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सबूत नंबर 32: सीएम Mamata Banergee से लेकर TMC नेताओं तक हिंदू विरोधी बोल- ‘राम राज्य और जय श्रीराम बंगाल में नहीं चलेगा’

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा पूरी तरह से एक्सपोज हो गया है। इसके एक नहीं, कई उदाहरण हैं, जिनमें टीएमसी नेताओं ने न सिर्फ हिंदू जनमानस की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, बल्कि उनकी आस्था से जुड़े भगवानों का भी अपमान किया है। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का मामला हो या फिर रामनवमी से पहले हिंसा रही हो। शिव मंदिर टूटने का मजाक बनाना हो या फिर दुर्गा पंडालों की अनुमति के लिए हाईकोर्ट जाने को मजबूर करना हो। ममता सरकार ने कदम-कदम पर सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हिंदुओं को हाशिए पर ही रखा है। जयश्री राम के नारे चिड़ने वाली सीएम ममता बनर्जी के नेता अब कहने लगे हैं कि जय सियाराम की बंगाल को जरूरत नहीं है। प्रभु श्री राम मुस्लिम हैं और वे सिर्फ उत्तर भारत के भगवान हैं। इसलिए भगवान राम की मूर्ति का सिर काटने के कृत्य के बावजूद ममता बनर्जी चुप्पी साध जाती हैं।

आइए, हिंदू विरोधी ममता बनर्जी की हिंदू विरोधी मानसिकता पर एक नजर डालते हैं…

सबूत नंबर 32
राम राज से पेट नहीं भरता, बंगाल को जरूरत नहीं- अखिल गिरि
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी सरगर्मी के बीच तृणमूल कांग्रेस के पूर्व मंत्री अखिल गिरि ने ‘राम राज्य’ को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘बंगाल में राम राज्य की कोई जरूरत नहीं है, इससे लोगों का पेट नहीं भरता।’ उन्होंने यह अजीब तर्क भी दिया कि ‘राम राज्य’ का मुद्दा राज्य की वास्तविक जरूरतों से मेल ही नहीं खाता।

सबूत नंबर 31
ममता बनर्जी ने ‘शिव मंदिर के टूटने का मज़ाक उड़ाया’
पश्चिम बंगाल BJP ने तृणमूल के हिंदू विरोधी चरित्र को सामने लाते हुए 28 मार्च को 2026 को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव पूर्व भाषण का 8-सेकंड का वीडियो शेयर किया। BJP के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा कि अगर एक शिव मंदिर टूटता है तो बीजेपी बहुत नाटक करती है। मतलब हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करना उसके लिए कोई महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। हिंदुओं को बार-बार निशाना बनाया गया। दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा रोक दी गई। 

सबूत नंबर 30
बंगाल में हिंदू पूजा पंडाल तक के लिए कोर्ट जाने के लिए मजबूर
बीजेपी प्रेसिडेंट नितिन नबीन ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोगों को पूजा पंडाल लगाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। नवभारत टाइम्स में 25 मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुओं को पूजा पंडाल लगाने के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि मुसलमानों को नमाज पढ़ने की पहले से ही अनुमति है।  

सबूत नंबर 29
जय श्रीराम यहां नहीं चलेगा, वो उत्तर भारत के देवता – टीएमसी
बंगाल पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा ने कहा कि बीजेपी उत्तर भारत की पार्टी है और भगवान राम उत्तर भारत के देवता हैं। 22 मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए TMC नेता ने कहा, “बीजेपी नेता यहां आकर इस बार जय श्रीराम नहीं, मां काली बोल रहे हैं। इसका मतलब यही है कि BJP उत्तर भारत की पार्टी है और श्रीराम उत्तर भारत के देवता हैं। अब समझ लें कि बंगाल में श्रीराम का नाम नहीं चलेगा।”

