भारत की राजनीति और सामाजिक ढांचे में पिछले 12 वर्षों के दौरान जो सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है, उसमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण सबसे अहम है। लंबे समय तक महिलाओं को केवल एक वोट बैंक के तौर पर देखा जाता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को योजनाओं, नीतियों और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश की। मोदी सरकार का फोकस केवल Women Development तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Women-Led Development के विजन को आगे बढ़ाने पर रहा। गांव की रसोई से लेकर संसद तक, बैंक खाते से लेकर डिजिटल भुगतान तक और सामाजिक अधिकारों से लेकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक—पिछले 12 वर्षों में महिलाओं के जीवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिले।

आइए जानते हैं उन 12 प्रमुख पहलों के बारे में, जिन्होंने देश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में सुविधा, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता बढ़ाने का काम किया।
1. महिला आरक्षण बिल: राजनीति में ऐतिहासिक भागीदारी
मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल पास कराकर भारतीय राजनीति में बड़ा संदेश दिया। दशकों से लंबित महिला आरक्षण बिल को कानून का रूप देना मोदी सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं की भागीदारी केवल मतदान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे नीति निर्माण और कानून बनाने की प्रक्रिया में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी। यह फैसला आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की तस्वीर बदल सकता है।

2. उज्ज्वला योजना: धुएं से मुक्ति, सम्मान की नई शुरुआत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मोदी सरकार की सबसे चर्चित महिला केंद्रित योजनाओं में रही। सरकार के मुताबिक अब तक 10 करोड़ से अधिक गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जा चुका है। इस योजना ने गांवों की महिलाओं को लकड़ी और चूल्हे के धुएं से राहत देने का काम किया। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनका समय भी बचा, जिसे वे अब दूसरे कामों में लगा पा रही हैं। सरकार लगातार सब्सिडी और रिफिल सहायता के जरिए गरीब परिवारों को एलपीजी से जोड़े रखने पर जोर दे रही है।

3. स्वच्छ भारत मिशन: ‘इज्जत घर’ से बढ़ा सम्मान
स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया। ग्रामीण महिलाओं के लिए यह योजना केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा बड़ा बदलाव साबित हुई। पहले महिलाओं को खुले में शौच के लिए अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता था। अब घरों में शौचालय बनने से उनकी सुरक्षा और गरिमा दोनों बढ़ी हैं। सरकार ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए “इज्जत घर” का नाम दिया, जिसने ग्रामीण समाज में बड़ा सामाजिक बदलाव पैदा किया।

4. जनधन, DBT और मुद्रा योजना: आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम
मोदी सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जनधन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और मुद्रा योजना पर खास जोर दिया। करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खुले, जिनमें सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे पहुंचने लगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी। वहीं मुद्रा योजना के तहत दिए गए कुल ऋणों में बड़ी हिस्सेदारी महिलाओं की रही। इससे लाखों महिलाओं ने छोटे कारोबार और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए।

5. सुरक्षित मातृत्व अभियान और मातृ वंदना योजना
महिलाओं के स्वास्थ्य और मातृत्व सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने कई अहम योजनाएं शुरू कीं। ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त जांच की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के जरिए पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे गर्भावस्था के दौरान पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं का असर खास तौर पर देखने को मिला है।

6. मातृत्व अवकाश में वृद्धि: कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत
मोदी सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन कर Paid Maternity Leave को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया। इसे कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ा और संवेदनशील फैसला माना गया। इससे महिलाओं को अपने नवजात शिशु की बेहतर देखभाल के साथ करियर जारी रखने में मदद मिली। इस फैसले से लाखों महिलाओं को नौकरी छोड़ने या करियर से समझौता किए बिना अपने नवजात शिशु की उचित देखभाल करने का अवसर मिला। कॉरपोरेट सेक्टर और महिला संगठनों ने भी इस फैसले को सकारात्मक बदलाव बताया।

7. तीन तलाक पर कानून: मुस्लिम महिलाओं को नया अधिकार
मोदी सरकार ने तीन तलाक की प्रथा को कानूनन अपराध घोषित कर इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और सम्मान से जोड़कर पेश किया। सरकार का कहना था कि यह फैसला महिलाओं को सामाजिक और मानसिक असुरक्षा से मुक्त कराने की दिशा में अहम कदम है। बीजेपी ने इसे Gender Justice का बड़ा उदाहरण बताया। सरकार समर्थक वर्ग मानता है कि इस कानून से मुस्लिम महिलाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।

