प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब साल 2014 में केंद्र में नई सरकार बनी, तब देश भ्रष्टाचार, धीमी अर्थव्यवस्था और सिस्टम की सुस्ती जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। आज 2026 में जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि बीते 12 साल सिर्फ एक सरकार के कार्यकाल के नहीं, बल्कि भारत की व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक साख के पूरी तरह बदल जाने की कहानी हैं। इस एक दशक से ज्यादा के सफर में ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ का नारा केवल एक चुनावी जुमला बनकर नहीं रहा, बल्कि जमीन पर उतरता हुआ दिखा। इस दौरान मोदी सरकार ने ऐसे फैसले लिए जिन्होंने सदियों पुराने राजनीतिक गतिरोधों को खत्म किया, कुछ ऐसे फैसले भी रहे जिन्होंने देश के हर नागरिक की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे तौर पर प्रभावित किया। इन कड़े और बड़े फैसलों ने भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर करने और विकसित भारत की बुनियाद रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

आइए, एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के उन 12 बड़े और निर्णायक फैसलों पर, जिन्होंने ‘न्यू इंडिया’ की रूपरेखा तैयार करते हुए देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज की तस्वीर बदल दी है-
1. अनुच्छेद 370 का खात्मा और जम्मू-कश्मीर का नया सवेरा
5 अगस्त 2019 की वह सुबह भारतीय इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई, जब गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने का ऐतिहासिक संकल्प पेश किया। दशकों से जिसे छूने की हिम्मत कोई सरकार नहीं कर पाई थी, उसे मोदी सरकार ने एक झटके में हकीकत में बदल दिया। राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख- में विभाजित कर दिया गया।
क्या बदला: जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और अलग संविधान इतिहास का हिस्सा बन गए। भारत का पूरा संविधान वहां लागू हुआ और देश के अन्य नागरिकों की तरह वहां के लोगों को भी अधिकार मिले। अलगाववादी ताकतों और पत्थरबाजी की घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लग गई। कश्मीर घाटी में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों का आना शुरू हुआ और विकास कार्यों में तेजी आई। हाल के वर्षों में वहां हुए लोकतांत्रिक चुनावों ने जमीनी स्तर पर राजनीति को दोबारा बहाल किया है।
आम लोगों पर असर: घाटी के आम नागरिकों को दशकों के खौफ और बंद की संस्कृति से आजादी मिली। कश्मीरी महिलाओं, दलितों और शरणार्थियों को वो अधिकार मिले जो उन्हें 70 साल से नहीं मिले थे। सिनेमा हॉल दोबारा खुले, रात की रौनक लौटी और युवाओं के हाथों में पत्थर की जगह लैपटॉप और खेल के उपकरण आ गए।

2. डिजिटल भुगतान क्रांति: JAM और UPI का जादू
साल 2014 में जब ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ शुरू हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह देश की आर्थिक तकदीर बदल देगी। सरकार ने वित्तीय समावेशन को अपना मुख्य हथियार बनाया। इसके बाद आधार कार्ड को मोबाइल और बैंक खातों से जोड़ा गया, जिसे जनधन-आधार-मोबाइल ‘JAM ट्रिनिटी’ कहा गया। इसी बुनियाद पर 2016 में UPI लॉन्च हुआ, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान तंत्र बना दिया।
क्या बदला: भारत में बैंकिंग व्यवस्था का लोकतांत्रीकरण हो गया। अब सरकारी सब्सिडी और मदद बिचौलियों के हाथों से गुजरने के बजाय सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में (Direct Benefit Transfer – DBT) पहुंचने लगी, जिससे भ्रष्टाचार पर करारी चोट लगी। देश कैश-आधारित अर्थव्यवस्था से तेजी से डिजिटल-फर्स्ट इकोनॉमी की तरफ बढ़ गया। आज दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन का एक बड़ा हिस्सा अकेले भारत में होता है।
आम लोगों पर असर: इस फैसले का सबसे खूबसूरत असर यह हुआ कि एक सब्जी बेचने वाले या रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े मॉल तक, हर कोई एक क्लिक पर भुगतान लेने लगा। आम आदमी को जेब में नकदी रखने या छुट्टे पैसों के झंझट से मुक्ति मिल गई। बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म हो गई। सबसे बड़ी बात, DBT व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को काफी हद तक कम किया, जिससे आम लोगों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा बढ़ा।