सबूत नंबर 28
ममता बनर्जी ने हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दिलवाया
टीएमसी के पूर्व नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने स्वीकारा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी के कहने पर ही हिन्‍दुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया था। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक उन्‍होंने अब इस पर माफी भी मांगी है। 31 जनवरी 2026 को बीजेपी नेता अमित मालवीय ने X पर प्रतिक्रिया दी, ‘ममता बनर्जी ने मुझसे यूसुफ पठान की जीत सुनिश्चित करने के लिए हिंदुओं के खिलाफ नफरत भरे भाषण देने को कहा था। टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर का कबूलनामा। यही हुमायूं हैं, जिसने 2024 में हिंदुओं को भागीरथी नदी में फेंक देने की धमकी दी थी। 

“Mamata Banerjee asked me to give hate speeches against Hindus to ensure Yusuf Pathan’s victory,” — TMC MLA Humayun Kabir.

सबूत नंबर 27
हिंदू-मुस्लिम में दंगा कराने की कोशिश करती हैं ममता बनर्जी
बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी पर हिंदू-मुस्लिम में दंगा कराने की कोशिश करने का भी आरोप है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने तृणमूल विधायक मदन मित्रा के भगवान राम को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर ममता की चुप्पी पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि उनके निर्देश पर ही तृणमूल नेता एक समुदाय को खुश करने के लिए हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं। मदन मित्रा ने श्रीराम को मुस्लिम करार दिया था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक भाटिया ने प्रश्न किया कि ममता ने मदन मित्रा को पार्टी से बर्खास्त क्यों नहीं किया?

सबूत नंबर 26
TMC नेता ने भगवान राम को बताया मुस्लिम, ममता ने साधी चुप्पी 
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने भगवान राम को लेकर विवादित बयान दिया है। एक वायरल वीडियो में मित्रा ने सार्वजनिक सभा में कहा ‘भगवान राम मुसलमान थे, वो हिंदू नहीं थे। उनका कोई उपनाम (सरनेम) भी नहीं था।’ पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह टिप्पणी BJP की हिंदू धर्म की समझ को ‘सतही’ बताते हुए की। 18 दिसंबर 2025 को बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह जानबूझकर किया गया अपमान है और तुष्टिकरण की मानसिकता को उजागर करता है।

सबूत नंबर 25
तृणमूल नेताओं ने हिंदुओं को निशाना बनाकर मुर्शिदाबाद हिंसा की रची साजिश
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन कानून के विरोध के दौरान हुई हिंसा को लेकर यह बात सामने आई है कि तृणमूल नेताओं ने ही हिंदुओं को निशाना बनाकर मुर्शिदाबाद हिंसा की साजिश रची थी। बीजेपी ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हिंसा TMC नेताओं के इशारे पर की गई। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस से बातचीत में कहा, ‘रिपोर्ट में साफ है कि 11 अप्रैल 2025 को धुलियान में हुए हमले स्थानीय पार्षद महबूब आलम के निर्देश पर हुए, जबकि पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय और नदारद रही।’ 

सबूत नंबर 24
BJP ने जो हिंदू धर्म बनाया, वह गंदा धर्म है-ममता बनर्जी
मुस्लिम तुष्टिकरण के ममता बनर्जी कितना कुख्यात हैं, इसकी बानगी ईद के मौके पर भी देखने को मिली। आज तक की 31 मार्च 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक ईद के अवसर पर सीएम बनर्जी ने हिंदू धर्म की व्याख्या करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने यहां तक कहा कि बीजेपी ने जो हिंदू धर्म बनाया है, वह गंदा धर्म है। बीजेपी ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया। साथ ही सीएम से अपने शब्द वापस लेने की मांग की।

सबूत नंबर-23
भगवान राम की मूर्ति का सिर काट ले गए जिहादी, ममता मौन 
राम नवमी के लिए तैयार की जा रही भगवान राम की एक मूर्ति के सिर को ‘जिहादी’ काटकर ले गए। यह घटना नंदीग्राम के ब्लॉक-2 के वेटुरिया बस स्टैंड की है, जहां प्रभु श्री राम की मूर्ति लगभग तैयार हो चुकी थी। लेकिन मूर्ति का सिर काटकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। कई लोगों ने इस घटना को सनातन हिंदू आस्था पर हमला बताया है।

