह लक्ष्य प्राप्त होता है, तो भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो जाएगा तथा लाखों उच्च-कौशल रोजगार और बड़े निवेश आकर्षित कर सकेगा।

Record No-82
गगनयान मिशन की निर्णायक प्रगति
21 अक्टूबर 2023 को गगनयान मिशन के लिए पहला टेस्ट व्हीकल एबॉर्ट मिशन (TV-D1) सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जबकि 2024 और 2025 के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम, पैराशूट सिस्टम, मानव-रेटेड प्रक्षेपण प्रणाली तथा अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति मानी गई। इन सफलताओं ने भारत को मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान क्षमता विकसित करने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में प्रवेश के और करीब पहुंचा दिया। गगनयान मिशन का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगनयात्रियों) को पृथ्वी की निम्न कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजना है। इसके लिए आवश्यक जीवन-समर्थन प्रणाली, सुरक्षा तंत्र और मानव-रेटेड रॉकेट तकनीक का विकास किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार गगनयान केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षमता का प्रतीक है। इस मिशन से एयरोस्पेस, रोबोटिक्स, सामग्री विज्ञान और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्रों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

Record No-81
भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी नौसैनिक निर्माण कार्यक्रम
वर्ष 2025-26 तक भारतीय नौसेना के लिए 60 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन थीं, जिनमें अधिकांश स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर आधारित थीं। यह भारत के नौसैनिक इतिहास में स्वदेशी युद्धपोत निर्माण का सबसे बड़ा विस्तार है। भारतीय शिपयार्डों में एक साथ अनेक विध्वंसक, फ्रिगेट, कार्वेट, सर्वेक्षण पोत और पनडुब्बी परियोजनाओं पर कार्य जारी रहा, जिसने भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान की। इस उपलब्धि का महत्व केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण है। स्वदेशी युद्धपोत निर्माण से विदेशी निर्भरता कम हुई है तथा घरेलू रक्षा उद्योगों को व्यापक अवसर मिले हैं। भारतीय नौसेना के नए प्लेटफॉर्मों में 70–80 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।

Record No-80
iPhone निर्माण में भारत की हिस्सेदारी का रिकॉर्ड
रिकॉर्ड एवं उपलब्धि: वित्त वर्ष 2025-26 तक वैश्विक iPhone उत्पादन का लगभग 15–20 प्रतिशत हिस्सा भारत में निर्मित होने लगा, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। Apple के प्रमुख विनिर्माण साझेदारों—Foxconn, Tata Electronics और Pegatron—ने भारत में उत्पादन क्षमता का तेजी से विस्तार किया। कुछ विश्लेषणों के अनुसार 2025-26 तक भारत से iPhone निर्यात दर्जनों अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जिससे भारत Apple की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। यह परिवर्तन वैश्विक विनिर्माण रणनीतियों में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। पहले iPhone उत्पादन मुख्यतः चीन-केंद्रित था, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की वैश्विक प्रवृत्ति ने भारत को नया अवसर प्रदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि iPhone निर्माण में बढ़ती हिस्सेदारी से उच्च कौशल वाले रोजगार, उन्नत विनिर्माण तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति मिली है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

Record No-79
भारत के मोबाइल फोन निर्यात ने रचा नया इतिहास
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का मोबाइल फोन निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया। यह देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। वर्ष 2014-15 में भारत का मोबाइल फोन निर्यात नगण्य स्तर पर था, जबकि एक दशक के भीतर भारत दुनिया के प्रमुख मोबाइल निर्माण और निर्यात केंद्रों में शामिल हो गया। Apple, Samsung तथा अन्य वैश्विक कंपनियों द्वारा भारत में उत्पादन बढ़ाने से यह ऐतिहासिक उछाल संभव हुआ। मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में यह सफलता उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते निवेश का परिणाम है। भारत अब केवल घरेलू मांग पूरी करने वाला बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। जानकारों के मुताबिक मोबाइल निर्यात में हुई यह वृद्धि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक विनिर्माण श्रृंखला में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। इससे रोजगार सृजन, विदेशी निवेश और तकनीकी हस्तांतरण को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

Record No-78
डीमैट खातों का भारत में बना नया रिकॉर्ड
वर्ष 2025 तक भारत में डीमैट (Demat) खातों की संख्या 20 करोड़ के करीब पहुंच गई, जो देश के पूंजी बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। कुछ वर्ष पहले तक जहां डीमैट खातों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित थी, वहीं डिजिटल निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग के विस्तार ने निवेशकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज कराई। यह उपलब्धि भारत में शेयर बाजार के लोकतंत्रीकरण और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। डीमैट खातों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट होता है कि अब निवेश केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। मोबाइल आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, कम लागत वाले ब्रोकरेज मॉडल और निवेश संबंधी जागरूकता अभियानों ने लाखों नए निवेशकों को बाजार से जोड़ा है। बढ़ती घरेलू भागीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को अधिक गहराई और स्थिरता प्रदान की है। विशेषज्ञों के अनुसार डीमैट खातों का यह रिकॉर्ड स्तर भारत की वित्तीय प्रणाली के औपचारिककरण तथा घरेलू निवेशकों की बढ़ती आर्थिक शक्ति का प्रतीक है। यह प्रवृत्ति भविष्य में पूंजी बाजार के और अधिक विस्तार का आधार बन सकती है।

Record No-77
म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि
9 जून 2026 को एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में व्यवस्थित निवेश योजना अर्थात Systematic Investment Plan (SIP) माध्यम से निवेश ₹30,953.83 करोड़ के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही सक्रिय SIP खातों की संख्या 9.64 करोड़ तथा SIP परिसंपत्तियां (SIP AUM) ₹17.12 लाख करोड़ तक पहुंच गईं। यह भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के इतिहास में व्यवस्थित निवेश योजना के अंतर्गत निवेश का अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। मई 2026 में इसमें ₹22,907 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा दीर्घकालिक निवेश साधनों पर लगातार बढ़ रहा है। नियमित निवेश की संस्कृति ने म्यूचुअल फंड उद्योग को स्थिर पूंजी प्रवाह उपलब्ध कराया है। मई 2026 में कुल म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियां (AUM) बढ़कर ₹81.58 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। विशेषज्ञों के अनुसार SIP आधारित निवेश की यह निरंतर वृद्धि भारत में वित्तीय साक्षरता, निवेश जागरूकता और घरेलू निवेशकों की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का महत्वपूर्ण संकेत है। यह भारतीय पूंजी बाजार को मजबूती प्रदान करने वाले सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों में से एक माना जा रहा है।

Record No-76
दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार बना भारत
वर्ष 2025 के दौरान भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे भारत ने दुनिया के प्रमुख इक्विटी बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत की। इससे पहले 22 जनवरी 2024 को भारत का बाजार पूंजीकरण 4 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया था, और इसके बाद भी भारतीय बाजार ने वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार जारी रखा। भारत कई अवसरों पर अमेरिका, चीन और जापान के बाद दुनिया के चौथे सबसे बड़े शेयर बाजार के रूप में उभरा, जो देश की आर्थिक शक्ति और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का महत्वपूर्ण संकेत माना गया। इस उपलब्धि के पीछे मजबूत आर्थिक विकास दर, कॉर्पोरेट आय में वृद्धि, बढ़ता घरेलू निवेश और रिकॉर्ड संख्या में नए निवेशकों की भागीदारी रही। भारतीय शेयर बाजार में म्यूचुअल फंडों के माध्यम से घरेलू निवेशकों का योगदान लगातार बढ़ा, जिससे वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार को स्थिरता मिली। बैंकिंग, आईटी, विनिर्माण, पूंजीगत वस्तुओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने भी बाजार पूंजीकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। विशेषज्ञों के अनुसार चौथे सबसे बड़े शेयर बाजार के रूप में भारत की स्थिति वैश्विक निवेशकों के लिए देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता और दीर्घकालिक विकास संभावनाओं का संकेत है।

Record No-75
भारत ने बनाया निजी रक्षा उत्पादन में नया रिकॉर्ड
वित्तीय वर्ष 2025-26 में निजी क्षेत्र का रक्षा उत्पादन लगभग 42,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो भारत के इतिहास में निजी रक्षा उद्योग का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे अब राष्ट्रीय रक्षा औद्योगिक आधार का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी हैं। निजी क्षेत्र की इस वृद्धि के पीछे रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में सुधार, स्वदेशीकरण को बढ़ावा, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची और रक्षा गलियारों जैसी पहलों का बड़ा योगदान रहा है। निजी कंपनियां अब ड्रोन, मिसाइल घटकों, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार, संचार प्रणालियों और एयरोस्पेस उपकरणों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे रक्षा क्षेत्र में नवाचार और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र का यह रिकॉर्ड योगदान भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है।

Record- No-74
रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र (Private Sector) की हिस्सेदारी बढ़कर 24 प्रतिशत हो गई, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। यह वित्तीय वर्ष 2024-25 के 22 प्रतिशत के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। पहली बार निजी क्षेत्र की भूमिका इतनी बड़ी मात्रा में रक्षा उत्पादन व्यवस्था का हिस्सा बनी है, जिससे रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नवाचार को नई गति मिली है। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया नीतियों की सफलता का संकेत है। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की उपस्थिति बढ़ने से अत्याधुनिक तकनीकों का विकास, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव भारत के रक्षा क्षेत्र को अधिक गतिशील और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बना रहा है।

Record- No-73
रक्षा निर्यात में 38,424 करोड़ रुपये के साथ नए सर्वकालिक रिकॉर्ड पर भारत
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो देश के रक्षा निर्यात इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि हुई है और भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ निर्यातक देश भी बन गया है। यह उपलब्धि रक्षा उत्पादन क्षमता में वृद्धि और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता का परिणाम है। रक्षा निर्यात में इस रिकॉर्ड वृद्धि के पीछे ब्रह्मोस मिसाइल, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार प्रणालियां, गोला-बारूद, नौसैनिक उपकरण और अन्य स्वदेशी सैन्य उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने के साथ-साथ सामरिक साझेदारियों को भी मजबूत करने का अवसर मिला है।

