राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि चुनावी घोषणा पत्र (Manifesto) सिर्फ कागजी वादे होते हैं, जिन्हें चुनाव जीतने के बाद अलमारी में बंद कर दिया जाता है। लेकिन पिछले 12 सालों में भारतीय राजनीति ने इस पुरानी धारणा को बदलते देखा है। साल 2014 का लोकसभा चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का चुनाव नहीं था। यह चुनाव एक मजबूत नेतृत्व, निर्णायक सरकार और दशकों पुराने राजनीतिक वादों को पूरा करने के भरोसे पर लड़ा गया था। जब नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, तब बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र—’संकल्प पत्र’—में विकास के साथ-साथ उन मुद्दों को भी प्रमुखता से जगह दी, जिन्हें पार्टी लंबे समय से अपने वैचारिक एजेंडे का मूल हिस्सा मानती रही थी। आज साल 2026 है। 12 साल बाद तक आते-आते बीजेपी ने अपने उन बड़े चुनावी वादों को एक-एक कर जमीन पर उतार दिया है जिन्हें कभी ‘असंभव’ माना जाता था। मोदी सरकार ने इन 12 वर्षों में अपने कोर वैचारिक और विकास से जुड़े संकल्पों को पूरा करने में जो राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई, उसने देश की सियासत की दिशा और दशा दोनों बदल दी। राम मंदिर, अनुच्छेद 370, CAA, ट्रिपल तलाक और महिला आरक्षण जैसे फैसले सिर्फ सरकारी घोषणाएं नहीं रहे, बल्कि ये मोदी युग की ऐतिहासिक राजनीतिक पहचान बन गए।
आइए जानते हैं उन 12 बड़े और ऐतिहासिक चुनावी वादों के बारे में, जिन्हें मोदी सरकार ने बीते 12 सालों में कानून और हकीकत की शक्ल दी…
1. भव्य राम मंदिर का निर्माण: पांच सदियों के इंतजार का अंत
बीजेपी के इतिहास में राम मंदिर सबसे बड़ा, सबसे पुराना और मुख्य वैचारिक वादा रहा है। साल 1989 के ऐतिहासिक ‘पालमपुर प्रस्ताव’ के बाद बीजेपी ने इसे आधिकारिक रूप से अपने एजेंडे में शामिल किया। इसके बाद 1991, 1996 के घोषणा पत्रों से लेकर हर लोकसभा चुनाव के संकल्प पत्र में पार्टी ने लगातार दोहराया कि संविधान के दायरे में अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का रास्ता निकाला जाएगा। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद, मोदी सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। साल 2020 में भूमि पूजन हुआ और जनवरी 2024 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। यह वादा आज भारत की सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है, जिसे 500 साल के इंतजार का अंत माना गया।
2. अनुच्छेद 370 और 35A का खात्मा: एक देश, एक विधान
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के वक्त से ही पार्टी का सबसे बड़ा और मुख्य नारा था। यह वादा साल 1951-52 के पहले आम चुनाव के जनसंघ के घोषणा पत्र से लेकर 2014 और 2019 के बीजेपी संकल्प पत्र तक लगातार शामिल रहा। हर चुनाव में पार्टी जम्मू-कश्मीर से इस विशेष दर्जे को हटाने की अपनी प्रतिबद्धता जताती रही। 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने संसद में ऐतिहासिक बिल पास कर अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया और कश्मीर को पूरी तरह भारत की मुख्यधारा से जोड़ दिया। इसे ‘एक देश, एक संविधान’ की दिशा में देश का सबसे बड़ा कदम बताया गया।

3. सीएए (CAA) लागू करना: पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता का अधिकार
सीएए (Citizenship Amendment Act) मोदी सरकार के सबसे दृढ़ और राजनीतिक रूप से सबसे चर्चित फैसलों में शामिल रहा है। बीजेपी ने साल 2014 में अपने चुनावी घोषणा पत्र में पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न झेलकर आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का वादा किया था। पार्टी ने 2019 के संकल्प पत्र में भी इसे कानून बनाने की बात दृढ़ता से कही थी। मोदी सरकार ने दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) संसद से पास कराया और मार्च 2024 में इसके नियम अधिसूचित कर इसे पूरी तरह देश में लागू कर दिया। इसके जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हुआ।

4. तीन तलाक के खिलाफ कानून: मुस्लिम महिलाओं को कानूनी सुरक्षा
महिला सम्मान और लैंगिक न्याय (Gender Justice) के सिद्धांत के तहत बीजेपी ने मुस्लिम महिलाओं को इस सामाजिक कुप्रथा से राहत दिलाने का संकल्प लिया था। मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक कहने की इस कुप्रथा को कानूनी रूप से बैन करने का वादा बीजेपी ने अपने 2014 के घोषणा पत्र में शामिल किया था। अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम’ पास कर तीन तलाक को एक संज्ञेय और दंडनीय अपराध बना दिया, जिससे करोड़ों मुस्लिम महिलाओं को बड़ा सामाजिक और कानूनी सुरक्षा कवच मिला।

5. वन रैंक, वन पेंशन (OROP): पूर्व सैनिकों का दशकों पुराना हक
देश की रक्षा करने वाले रिटायर्ड जवानों के लिए ‘समान रैंक, समान पेंशन’ की यह मांग करीब 40 साल से ठंडे बस्ते में लटकी हुई थी। बीजेपी ने पूर्व सैनिकों के सम्मान से जुड़े इस वादे को अपने 2014 के लोकसभा चुनाव संकल्प पत्र में बहुत प्रमुखता से जगह दी थी। सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद, साल 2015 में मोदी सरकार ने OROP को लागू करने का ऐतिहासिक फैसला किया। इससे देश के लाखों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सीधा वित्तीय लाभ मिलना शुरू हुआ।