सबूत नंबर 22
‘जय श्री राम’ के नारे से ममता बनर्जी फिर हुई नाराज
हावड़ा स्टेशन में वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन पर सीएम ममता के सामने बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। इतने में ही सीएम के हाव भाव बदल गए। वो ‘जय श्रीराम’ नारे को सुनकर नाराज हो गई और गुस्सा होकर वहीं खड़ी रहीं। वो मंच पर नहीं चढ़ीं। इससे वहां का माहौल बिगड़ गया। ‘जय श्रीराम’ नारे से ममता इतनी नाराज थी कि 10 मिनट तक मंच पर नहीं आईं। इसके बाद औपचारिक रूप से उद्घाटन कार्य शुरू हुआ।सबूत नंबर-21
राम नाम मास्क बांटने पर बीजेपी नेता गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के हुगली में जय श्रीराम मास्क बांटना ममता की पुलिस को रास नहीं आया। पुलिस मास्क बांटने वाले बीजेपी नेताओं को पकड़कर ले गई। हुगली के सेरामपुर में बीजेपी नेता अमनिश अय्यर लोगों को ‘जय श्रीराम’ लिखा मास्क बांट रहे थे। इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और बीजेपी नेता को गिरफ्तार करके ले गई। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने विरोध जताते हुए जमकर जय श्रीराम के नारे लगाए। 

सबूत नंबर-20
भगवा टीशर्ट पहनने और जय श्रीराम बोलने से रोका
इसके पहले 7 फरवरी, 2021 को भगवा टीशर्ट पहनने और जय श्रीराम बोलने वालों को धमकाया गया। कोलकाता के इको पार्क में पुलिस के एक अधिकारी ने लोगों से साफ कहा कि आप लोग यहां जय श्री राम का नारा नहीं लगा सकते हैं।

सबूत नंबर-19
पार्टी नेता ने जय श्रीराम बोलने वालों को धमकाया
हाल ही में उनकी पार्टी के एक नेता ने जय श्रीराम बोलने वालों को धमकाया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक नेता ने लोगों को धमकाते हुए कहा कि अगर बंगाल में रहना चाहते हो तो यहां ‘जय श्री राम’ के नारे नहीं लगा सकते। वीडियो में किसी सभा को संबोधित करते हुए टीएमसी नेता ने बंगाली में कहा कि राज्य में जय श्री राम बोलने की अनुमति नहीं है। यहां इन सब चीजों की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो लोग इसका जाप करना चाहते हैं वे मोदी के राज्य गुजरात में जाकर ये कर सकते हैं।

सबूत नंबर-18
मुर्शिदाबाद में काली मां की मूर्ति जला डाली
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण और वोटबैंक को लेकर इतनी अंधी हो चुकी है कि राज्य में हिन्दू विरोधी हरकतों पर कुछ भी एक्शन नहीं लेती हैं। 1 सितंबर, 2020 को मुर्शिदाबाद के एक मंदिर में काली मां की मूर्ति जला दी गई। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने ट्वीट कर बताया कि मुर्शिदाबाद इलाके के एक मंदिर पर हमला कर मां काली की मूर्ति जला दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता की राजनीति का जिहादी स्वरूप अब हिंदू धर्म और संस्कृति को नष्ट करने पर तुला है।


सबूत नंबर-17
मंदिर में पूजा करने पर पुलिस ने की पिटाई
ममता राज में तो हिन्दुओं को मंदिरों में भी पूजा करने की आजादी नहीं है। 5 अगस्त, 2020 को जब पूरे विश्व के हिन्दू अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन को लेकर उत्साहित थे। वहीं पश्चिम बंगाल की पुलिस लॉकडाउन के बहाने हिन्दुओं पर जुल्म ढा रही थी। मंदिर में पूजा कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया। 