Record- No-72
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रभाव अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसी अभियान का असर है कि भारत पहली बार रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में 1.78 लाख करोड़ रुपये का रिकार्ड स्थापित किया है। मई 2026 में जारी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन पहली बार ₹1.78 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2020-21 में रक्षा उत्पादन ₹84,643 करोड़ तथा 2013-14 में ₹43,746 करोड़ था। इस प्रकार एक दशक में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया है, जो भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार को दर्शाता है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की नीति की सफलता का प्रमाण है। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Record No- 71
भारत के “Silicon Diplomacy” सबसे व्यापक अभियान
Semicon India 2024 और Semicon India 2025 के माध्यम से भारत ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों, निवेशकों और प्रौद्योगिकी भागीदारों को आकर्षित करने का अब तक का सबसे व्यापक अभियान चलाया। इन आयोजनों में अमेरिका, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और यूरोप की अनेक अग्रणी कंपनियों ने भागीदारी की। भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करते हुए वैश्विक चिप उद्योग में अपनी भूमिका को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया। “Silicon Diplomacy” का आशय तकनीकी सहयोग, निवेश आकर्षण और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी के माध्यम से रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। वैश्विक चिप संकट के बाद अनेक देशों ने आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण पर बल दिया, जिससे भारत को नए अवसर प्राप्त हुए। Semicon India मंच ने भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार के बजाय संभावित विनिर्माण एवं डिजाइन केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया। Tata Electronics, Micron, PSMC, Foxconn और अन्य वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इस रणनीति की सफलता को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान भारत को दीर्घकाल में वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण भागीदार बनाने तथा उच्च-प्रौद्योगिकी कूटनीति में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Record No- 70
पहली बार सेमीकंडक्टर उत्पादन में हुई है यूपी की एंट्री
14 मई 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जेवर (उत्तर प्रदेश) में HCL-Foxconn सेमीकंडक्टर परियोजना को मंजूरी दिए जाने के साथ उत्तर प्रदेश पहली बार भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण मानचित्र में शामिल हुआ है। मालूम हो यूपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय प्रदेश हैं। वे इसी राज्य के बनारस संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। लगभग ₹3,706 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना राज्य की पहली सेमीकंडक्टर इकाई है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश देश के उभरते चिप निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में नई पहचान प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ा है। जेवर परियोजना का महत्व केवल एक औद्योगिक इकाई की स्थापना तक सीमित नहीं है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र पहले से ही मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। सेमीकंडक्टर परियोजना के जुड़ने से इस क्षेत्र को और अधिक तकनीकी गहराई तथा निवेश आकर्षण मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे सहायक उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और कुशल मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Record No- 69
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को ₹6 लाख करोड़ रुपये के उद्योग बनाने का लक्ष्य
वर्ष 2022 में लगभग ₹1.46 लाख करोड़ के स्तर पर रहे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के FY 2027 तक 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जो इस क्षेत्र के इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं में से एक है। मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार उपकरणों के उत्पादन में तेज वृद्धि ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई गति प्रदान की है। यह लक्ष्य हासिल होने पर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का आकार कुछ ही वर्षों में कई गुना बढ़ जाएगा। इस प्रगति के पीछे उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, सेमीकंडक्टर मिशन, वैश्विक कंपनियों के निवेश और निर्यात-उन्मुख विनिर्माण रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत पहले ही दुनिया के प्रमुख मोबाइल फोन निर्माताओं में शामिल हो चुका है और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह विस्तार केवल औद्योगिक विकास का संकेत नहीं, बल्कि भारत को उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।

Record No- 68
गुजरात का धोलेरा बना भारत का पहला सबसे अधिक वेफर निर्माण प्लांट
मार्च 2024 में स्वीकृत गुजरात के धोलेरा स्थित Tata Electronics–PSMC सेमीकंडक्टर फैब परियोजना 50,000 वेफर प्रति माह उत्पादन क्षमता के साथ भारत का पहला बड़े पैमाने का वेफर निर्माण संयंत्र बनने की दिशा में आगे बढ़ी। लगभग ₹91,000 करोड़ के निवेश वाली यह परियोजना भारत के सेमीकंडक्टर इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक पहलों में से एक है। यह पहली बार है जब देश में इतने बड़े स्तर पर सिलिकॉन वेफर निर्माण और उन्नत चिप उत्पादन की आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। धोलेरा फैब का महत्व इस तथ्य में निहित है कि सेमीकंडक्टर निर्माण वैश्विक स्तर पर सबसे जटिल और पूंजी-गहन उद्योगों में से एक माना जाता है। इस परियोजना के माध्यम से ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और औद्योगिक उपकरणों में उपयोग होने वाले चिप्स का उत्पादन किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भारत को डिजाइन-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर वास्तविक चिप निर्माण क्षमता वाले देशों की श्रेणी में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही इससे सहायक उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और कुशल मानव संसाधन विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह परियोजना भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जा रही है।

Record No- 67
देश के सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हुआ अब तक सबसे बड़ा निवेश
वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावित अथवा स्वीकृत किए गए। यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं में से एक है। विभिन्न सेमीकंडक्टर फैब, ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) इकाइयों तथा डिस्प्ले चिप परियोजनाओं ने भारत को वैश्विक चिप उद्योग के उभरते गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन निवेशों में Tata Electronics, Micron, CG Power, Kaynes तथा HCL-Foxconn जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार की सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन नीति और India Semiconductor Mission ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और चिप संकट के बाद अनेक कंपनियां भारत में उत्पादन आधार विकसित करने में रुचि दिखा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन निवेशों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे तथा भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में दीर्घकालिक भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

Record No- 66
“Made in India” सेमीकंडक्टर चिप्स बना देश के लिए माइलस्टोन
वर्ष 2025 में आयोजित Semicon India 2025 के दौरान पहली बार “Made in India” सेमीकंडक्टर चिप्स को प्रदर्शित किया गया, जो भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण कार्यक्रम का एक ऐतिहासिक माइलस्टोन बन गया। लंबे समय तक चिप आयात पर निर्भर रहने वाले भारत के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इससे देश ने अनुसंधान और डिजाइन से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में ठोस प्रगति का संकेत दिया। यह पहल भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी गई। इस उपलब्धि का महत्व केवल तकनीकी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षमता का भी प्रतीक है। सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत आवश्यकता हैं और मोबाइल, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में इनकी केंद्रीय भूमिका है। विशेषज्ञों के अनुसार “Made in India” चिप्स का प्रदर्शन निवेशकों और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत था कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का उभरता केंद्र भी बन रहा है। यह उपलब्धि भविष्य में बड़े पैमाने पर चिप उत्पादन और निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।

Record No- 65
व्यावसायिक अपराधों के अपराधमुक्तिकरण का सबसे बड़ा जन विश्वास बिल
अगस्त 2025 में Jan Vishwas Bill 3.0 पेश किया गया, जिसके तहत लगभग 275 से 300 छोटे व्यावसायिक अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भारत में कारोबार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) बढ़ाने और अनुपालन बोझ कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम माना गया है। इससे पहले जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से भी अनेक प्रावधानों का अपराधमुक्तिकरण किया जा चुका था। इस पहल का उद्देश्य उद्योगों, स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए नियामकीय वातावरण को अधिक सरल और भरोसेमंद बनाना है। छोटे तकनीकी या प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड के बजाय प्रशासनिक और आर्थिक दंड की व्यवस्था व्यवसायों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से राहत प्रदान कर सकती है। सरकार का मानना है कि इससे निवेश माहौल बेहतर होगा, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और अनुपालन लागत कम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार नियामकीय सुधारों की यह श्रृंखला भारत को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है। जन विश्वास 3.0 को प्रशासनिक सुधार, निवेश संवर्धन और आर्थिक उदारीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

Record No- 64
“भारत का सबसे बड़ा ड्रोन स्टार्टअप इकोसिस्टम”
वर्ष 2026 तक भारत में 600 से अधिक ड्रोन कंपनियां सक्रिय हो गईं, जिनमें 100 से अधिक कंपनियां रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र से जुड़ी हैं। यह भारत के ड्रोन उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार है। ड्रोन नियमों के उदारीकरण, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिले प्रोत्साहन ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक दशक पहले जहां भारत का ड्रोन उद्योग प्रारंभिक अवस्था में था, वहीं 2026 तक यह तेजी से विकसित होते उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में शामिल हो गया। ड्रोन उद्योग का यह विस्तार केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, लॉजिस्टिक्स, निगरानी और रक्षा क्षेत्र में भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन निर्माण को बढ़ावा मिलने से आयात पर निर्भरता कम होने की संभावना बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार 600 से अधिक कंपनियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक ड्रोन नवाचार केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे रोजगार सृजन, तकनीकी अनुसंधान और निर्यात क्षमता को भी बल मिला है। ड्रोन इकोसिस्टम का यह विस्तार “आत्मनिर्भर भारत” और उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

Record No- 63
रक्षा ड्रोन खरीद का सबसे बड़ा स्वदेशी कार्यक्रम
जून 2026 में भारत ने 2 अरब डॉलर चानि करीब 17,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के स्वदेशी रक्षा ड्रोन खरीद कार्यक्रम की तैयारी शुरू की। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा स्वदेशी रक्षा ड्रोन अधिग्रहण कार्यक्रम बन गया है। यह पहल भारतीय सशस्त्र बलों की निगरानी, खुफिया जानकारी संग्रह, सीमा सुरक्षा तथा आधुनिक युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई। साथ ही यह “आत्मनिर्भर भारत” और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है। ड्रोन आधुनिक सैन्य रणनीति का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य वैश्विक युद्धों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानव रहित प्रणालियां भविष्य के युद्धक्षेत्र का स्वरूप बदल रही हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित विभिन्न प्रकार के निगरानी, आक्रमण और लॉजिस्टिक सहायता ड्रोन खरीदे जाने की संभावना जताई गई। इससे देश के रक्षा स्टार्टअप, निजी उद्योग और अनुसंधान संस्थानों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस कार्यक्रम से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि भारत वैश्विक रक्षा ड्रोन उद्योग में भी अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा। यह पहल रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशी तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

