प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने विकास, अर्थव्यवस्था, तकनीक, आधारभूत संरचना, रक्षा, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, वहीं रक्षा निर्यात, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और सौर ऊर्जा क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। तीसरे कार्यकाल के दौरान बने ये रिकॉर्ड केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को भी दर्शाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज हुई ये उपलब्धियां विकसित भारत की दिशा में बढ़ते नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं।
Records No – 31
मेक इन इंडिया के अंतर्गत मोबाइल निर्माण का बना रिकॉर्ड
‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत भारत ने मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वर्ष 2025 में भारत में निर्मित स्मार्टफोन उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मोबाइल निर्यात में 28 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। Counterpoint Research के अनुसार भारत में बने स्मार्टफोन अब कुल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई निर्यात हो रहे हैं फॉक्सकॉन, डिक्सन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सैमसंग जैसी कंपनियों ने भारत को वैश्विक मोबाइल निर्माण हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से Apple iPhone के निर्यात में तेज उछाल देखने को मिला। भारत अब केवल घरेलू मांग पूरी नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का भी बड़ा केंद्र बन रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने भारत को दुनिया के प्रमुख स्मार्टफोन निर्माण देशों की श्रेणी में पहुंचा दिया है।
1. India has made significant progress in mobile and electronics manufacturing.
From just 2 mobile manufacturing units in 2014 to over 300 today, the sector has expanded rapidly. pic.twitter.com/cMjyEU2hYJ— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 4, 2025
Records No – 30
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा भारत
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है। 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक रही। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 और 2027 में भी भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। चीन, अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत की आर्थिक रफ्तार कहीं अधिक बनी हुई है।

Records No – 29
सोलर एनर्जी क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि कर बनाया नया कीर्तिमान
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 31 जनवरी 2025 तक 100.33 गीगावाट (GW) स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2014 में देश की सौर क्षमता लगभग 2.8 GW थी। यानी एक दशक में भारत की सौर क्षमता में 35 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही 84.10 GW परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं तथा 47.49 GW अतिरिक्त परियोजनाएं निविदा चरण में हैं। भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में यह बड़ी छलांग लगाई है।

Records No – 28
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का विश्वस्तरीय विस्तार का रिकॉर्ड
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने 4 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश तय किया गया। इसके बाद 2025 तक भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में कई बड़े औद्योगिक समझौते किए। सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। यह दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा अभियानों में से एक माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ऊर्जा आयात पर निर्भरता से धीरे-धीरे मुक्त करना और स्वच्छ ईंधन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाना है। इससे स्टील, रिफाइनरी, उर्वरक और भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

Records No – 27
सबसे अधिक मेट्रो नेटवर्क विस्तार का देश में बना नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने शहरी परिवहन क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर मेट्रो नेटवर्क विस्तार किया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार 2025 तक भारत में मेट्रो रेल नेटवर्क की लंबाई बढ़कर 1,000 किलोमीटर से अधिक पहुंच गई, जबकि 2014 में यह केवल 248 किलोमीटर थी। पिछले एक दशक में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, नागपुर, अहमदाबाद, कानपुर और भोपाल सहित कई शहरों में मेट्रो सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड यह रहा कि भारत अब दुनिया में सबसे तेजी से मेट्रो नेटवर्क विस्तार करने वाले देशों में शामिल हो चुका है। यह उपलब्धि भारत के तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ वर्षों में भारत का मेट्रो नेटवर्क अमेरिका और कई यूरोपीय देशों से भी बड़ा हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक शहरी परिवहन मॉडल के रूप में उभर सकता है।

Records No- 26
देश में एयरपोर्ट विस्तार ने बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार दर्ज किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार अप्रैल 2025 तक देश में संचालित हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम की संख्या बढ़कर लगभग 164 पहुंच गई, जबकि 2014 में यह संख्या केवल 74 थी। UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत 625 से अधिक क्षेत्रीय हवाई रूट शुरू किए गए, जिससे छोटे शहर भी हवाई नेटवर्क से जुड़ने लगे। सबसे बड़ा रिकॉर्ड यह रहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा। इसके साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट और कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को नई गति दी है।