खड़गपुर में स्थानीय लोग राम मंदिर शिलान्यास के उत्सव में मंदिर में पूजा कर रहे थे। लेकिन ममता की पुलिस को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। इससे सार्वजनिक व्यावस्था और लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं हो रहा था। फिर भी शांतिपूर्वक पूजा कर रहे लोगों को पुलिस ने घसिटकर मंदिर से बाहर निकाला। लोग पुलिस से पूजा करने का आग्रह करते रहे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पूजा करने की अनुमति नहीं दी।

बीजेपी कार्यकर्ता ने नारायणपुर इलाके में ‘यज्ञ’ आयोजित करने का प्रयास किया लेकिन ममता के गुंडों ने उन्हें रोक दिया। हिन्दुओं और ममता के गुंडों के बीच झड़प हो गई। जिसके बाद पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। जिसमें कई लोगों को चोटें आईं। उधर खड़गपुर में श्री राम मंदिर के लिए पूजा का आयोजन किया गया था। लेकिन ममता बनर्जी की पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

सबूत नंबर-16
तेलिनीपाड़ा में जला दिए गए हिन्दुओं के घर और मंदिर
राज्य के हुगली जिले के चंदर नगर के तेलिनीपाड़ा में मई, 2020 के महीने में कई दिनों तक हिंदुओं के खिलाफ खुलकर हिंसा हुई। हिंदुओं के घर जलाए गए। जिले के तेलिनीपाड़ा के तांतीपारा, महात्मा गांधी स्कूल के पास शगुनबागान और फैज स्कूल के पास जमकर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की गई। प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। मालदा के शीतला माता मंदिर में भी तोड़फोड़ और आगजनी की गई।

सबूत नंबर-15
पुस्तक मेले में हनुमान चालीसा के वितरण पर लगाया प्रतिबंध
पश्चिम बंगाल में ममता की पुलिस ने कोलकाता में 44वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा बांटी जा रही हनुमान चालीसा की पुस्तकों पर रोक लगा दी। पुलिस ने बताया कि हनुमान चालीसा के वितरण से शहर में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है और पुस्तक मेले में आने वाले लोग भावनाओं में बह सकते हैं।

विहिप के अधिकारियों ने पुलिस के इस कार्रवाई का विरोध किया। साथ ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब मेले में कुरान और बाइबिल की पुस्तकें बांटी जा सकती हैं तो हनुमान चालीसा की क्यों नहीं? बढ़ते विरोध को देखते हुए कोलकाता पुलिस बैकफुट पर आ गई और हनुमान चालीसा के वितरण से रोक को हटा लिया। विहिप ने कहा कि हनुमान चालीसा धार्मिक पुस्तक है और इसमें किसी भी तरह की आपत्तिपूर्ण सामग्री नहीं है। लेकिन ममता राज में हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक का विरोध किया जा रहा है।

सबूत नंबर-14
ममता बनर्जी ने स्कूली बच्चों को धर्म के नाम पर बांटा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों गंभीर हताशा और निराशा में हैं। लोकसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद उन्हें विधानसभा चुनाव में भी भयानक हार पहले से ही दिखाई देने लगी है। यही वजह है कि ममता बनर्जी अपना वोट बैंक बचाने के लिए जोरशोर से मुस्लिम तुष्टिकरण में जुट गई हैं।

ममता बनर्जी ने राजनीतिक निर्लज्जता की सभी सीमाओं को पार करते हुए स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भी मजहब के नाम पर बांट दिया। ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य के स्‍कूलों को निर्देश दिया कि वे मुस्लिम स्‍टूडेंट्स के लिए अलग से मिड-डे मील हॉल रिजर्व करें। यह आदेश राज्‍य के उन सरकारी स्‍कूलों पर लागू होगा जहां पर 70 प्रतिशत या उससे ज्‍यादा मुस्लिम छात्र हैं। राज्‍य अल्‍पसंख्‍यक और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर उन सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों का नाम मांगा, जहां पर 70 प्रतिशत से ज्‍यादा मुस्लिम बच्‍चे पढ़ते हैं। इन सरकारी स्‍कूलों में अल्‍पसंख्‍यक बच्‍चों के लिए अलग से मिड-डे मील डायनिंग हॉल बनाया जाएगा।