Record No- 62
भारत का अब तक का सबसे बड़ा रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण कार्यक्रम
नवंबर 2025 में भारत सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये के रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट निर्माण कार्यक्रम को मंजूरी दी। यह भारत का इस क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रोत्साहन कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य चीन सहित अन्य देशों पर आयात निर्भरता कम करना तथा इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है। वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मैग्नेट आधुनिक उद्योगों की आधारभूत आवश्यकता बन चुके हैं और उनकी आपूर्ति कुछ ही देशों के नियंत्रण में है। इस कार्यक्रम का महत्व केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी और सामरिक आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा है। स्थायी मैग्नेट का उपयोग इलेक्ट्रिक मोटर, पवन टर्बाइन, मिसाइल प्रणालियों, रडार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित कर भविष्य की उच्च-प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायता करेगी। साथ ही इससे रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

Record No- 61
देश के चिप निर्माण इकोसिस्टम का विस्तार करेगी यूपी की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट
14 मई 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के जेवर में पहली HCL-Foxconn सेमीकंडक्टर यूनिट को मंजूरी दी। लगभग 3,706 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भारत की छठी स्वीकृत सेमीकंडक्टर यूनिट बनी। मोदी सरकार का यह निर्णय देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया। सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण और रक्षा प्रणालियों सहित लगभग हर आधुनिक तकनीक की आधारभूत आवश्यकता है। HCL-Foxconn परियोजना की यह इकाई विशेष रूप से डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन करेगी, जिनका उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, वाहन डिस्प्ले और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में व्यापक रूप से होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित करेगी तथा “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को मजबूती प्रदान करेगी। इससे भारत का लक्ष्य केवल इलेक्ट्रॉनिक्स उपभोक्ता देश से आगे बढ़कर वैश्विक चिप निर्माण केंद्र बनने की दिशा में और मजबूत होगा।

Record No- 60
भारतीय रेल ब्रॉडगेज नेटवर्क का बना नया रिकॉर्ड
नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% विद्युतीकरण पूरा हो गया। लगभग सम्पूर्ण रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण के साथ भारत ने विश्व की सबसे बड़ी और सबसे तेज रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2014 में जहां रेलवे के सीमित हिस्से का ही विद्युतीकरण हुआ था, वहीं एक दशक के भीतर यह कवरेज लगभग पूर्णता तक पहुंच गई। रेल विद्युतीकरण का सबसे बड़ा लाभ डीजल पर निर्भरता में कमी और परिचालन लागत में गिरावट के रूप में सामने आया है। इससे रेलवे की ऊर्जा दक्षता बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। विद्युतीकृत नेटवर्क पर ट्रेनों की गति, समयबद्धता और माल ढुलाई क्षमता में भी सुधार हुआ है। सरकार के अनुसार यह उपलब्धि भारत के हरित परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को मजबूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग पूर्ण विद्युतीकरण से रेलवे का विदेशी मुद्रा व्यय घटेगा, क्योंकि डीजल आयात पर निर्भरता कम होगी। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे को दुनिया के सबसे पर्यावरण-अनुकूल बड़े रेल नेटवर्कों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Record No- 59
रेलवे की सौर ऊर्जा क्षमता में 240 गुना से अधिक वृद्धि
नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 898 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि वर्ष 2014 में यह केवल 3.68 मेगावाट थी। इस प्रकार लगभग 11 वर्षों में 240 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यह भारतीय रेलवे के इतिहास में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और रेलवे को हरित परिवहन प्रणाली (Green Transport System) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इस उपलब्धि के पीछे रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों, कारखानों और खाली भूमि पर बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों की स्थापना की नीति रही। भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक “नेट-जीरो कार्बन एमिशन” का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार किया जा रहा है। बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता से रेलवे की बिजली लागत में कमी आई है तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता भी घटी है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह प्रगति पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिचालन लागत कम करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल भारतीय रेलवे द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा का यह विस्तार भारत के हरित विकास मॉडल का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

Record No- 58
सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा देश का रक्षा निर्यात
एक अप्रैल 2025 को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये (लगभग 2.76 अरब डॉलर) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2023-24 के 21,083 करोड़ रुपये की तुलना में 12.04 प्रतिशत अधिक था। इसके साथ ही भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया और वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 80 देशों तक पहुंच चुका है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति, ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का परिणाम मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में निजी क्षेत्र ने 15,233 करोड़ रुपये तथा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) ने 8,389 करोड़ रुपये के निर्यात में योगदान दिया। विशेष रूप से DPSUs के निर्यात में 42.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मिसाइल, रडार, गोला-बारूद, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, नौसैनिक प्रणालियां और एयरोस्पेस उपकरणों की बढ़ती मांग ने भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। विशेषज्ञों के अनुसार रक्षा निर्यात में यह निरंतर वृद्धि न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित कर रही है, बल्कि भारत की सामरिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रभाव को भी मजबूत कर रही है।
India’s defence exports have surged to a record high of Rs 23,622 crore in the FY 2024-25. An impressive growth of Rs 2,539 crore or 12.04% has been registered in the just-concluded FY over the defence exports figures of FY 2023-24, which were Rs 21,083 crore.
I congratulate…
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 1, 2025
Record- No-57
कॉर्पोरेट मुनाफे में अनुमान से बेहतर वृद्धि
मार्च 2026 तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) में Nifty-50 कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो अधिकांश बाजार विश्लेषकों और ब्रोकरेज संस्थानों के पूर्वानुमानों से बेहतर रही। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई जब वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी वृद्धि, ऊंची ब्याज दरों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही थी। बेहतर कॉर्पोरेट आय ने भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और घरेलू अर्थव्यवस्था की लचीलापन (Resilience) को रेखांकित किया। इस प्रदर्शन के पीछे बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और उपभोक्ता क्षेत्र की कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ऋण वितरण में वृद्धि, मजबूत उपभोक्ता मांग तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बढ़ते सरकारी व्यय का सकारात्मक प्रभाव कॉर्पोरेट नतीजों में दिखाई दिया। कॉर्पोरेट लाभप्रदता में सुधार से निवेशकों का विश्वास बढ़ा और भारतीय पूंजी बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कॉर्पोरेट क्षेत्र की आय वृद्धि और निवेश चक्र इसी प्रकार आगे बढ़ता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव रोजगार, उत्पादन और आर्थिक विकास दर पर भी पड़ेगा। इस प्रकार मार्च 2026 तिमाही के परिणाम भारत की आर्थिक मजबूती और निजी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक बने।
Record- No-56
चुनौतीपूर्ण माहौल में चालू खाते में अधिशेष का रिकॉर्ड
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में भारत ने 7.1 अरब डॉलर का चालू खाता अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज किया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापारिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह उपलब्धि भारत के बाह्य क्षेत्र (External Sector) की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत मानी गई। सेवा निर्यात, मजबूत प्रेषण प्राप्तियों और नियंत्रित व्यापार घाटे ने इस अधिशेष को संभव बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई। चालू खाते में अधिशेष का अर्थ है कि देश की विदेशी मुद्रा आय उसके विदेशी भुगतान से अधिक रही। इस उपलब्धि के पीछे सेवा निर्यात, विशेषकर आईटी और व्यवसायिक सेवाओं से प्राप्त आय, मजबूत प्रेषण (Remittances) तथा अपेक्षाकृत नियंत्रित व्यापार घाटे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इससे भारत के भुगतान संतुलन की स्थिति मजबूत हुई और विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि चालू खाते में अधिशेष निवेशकों के विश्वास को बढ़ाता है, मुद्रा स्थिरता को समर्थन देता है तथा बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था की रक्षा करने में मदद करता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह उपलब्धि भारत की बाह्य क्षेत्र (External Sector) की मजबूती और आर्थिक प्रबंधन की प्रभावशीलता को रेखांकित करती है।
Record- No-55
सेवाओं से विदेशी आय और प्रेषण का रिकॉर्ड
रिकॉर्ड एवं उपलब्धि: वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में भारत को 43.5 अरब डॉलर का प्रेषण (Remittance) प्राप्त हुआ, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 33.9 अरब डॉलर था। इस प्रकार प्रेषण प्राप्तियों में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड स्तर माना गया। भारत लगातार दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्त करने वाला देश बना रहा और इस उपलब्धि ने विदेशी मुद्रा प्रवाह तथा घरेलू मांग को मजबूत आधार प्रदान किया। यह उपलब्धि वैश्विक श्रम बाजार में भारतीय पेशेवरों और प्रवासी समुदाय की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। खाड़ी देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कार्यरत भारतीयों द्वारा भेजी गई राशि ने घरेलू खपत, निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत आधार प्रदान किया। सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सेवाओं तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की बढ़ती मांग का सकारात्मक प्रभाव भी इस वृद्धि में दिखाई दिया। विश्व बैंक लंबे समय से भारत को दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्त करने वाला देश बताता रहा है, और यह नया रिकॉर्ड उस स्थिति को और मजबूत करता है। बढ़ते प्रेषण से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की आय में वृद्धि हुई तथा घरेलू मांग को सहारा मिला, जिससे आर्थिक गतिविधियों को अतिरिक्त गति प्राप्त हुई।

Record- No-54
निजी निवेश में तीन वर्षों का उच्चतम स्तर
31 मई 2026 को जारी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से संबंधित आंकड़ों के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 (Q4 FY 2025-26) में निजी निवेश, जिसे सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation-GFCF) से मापा जाता है, की वृद्धि दर 10.8% रही। यह लगभग तीन वर्षों का सर्वोच्च स्तर माना गया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद निजी क्षेत्र द्वारा क्षमता विस्तार, नए संयंत्रों की स्थापना और विनिर्माण निवेश में तेजी इस उपलब्धि का प्रमुख कारण रही। निजी निवेश में यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, कॉर्पोरेट कर सुधार तथा व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) से जुड़े कदमों ने निवेश वातावरण को मजबूत किया है। निजी निवेश में वृद्धि का सीधा प्रभाव रोजगार सृजन, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात क्षमता पर पड़ता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार किसी भी अर्थव्यवस्था में टिकाऊ उच्च विकास दर के लिए निजी निवेश का मजबूत होना आवश्यक होता है। इसलिए 10.8% की यह वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता और निवेश आकर्षण का संकेतक भी है।