8. हज में ‘महरम’ की अनिवार्यता खत्म
मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के लिए बिना ‘महरम’ हज यात्रा की अनुमति देकर बड़ा बदलाव किया। पहले महिलाओं के लिए किसी पुरुष रिश्तेदार का साथ जरूरी होता था। सरकार ने इस फैसले को महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों से जोड़ा। इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने अकेले या समूह में हज यात्रा के लिए आवेदन किया। यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के बीच सरकार की सकारात्मक छवि बनाने में अहम माना गया।

9. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘शादी शगुन’ योजना
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान मोदी सरकार की सबसे चर्चित सामाजिक पहलों में रहा। इसका मकसद बेटियों की शिक्षा और उनके प्रति सामाजिक सोच में बदलाव लाना था। कई राज्यों में बेटियों के स्कूल नामांकन और जागरूकता में सुधार देखने को मिला। वहीं ‘शादी शगुन’ योजना के तहत अल्पसंख्यक समुदाय की पढ़ी-लिखी बेटियों को आर्थिक सहायता देने की पहल की गई। इसके तहत स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली अल्पसंख्यक बेटियों को उनकी शादी के अवसर पर सरकार की तरफ से 51,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे समाज में बेटियों की पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ा है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा ही आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है।

10. फ्री सिलाई मशीन और स्वयं सहायता समूह: आत्मनिर्भरता की नई राह
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सिलाई मशीन, कौशल विकास और स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया। सरकार की कोशिश रही कि महिलाएं केवल लाभार्थी बनकर न रहें, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की भागीदार बनें। मुद्रा लोन और स्वयं सहायता समूहों के जरिए लाखों महिलाएं छोटे कारोबार, डेयरी, खेती और हस्तशिल्प से जुड़ीं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में इन योजनाओं की अहम भूमिका मानी जा रही है।

11. डिजिटल इंडिया: महिलाओं के हाथ में टेक्नोलॉजी की ताकत
पिछले 12 वर्षों में डिजिटल इंडिया अभियान ने गांवों और कस्बों की महिलाओं को टेक्नोलॉजी से जोड़ने का काम किया। आज बड़ी संख्या में महिलाएं मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी और आर्थिक लेनदेन अब सीधे मोबाइल के जरिए संभव हो रहे हैं। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और वे डिजिटल दुनिया से जुड़ सकीं। सरकार का मानना है कि डिजिटल पहुंच महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता को मजबूत कर रही है।

12. मुफ्त राशन योजना और महिला वोटर का उभार
कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई मुफ्त राशन योजना करोड़ों गरीब परिवारों, खासकर महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हुई। घर चलाने की जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाओं को इससे आर्थिक सहारा मिला। घर की मुखिया होने के नाते रसोई और परिवार के पालन-पोषण की सबसे बड़ी चिंता महिला की ही होती है। सरकार द्वारा मुफ्त अनाज की गारंटी ने महिलाओं को इस भारी चिंता से मुक्त रखा। महिलाओं तक सीधे पहुंचने वाली योजनाओं ने देश में एक नया “महिला वोटर वर्ग” तैयार किया है। आज महिलाएं स्वतंत्र रूप से राजनीतिक फैसले लेने वाली निर्णायक मतदाता बनकर उभरी हैं। बीजेपी की राजनीति में “नारी शक्ति” अब केवल नारा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सामाजिक और राजनीतिक आधार बन चुकी है।

मोदी सरकार के इन 12 वर्षों का पूरा कालखंड इस बात का जीवंत दस्तावेज है कि जब देश की महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान मिलता है, तो पूरा समाज और देश तीव्र गति से आगे बढ़ता है। सरकार ने महिलाओं से जुड़े विमर्श को केवल कल्याणकारी घोषणाओं से निकालकर राष्ट्र निर्माण के मुख्य एजेंडे में तब्दील कर दिया है। आज जब देश ‘विकसित भारत’ के बड़े संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तो देश की नारी शक्ति आत्मविश्वास से लबरेज होकर इसकी अगुवाई कर रही है। आत्मसम्मान, आर्थिक आजादी और सुरक्षित माहौल के बूते देश की बेटियों ने जो उड़ान भरी है, वही मोदी सरकार की पिछले 12 वर्षों की सबसे बड़ी और अमूल्य पूंजी कही जा सकती है।