सबूत नंबर-13
ममता बनर्जी ने ‘जय श्रीराम’ बोलने वालों को दी धमकी
मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली ममता बनर्जी को जय श्रीराम का उद्घोष अब गाली की तरह लगने लगा है। राज्य के 24 परगना जिले में ममता बनर्जी का काफिला गुजर रहा था तभी रास्ते में भीड़ में खड़े लोगों ने जय श्रीराम का उदघोष कर दिया। जय श्रीराम सुनते ही ममता बनर्जी को गुस्सा आ गया और गाड़ी से उतरकर उन्होंने लोगों को धमकाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने जय श्रीराम कहने वालों को गिरफ्तार करने की धमकी भी दी और उन्हें दूसरे प्रदेश का बता दिया। यह कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले चुनाव के दौरान भी ममता बनर्जी ने इसी तरह जय श्रीराम कहने वालों को जेल में डालने की धमकी दी थी। 

सबूत नंबर-12
ममता बनर्जी का जय श्रीराम बोलने से इंकार, बताया गाली
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वे किसी हाल में जय श्रीराम नहीं बोलेंगी। ममता का कहना है कि जय श्रीराम बीजेपी का नारा है, लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी लोगों को यह बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। सच्चाई यह है कि देश में जय श्रीराम बोलने की सदियों पुरानी परंपरा है। इसके एक दिन पहले ही बंगाल में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें तृणमूल कार्यकर्ता जय श्रीराम का नारा लगा रही भीड़ को खदेड़ रहे हैं। पूरे राज्य में हिंदुओं को इसी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। 

सबूत नंबर-11
मुस्लिम प्रेम और हिंदू विरोध में देवताओं को बांटने पर तुली ममता बनर्जी
हिंदुओं के धार्मिक रीति-रिवाज, पूजा-पद्धति और पर्व-त्योहार पर लगाम लगाने के बाद ममता बनर्जी हिंदू देवी-देवताओं को बांटने में भी लग गई। हिंदुओं को बांटने के लिए ममता बनर्जी ने कहा कि हम दुर्गा की पूजा करते हैं, राम की पूजा क्यों करें? झरगाम की एक सभा में ममता ने कहा कि, ‘बीजेपी राम मंदिर बनाने की बात करती है, वे राम की नहीं रावण की पूजा करती है। लेकिन हमारे पास हमारी अपनी देवी दुर्गा है। हम मां काली और गणपति की पूजा करते हैं। हम राम की पूजा नहीं करते।’

सनातन संस्कृति में शस्त्रों का विशेष महत्त्व है। अलग-अलग पर्व त्योहारों पर धार्मिक यात्राओं में तलवार, गदा लेकर चलने की परंपरा रही है, लेकिन ममता बनर्जी ने धार्मिक यात्राओं और शस्त्र को भी साम्प्रदायिक और सेक्युलर करार दिया। गौरतलब है कि जब यही शस्त्र प्रदर्शन मोहर्रम के जुलूस में निकलते हैं तो सेक्युलर होते हैं, लेकिन रामनवमी में निकलते ही साम्प्रदायिक हो जाते हैं।

सबूत नंबर-10
राम के नाम से नफरत कई बार हो चुकी है जाहिर
ममता बनर्जी कई बार हिंदू धर्म और भगवान राम के प्रति अपनी असहिष्णुता जाहिर करती रही हैं। हालांकि कई बार कोर्ट ने उनकी इस कुत्सित कोशिश को सफल नहीं होने दिया। वर्ष 2017 में जब लेक टाउन रामनवमी पूजा समिति’ ने 22 मार्च को रामनवमी पूजा की अनुमति के लिए आवेदन दिया तो राज्य सरकार के दबाव में नगरपालिका ने पूजा की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद जब समिति ने कानून का दरवाजा खटखटाया तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूजा शुरू करने की अनुमति देने का आदेश दिया।