Record- No-53
अप्रैल 2025 में GST संग्रह का सर्वकालिक मासिक रिकॉर्ड
1 मई 2025 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 में सकल GST संग्रह ₹2.37 लाख करोड़ रहा, जो 1 जुलाई 2017 को GST लागू होने के बाद का अब तक का सबसे बड़ा मासिक संग्रह था। यह संग्रह पिछले वर्ष अप्रैल 2024 के ₹2.10 लाख करोड़ की तुलना में 12.6% अधिक रहा। यह रिकॉर्ड भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती औपचारिकता, बेहतर कर अनुपालन और डिजिटल टैक्स प्रशासन की सफलता को दर्शाता है। घरेलू लेनदेन से प्राप्त GST राजस्व में 10.7% तथा आयातित वस्तुओं से प्राप्त GST में 20.8% की वृद्धि दर्ज की गई। सरकार द्वारा ई-इनवॉइसिंग, डेटा एनालिटिक्स और फर्जी बिलिंग पर नियंत्रण जैसे कदमों का सकारात्मक प्रभाव संग्रह में दिखाई दिया। लगातार ऊंचे GST संग्रह से राज्यों और केंद्र सरकार दोनों की वित्तीय क्षमता मजबूत हुई, जिससे बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण और पूंजीगत निवेश पर व्यय बढ़ाने की गुंजाइश बनी। यह उपलब्धि इस बात का भी संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत मांग और व्यापारिक गतिविधियों को बनाए रखने में सफल रही।

Record- No-52
वैश्विक सार्वजनिक संपदा बना भारत का डीपीआई मॉडल
पहली बार भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल वर्ष 2024-25 तक दुनिया के सबसे सफल डिजिटल गवर्नेंस मॉडलों में शामिल हो गया। आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, कोविन और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे प्लेटफॉर्मों ने भारत को डिजिटल समावेशन का वैश्विक उदाहरण बनाया। सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 Summit के दौरान भारत ने DPI को वैश्विक सार्वजनिक संपदा (Global Digital Public Infrastructure) के रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अनेक देशों ने भारतीय मॉडल में रुचि दिखाई। इस उपलब्धि का महत्व केवल तकनीकी नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक भी है। यूपीआई के माध्यम से प्रतिमाह अरबों डिजिटल लेनदेन होने लगे, जबकि आधार आधारित सेवाओं ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई। भारत का DPI मॉडल कम लागत, बड़े पैमाने पर पहुंच और ओपन-सोर्स संरचना के कारण विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से आकर्षक माना जा रहा है। इससे भारत की “डिजिटल डिप्लोमेसी” को नई पहचान मिली और देश वैश्विक डिजिटल शासन के मानक तय करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हुआ। यह उपलब्धि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

Records No- 51
देश में AI मिशन और इंडिया AI इकोसिस्टम का रिकॉर्ड विस्तार
भारत का IndiaAI Mission, जिसे 7 मार्च 2024 को ₹10,371.92 करोड़ रुपये के साथ स्वीकृति मिली थी, अब देश के AI पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। 25 मार्च 2026 तक मिशन के अंतर्गत 38,231 GPU राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग अवसंरचना में जोड़े जा चुके थे तथा 190 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। इसके बाद 6 मार्च 2026 को अतिरिक्त GPU क्षमता जोड़कर राष्ट्रीय AI कंप्यूट क्षमता को लगभग 62,000 GPU तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। यह भारत के इतिहास में सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा निर्मित सबसे बड़े AI कंप्यूट प्लेटफॉर्मों में से एक है। IndiaAI Mission का उद्देश्य केवल तकनीकी अवसंरचना बनाना नहीं, बल्कि स्वदेशी AI मॉडल, डेटा प्लेटफॉर्म, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को सशक्त करना भी है। सरकार ने AI Compute Portal, AIKosh, Foundation Models तथा AI Safety Framework जैसी पहलों को आगे बढ़ाया है। स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों को रियायती दरों पर GPU उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों पर आधारित AI समाधानों का विकास संभव हो रहा है। इस मिशन ने भारत को AI उपभोक्ता से AI नवाचार केंद्र की दिशा में अग्रसर किया है और “Make AI in India, Make AI Work for India” की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान किया है।

Records No- 50
नई शिक्षा और स्किलिंग योजना बनी देश का सबसे बड़ा संगठित स्कीलिंग अभियान
नई शिक्षा नीति (NEP-2020) और स्किल इंडिया कार्यक्रम के विस्तार के तहत कौशल विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। 8 फरवरी 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्किल इंडिया प्रोग्राम (SIP) को ₹8,800 करोड़ के परिव्यय के साथ 2025-26 तक जारी रखने और पुनर्गठित करने को मंजूरी दी। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (PM-NAPS) और जन शिक्षण संस्थान (JSS) को एकीकृत किया गया। सरकार के अनुसार इन योजनाओं से 2.27 करोड़ से अधिक लाभार्थी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़े संगठित स्किलिंग अभियानों में से एक है। नई शिक्षा नीति ने स्कूली शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उद्योग-आधारित कौशल विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया है। आईटीआई, राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) तथा अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों के आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के लिए ₹9,885.80 करोड़ का प्रावधान भी इस क्षेत्र को मिली प्राथमिकता को दर्शाता है। उद्योग-साझेदारी, डिजिटल प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों के माध्यम से भारत अपनी युवा आबादी को भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Records No- 49
डिजिलॉकर और आधार सेवाओं के उपयोग का रिकॉर्ड
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के प्रमुख स्तंभ DigiLocker और Aadhaar ने 2025-26 तक रिकॉर्ड स्तर का उपयोग दर्ज किया है। डिजिलॉकर के माध्यम से अरबों डिजिटल दस्तावेज जारी और सत्यापित किए जा चुके हैं, जबकि आधार देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में 140 करोड़ से अधिक निवासियों को कवर कर चुका है। नवंबर 2025 में विदेश मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Passport Verification Record (PVR) को भी DigiLocker से जोड़ दिया, जिससे दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और अधिक डिजिटल तथा पेपरलेस बन गई। आधार, डिजिलॉकर, UPI और DBT मिलकर भारत के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की आधारशिला बन चुके हैं। डिजिलॉकर के जरिए नागरिक शैक्षणिक प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, बीमा, पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेज सुरक्षित रूप से प्राप्त और साझा कर सकते हैं। इससे दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता कम हुई है और सेवाओं की डिलीवरी तेज हुई है। आधार आधारित प्रमाणीकरण ने बैंकिंग, कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल भुगतान को अधिक विश्वसनीय बनाया है। IMF, विश्व बैंक और अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत की इस डिजिटल व्यवस्था को बड़े पैमाने पर सेवा वितरण का सफल मॉडल बताया है। DigiLocker और Aadhaar का बढ़ता उपयोग भारत को विश्व की अग्रणी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित कर रहा है।

Records No- 48
विश्व के सबसे बड़े कृषि डीबीटी कार्यक्रम का कीर्तिमान
रिकॉर्ड उपलब्धि: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के तहत किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता पहुंचाने में भारत ने विश्व के सबसे बड़े कृषि DBT कार्यक्रमों में स्थान बनाया है। 2 अगस्त 2025 को जारी 20वीं किस्त के अंतर्गत लगभग 9.7 करोड़ किसानों के खातों में ₹20,500 करोड़ सीधे हस्तांतरित किए गए। इसके साथ ही योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 से लेकर अगस्त 2025 तक किसानों को कुल ₹3.69 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी थी, जो एक रिकॉर्ड स्तर का प्रत्यक्ष कृषि सहायता वितरण है। पीएम-किसान योजना ने छोटे और सीमांत किसानों को नियमित आय सहायता उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। आधार-आधारित सत्यापन और DBT व्यवस्था के कारण पारदर्शिता बढ़ी है तथा बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है। कृषि क्षेत्र में प्रत्यक्ष आय सहायता के इस मॉडल को सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय समावेशन के सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। करोड़ों किसानों तक समयबद्ध तरीके से सहायता पहुंचाने की क्षमता ने भारत को कृषि कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

Records No- 47
दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल तंत्र बना DBT मॉडल
रिकॉर्ड उपलब्धि: भारत का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मॉडल दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कल्याण वितरण तंत्र बन चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार DBT के माध्यम से 2014 से 2025 के बीच लाभार्थियों के खातों में लाखों करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए हैं। आधार, जनधन और मोबाइल (JAM) त्रयी पर आधारित इस प्रणाली ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त करते हुए करोड़ों लोगों तक सरकारी सहायता सीधे पहुंचाई है। विभिन्न स्तरों पर फर्जी लाभार्थियों को हटाने से हजारों करोड़ रुपये की बचत भी दर्ज की गई है। DBT मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता और दक्षता है। छात्रवृत्ति, LPG सब्सिडी, खाद्य सहायता, किसान सम्मान निधि, मनरेगा भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं सहित सैकड़ों कार्यक्रमों में इसका उपयोग हो रहा है। डिजिटल भुगतान अवसंरचना और आधार प्रमाणीकरण के कारण सहायता राशि सीधे पात्र व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंचती है। विश्व बैंक, IMF और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी भारत के DBT और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल को विकासशील देशों के लिए अनुकरणीय बताया है। इससे भ्रष्टाचार में कमी, प्रशासनिक लागत में बचत और वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व गति मिली है।

Records No- 46
महिलाओं को वीत्तीय सहायता और बैंक ऋण देने में नया कीर्तिमान
महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को वित्तीय सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध कराने में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत देशभर में करोड़ों महिलाओं को संगठित किया गया है। वर्ष 2025-26 तक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को उद्यमिता, स्वरोजगार और आजीविका विस्तार हेतु रिकॉर्ड स्तर पर ऋण और सहायता उपलब्ध कराई गई। गुजरात जैसे राज्यों में ही SHGs को ₹1,432 करोड़ की सहायता और ₹3,652 करोड़ का बैंक ऋण प्रदान किया गया, जबकि लाखों महिलाएं “लखपति दीदी” बनीं। महिला स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार की “लखपति दीदी” पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है। SHGs को बढ़ते बैंक ऋण, डिजिटल भुगतान और बाजार संपर्क ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई ऊंचाई दी है। यह महिला-नेतृत्व वाले विकास मॉडल का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।