Records No- 25
ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा देश का सबसे बड़ा रेलवे विद्युतीकरण अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारतीय रेल ने दुनिया के सबसे बड़े रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में से एक को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया है। रेल मंत्रालय के अनुसार नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.2 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका था। यह उपलब्धि भारत को दुनिया की सबसे व्यापक रूप से विद्युतीकृत रेल प्रणालियों में शामिल करती है। सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड विद्युतीकरण की गति में देखने को मिला। जहां 2004–2014 के दौरान औसतन केवल 1.42 किलोमीटर प्रतिदिन रेलवे लाइन विद्युतीकृत होती थी, वहीं 2019–2025 के बीच यह गति बढ़कर 15 किलोमीटर प्रतिदिन से अधिक पहुंच गई। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा विस्तार किया। नवंबर 2025 तक रेलवे की सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 898 मेगावाट हो गई, जबकि 2014 में यह केवल 3.68 मेगावाट थी।

Records No- 24
देश का सबसे बड़ा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान योजना भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर इंटीग्रेशन अभियान बन चुकी है। अक्टूबर 2021 में शुरू हुई यह योजना 2025-26 तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिसमें रेलवे, सड़क, बंदरगाह, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी 1,600 से अधिक बड़ी परियोजनाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया। सरकार के अनुसार मई 2025 तक इस प्लेटफॉर्म पर 44 केंद्रीय मंत्रालय और सभी राज्य सरकारें जुड़ चुकी थीं। इसके तहत लगभग ₹100 लाख करोड़ की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन परियोजनाओं को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम गति शक्ति का सबसे बड़ा प्रभाव लॉजिस्टिक लागत घटाने और माल परिवहन की गति बढ़ाने में देखा जा रहा है। भारत में लॉजिस्टिक लागत GDP के लगभग 13–14% तक मानी जाती थी, जिसे घटाकर वैश्विक स्तर के करीब लाने का लक्ष्य रखा गया है।

Records No- 23
भारत में एक्सप्रेसवे निर्माण की रिकॉर्ड गति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत ने सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मार्च 2025 तक देश में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 1.47 लाख किलोमीटर पहुंच गई, जबकि 2014 में यह करीब 91 हजार किलोमीटर थी। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार रहा। 2024-25 के दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने भारत को दुनिया के सबसे तेज हाईवे निर्माण करने वाले देशों में शामिल कर दिया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025 में प्रतिदिन औसतन 34–36 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति दर्ज की गई, जो भारत में वैश्विक स्तर का रिकॉर्ड। यह उपलब्धि केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की लॉजिस्टिक लागत कम करने, यात्रा समय घटाने और औद्योगिक विकास को गति देने में भी मदद मिली है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने टियर-2 और टियर-3 शहरों को राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Records No- 22
PayPal का ग्लोबल पार्टनर बनकर UPI ने बनाया कीर्तिमान
2025 में वैश्विक डिजिटल पेमेंट कंपनी PayPal द्वारा UPI को अपने नए “PayPal World” प्लेटफॉर्म का पहला पेमेंट सिस्टम पार्टनर बनाना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार PayPal ने NPCI International के साथ साझेदारी कर UPI को अपने वैश्विक नेटवर्क से जोड़ा। इसका अर्थ है कि भारतीय उपभोक्ता भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स और विदेशी व्यापारिक प्लेटफॉर्म पर भी UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। PayPal World प्लेटफॉर्म में Venmo, Tencent और Mercado Pago जैसे अंतरराष्ट्रीय पेमेंट नेटवर्क भी शामिल हैं। UPI का इस नेटवर्क में शामिल होना भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का प्रमाण बना। NPCI के अनुसार यह कदम UPI को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा और भारतीय डिजिटल भुगतान मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारतीय यात्रियों, व्यापारियों और प्रवासी भारतीयों के लिए सीमा-पार भुगतान पहले से अधिक सरल और सस्ता होगा।

