प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 27 मई को ‘प्रगति’ (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली सात बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की गई। ये परियोजनाएं देश के नौ राज्यों में चल रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और समयबद्ध काम बेहद जरूरी है।
‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास परियोजनाओं में देरी खत्म कर उन्हें मिशन मोड में तेजी से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों और देश के विकास पर पड़ता है। देरी की वजह से लागत बढ़ती है और लोगों तक जरूरी सुविधाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने सभी मंत्रालयों और राज्यों से तेज, जवाबदेह और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया।
बिजली क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान पीएम मोदी ने रूफटॉप सोलर को तेजी से बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शहरों, हाउसिंग सोसाइटियों और सरकारी संस्थानों में बड़े स्तर पर सोलर पैनल लगाए जाने चाहिए। इससे बिजली का खर्च कम होगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि रूफटॉप सोलर अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बन चुका है। उन्होंने राज्यों से इसे मिशन मोड में लागू करने को कहा ताकि ज्यादा से ज्यादा घर और संस्थान इससे जुड़ सकें।
सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने वधावन बंदरगाह परियोजना को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वधावन पोर्ट को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के मॉडल के रूप में तैयार किया जाए, जहां सड़क, रेल, जलमार्ग, हवाई अड्डे और माल ढुलाई गलियारे आपस में जुड़े हों। उनका कहना था कि इससे देश का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और व्यापार को गति मिलेगी।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान सिर्फ ढांचागत निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके परिणाम जमीन पर भी दिखाई देने चाहिए। उन्होंने नियमित निगरानी, जनभागीदारी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। पीएम मोदी ने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा। उन्होंने अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों और ‘गोबर-धन’ प्लांट्स के निर्माण को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका कहना था कि इससे स्वच्छता के साथ-साथ ऊर्जा और जैविक संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।
बैठक में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की भी समीक्षा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे राज्यों के बीच सहयोग का अच्छा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से दूसरे राज्यों को भी सीख लेनी चाहिए कि आपसी समन्वय, समय पर मंजूरी और तकनीक आधारित निगरानी के जरिए जल विवादों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने राज्यों को नदी जोड़ो परियोजनाओं, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को एकीकृत तरीके से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी से ठोस कदम उठाने होंगे।
पीएम मोदी ने नहर नेटवर्क के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि नहरों के ऊपर और किनारों पर सोलर पैनल लगाए जा सकते हैं। इससे जमीन की बचत होगी, पानी के वाष्पीकरण में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और राज्यों से तेज, जवाबदेह और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने का आह्वान किया।