Records No- 45
जल जीवन मिशन के तहत पाइप नेटवर्क का रिकॉर्ड विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को देश भर में जल जीवन मीशन के तहत पाइप से जलापूर्ति अभियान की शुरुआत की थी। जब यह अभियान शुरू हुआ था उस समय देश में सिर्फ 3.23 करोड़ यानि 16.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन था। लेकिन उस अभियान का प्रभाव देखिए कि 3 मार्च 2026 तक देश में 12.58 करोड़ से अधिक अतिरिक्त परिवारों को नल जल के नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। नल जल कनेक्शन का यह विस्तार अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस विस्तार के परिणामस्वरूप देश में ग्रामीण नल जल कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 15 करोड़ से अधिक हो गई, जो विश्व के सबसे बड़े ग्रामीण पेयजल नेटवर्क विस्तारों में से एक है। इस मिशन ने ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में व्यापक परिवर्तन किया है। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में लगने वाला समय कम हुआ है, जलजनित रोगों में कमी आई है तथा शिक्षा एवं आजीविका के लिए अधिक समय उपलब्ध हुआ है। मिशन की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त 2019 से जनवरी 2026 के बीच ग्रामीण जल कवरेज 17 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गई। यह केवल आधारभूत संरचना निर्माण नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण अभियान बन गया है।

Record No-44
IMF और वैश्विक संस्थाओं ने माना भारतीय डिजिटल मॉडल का लोहा
इंटरनेशनल मोनेटरी फंड यानि IMF ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को वैश्विक विकास का महत्वपूर्ण मॉडल बताया है। 2025 में UPI द्वारा प्रतिदिन 64 करोड़ (640 मिलियन) से अधिक लेनदेन और मासिक 18.39 अरब ट्रांजेक्शन का स्तर हासिल करना विश्व के सबसे बड़े रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। IMF, विश्व बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत के डिजिटल मॉडल की विशेष रूप से सराहना की है क्योंकि इसने वित्तीय समावेशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), डिजिटल पहचान और भुगतान को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया है। आधार, UPI, डिजिलॉकर और कोविन जैसे प्लेटफॉर्मों ने दिखाया कि बड़ी आबादी वाले देश में भी कम लागत पर डिजिटल सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। IMF अधिकारियों ने भारत के DPI को “वाटरशेड मोमेंट” बताते हुए इसे आर्थिक वृद्धि और समावेशन का महत्वपूर्ण चालक माना है। यही कारण है कि अनेक विकासशील देश भारत के डिजिटल मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। यह भारत की उपलब्धि का एक रिकॉर्ड है।
Record No-43
पीएम आवास योजना के तहत हुआ रिकॉर्ड घरों का निर्माण
रिकॉर्ड उपलब्धि: भारत सरकार के अनुसार 9 दिसंबर 2025 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत 3.86 करोड़ घर स्वीकृत किए जा चुके थे, जिनमें से 2.92 करोड़ पक्के घरों का निर्माण पूरा हो चुका था। यह योजना शुरू होने के बाद से ग्रामीण आवास निर्माण का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। साथ ही, 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य की दिशा में कार्य जारी है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवासीय सुरक्षा को नई दिशा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने से सामाजिक और आर्थिक जीवन स्तर में सुधार हुआ है। अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना का विस्तार करते हुए अतिरिक्त 2 करोड़ ग्रामीण घरों के निर्माण को मंजूरी दी थी। योजना की विशेषता यह है कि इसे स्वच्छता, बिजली, जलापूर्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के साथ जोड़ा गया है। इससे “सबके लिए आवास” के लक्ष्य को गति मिली है और ग्रामीण विकास को व्यापक आधार प्राप्त हुआ है।

Records No- 42
विकसित भारत 2047 के विजन को मिला वैश्विक समर्थन
भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को केंद्र में रखकर प्रस्तुत “Viksit Bharat 2047” विजन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। 2024-25 के दौरान G20, World Economic Forum, BRICS, IMF और विभिन्न निवेश सम्मेलनों में भारत ने इस दीर्घकालिक विकास दृष्टि को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। भारत ने 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था, उच्च आय, आधुनिक अवसंरचना, हरित ऊर्जा और तकनीकी नेतृत्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक निवेशकों ने भारत की मजबूत विकास दर, जनसांख्यिकीय लाभांश और सुधारवादी नीतियों को इस लक्ष्य की प्रमुख ताकत बताया है। अनेक वैश्विक कंपनियों ने विनिर्माण, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की घोषणाएं की हैं। “Viksit Bharat 2047” केवल एक राष्ट्रीय संकल्प नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक भूमिका को लेकर वैश्विक विश्वास का भी प्रतीक बनता जा रहा है।

Records No- 41
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल को मिली वैश्विक मान्यता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक वैश्विक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने ₹10,372 करोड़ के IndiaAI Mission को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य AI कंप्यूटिंग क्षमता, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है। आधार, UPI, डिजिलॉकर, कोविन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही वैश्विक स्तर पर प्रशंसा प्राप्त कर चुके हैं। विश्व बैंक, IMF और G20 के विभिन्न मंचों पर भारत के डिजिटल मॉडल को विकासशील देशों के लिए अनुकरणीय बताया गया है। भारत में डिजिटल भुगतान की रिकॉर्ड वृद्धि और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने शासन को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाया है। AI, डेटा गवर्नेंस और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां उसे तकनीक-आधारित सुशासन के वैश्विक उदाहरण के रूप में स्थापित कर रही हैं।

Records No- 40
भारत ने उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष अनुसंधान और डेटा साझेदारी में बनाया नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2024-25 के दौरान भारत ने कई देशों के साथ उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष अनुसंधान और डेटा साझेदारी का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष इकाई NSIL के माध्यम से विदेशी उपग्रह प्रक्षेपणों की संख्या में भी वृद्धि हुई। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता, कम लागत वाली अंतरिक्ष तकनीक और विश्वसनीय लॉन्च सेवाओं को स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में भारत की मांग बढ़ी और भारत वैश्विक अंतरिक्ष साझेदारियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