3. नोटबंदी (Demonetisation): एक साहसिक आर्थिक प्रयोग
8 नवंबर 2016 की रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक टीवी पर आकर 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने का एलान कर दिया। इस एक फैसले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। सरकार का तर्क था कि इससे काले धन पर लगाम लगेगी, जाली नोटों का कारोबार बंद होगा और आतंकवाद-नक्सलवाद की फंडिंग की कमर टूट जाएगी।
क्या बदला: इस फैसले के बाद देश का छुपा हुआ पैसा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गया। टैक्स बेस का दायरा बढ़ा और देश में डिजिटल लेन-देन को अभूतपूर्व रफ्तार मिली। इस फैसले ने देश के भीतर छिपे समानांतर काले धन के साम्राज्य पर एक मनोवैज्ञानिक चोट की।
आम लोगों पर असर: शुरुआत में लोगों को बैंकों की लाइनों में लगने के कारण कुछ व्यावहारिक परेशानियां हुईं, लेकिन लंबी अवधि में आम जनता ने इसे काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साहसिक कदम के रूप में देखा। इस फैसले ने देश के आम नागरिकों में कैशलेस और डिजिटल लेनदेन की आदत डालने में भी बड़ी भूमिका निभाई।

4. जीएसटी (GST): ‘एक देश, एक टैक्स’ का सपना सच
1 जुलाई 2017 की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल से वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू किया गया। आजादी के बाद से देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में यह सबसे बड़ा और जटिल सुधार था। इसने राज्यों और केंद्र के दर्जनों अलग-अलग टैक्सों को खत्म करके पूरे देश को एक एकल बाजार में बदल दिया।
क्या बदला: ‘इंस्पेक्टर राज’ और राज्यों की सीमाओं पर लगने वाले टैक्स नाकों का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो गया। टैक्स पर लगने वाले टैक्स की बीमारी दूर हुई। आज 2026 में जीएसटी कलेक्शन हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के पास विकास कार्यों के लिए भारी फंड जमा हो रहा है। लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की रफ्तार में काफी सुधार आया है।
आम लोगों पर असर: शुरुआत में अलग-अलग टैक्स स्लैब और रिटर्न फाइलिंग की जटिलताओं के कारण व्यापारियों और दुकानदारों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन समय के साथ जब व्यवस्था सुधरी, तो व्यापार करना आसान हो गया। आम उपभोक्ताओं के लिए कई जरूरी चीजों पर टैक्स की दरें कम हुईं, जिससे बिलिंग पारदर्शी हुई। ग्राहकों को अब यह पता होता है कि वे वास्तव में कितना टैक्स दे रहे हैं।

5. इन्फ्रास्ट्रक्चर का महा-अभियान: हाईवे, वंदे भारत और नए हवाई अड्डे
मोदी सरकार ने देश के विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा। प्रधानमंत्री गतिशक्ति मास्टरप्लान और नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के जरिए देश के कोने-कोने को जोड़ने का काम शुरू हुआ। नेशनल हाईवे बनाने की रफ्तार को बढ़ाकर 30-40 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचाया गया।
क्या बदला: भारतीय रेलवे की पूरी तस्वीर बदल गई। पारंपरिक ट्रेनों की जगह स्वदेशी तकनीक से बनी ‘वंदे भारत’ और ‘अमृत भारत’ जैसी अत्याधुनिक ट्रेनों ने ले ली। देश के दर्जनों प्रमुख रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प कर उन्हें वर्ल्ड क्लास एयरपोर्ट जैसा बनाया जा रहा है। ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत छोटे शहरों में नए हवाई अड्डे बने और हवाई चप्पल पहनने वाले को भी हवाई सफर का मौका मिला। समुद्री बंदरगाहों और जलमार्गों का तेजी से विकास हुआ।
आम लोगों पर असर: इस इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रांति से आम लोगों का सफर बेहद आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाला बन गया है। दिल्ली से मेरठ, मुंबई से नागपुर या बेंगलुरु से मैसूर जैसे एक्सप्रेसवे ने शहरों की दूरी को घंटों से समेटकर मिनटों में बदल दिया है। सुदूर इलाकों के लोगों के लिए बड़े शहरों तक पहुंच आसान हुई है, जिससे व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है।

6. आत्मनिर्भर रक्षा नीति: राष्ट्रीय सुरक्षा, सर्जिकल स्ट्राइक और डिफेंस एक्सपोर्ट
मोदी सरकार ने भारत की रक्षा नीति को ‘रक्षात्मक’ से ‘आक्रामक और आत्मनिर्भर’ मोड में डाल दिया। 2016 में उरी हमले के बाद ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और 2019 में पुलवामा हमले के बाद ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ करके सरकार ने साफ कर दिया कि भारत अब घर में घुसकर मारना जानता है। इसके साथ ही, रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हथियारों का घरेलू उत्पादन शुरू किया गया।
क्या बदला: भारत की युद्ध नीति और वैश्विक छवि पूरी तरह बदल गई। देश अब केवल दूसरों से हथियार खरीदने वाला नहीं, बल्कि हथियारों का निर्यात करने वाला देश बन गया है। ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस लड़ाकू विमान और आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी लड़ाकू जहाजों का निर्माण भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक बन चुके हैं। सीमाओं पर सड़कों और सुरंगों का जाल बिछाया गया है, जिससे सेना की आवाजाही आसान हुई है।
आम लोगों पर असर: देश के नागरिकों के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक नया भरोसा और गौरव की भावना पैदा हुई। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग, जो पहले हमेशा गोलाबारी के साए में जीते थे, अब खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। इसके अलावा, रक्षा विनिर्माण के घरेलू हब बनने से देश के हजारों युवाओं के लिए हाई-टेक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।