Records No- 21
दुनिया के 20 से अधिक देशों में सुगम होगी UPI की पहुंच
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब केवल घरेलू भुगतान प्रणाली नहीं रहा, बल्कि वैश्विक डिजिटल भुगतान नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार तेज हुआ और कई देशों ने इसे अपनाने या जोड़ने में रुचि दिखाई। सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल और भूटान जैसे देशों में UPI आधारित भुगतान सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि भारतीय रिजर्ब बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) आने वाले वर्षों में इसे 20 से अधिक देशों तक ले जाने की योजना पर काम कर रहे हैं। 2025 में भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow लिंक का विस्तार हुआ, जिसमें 19 भारतीय बैंक शामिल किए गए। इसके अलावा यूरोप में भी UPI आधारित रेमिटेंस सिस्टम की शुरुआत हुई। यह भारत की “फिनटेक डिप्लोमेसी” का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार UPI का वैश्विक विस्तार डॉलर आधारित भुगतान तंत्र के विकल्प के रूप में भारत की तकनीकी शक्ति को स्थापित कर रहा है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों को कम लागत और रियल-टाइम ट्रांसफर की सुविधा मिल रही है।

Records No-20
भारत में 99.8% पेमेंट डिजिटल मोड होने का बना कीर्तिमान
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब RBI की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल भुगतान लेनदेन का 99.8% हिस्सा डिजिटल माध्यमों से होने लगा। यह बदलाव केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यवहारिक परिवर्तन का संकेत है। RBI के आंकड़ों के अनुसार 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में कुल 1,572 लाख करोड़ रुपये के भुगतान लेनदेन हुए, जिनमें से 1,536 लाख करोड़ रुपये डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर किए गए। UPI अकेले कुल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम का लगभग 85% हिस्सा संभाल रहा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 में डिजिटल भुगतान का हिस्सा 96.7% था, जबकि अब यह लगभग पूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम में बदल चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर ग्रामीण बाजारों तक QR आधारित भुगतान सामान्य हो चुका है। चाय की दुकान, सब्जी विक्रेता और टैक्सी जैसे छोटे लेनदेन भी अब UPI आधारित हो गए हैं। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। भारत का यह मॉडल अब दुनिया के लिए “डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर” का उदाहरण बन रहा है।

Records No-19
मोदी के तीसरे कार्यकाल में ऐतिहासिक जीएसटी (GST) कलेक्शन का रिकॉर्ड
भारत में अप्रैल 2025 के दौरान वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने नया इतिहास रचते हुए 2.37 लाख करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च मासिक कलेक्शन दर्ज किया। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.6 प्रतिशत अधिक रहा और जुलाई 2017 में GST व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा मासिक टैक्स संग्रह बना। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकॉर्ड के पीछे मजबूत आर्थिक गतिविधियां, बढ़ती उपभोग क्षमता, डिजिटल टैक्स अनुपालन, ई-इनवॉइसिंग प्रणाली तथा कर प्रशासन में पारदर्शिता जैसे प्रमुख कारण रहे। जीएसटी संग्रह में लगातार वृद्धि को भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार और कर आधार के मजबूत होने का संकेत भी माना जा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, उच्च GST राजस्व सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत व्यय को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है। यह उपलब्धि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और कर सुधारों की प्रभावशीलता को दर्शाने वाले महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के रूप में देखी जा रही है।

Records No-18
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रिकॉर्ड
भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रिकॉर्ड दर्ज किया है। नीति आयोग तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निवेश ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। पिछले एक दशक में भारत ने स्टार्टअप, डिजिटल भुगतान, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आकार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल आर्थिक रैंकिंग में बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास और भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता का संकेत भी है। तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अब वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच गया है।

Records No-17
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया उच्च सर्वकालिक रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों (सितंबर-अक्टूबर 2024) में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time High) पर पहुंचना एक असाधारण आर्थिक रिकॉर्ड है। जो यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कितनी मजबूत स्थिति में खड़ी है। इस प्रकार भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। इससे देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक वित्तीय भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत माना गया। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में आरक्षित स्थिति शामिल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकॉर्ड भारत की मजबूत निर्यात क्षमता, स्थिर पूंजी प्रवाह, बढ़ते निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक की सतर्क मौद्रिक नीति का परिणाम है। उच्च विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा विनिमय संकट से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। यह उपलब्धि भारत की उभरती वैश्विक आर्थिक शक्ति और वित्तीय विश्वसनीयता को भी मजबूत करती है।