Records No- 39
रक्षा सहयोग समझौतों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में ऐतिहासिक वृद्धि
2024-25 के दौरान भारत ने अमेरिका, फ्रांस, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब तथा यूरोपीय देशों सहित अनेक रणनीतिक साझेदारों के साथ रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई दी। इस अवधि में भारत ने कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों को आगे बढ़ाया, जिनमें अमेरिका से MQ-9B ड्रोन खरीद, फ्रांस के साथ रक्षा एवं एयरोस्पेस सहयोग तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं। भारत अब 100 से अधिक देशों के साथ रक्षा सहयोग और सुरक्षा संवाद बनाए हुए है। QUAD, I2U2 और इंडो-पैसिफिक साझेदारियों में भारत की भूमिका भी मजबूत हुई है। रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि के साथ-साथ तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और सह-उत्पादन की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इन साझेदारियों ने भारत की सामरिक क्षमता, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत का बढ़ता रक्षा सहयोग उसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक प्रमुख और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।
Records No- 38
RuPay का वैश्विक विस्तार, अनेक देशों में भुगतान व्यवस्था से जुड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है। मई 2025 तक RuPay की सेवाएं भूटान, नेपाल, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित कई देशों में शुरू या स्वीकार की जा चुकी थीं। इसी अवधि में भारत में UPI के माध्यम से 18.68 अरब से अधिक मासिक लेन-देन दर्ज किए गए, जो दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली का रिकॉर्ड है। भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow लिंक तथा मॉरीशस और श्रीलंका में UPI लॉन्च ने सीमा-पार भुगतान को सरल बनाया है। RuPay कार्ड की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता भी लगातार बढ़ी है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत का यह मॉडल अब कई देशों द्वारा अध्ययन और अपनाया जा रहा है। UPI और RuPay का विस्तार भारत की फिनटेक क्षमता और वैश्विक डिजिटल नेतृत्व का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।
Records No- 37
IMEC के वैश्विक समर्थन से भारत की भू-आर्थिक रणनीति मजबूत
India-Middle East-Europe Corridor (IMEC) को वैश्विक समर्थन मिलने से भारत की अमेरिका, यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और जी-7 के देशों में व्यापक पहुंच बढ़ गई है। 9 सितम्बर 2023 को नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल में वैश्विक रणनीतिक परियोजना के रूप में तेजी से आगे बढ़ा है। यह कॉरिडोर भारत, यूएई, सऊदी अरब और यूरोप को रेल, बंदरगाह, ऊर्जा तथा डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने का लक्ष्य रखता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार IMEC से भारत और यूरोप के बीच माल परिवहन समय में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। यह परियोजना विश्व की लगभग 25 प्रतिशत आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक GDP से जुड़े क्षेत्रों को कनेक्ट करने की क्षमता रखती है। G7 देशों, यूरोपीय संघ, अमेरिका तथा खाड़ी देशों ने इसके प्रति लगातार समर्थन व्यक्त किया है। IMEC को वैश्विक सप्लाई चेन विविधीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत की भू-आर्थिक और रणनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।
Records No- 36
“Voice of the Global South” से भारत हुआ सशक्त
ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में भारत की वैश्विक स्वीकार्यता अब नई क्षितिज पर पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के प्रतिनिधि और प्रवक्ता के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। 2025 में आयोजित विभिन्न वैश्विक मंचों—G7, BRICS और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संवादों—में भारत ने विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता से उठाया। भारत ने ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा, जलवायु वित्त, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती प्रदान की है। भारत की पहल पर अफ्रीकी संघ (African Union) को G20 की स्थायी सदस्यता मिलने के बाद भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और अधिक मजबूत हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी भारत को “Voice of the Global South” के रूप में प्रस्तुत किया। यह भूमिका भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता, विकास साझेदारी और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में उसके प्रभाव को दर्शाती है।
Records No- 35
ONDC पर लेन-देन का बना सर्वकालिक उच्च स्तरीय कीर्तिमान
भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने मई 2025 में कुल डिजिटल लेन-देन (Transactions) का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड दर्ज किया। ONDC के माध्यम से ई-कॉमर्स, मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और फूड डिलीवरी सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ा है। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में छोटे व्यापारियों तथा MSMEs की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार ONDC से जुड़ने के बाद छोटे शहरों के MSMEs के राजस्व में औसतन 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। ONDC का उद्देश्य कुछ बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रभुत्व को कम कर छोटे व्यापारियों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। डिजिटल इंडिया और ओपन नेटवर्क आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ONDC के विस्तार से भारत दुनिया में ओपन डिजिटल कॉमर्स मॉडल का अग्रणी उदाहरण बनकर उभरा है।
Records No – 34
वैश्विक सप्लाई चेन हब के रूप में भारत का रिकॉर्ड स्थापित
वैश्विक कंपनियों द्वारा अपनाई गई रणनीति के बीच भारत तेजी से वैश्विक सप्लाई चेन हब के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2025 में भारत में विदेशी कंपनियों के नए पंजीकरण और विनिर्माण निवेश में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, टेक्सटाइल और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में उत्पादन इकाइयों का तेजी से विस्तार किया है। Apple, Tesla सप्लायर नेटवर्क, Foxconn, Micron और VinFast जैसी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणा की। विश्व बैंक और IMF की रिपोर्टों में भी भारत को सबसे भरोसेमंद उभरते विनिर्माण केंद्रों में शामिल किया गया है। मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज लॉजिस्टिक्स सुधार, जीएसटी व्यवस्था, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और PLI योजनाओं ने भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाया है। भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया और विश्व की सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका निभा रहा है। यह परिवर्तन भारत को दीर्घकालिक आर्थिक और औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
भारत अब केवल दुनिया के लिए एक बड़ा बाज़ार नहीं रहा, बल्कि तेजी से एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है।
सरकार सिर्फ फैक्ट्रियां स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एकीकृत औद्योगिक हब विकसित कर रही है, जहां सड़क, बिजली, लॉजिस्टिक्स, कुशल कार्यबल और सप्लाई चेन जैसी… pic.twitter.com/qVTgRLDzxv
— DD News UP (@DDNewsUP) May 13, 2026
Records No – 33
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा कीर्तिमान
भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात में नया इतिहास रचते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 38 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात दर्ज किया। इसमें अकेले मोबाइल फोन निर्यात का योगदान 24 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन भी तेजी से बढ़कर 115 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। Apple, Samsung, Dixon, Foxconn और Tata Electronics जैसी कंपनियों के विस्तार से भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण केंद्र के रूप में उभरा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, सेमीकंडक्टर मिशन और ‘मेक इन India’ अभियान ने इस वृद्धि को मजबूत आधार प्रदान किया है। अमेरिका और यूरोप को स्मार्टफोन तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में यह उछाल भारत की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
Bharat achieves a record electronics exports of $47 bn (₹4.15 lakh cr) in CY 2025
📦 ~$30 bn from PLI‑driven smartphone exports
🚀 11x growth since FY15
🌍 Electronics is now Bharat’s third largest export item
👩🏭 25 lakh new jobs with strong women participation,… pic.twitter.com/nktpZPfcUz
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) January 19, 2026
Records No – 32
रक्षा निर्यात में भारत की वृद्धि ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए वित्त वर्ष 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात दर्ज किया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक रहा। वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा निर्यात केवल लगभग ₹1,940 करोड़ था, यानी एक दशक में इसमें 12 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, मिसाइल सिस्टम, रडार, हेलीकॉप्टर पार्ट्स, बुलेटप्रूफ जैकेट और नौसैनिक उपकरण निर्यात कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस लड़ाकू विमान, आर्टिलरी सिस्टम और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन को विशेष बढ़ावा मिला है। निजी क्षेत्र और डीआरडीओ की भागीदारी ने भी इस वृद्धि को गति दी है। रक्षा निर्यात में यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Records No – 31
मेक इन इंडिया के अंतर्गत मोबाइल निर्माण का बना रिकॉर्ड
‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत भारत ने मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वर्ष 2025 में भारत में निर्मित स्मार्टफोन उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मोबाइल निर्यात में 28 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। Counterpoint Research के अनुसार भारत में बने स्मार्टफोन अब कुल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई निर्यात हो रहे हैं फॉक्सकॉन, डिक्सन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सैमसंग जैसी कंपनियों ने भारत को वैश्विक मोबाइल निर्माण हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से Apple iPhone के निर्यात में तेज उछाल देखने को मिला। भारत अब केवल घरेलू मांग पूरी नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का भी बड़ा केंद्र बन रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने भारत को दुनिया के प्रमुख स्मार्टफोन निर्माण देशों की श्रेणी में पहुंचा दिया है।
1. India has made significant progress in mobile and electronics manufacturing.
From just 2 mobile manufacturing units in 2014 to over 300 today, the sector has expanded rapidly. pic.twitter.com/cMjyEU2hYJ— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 4, 2025
Records No – 30
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा भारत
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक रही। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 और 2027 में भी भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। चीन, अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत की आर्थिक रफ्तार कहीं अधिक बनी हुई है।

Records No – 29
सोलर एनर्जी क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि कर बनाया नया कीर्तिमान
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 31 जनवरी 2025 तक 100.33 गीगावाट (GW) स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2014 में देश की सौर क्षमता लगभग 2.8 GW थी। यानी एक दशक में भारत की सौर क्षमता में 35 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही 84.10 GW परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं तथा 47.49 GW अतिरिक्त परियोजनाएं निविदा चरण में हैं। भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में यह बड़ी छलांग लगाई है।

Records No – 28
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का विश्वस्तरीय विस्तार का रिकॉर्ड
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने 4 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश तय किया गया। इसके बाद 2025 तक भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में कई बड़े औद्योगिक समझौते किए। सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। यह दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा अभियानों में से एक माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ऊर्जा आयात पर निर्भरता से धीरे-धीरे मुक्त करना और स्वच्छ ईंधन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाना है। इससे स्टील, रिफाइनरी, उर्वरक और भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

Records No – 27
सबसे अधिक मेट्रो नेटवर्क विस्तार का देश में बना नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने शहरी परिवहन क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर मेट्रो नेटवर्क विस्तार किया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार 2025 तक भारत में मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई बढ़कर 1,000 किलोमीटर से अधिक पहुंच गई, जबकि 2014 में यह केवल 248 किलोमीटर थी। पिछले एक दशक में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नागपुर, अहमदाबाद, कानपुर और भोपाल सहित कई शहरों में मेट्रो सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड यह रहा कि भारत अब दुनिया में सबसे तेजी से मेट्रो नेटवर्क विस्तार करने वाले देशों में शामिल हो चुका है। यह उपलब्धि भारत के तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ वर्षों में भारत का मेट्रो नेटवर्क अमेरिका और कई यूरोपीय देशों से भी बड़ा हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में उभर सकता है।

Records No- 26
देश में एयरपोर्ट विस्तार ने बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार अप्रैल 2025 तक देश में संचालित हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम की संख्या बढ़कर लगभग 164 पहुंच गई, जबकि 2014 में यह संख्या केवल 74 थी। UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत 625 से अधिक क्षेत्रीय हवाई रूट शुरू किए गए, जिससे छोटे शहर भी हवाई नेटवर्क से जुड़ने लगे। सबसे बड़ा रिकॉर्ड यह रहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा। इसके साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट और कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को नई गति दी है।

Records No- 25
ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा देश का सबसे बड़ा रेलवे विद्युतीकरण अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारतीय रेल ने दुनिया के सबसे बड़े रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में से एक को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया है। रेल मंत्रालय के अनुसार नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.2 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका था। यह उपलब्धि भारत को दुनिया की सबसे व्यापक रूप से विद्युतीकृत रेल प्रणालियों में शामिल करती है। सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड विद्युतीकरण की गति में देखने को मिला। जहां 2004–2014 के दौरान औसतन केवल 1.42 किलोमीटर प्रतिदिन रेलवे लाइन विद्युतीकृत होती थी, वहीं 2019–2025 के बीच यह गति बढ़कर 15 किलोमीटर प्रतिदिन से अधिक पहुंच गई। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार किया। नवंबर 2025 तक रेलवे की सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 898 मेगावाट हो गई, जबकि 2014 में यह केवल 3.68 मेगावाट थी।

Records No- 24
देश का सबसे बड़ा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान योजना भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर इंटीग्रेशन अभियान बन चुकी है। अक्टूबर 2021 में शुरू हुई यह योजना 2025-26 तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिसमें रेलवे, सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी 1,600 से अधिक बड़ी परियोजनाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया। सरकार के अनुसार मई 2025 तक इस प्लेटफॉर्म पर 44 केंद्रीय मंत्रालय और सभी राज्य सरकारें जुड़ चुकी थीं। इसके तहत लगभग ₹100 लाख करोड़ की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन परियोजनाओं को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम गति शक्ति का सबसे बड़ा प्रभाव लॉजिस्टिक लागत घटाने और माल परिवहन की गति बढ़ाने में देखा जा रहा है। भारत में लॉजिस्टिक लागत GDP के लगभग 13–14% तक मानी जाती थी, जिसे घटाकर वैश्विक स्तर के करीब लाने का लक्ष्य रखा गया है।

Records No- 23
भारत में एक्सप्रेसवे निर्माण की रिकॉर्ड गति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मार्च 2025 तक देश में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 1.47 लाख किलोमीटर पहुंच गई, जबकि 2014 में यह करीब 91 हजार किलोमीटर थी। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार रहा। 2024-25 के दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने भारत को दुनिया के सबसे तेज हाईवे निर्माण करने वाले देशों में शामिल कर दिया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025 में प्रतिदिन औसतन 34–36 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति दर्ज की गई, जो भारत में वैश्विक स्तर का रिकॉर्ड। यह उपलब्धि केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की लॉजिस्टिक लागत कम करने, यात्रा समय घटाने और औद्योगिक विकास को गति देने में भी मदद मिली है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने टियर-2 और टियर-3 शहरों को राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Records No- 22
PayPal का ग्लोबल पार्टनर बनकर UPI ने बनाया कीर्तिमान
2025 में वैश्विक डिजिटल पेमेंट कंपनी PayPal द्वारा UPI को अपने नए “PayPal World” प्लेटफॉर्म का पहला पेमेंट सिस्टम पार्टनर बनाना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार PayPal ने NPCI International के साथ साझेदारी कर UPI को अपने वैश्विक नेटवर्क से जोड़ा। इसका अर्थ है कि भारतीय उपभोक्ता भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स और विदेशी व्यापारिक प्लेटफॉर्म पर भी UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। PayPal World प्लेटफॉर्म में Venmo, Tencent और Mercado Pago जैसे अंतरराष्ट्रीय पेमेंट नेटवर्क भी शामिल हैं। UPI का इस नेटवर्क में शामिल होना भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का प्रमाण बना। NPCI के अनुसार यह कदम UPI को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा और भारतीय डिजिटल भुगतान मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारतीय यात्रियों, व्यापारियों और प्रवासी भारतीयों के लिए सीमा-पार भुगतान पहले से अधिक सरल और सस्ता होगा।