7. आयुष्मान भारत: दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य कवच
2018 में शुरू की गई ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) देश के गरीब और मध्यम वर्ग के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। इस योजना के तहत देश के गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाने लगा। इसके साथ ही देशभर में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) खोले गए।
क्या बदला: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदल गया। इलाज के अभाव में दम तोड़ने वाले गरीबों को देश के बड़े-बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में भी वही इलाज मिलने लगा जो अमीरों को मिलता है। इस योजना ने प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर भी एक हद तक लगाम लगाई और देश के दूर-दराज के इलाकों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया।
आम लोगों पर असर: इस योजना ने करोड़ों परिवारों को इलाज के खर्च के कारण कर्जदार होने या गरीबी रेखा से नीचे जाने से बचा लिया। कैंसर, दिल की बीमारी और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज होने से आम आदमी को एक बड़ा मानसिक और आर्थिक संबल मिला। जन औषधि केंद्रों के जरिए मिलने वाली बेहद सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं ने आम लोगों के महीने के मेडिकल खर्च को 70-80 प्रतिशत तक कम कर दिया है।

8. प्रधानमंत्री आवास और उज्ज्वला योजना: जीवन स्तर में बुनियादी बदलाव
मोदी सरकार ने ‘सबके लिए पक्का मकान’ और ‘धुआं मुक्त भारत’ का संकल्प लेकर दो बेहद महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू कीं—प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना। आवास योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में करोड़ों पक्के मकान बनाए गए, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए।
क्या बदला: देश के ग्रामीण इलाकों की सूरत बदल गई। मिट्टी और फूस के कच्चे घरों की जगह पक्के और पक्के शौचालयों से लैस मकानों ने ले ली। इसके साथ ही, लकड़ी और उपलों पर खाना बनाने की सदियों पुरानी परंपरा का अंत हुआ, जिससे पर्यावरण और महिलाओं के स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान में भारी कमी आई। इन योजनाओं ने महिलाओं के नाम पर घर देकर महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी।
आम लोगों पर असर: गरीब परिवारों को अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी ‘एक सुरक्षित छत’ मिली। प्राकृतिक आपदाओं के समय घर ढहने का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया। उज्ज्वला योजना से करोड़ों माताओं-बहनों को रसोई के धुएं से आजादी मिली, जिससे उनकी आंखों और फेफड़ों की बीमारियों में कमी आई। खाना बनाने में लगने वाला समय बचा, जिसका उपयोग वे अन्य आर्थिक या रचनात्मक गतिविधियों में करने लगीं।

9. कोविड-19 प्रबंधन और दुनिया का सबसे बड़ा ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान
जब 2020 में सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड-19 ने दुनिया पर दस्तक दी, तो भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश को लेकर वैश्विक विशेषज्ञों ने बेहद डरावनी भविष्यवाणियां की थीं। लेकिन मोदी सरकार ने कड़े राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन, स्वदेशी टीकों कोवैक्सिन और कोविशील्ड के विकास को प्रोत्साहन और ‘कोविन’ (CoWIN) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा और सफल मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया।
क्या बदला: भारत ने न केवल अपनी 140 करोड़ की आबादी को सुरक्षित किया, बल्कि ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत दुनिया के 100 से अधिक देशों को मेड-इन-इंडिया टीके भेजकर खुद को ‘विश्व मित्र’ के रूप में स्थापित किया। देश में पीपीई किट, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन प्लांट का घरेलू उत्पादन इतनी तेजी से बढ़ा कि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया। महामारी के दौरान शुरू हुई ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई, जो आज भी जारी है।
आम लोगों पर असर: संकट के उस भयानक दौर में आम नागरिकों को मुफ्त टीके ने जीवनदान दिया। डिजिटल वैक्सीन सर्टिफिकेट ने लोगों को दोबारा काम पर लौटने और यात्रा करने की आजादी दी। मुफ्त राशन योजना ने यह सुनिश्चित किया कि लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के दौर में भी देश का कोई भी गरीब भूखा न सोए। इस संकट प्रबंधन ने सरकार और जनता के बीच के जुड़ाव को और अधिक गहरा कर दिया।

