वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली, तब भारत केवल आर्थिक चुनौतियों से ही नहीं जूझ रहा था, बल्कि सामाजिक असमानता, ग्रामीण पिछड़ापन, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और गरीबों की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी जैसी समस्याओं से भी घिरा हुआ था। पिछले बारह वर्षों में मोदी सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को केंद्र में रखते हुए हर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाओं का ऐसा व्यापक ढांचा खड़ा किया, जिसने शासन की परिभाषा बदल दी। यह दौर केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, डिजिटल पारदर्शिता और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का दौर बना। महिलाओं, किसानों, युवाओं, गरीबों, दलितों, आदिवासियों, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई योजनाओं ने भारत के सामाजिक ढांचे को नई दिशा दी है।
नारीशक्ति: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का व्यापक अभियान
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 12 साल के अब तक के कार्यकाल में महिलाओं को केवल “लाभार्थी” नहीं, बल्कि विकास की “निर्णायक भागीदार” बनाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत साढ़े 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे धुएं से होने वाली बीमारियों में कमी आई। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान ने कई राज्यों में बाल लिंगानुपात सुधारने में मदद की। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत करोड़ों गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी गई। सुकन्या समृद्धि योजना ने बेटियों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षा को मजबूत आधार दिया। वहीं लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। आज देशभर में 9 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। मोदी सरकार ने महिलाओँ के आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी पारित किया है।
युवाशक्ति: युवा साथियों को रोजगार और स्टार्टअप की नई उड़ान
पिछले 12 साल में युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई। स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया योजनाओं ने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना दिया। वर्ष 2016 में जहां कुछ सौ स्टार्टअप पंजीकृत थे, वहीं आज उनकी संख्या 1.5 लाख से अधिक हो चुकी है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 50 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और युवाओं की रही। “प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना” के तहत करोड़ों युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। डिजिटल इंडिया अभियान और सेमीकंडक्टर, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, ड्रोन तथा AI सेक्टर में निवेश ने नए रोजगार अवसर पैदा किए। आज भारत मोबाइल निर्माण में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।
किसान भाई-बहन: अन्नदाता की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
मोदी सरकार ने कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में सीधे 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को सुरक्षा कवच दिया। पर ड्रॉप मोर क्रॉप, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ई-नामऔर किसान रेल जैसी योजनाओं ने खेती को आधुनिक बनाने का प्रयास किया। रिकॉर्ड स्तर पर MSP बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देने से किसानों को लाभ मिला। भारत आज खाद्यान्न उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।
गरीब-वंचित: इनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कल्याणकारी योजनाओं का सबसे बड़ा फोकस गरीब और वंचित वर्ग रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के घर मिले। जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत के करोड़ों घरों तक नल से जल पहुंचाया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए, जिससे खुले में शौच की समस्या में भारी कमी आई। “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना” के तहत कोविड महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया। यह दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम माना गया।
दलित: आदिवासी और पिछड़े वर्गों के उत्थान की कई योजनाएं
मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय को केवल राजनीतिक नारे तक सीमित नहीं रखा। दलितों और पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, मुद्रा ऋण और आवास योजनाओं का विस्तार किया गया। “वन धन योजना” और जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल स्कूलों ने आदिवासी समाज को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर दिए। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा सहायता बढ़ाई गई। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों का विकास कर सामाजिक सम्मान को भी नई पहचान दी गई।

दिव्यांगजन: सुगम्य भारत अभियान और संवेदनशील शासन
प्रधानमंत्री मोदी ने “विकलांग” शब्द की जगह “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग कर सामाजिक सोच बदलने की कोशिश की। “सुगम्य भारत अभियान” के तहत सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों को दिव्यांग अनुकूल बनाया गया। दिव्यांगजनों को उपकरण वितरण, शिक्षा और रोजगार सहायता में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। यूनिक डिसेबिलिटी ID कार्ड जैसी पहल ने सरकारी सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाई।
सीनियर सिटीजन: वरिष्ठों के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में पहल
वरिष्ठ नागरिकों के लिए अटल पेंशन योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण साबित हुईं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिला। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सस्ती दवाओं हेतु जन औषधि केंद्रों का विस्तार भी बड़ा कदम रहा। आज देशभर में हजारों जन औषधि केंद्र कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य क्रांति और मुफ्त इलाज
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना को दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना माना गया। इसके तहत करोड़ों मरीजों का मुफ्त इलाज हुआ। नए AIIMS, मेडिकल कॉलेज और डिजिटल हेल्थ मिशन ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया। कोविड महामारी के दौरान भारत ने न केवल अपनी 200 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज दीं, बल्कि “वैक्सीन मित्र” बनकर 100 से अधिक देशों को वैक्सीन पहुंचाई।

डिजिटल इंडिया के पारदर्शी शासन में करोड़ों का हस्तांतरण
डिजिटल इंडिया अभियान ने शासन प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया। UPI के माध्यम से भारत दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल लेनदेन करने वाला देश बन चुका है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए लाखों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम हुई। जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी ने गरीबों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा। आज 55 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं।
विकसित और आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक प्रतिष्ठा
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा। भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। मोबाइल निर्माण, डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष मिशन और वैक्सीन उत्पादन में भारत की उपलब्धियों ने वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है।

अंत्योदय से राष्ट्रोदय तक का नए भारत का सफर
प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने विकास को केवल शहरों या उच्च वर्ग तक सीमित नहीं रखा। गरीब, महिला, किसान, युवा, दलित, आदिवासी और दिव्यांग हर वर्ग को विकास प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास किया गया। यही कारण है कि पिछले बारह वर्षों में भारत में कल्याणकारी शासन की एक नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। यह केवल योजनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि शासन की मानसिकता में आया बड़ा परिवर्तन है, जहां अंत्योदय को ही राष्ट्रोदय का आधार माना गया।