रिकॉर्ड नंबर-16
लगातार 25 वर्षों तक कार्यपालिका का शीर्ध पद संभालने का रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2001 से लेकर वर्ष 2026 तक लगातार शीर्ष कार्यपालिका पदों पर बने रहकर भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड स्थापित किया है। अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद वे लगभग 13 वर्षों तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे और मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 2019 और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने अपने नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखी। इस प्रकार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल लगभग 25 वर्षों तक पहुंच गया है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने लंबे समय तक लगातार शीर्ष कार्यपालिका पद पर बने रहना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल चुनावी सफलता का संकेत नहीं, बल्कि लंबे समय तक जनसमर्थन, संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक निरंतरता का भी प्रतीक है। लगातार तीन दशकों के करीब शासन नेतृत्व ने उन्हें स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक सक्रिय शीर्ष प्रशासकों में शामिल कर दिया है।

Records No-15
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 ने जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Responsible AI) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। समिट के दौरान केवल 24 घंटे में 2,50,946 लोगों ने एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित उपयोग की शपथ लेकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यह अभियान IndiaAI Mission और Intel India के सहयोग से आयोजित किया गया था। विशेष बात यह रही कि रिकॉर्ड के लिए प्रारंभिक लक्ष्य मात्र 5,000 शपथों का था, लेकिन छात्रों, शिक्षकों और तकनीकी समुदाय की व्यापक भागीदारी ने इसे कई गुना पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि केवल संख्या का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत की “जिम्मेदार एआई” नीति और डिजिटल नैतिकता के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है। इस पहल ने भारत को एआई नवाचार के साथ-साथ नैतिक और समावेशी तकनीकी नेतृत्व के केंद्र के रूप में भी स्थापित करने का संदेश दिया।

Records No-14
विश्व का सबसे बड़ा Biometric Identity System बना भारत का आधार कार्यक्रम
भारत का आधार कार्यक्रम आज विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और भारत सरकार के अनुसार, वर्ष 2026 तक लगभग 134 करोड़ “लाइव आधार” धारकों के साथ यह दुनिया का सबसे व्यापक डिजिटल पहचान नेटवर्क बन गया है। आधार केवल पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। UIDAI के आंकड़ों के अनुसार, आधार प्रणाली के माध्यम से 17,000 करोड़ से अधिक authentication transactions पूरे किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक उपयोगिता और विश्वसनीयता को दर्शाते हैं। बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में आधार आधारित सत्यापन ने पारदर्शिता और सेवा वितरण की गति को मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी विशाल जनसंख्या के लिए सुरक्षित और रियल-टाइम डिजिटल पहचान उपलब्ध कराना भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) मॉडल की वैश्विक सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

Records No-13
देश के सबसे अधिक क्षमता वाले वधावन डीप वाटर पोर्ट का निर्माण
महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित हो रहा वधावन डीप-वाटर पोर्ट भारत की समुद्री अवसंरचना में एक ऐतिहासिक परियोजना माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह पोर्ट दुनिया के शीर्ष 10 बंदरगाहों में शामिल हो सकता है। इसकी अनुमानित क्षमता लगभग 298 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक कार्गो हैंडलिंग तथा 23.2 मिलियन TEU कंटेनर संचालन की होगी, जो इसे भारत का सबसे अधिक क्षमता वाला कंटेनर पोर्ट बना सकती है। यह परियोजना भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, वधावन पोर्ट विदेशी ट्रांसशिपमेंट पर निर्भरता कम करने, निर्यात क्षमता बढ़ाने तथा पश्चिमी तट को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। वधावन पोर्ट की क्षमता वर्तमान में देश के सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, जिसकी क्षमता 7.3 मिलियन TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) का है, उससे तीन गुना अधिक होगी। मुंबई से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित वधावन पोर्ट देश की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें समुद्र से भूमि पुनर्ग्रहण (Reclamation) के लिए आसपास के तटीय क्षेत्रों की मिट्टी और रेत का उपयोग किया जाएगा।