10. कूटनीति और वैश्विक नीति: ‘इंडिया फर्स्ट’ और ग्लोबल साउथ की कप्तानी
बीते 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति में एक बड़ा वैचारिक बदलाव देखा गया। भारत ने अपनी पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्षता’ की नीति से आगे बढ़कर ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ और ‘इंडिया फर्स्ट’ की नीति अपनाई। यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस से सस्ता तेल खरीदना हो या जी-20 की अध्यक्षता के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनना हो, भारत ने अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक धमक दिखाई।
क्या बदला: भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ एक मूकदर्शक या एजेंडा का पालन करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह एजेंडा तय करने वाला बन चुका है। QUAD और BRICS जैसे संगठनों में भारत की भूमिका बेहद अहम हो गई है। यूएई, सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध रणनीतिक और ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। दुनिया के किसी भी कोने में संकट आने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा’ (यूक्रेन) और ‘ऑपरेशन कावेरी’ (सूडान) जैसे सफल रेस्क्यू मिशन चलाए गए।
आम लोगों पर असर: विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों का सम्मान और सुरक्षा का अहसास अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। आज भारतीय पासपोर्ट की ताकत और वैश्विक साख मजबूत हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति का सीधा फायदा देश में आ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के रूप में मिल रहा है, जिससे घरेलू स्तर पर नई तकनीकों और नौकरियों का सृजन हो रहा है।

11. सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पुनर्जागरण: तीन तलाक का अंत और राम मंदिर निर्माण
मोदी सरकार ने अपने वैचारिक और सांस्कृतिक एजेंडे पर भी बेहद मजबूती से काम किया। 2019 में संसद से ‘तीन तलाक’ विरोधी कानून पास कराकर मुस्लिम महिलाओं को एक कुप्रथा से मुक्ति दिलाई गई। वहीं दूसरी ओर, दशकों पुराने कानूनी विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के बाद जनवरी 2024 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जिसे सरकार ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। साल 2023 में संसद से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पास कराना भी इसी कड़ी का हिस्सा था।
क्या बदला: देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में एक बड़ा मोड़ आया। तीन तलाक कानून ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के नाम पर होने वाले मनमाने शोषण को कानूनी अपराध बना दिया। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और काशी-विश्वनाथ व उज्जैन महाकाल कॉरिडोर के विकास ने देश के भीतर सांस्कृतिक पर्यटन की एक नई और विशाल अर्थव्यवस्था को जन्म दिया।
आम लोगों पर असर: तीन तलाक कानून से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को समाज में कानूनी सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार मिला। दूसरी तरफ, राम मंदिर और सांस्कृतिक स्थलों के पुनरुद्धार से देश के बहुसंख्यक समाज की सांस्कृतिक आकांक्षाएं पूरी हुईं। अयोध्या और वाराणसी जैसे शहरों में होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार में कई गुना की वृद्धि हुई है, जिससे लाखों स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

12. नई शिक्षा नीति और कौशल विकास: भविष्य के भारत की तैयारी
34 साल पुराने शिक्षा ढांचे को बदलते हुए मोदी सरकार ने 2020 में ‘नई शिक्षा नीति’ (National Education Policy) को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारतीय शिक्षा व्यवस्था को रट्टा मारने की संस्कृति से निकालकर कौशल-आधारित, व्यावहारिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। इसके साथ ही ‘स्किल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के जरिए युवाओं को नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी देने वाला बनाने पर जोर दिया गया।
क्या बदला: स्कूली शिक्षा के पारंपरिक 10+2 ढांचे को बदलकर 5+3+3+4 में बदला गया, जिसमें शुरुआती बचपन की देखभाल और शिक्षा को शामिल किया गया। उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (पढ़ाई बीच में छोड़ने और दोबारा शुरू करने) की सुविधा दी गई। मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी व व्यावहारिक शिक्षा देने की शुरुआत हुई। देश में स्टार्टअप्स की संख्या कुछ सौ से बढ़कर सवा लाख के पार पहुंच गई, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया।
आम लोगों पर असर: छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने की आजादी मिली—जैसे अब विज्ञान का छात्र भी संगीत या इतिहास पढ़ सकता है। रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर होने से कॉलेजों से निकलने वाले युवाओं की स्किलिंग बेहतर हो रही है। छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को अपनी भाषा में उच्च शिक्षा पाने का अवसर मिला है, जिससे अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व का दबाव कम हुआ है।

मोदी सरकार के इन 12 वर्षों ने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज को नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2026 के इस पड़ाव पर खड़ा भारत अब केवल विकास की बातें नहीं करता, बल्कि 2047 तक एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के संकल्प को सिद्ध करने के लिए पूरे वेग से आगे बढ़ रहा है।