सबूत नंबर-9
बंगाल सरकार ने पाठ्यक्रम में रामधनु को कर दिया रंगधनु 
भगवान राम के प्रति ममता बनर्जी की घृणा का अंदाजा इस बात से भी जाहिर हो गई, जब तीसरी क्लास में पढ़ाई जाने वाली किताब ‘अमादेर पोरिबेस’ (हमारा परिवेश) ‘रामधनु’ (इंद्रधनुष) का नाम बदल कर ‘रंगधनु’ कर दिया गया। साथ ही ब्लू का मतलब आसमानी रंग बताया गया है। दरअसल साहित्यकार राजशेखर बसु ने सबसे पहले ‘रामधनु’ का प्रयोग किया था, लेकिन मुस्लिमों को खुश करने के लिए किताब में इसका नाम ‘रामधनु’ से बदलकर ‘रंगधनु’ कर दिया गया।

सबूत नंबर-8
हिंदुओं के हर पर्व के साथ भेदभाव करती हैं ममता बनर्जी
ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ कि ममता बनर्जी ने हिंदुओं के साथ भेदभाव किया। कई ऐसे मौके आए हैं जब उन्होंने अपना मुस्लिम प्रेम जाहिर किया है और हिंदुओं के साथ भेदभाव किया है। सितंबर, 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से ममता बनर्जी का हिंदुओं से नफरत जाहिर होता है। कोर्ट ने तब कहा था,  ”आप दो समुदायों के बीच दरार पैदा क्यों कर रहे हैं। दुर्गा पूजन और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है। उन्‍हें साथ रहने दीजिए।”


सबूत नंबर-7
दशहरे पर शस्त्र जुलूस निकालने की नहीं दी थी अनुमति
हिंदू धर्म में दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा रही है। लेकिन मुस्लिम प्रेम में ममता बनर्जी हिंदुओं की धार्मिक आजादी छीनने की हर कोशिश करती रही हैं। सितंबर, 2017 में ममता सरकार ने आदेश दिया कि दशहरा के दिन पश्चिम बंगाल में किसी को भी हथियार के साथ जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस प्रशासन को इस पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। हालांकि कोर्ट के दखल के बाद ममता बनर्जी की इस कोशिश पर भी पानी फिर गया।

सबूत नंबर-6
कई गांवों में दुर्गा पूजा पर ममता बनर्जी ने लगा रखी है रोक
10 अक्टूबर, 2016 को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश से ये बात साबित होती है ममता बनर्जी ने हिंदुओं को अपने ही देश में बेगाने करने के लिए ठान रखी है। बीरभूम जिले का कांगलापहाड़ी गांव ममता बनर्जी के दमन का भुक्तभोगी है। गांव में 300 घर हिंदुओं के हैं और 25 परिवार मुसलमानों के हैं, लेकिन इस गांव में चार साल से दुर्गा पूजा पर पाबंदी है। मुसलमान परिवारों ने जिला प्रशासन से लिखित में शिकायत की कि गांव में दुर्गा पूजा होने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है, क्योंकि दुर्गा पूजा में बुतपरस्ती होती है। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने दुर्गा पूजा पर बैन लगा दिया, जो अब तक कायम है।

सबूत नंबर-5
छठ पूजा मनाने पर लगा दी रोक
ममता राज में साल 2017 में राज्य के सिलीगुड़ी में महानंदा नदी में छठ पूजा मनाने पर रोक लगा दी गई। जनसत्ता अखबार की खबर के अनुसार दार्जिलिंग की डीएम ने एनजीटी के आदेश का हवाला देकर महानंदा नदी में छठ पूजा मनाने पर बैन कर दिया। दार्जिलिंग की जिलाधिकारी ने नदी में छठ के लिए अस्थायी घाट बनवाने से भी इनकार कर दिया और कहा कि जो कोई भी यहां छट मनाते देखा गया उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  भगवान सूर्य को अर्घ्य के रूप में नदी का ही पानी अर्पित किया जाता है उसमें थोड़े से फूल और पत्ते और चावल के दाने होते हैं। ये सब प्राकृतिक चीजे हैं जिन्हें नदी में पलने वाली मछलियां और दूसरे जीव खाते हैं। ये सारी चीजें सूप में रखकर चढ़ाई जाती हैं, यानी पॉलीथिन फेंके जाने की भी आशंका नहीं होती।