Records No-12
भारत का सबसे बड़ा डीप-वाटर पोर्ट, नया कीर्तिमान
महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित हो रहा वधावन मेगा पोर्ट भारत की समुद्री क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। लगभग 20 मीटर से अधिक प्राकृतिक ड्राफ्ट के कारण यह देश का सबसे बड़ा डीप-वाटर पोर्ट बनने की दिशा में अग्रसर है। इतनी गहराई होने से यहां दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज, जिनकी क्षमता लगभग 24,000 TEU तक होती है, आसानी से संचालन कर सकेंगे। वर्तमान में भारत के अधिकांश बंदरगाह इतने बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता बढ़ जाती है। वधावन पोर्ट इस निर्भरता को कम कर भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से निर्यात, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धा को भी बड़ा बल मिलने की संभावना है।

Records No-11
वधावन मेगा पोर्ट प्रोजेक्ट पर निवेश का नया रिकॉर्ड
वधावन मेगा पोर्ट परियोजना भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में गिनी जा रही है। लगभग ₹76,220 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना को जून 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। यह निवेश केवल एक बंदरगाह निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स और समुद्री व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक कंटेनर टर्मिनल, डीप-वाटर सुविधा, रेल और सड़क कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने तथा विदेशी ट्रांसशिपमेंट पर निर्भरता घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, इससे रोजगार सृजन और पश्चिमी तट के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है।

Records No-10
भारत ने डिजिटल ट्रांजेक्शन में विश्व में रचा नया कीर्तिमान
भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूरी दुनिया में हो रहे कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन के आधे से अधिक हिस्से पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आधारित भुगतान प्रणाली ने देश को विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल लेन-देन अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आज भारत में हर महीने 20 बिलियन (2,000 करोड़) से अधिक UPI ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जो डिजिटल इंडिया अभियान की व्यापक सफलता और तकनीकी समावेशन का प्रमाण हैं। यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का भी संकेत है। गांवों से लेकर महानगरों तक छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, किसान, छात्र और आम नागरिक तेजी से डिजिटल भुगतान को अपना रहे हैं। नकदी पर निर्भरता कम होने से लेन-देन अधिक पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बने हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापक आधार प्रदान किया है। भारत का UPI मॉडल अब वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। सिंगापुर, फ्रांस, यूएई, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे देशों में इसकी पहुंच बढ़ना भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल नेतृत्व को दर्शाता है। यह रिकॉर्ड भारत को वैश्विक फिनटेक नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

Records No-09
भारत में दुनिया का सबसे बड़ा यूनीक आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम चलाकर पीएम मोदी ने रचा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का आधार कार्यक्रम विश्व की सबसे बड़ी यूनिक डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है। लगभग 140 करोड़ आधार धारकों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन नेटवर्क माना जा रहा है। मई 2024 के बाद इस प्रणाली ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 2,707 करोड़ से अधिक आधार ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन दर्ज हुए, जबकि फेस ऑथेंटिकेशन ने 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर डिजिटल गवर्नेंस में नई उपलब्धि हासिल की। इसी अवधि में e-KYC सेवाओं का उपयोग भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। आधार आधारित डिजिटल पहचान ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transaction), बैंकिंग, स्वास्थ्य, जनकल्याण और सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाया है। वैश्विक संस्थाओं द्वारा इसे “World’s Largest Biometric Identity System” और “Most Ambitious Digital Identity Programme” कहा जाना भारत की डिजिटल क्षमता तथा प्रधानमंत्री मोदी के तकनीक-आधारित सुशासन मॉडल की बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