Records No- 21
दुनिया के 20 से अधिक देशों में सुगम होगी UPI की पहुंच
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब केवल घरेलू भुगतान प्रणाली नहीं रहा, बल्कि वैश्विक डिजिटल भुगतान नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार तेज हुआ और कई देशों ने इसे अपनाने या जोड़ने में रुचि दिखाई। सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल और भूटान जैसे देशों में UPI आधारित भुगतान सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि भारतीय रिजर्ब बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) आने वाले वर्षों में इसे 20 से अधिक देशों तक ले जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। 2025 में भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow लिंक का विस्तार हुआ, जिसमें 19 भारतीय बैंक शामिल किए गए। इसके अलावा यूरोप में भी UPI आधारित रेमिटेंस सिस्टम की शुरुआत हुई। यह भारत की “फिनटेक डिप्लोमेसी” का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार UPI का वैश्विक विस्तार डॉलर आधारित भुगतान तंत्र के विकल्प के रूप में भारत की तकनीकी शक्ति को स्थापित कर रहा है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को कम लागत और रियल-टाइम ट्रांसफर की सुविधा मिल रही है।

Records No-20
भारत में 99.8% पेमेंट डिजिटल मोड होने का बना कीर्तिमान
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब RBI की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल भुगतान लेनदेन का 99.8% हिस्सा डिजिटल माध्यमों से होने लगा। यह बदलाव केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यवहारिक परिवर्तन का संकेत है। RBI के आंकड़ों के अनुसार 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में कुल 1,572 लाख करोड़ रुपये के भुगतान लेनदेन हुए, जिनमें से 1,536 लाख करोड़ रुपये डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर किए गए। UPI अकेले कुल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम का लगभग 85% हिस्सा संभाल रहा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 में डिजिटल भुगतान का हिस्सा 96.7% था, जबकि अब यह लगभग पूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम में बदल चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर ग्रामीण बाजारों तक QR आधारित भुगतान सामान्य हो चुका है। चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता और टैक्सी जैसे छोटे लेनदेन भी अब UPI आधारित हो गए हैं। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। भारत का यह मॉडल अब दुनिया के लिए “डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर” का उदाहरण बन रहा है।

Records No-19
मोदी के तीसरे कार्यकाल में ऐतिहासिक जीएसटी (GST) कलेक्शन का रिकॉर्ड
भारत में अप्रैल 2025 के दौरान वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने नया इतिहास रचते हुए 2.37 लाख करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च मासिक कलेक्शन दर्ज किया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक रहा और जुलाई 2017 में GST व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा मासिक टैक्स संग्रह बना। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकॉर्ड के पीछे मजबूत आर्थिक गतिविधियां, बढ़ती उपभोग क्षमता, डिजिटल टैक्स अनुपालन, ई-इनवॉइसिंग प्रणाली तथा कर प्रशासन में पारदर्शिता जैसे प्रमुख कारण रहे। जीएसटी संग्रह में लगातार वृद्धि को भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार और कर आधार के मजबूत होने का संकेत भी माना जा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, उच्च GST राजस्व सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत व्यय को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है। यह उपलब्धि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और कर सुधारों की प्रभावशीलता को दर्शाने वाले महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के रूप में देखी जा रही है।

Records No-18
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रिकॉर्ड
भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रिकॉर्ड दर्ज किया है। नीति आयोग तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निवेश ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। पिछले एक दशक में भारत ने स्टार्टअप, डिजिटल भुगतान, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आकार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल आर्थिक रैंकिंग में बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास और भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता का संकेत भी है। तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अब वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच गया है।

Records No-17
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया उच्च सर्वकालिक रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों (सितंबर-अक्टूबर 2024) में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) पर पहुंचना एक असाधारण आर्थिक रिकॉर्ड है। जो यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कितनी मजबूत स्थिति में खड़ी है। इस प्रकार भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। इससे देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक वित्तीय भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत माना गया। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में आरक्षित स्थिति शामिल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकॉर्ड भारत की मजबूत निर्यात क्षमता, स्थिर पूंजी प्रवाह, बढ़ते निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक की सतर्क मौद्रिक नीति का परिणाम है। उच्च विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा विनिमय संकट से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। यह उपलब्धि भारत की उभरती वैश्विक आर्थिक शक्ति और वित्तीय विश्वसनीयता को भी मजबूत करती है।

रिकॉर्ड नंबर-16
लगातार 25 वर्षों तक कार्यपालिका का शीर्ध पद संभालने का रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2001 से लेकर वर्ष 2026 तक लगातार शीर्ष कार्यपालिका पदों पर बने रहकर भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद वे लगभग 13 वर्षों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे और मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2019 और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने अपने नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखी। इस प्रकार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल लगभग 25 वर्षों तक पहुंच गया है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने लंबे समय तक लगातार शीर्ष कार्यपालिका पद पर बने रहना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल चुनावी सफलता का संकेत नहीं, बल्कि लंबे समय तक जनसमर्थन, संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक निरंतरता का भी प्रतीक है। लगातार तीन दशकों के करीब शासन नेतृत्व ने उन्हें स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक सक्रिय शीर्ष प्रशासकों में शामिल कर दिया है।

Records No-15
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 ने जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Responsible AI) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। समिट के दौरान केवल 24 घंटे में 2,50,946 लोगों ने एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग की शपथ लेकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यह अभियान IndiaAI Mission और Intel India के सहयोग से आयोजित किया गया था। विशेष बात यह रही कि रिकॉर्ड के लिए प्रारंभिक लक्ष्य मात्र 5,000 शपथों का था, लेकिन छात्रों, शिक्षकों और तकनीकी समुदाय की व्यापक भागीदारी ने इसे कई गुना पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि केवल संख्या का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत की “जिम्मेदार एआई” नीति और डिजिटल नैतिकता के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है। इस पहल ने भारत को एआई नवाचार के साथ-साथ नैतिक और समावेशी तकनीकी नेतृत्व के केंद्र के रूप में भी स्थापित करने का संदेश दिया।

Records No-14
विश्व का सबसे बड़ा Biometric Identity System बना भारत का आधार कार्यक्रम
भारत का आधार कार्यक्रम आज विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2026 तक लगभग 134 करोड़ “लाइव आधार” धारकों के साथ यह दुनिया का सबसे व्यापक डिजिटल पहचान नेटवर्क बन गया है। आधार केवल पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। UIDAI के आंकड़ों के अनुसार, आधार प्रणाली के माध्यम से 17,000 करोड़ से अधिक authentication transactions पूरे किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक उपयोगिता और विश्वसनीयता को दर्शाते हैं। बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में आधार आधारित सत्यापन ने पारदर्शिता और सेवा वितरण की गति को मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी विशाल जनसंख्या के लिए सुरक्षित और रियल-टाइम डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) मॉडल की वैश्विक सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

Records No-13
देश के सबसे अधिक क्षमता वाले वधावन डीप वाटर पोर्ट का निर्माण
महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित हो रहा वधावन डीप-वाटर पोर्ट भारत की समुद्री अवसंरचना में एक ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह पोर्ट दुनिया के शीर्ष 10 बंदरगाहों में शामिल हो सकता है। इसकी अनुमानित क्षमता लगभग 298 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक कार्गो हैंडलिंग तथा 23.2 मिलियन TEU कंटेनर संचालन की होगी, जो इसे भारत का सबसे अधिक क्षमता वाला कंटेनर पोर्ट बना सकती है। यह परियोजना भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, वधावन पोर्ट विदेशी ट्रांसशिपमेंट पर निर्भरता कम करने, निर्यात क्षमता बढ़ाने तथा पश्चिमी तट को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। वधावन पोर्ट की क्षमता वर्तमान में देश के सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, जिसकी क्षमता 7.3 मिलियन TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) का है, उससे तीन गुना अधिक होगी। मुंबई से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित वधावन पोर्ट देश की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें समुद्र से भूमि पुनर्ग्रहण (Reclamation) के लिए आसपास के तटीय क्षेत्रों की मिट्टी और रेत का उपयोग किया जाएगा।

Records No-12
भारत का सबसे बड़ा डीप-वाटर पोर्ट, नया कीर्तिमान
महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित हो रहा वधावन मेगा पोर्ट भारत की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। लगभग 20 मीटर से अधिक प्राकृतिक ड्राफ्ट के कारण यह देश का सबसे बड़ा डीप-वाटर पोर्ट बनने की दिशा में अग्रसर है। इतनी गहराई होने से यहां दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज, जिनकी क्षमता लगभग 24,000 TEU तक होती है, आसानी से संचालन कर सकेंगे। वर्तमान में भारत के अधिकांश बंदरगाह इतने बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता बढ़ जाती है। वधावन पोर्ट इस निर्भरता को कम कर भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से निर्यात, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धा को भी बड़ा बल मिलने की संभावना है।

Records No-11
वधावन मेगा पोर्ट प्रोजेक्ट पर निवेश का नया रिकॉर्ड
वधावन मेगा पोर्ट परियोजना भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में गिनी जा रही है। लगभग ₹76,220 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को जून 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। यह निवेश केवल एक बंदरगाह निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स और समुद्री व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक कंटेनर टर्मिनल, डीप-वाटर सुविधा, रेल और सड़क कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने तथा विदेशी ट्रांसशिपमेंट पर निर्भरता घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, इससे रोजगार सृजन और पश्चिमी तट के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है।