6. जीएसटी का कार्यान्वयन: एक देश, एक टैक्स की व्यवस्था
देश की जटिल और बिखरी हुई टैक्स व्यवस्था को खत्म कर एक पारदर्शी और एकीकृत टैक्स व्यवस्था लागू करना अर्थव्यवस्था की बड़ी जरूरत थी। बीजेपी साल 2009 और फिर 2014 के अपने चुनावी संकल्प पत्र में लगातार बड़े टैक्स रिफॉर्म का वादा करती आ रही थी। केंद्र में सरकार बनने के बाद राज्यों के साथ लंबी आम सहमति बनाई गई। इसके बाद, 1 जुलाई 2017 की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल से देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदल दिया। इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार कहा जाता है।

7. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): 34 साल बाद शिक्षा में बड़ा सुधार
देश की पुरानी और पारंपरिक शिक्षा पद्धति को बदलकर उसे आधुनिक, भविष्योन्मुखी और कौशल-आधारित (Skill-based) बनाना बेहद जरूरी था। बीजेपी ने अपने 2014 के घोषणा पत्र में देश के लिए एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने का स्पष्ट वादा देश की जनता से किया था। साल 2020 में मोदी सरकार ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ को मंजूरी दी। इसमें रट्टा मार पढ़ाई के कल्चर को खत्म कर मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा, फ्लेक्सिबल कोर्सेज और ग्लोबल रिसर्च पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।

8. नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण): संसद में महिलाओं को 33% हक
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना एक ऐसा मुद्दा था जो दशकों से अटका हुआ था। बीजेपी महिला सशक्तिकरण के तहत अपने 2004, 2009 और 2014 के चुनावी घोषणा पत्रों में महिला आरक्षण बिल को संसद से पास कराने का वादा लगातार करती आ रही थी। सितंबर 2023 में संसद के नए भवन के विशेष सत्र में मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कराकर इस ऐतिहासिक कानून को अमलीजामा पहनाया, जिससे राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का एक नया युग शुरू हुआ।

9. किसानों को सम्मान निधि (PM-KISAN): अन्नदाता को सीधी वित्तीय मदद
किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागत का डेढ़ गुना करना और उन्हें सीधी मदद देना पार्टी का बड़ा संकल्प था। बीजेपी ने साल 2014 के मेनिफेस्टो में स्वामीनाथन आयोग के अनुसार एमएसपी बढ़ाने और 2019 के संकल्प पत्र में सभी किसानों को सीधी आय सहायता देने का वादा किया था। सरकार ने एमएसपी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की और ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ की शुरुआत की। आज इसके जरिए हर साल देश के करीब 11 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिये के सीधे ₹6,000 भेजे जा रहे हैं।

10. प्रधानमंत्री आवास योजना: गरीबों को पक्का घर
‘हर गरीब के सिर पर पक्की छत’ बीजेपी के प्रमुख सामाजिक वादों में शामिल रहा। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्रों में हर भारतीय के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्का मकान देने का भरोसा दिया था। इसी विजन के साथ 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) शुरू की गई। इस योजना के तहत अब तक ग्रामीण और शहरी इलाकों में 4 करोड़ से ज्यादा पक्के मकान गरीबों को सौंपे जा चुके हैं। बिजली, शौचालय और गैस जैसी सुविधाओं को भी इससे जोड़ा गया, जिसने गरीबों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव लाने का काम किया।

11. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद का गठन: सेनाओं का एकीकरण
कारगिल युद्ध के बाद से ही तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक सिंगल-पॉइंट मिलिट्री एडवाइजर की मांग हो रही थी। सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण के हिस्से के रूप में बीजेपी ने अपने 2014 के घोषणा पत्र में रक्षा सुधारों का वादा किया था। 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी ने लाल किले से इसकी घोषणा की और जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बने।

12. नई श्रम संहिताएं (Labour Codes): 44 जटिल कानूनों का सरलीकरण
देश में निवेश बढ़ाने और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दशकों पुराने और जटिल श्रम कानूनों को आसान बनाने का वादा बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में किया। बीजेपी ने अपने 2014 और 2019 के संकल्प पत्रों में औद्योगिक विकास और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए श्रम सुधारों का वादा किया था। मोदी सरकार ने संसद में 44 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर 4 सरल श्रम संहिताओं (Labour Codes) में बदल दिया, जो देश के वर्क कल्चर को आधुनिक बना रहे हैं।

मोदी सरकार के इन 12 सालों का सफरनामा देखने पर एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है—इस सरकार ने भारतीय राजनीति में वादे पूरे करने की संस्कृति को स्थापित किया है। पहले के दौर में घोषणा पत्र महज एक रस्म होते थे, लेकिन इन 12 वर्षों में बीजेपी ने अपने वैचारिक एजेंडे के सबसे कठिन और विवादास्पद माने जाने वाले मुद्दों को भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से पूरा करके दिखाया। इन 12 बड़े वादों का पूरा होना यह साबित करता है कि मोदी सरकार ने ‘पॉलिटिकल क्रेडिबिलिटी’ यानी जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी माना है। यही वजह है कि आज चुनावी राजनीति में वादों का वजन बढ़ गया है और जनता कागजी दावों के बजाय ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करने लगी है।