Records No-08
भारत में दुनिया की सबसे बड़ी एआई समिट आयोजित कर प्रधानमंत्री मोदी ने रचा इतिहास
भारत में आयोजित “इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026” ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वैश्विक तकनीकी कूटनीति के केंद्र में स्थापित कर दिया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह सम्मेलन ‘ग्लोबल साउथ’ का अब तक का सबसे बड़ा एआई शिखर सम्मेलन माना गया, जिसमें लगभग 88 देशों, अग्रणी टेक कंपनियों और नीति-निर्माताओं की भागीदारी ने भारत की बढ़ती डिजिटल शक्ति को प्रदर्शित किया। इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि जिम्मेदार एआई के समर्थन में 24 घंटे के भीतर सर्वाधिक लोगों द्वारा शपथ लेकर बनाया गया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा, जिसने इसे केवल एक तकनीकी सम्मेलन न होकर वैश्विक जनभागीदारी अभियान का स्वरूप दे दिया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत “ह्यूमन-सेंट्रिक एआई” मॉडल ने यह संदेश दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि मानव कल्याण होना चाहिए। यह समिट भारत की उस नई पहचान का प्रतीक बनकर उभरा, जिसमें देश एआई नीति, नवाचार और नैतिक तकनीकी नेतृत्व के वैश्विक केंद्र के रूप में सामने आया।

Records No-07
आयुष्मान भारत योजना में 70 वर्ष आयु वर्ग को जोड़कर बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को ₹5 लाख तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह पहल इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि आयुष्मान भारत पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में गिनी जाती है। अब आय की सीमा से परे सभी 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को इसमें शामिल करना सामाजिक सुरक्षा कवरेज के व्यापक विस्तार का संकेत देता है। सरकारी अनुमान के अनुसार इस निर्णय से लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों तथा 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा और गंभीर बीमारियों के इलाज के खर्च को कम करने की दृष्टि से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत में सार्वभौमिक वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में रिकॉर्ड स्तर की कवरेज विस्तार पहल के रूप में उभरता दिखाई देता है।

Records No-06
तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का रचा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाया गया ‘लखपति दीदी’ अभियान ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक पहल के रूप में उभरा है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें वार्षिक ₹1 लाख या उससे अधिक की आमदनी तक पहुंचाने का लक्ष्य इस योजना का मूल आधार रहा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का संकल्प पूरा होने की घोषणा इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाती है। इस पहल ने केवल महिलाओं की आय में वृद्धि नहीं की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, परिवारिक निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी महिलाओं की भूमिका को मजबूत किया है। कौशल विकास, बैंकिंग सुविधा, डिजिटल लेन-देन, सूक्ष्म वित्त और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देकर सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया। यह अभियान इस बात का उदाहरण बनकर उभरा है कि यदि नीति निर्माण में महिलाओं को केंद्र में रखा जाए, तो सामाजिक विकास और आर्थिक प्रगति दोनों को नई गति मिल सकती है।

Records No-05
तीसरे कार्यकाल में बना सौ दिवसीय इंफ्रास्ट्रक्चर अभियान का रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों में केंद्र सरकार द्वारा लगभग ₹3 लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी देना स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक और विकासात्मक नीति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवधि में सड़क, रेल, बंदरगाह, ग्रामीण संपर्क, मेट्रो और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनेक बड़ी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें वधावन मेगा पोर्ट, विभिन्न आर्थिक कॉरिडोर तथा PMGSY-IV जैसी योजनाएं प्रमुख रहीं। इतनी कम अवधि में इतने बड़े निवेश पैकेज की मंजूरी ने यह संकेत दिया कि मोदी 3.0 सरकार आर्थिक वृद्धि को इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित मॉडल से गति देना चाहती है। यद्यपि इसे लेकर कोई आधिकारिक “रिकॉर्ड” घोषित नहीं किया गया है, फिर भी राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार यह स्वतंत्र भारत के शुरुआती कार्यकालों के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर अप्रूवल अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसने सरकार की निर्णय क्षमता और तेज क्रियान्वयन दृष्टि को रेखांकित किया।