सबूत नंबर-4
ममता बनर्जी ने सरस्वती पूजा पर भी लगाया प्रतिबंध
एक तरफ बंगाल के पुस्तकालयों में नबी दिवस और ईद मनाना अनिवार्य किया गया तो एक सरकारी स्कूल में कई दशकों से चली आ रही सरस्वती पूजा ही बैन कर दी गई। ये मामला हावड़ा के एक सरकारी स्कूल का है, जहां पिछले 65 साल से सरस्वती पूजा मनायी जा रही थी, लेकिन मुसलमानों को खुश करने के लिए ममता सरकार ने इसी साल फरवरी में रोक लगा दी। जब स्कूल के छात्रों ने सरस्वती पूजा मनाने को लेकर प्रदर्शन किया, तो मासूम बच्चों पर डंडे बरसाए गए। इसमें कई बच्चे घायल हो गए।

सबूत नंबर-3
हनुमान जयंती पर निर्दोषों को किया गिरफ्तार, लाठी चार्ज 
11 अप्रैल, 2017 को पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के सिवड़ी में हनुमान जयंती के जुलूस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ममता सरकार से हिन्दू जागरण मंच को हनुमान जयंती पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का कहना था कि हम इस आयोजन की अनुमति को लेकर बार-बार पुलिस के पास गए, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया। धार्मिक आस्था के कारण निकाले गए जुलूस पर पुलिस ने बर्बता से लाठीचार्ज किया। इसमें कई लोग घायल हो गए। जुलूस में शामिल होने पर पुलिस ने 12 हिन्दुओं को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आर्म्स एक्ट समेत कई गैर जमानती धाराएं लगा दीं।

सबूत नंबर-2
ममता राज के 8000 गांवों में एक भी हिंदू नहीं
पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं का उत्पीड़न जारी है। दरअसल ममता राज में हिंदुओं पर अत्याचार और उनके धार्मिक क्रियाकलापों पर रोक के पीछे तुष्टिकरण की नीति है। लेकिन इस नीति के कारण राज्य में अलार्मिंग परिस्थिति उत्पन्न हो गई है। प. बंगाल के 38,000 गांवों में 8000 गांव अब इस स्थिति में हैं कि वहां एक भी हिन्दू नहीं रहता, या यूं कहना चाहिए कि उन्हें वहां से भगा दिया गया है। बंगाल के तीन जिले जहां पर मुस्लिमों की जनसंख्या बहुमत में हैं, वे जिले हैं मुर्शिदाबाद जहां 47 लाख मुस्लिम और 23 लाख हिन्दू, मालदा 20 लाख मुस्लिम और 19 लाख हिन्दू, और उत्तरी दिनाजपुर 15 लाख मुस्लिम और 14 लाख हिन्दू। दरअसल बंगलादेश से आए घुसपैठिए प. बंगाल के सीमावर्ती जिलों के मुसलमानों से हाथ मिलाकर गांवों से हिन्दुओं को भगा रहे हैं और हिन्दू डर के मारे अपना घर-बार छोड़कर शहरों में आकर बस रहे हैं।

सबूत नंबर-1
ममता राज में घटती जा रही हिंदुओं की संख्या
पश्चिम बंगाल में 1951 की जनसंख्या के हिसाब से 2011 में हिंदुओं की जनसंख्या में भारी कमी आयी है। 2011 की जनगणना ने खतरनाक जनसंख्यिकीय तथ्यों को उजागर किया है। जब अखिल स्तर पर भारत की हिन्दू आबादी 0.7 प्रतिशत कम हुई है तो वहीं सिर्फ बंगाल में ही हिन्दुओं की आबादी में 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो कि बहुत ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की आबादी में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि सिर्फ बंगाल में मुसलमानों की आबादी 1.77 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय स्तर से भी कहीं ज्यादा दर से बढ़ी है।

 

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