Records No-10
भारत ने डिजिटल ट्रांजेक्शन में विश्व में रचा नया कीर्तिमान
भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूरी दुनिया में हो रहे कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधे से अधिक हिस्से पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आधारित भुगतान प्रणाली ने देश को विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल लेन-देन अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आज भारत में हर महीने 20 बिलियन (2,000 करोड़) से अधिक UPI ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जो डिजिटल इंडिया अभियान की व्यापक सफलता और तकनीकी समावेशन का प्रमाण हैं। यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का भी संकेत है। गांवों से लेकर महानगरों तक छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, किसान, छात्र और आम नागरिक तेजी से डिजिटल भुगतान को अपना रहे हैं। नकदी पर निर्भरता कम होने से लेन-देन अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बने हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापक आधार प्रदान किया है। भारत का UPI मॉडल अब वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। सिंगापुर, फ्रांस, यूएई, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे देशों में इसकी पहुंच बढ़ना भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल नेतृत्व को दर्शाता है। यह रिकॉर्ड भारत को वैश्विक फिनटेक नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

Records No-09
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा यूनीक आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम चलाकर पीएम मोदी ने रचा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आधार कार्यक्रम विश्व की सबसे बड़ी यूनिक डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है। लगभग 140 करोड़ आधार धारकों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन नेटवर्क माना जा रहा है। मई 2024 के बाद इस प्रणाली ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 2,707 करोड़ से अधिक आधार ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन दर्ज हुए, जबकि फेस ऑथेंटिकेशन ने 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर डिजिटल गवर्नेंस में नई उपलब्धि हासिल की। इसी अवधि में e-KYC सेवाओं का उपयोग भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। आधार आधारित डिजिटल पहचान ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transaction), बैंकिंग, स्वास्थ्य, जनकल्याण और सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाया है। वैश्विक संस्थाओं द्वारा इसे “World’s Largest Biometric Identity System” और “Most Ambitious Digital Identity Programme” कहा जाना भारत की डिजिटल क्षमता तथा प्रधानमंत्री मोदी के तकनीक-आधारित सुशासन मॉडल की बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

Records No-08
भारत में दुनिया की सबसे बड़ी एआई समिट आयोजित कर प्रधानमंत्री मोदी ने रचा इतिहास
भारत में आयोजित “इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026” ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वैश्विक तकनीकी कूटनीति के केंद्र में स्थापित कर दिया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ’ का अब तक का सबसे बड़ा एआई शिखर सम्मेलन माना गया, जिसमें लगभग 88 देशों, अग्रणी टेक कंपनियों और नीति-निर्माताओं की भागीदारी ने भारत की बढ़ती डिजिटल शक्ति को प्रदर्शित किया। इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि जिम्मेदार एआई के समर्थन में 24 घंटे के भीतर सर्वाधिक लोगों द्वारा शपथ लेकर बनाया गया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा, जिसने इसे केवल एक तकनीकी सम्मेलन न होकर वैश्विक जनभागीदारी अभियान का स्वरूप दे दिया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत “ह्यूमन-सेंट्रिक एआई” मॉडल ने यह संदेश दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि मानव कल्याण होना चाहिए। यह समिट भारत की उस नई पहचान का प्रतीक बनकर उभरा, जिसमें देश एआई नीति, नवाचार और नैतिक तकनीकी नेतृत्व के वैश्विक केंद्र के रूप में सामने आया।

Records No-07
आयुष्मान भारत योजना में 70 वर्ष आयु वर्ग को जोड़कर बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को ₹5 लाख तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह पहल इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि आयुष्मान भारत पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में गिनी जाती है। अब आय की सीमा से परे सभी 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को इसमें शामिल करना सामाजिक सुरक्षा कवरेज के व्यापक विस्तार का संकेत देता है। सरकारी अनुमान के अनुसार इस निर्णय से लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों तथा 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा और गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च को कम करने की दृष्टि से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत में सार्वभौमिक वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में रिकॉर्ड स्तर की कवरेज विस्तार पहल के रूप में उभरता दिखाई देता है।

Records No-06
तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का रचा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाया गया ‘लखपति दीदी’ अभियान ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक पहल के रूप में उभरा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें वार्षिक ₹1 लाख या उससे अधिक की आमदनी तक पहुंचाने का लक्ष्य इस योजना का मूल आधार रहा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का संकल्प पूरा होने की घोषणा इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाती है। इस पहल ने केवल महिलाओं की आय में वृद्धि नहीं की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, परिवारिक निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है। कौशल विकास, बैंकिंग सुविधा, डिजिटल लेन-देन, सूक्ष्म वित्त और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देकर सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया। यह अभियान इस बात का उदाहरण बनकर उभरा है कि यदि नीति निर्माण में महिलाओं को केंद्र में रखा जाए, तो सामाजिक विकास और आर्थिक प्रगति दोनों को नई गति मिल सकती है।

Records No-05
तीसरे कार्यकाल में बना सौ दिवसीय इंफ्रास्ट्रक्चर अभियान का रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों में केंद्र सरकार द्वारा लगभग ₹3 लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी देना स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक और विकासात्मक नीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवधि में सड़क, रेल, बंदरगाह, ग्रामीण संपर्क, मेट्रो और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनेक बड़ी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें वधावन मेगा पोर्ट, विभिन्न आर्थिक कॉरिडोर तथा PMGSY-IV जैसी योजनाएं प्रमुख रहीं। इतनी कम अवधि में इतने बड़े निवेश पैकेज की मंजूरी ने यह संकेत दिया कि मोदी 3.0 सरकार आर्थिक वृद्धि को इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित मॉडल से गति देना चाहती है। यद्यपि इसे लेकर कोई आधिकारिक “रिकॉर्ड” घोषित नहीं किया गया है, फिर भी राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यह स्वतंत्र भारत के शुरुआती कार्यकालों के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर अप्रूवल अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसने सरकार की निर्णय क्षमता और तेज क्रियान्वयन दृष्टि को रेखांकित किया।

Record No-04
पीएम मोदी ने एनडीए गठबंधन सरकार का बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने दम पर पूर्ण बहुमत (240 सीटें) न मिलने के बावजूद, उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार का सफलतापूर्वक गठन किया और गठबंधन की राजनीति का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। भारतीय जनता पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत के लिए आवश्यक 272 सीटें नहीं मिलीं और पार्टी 240 सीटों पर सिमट गई, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कुल 293 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। इसके बाद मोदी के नेतृत्व में सहयोगी दलों — जैसे टीडीपी और जेडीयू — के साथ मिलकर सफलतापूर्वक सरकार का गठन किया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2014 और 2019 में भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार चला चुकी थी, जबकि 2024 में उसे गठबंधन समन्वय और सहयोगी दलों के समर्थन के साथ सरकार संचालित करनी पड़ी। इसके बावजूद एनडीए को एकजुट बनाए रखना और तीसरी बार लगातार सरकार बनाना भारतीय राजनीति में मोदी की नेतृत्व क्षमता और गठबंधन प्रबंधन कौशल का महत्वपूर्ण स्थापित करने के साथ एक नया रिकार्ड भी बना है।

Record No-03
निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में पीएम मोदी के नाम अभूतपूर्व रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति में एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल 8,000 दिनों से आगे निकल चुका है। मार्च 2026 में उन्होंने 8,931 दिनों का कार्यकाल पूरा कर देश में किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबी सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जिन्होंने 8,930 दिनों तक शासन किया था। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और मई 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 26 मई 2014 से वे लगातार भारत के प्रधानमंत्री हैं। यह उपलब्धि केवल लंबी राजनीतिक उपस्थिति नहीं, बल्कि निरंतर जनसमर्थन, चुनावी सफलता और नेतृत्व की स्थिरता का प्रतीक मानी जा रही है। सरकार के मुखिया के रूप में लंबा सफर: केंद्र और गुजरात के मुख्यमंत्री पद को मिलाकर, श्री मोदी एक निर्वाचित सरकार के प्रमुख के तौर पर 8,000 से अधिक दिनों तक काम करने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बना चुके हैं।

Records No-02
भाजपा के इतिहास में लगातार तीन बार सत्ता में पहुंचाने वाले पहले नेता बने पीएम मोदी
भारतीय जनता पार्टी के 44 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब एक नेता के नेतृत्व में पार्टी लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई हो। वो नेता कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है जिन्होंने अपनी पार्टी को लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता पर आसीन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024 में लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाकर भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी, लेकिन इससे पहले पार्टी किसी भी नेता के नेतृत्व में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता तक नहीं पहुंच सकी थी। वर्ष 2014 में पूर्ण बहुमत, 2019 में और अधिक सीटों के साथ विजय तथा 2024 में लगातार तीसरी बार सरकार गठन ने प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा के इतिहास का पहला ऐसा नेता बना दिया, जिसने पार्टी को निरंतर तीन कार्यकाल तक सत्ता में बनाए रखा। यह उपलब्धि केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि संगठनात्मक विस्तार, नेतृत्व की स्वीकार्यता और राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी जनाधार का संकेत भी मानी जा रही है। स्वतंत्र भारत की राजनीति में भी यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले केवल जवाहरलाल नेहरू ही लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने थे।
Record No-01
लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर नरेंद्र मोदी ने रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान
नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर देश की संसदीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया। वे स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बन गए, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में उनके लंबे जनाधार, नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जा रही है।
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आज शाम हुए समारोह में मैंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मैं और मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी, 140 करोड़ देशवासियों की सेवा करने और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। pic.twitter.com/TKNNomHf0r
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2024
यद्यपि जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही वर्ष 1947 में देश के प्रधानमंत्री बन गए थे, किंतु वे वर्ष 1952 में हुए प्रथम लोकसभा चुनाव के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हुए। इसके बाद 1957 और 1962 के लोकसभा चुनावों में भी उनकी जीत हुई तथा वे लगातार प्रधानमंत्री पद पर बने रहे। 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे देश के प्रधानमंत्री रहे।
नरेंद्र मोदी का पहला कार्यकाल वर्ष 2014 में शुरू हुआ, जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता हासिल की। वर्ष 2019 में भाजपा ने पहले से अधिक बहुमत प्राप्त कर दूसरी बार सरकार बनाई और मोदी लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में नेतृत्व की स्थिरता और जनविश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है।