Record No-04
पीएम मोदी ने एनडीए गठबंधन सरकार का बनाया नया रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपने दम पर पूर्ण बहुमत (240 सीटें) न मिलने के बावजूद, उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार का सफलतापूर्वक गठन किया और गठबंधन की राजनीति का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। भारतीय जनता पार्टी को अपने दम पर पूर्ण बहुमत के लिए आवश्यक 272 सीटें नहीं मिलीं और पार्टी 240 सीटों पर सिमट गई, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कुल 293 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। इसके बाद मोदी के नेतृत्व में सहयोगी दलों — जैसे टीडीपी और जेडीयू — के साथ मिलकर सफलतापूर्वक सरकार का गठन किया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2014 और 2019 में भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार चला चुकी थी, जबकि 2024 में उसे गठबंधन समन्वय और सहयोगी दलों के समर्थन के साथ सरकार संचालित करनी पड़ी। इसके बावजूद एनडीए को एकजुट बनाए रखना और तीसरी बार लगातार सरकार बनाना भारतीय राजनीति में मोदी की नेतृत्व क्षमता और गठबंधन प्रबंधन कौशल का महत्वपूर्ण स्थापित करने के साथ एक नया रिकार्ड भी बना है।

Record No-03
निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में पीएम मोदी के नाम अभूतपूर्व रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति में एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल 8,000 दिनों से आगे निकल चुका है। मार्च 2026 में उन्होंने 8,931 दिनों का कार्यकाल पूरा कर देश में किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबी सेवा देने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पवन कुमार चामलिंग के नाम था, जिन्होंने 8,930 दिनों तक शासन किया था। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और मई 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 26 मई 2014 से वे लगातार भारत के प्रधानमंत्री हैं। यह उपलब्धि केवल लंबी राजनीतिक उपस्थिति नहीं, बल्कि निरंतर जनसमर्थन, चुनावी सफलता और नेतृत्व की स्थिरता का प्रतीक मानी जा रही है। सरकार के मुखिया के रूप में लंबा सफर: केंद्र और गुजरात के मुख्यमंत्री पद को मिलाकर, श्री मोदी एक निर्वाचित सरकार के प्रमुख के तौर पर 8,000 से अधिक दिनों तक काम करने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बना चुके हैं।

Records No-02
भाजपा के इतिहास में लगातार तीन बार सत्ता में पहुंचाने वाले पहले नेता बने पीएम मोदी
भारतीय जनता पार्टी के 44 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब एक नेता के नेतृत्व में पार्टी लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई हो। वो नेता कोई और नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है जिन्होंने अपनी पार्टी को लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता पर आसीन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024 में लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाकर भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी, लेकिन इससे पहले पार्टी किसी भी नेता के नेतृत्व में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र की सत्ता तक नहीं पहुंच सकी थी। वर्ष 2014 में पूर्ण बहुमत, 2019 में और अधिक सीटों के साथ विजय तथा 2024 में लगातार तीसरी बार सरकार गठन ने प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा के इतिहास का पहला ऐसा नेता बना दिया, जिसने पार्टी को निरंतर तीन कार्यकाल तक सत्ता में बनाए रखा। यह उपलब्धि केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि संगठनात्मक विस्तार, नेतृत्व की स्वीकार्यता और राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी जनाधार का संकेत भी मानी जा रही है। स्वतंत्र भारत की राजनीति में भी यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले केवल जवाहरलाल नेहरू ही लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बने थे।
Record No-01
लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर नरेंद्र मोदी ने रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान
नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर देश की संसदीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया। वे स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बन गए, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में उनके लंबे जनाधार, नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जा रही है।
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आज शाम हुए समारोह में मैंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मैं और मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी, 140 करोड़ देशवासियों की सेवा करने और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। pic.twitter.com/TKNNomHf0r
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2024
यद्यपि जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही वर्ष 1947 में देश के प्रधानमंत्री बन गए थे, किंतु वे वर्ष 1952 में हुए प्रथम लोकसभा चुनाव के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित हुए। इसके बाद 1957 और 1962 के लोकसभा चुनावों में भी उनकी जीत हुई तथा वे लगातार प्रधानमंत्री पद पर बने रहे। 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे देश के प्रधानमंत्री रहे।
नरेंद्र मोदी का पहला कार्यकाल वर्ष 2014 में शुरू हुआ, जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता हासिल की। वर्ष 2019 में भाजपा ने पहले से अधिक बहुमत प्राप्त कर दूसरी बार सरकार बनाई और मोदी लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में नेतृत्व की स्थिरता और जनविश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है।










