पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विभिन्न मुद्दों पर दिए गए बयानों को लेकर लगातार राजनीतिक विवाद गहराता रहा है। सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, नागरिकता कानून और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर उनकी टिप्पणियों ने अराजकता का माहौल उत्पन्न कर दिया। इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है और इससे राष्ट्रीय एकता तथा सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
1. बंगाल में 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे तक बंधक
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भड़के विरोध के दौरान 2 अप्रैल 2026 को सात न्यायिक अधिकारियों को लगभग 9 घंटे तक बंधक बनाए जाने की घटना सामने आई। ये अधिकारी Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची संशोधन कार्य में लगे हुए थे। इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। इस तरह की घटनाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बाधक माना जाता है। संस्थागत कार्यों में इस प्रकार का व्यवधान प्रशासनिक अस्थिरता का संकेत देता है, जिसका असर शासन व्यवस्था और व्यापक सामाजिक विश्वास पर पड़ सकता है।

2. सीमा बाड़बंदी के लिए जमीन नहीं दी
तृणमूल कांग्रेस ने बांग्लादेश से घुसपैठ रोकने के लिए कांटेदार तार की बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं कराई। यह मुद्दा सीधे तौर पर सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ है, जिस पर राज्य सरकार का रुख सवालों के घेरे में है। ममता ने 6 फरवरी 2026 को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है। इस संवेदनशील मसले पर सहयोग करने के बजाय उन्होंने शर्त रखी कि पहले बीएसएफ का दायरा घटाया जाए, तभी जमीन दी जाएगी। 
3. SIR का विरोध, चुनाव आयोग को कहा ‘बेशर्म आयोग’
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बन गई। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण के तहत अवैध मतदाताओं और संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया कई राज्यों में पहले भी लागू की जा चुकी है। ममता बनर्जी ने 22 दिसंबर 2025 को तृणमूल कांग्रेस के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा, “मैंने ऐसा बेशर्म आयोग पहले कभी नहीं देखा, और न ही मैं भविष्य में वर्तमान आयोग को देखना चाहती हूं।” संवैधानिक संस्था पर इस तरह की तीखी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी बयानबाजी से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है और इससे राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन सकता है।

4. पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करा रही BSF : ममता
सीमा सुरक्षा बल को बदनाम करते हुए ममता बनर्जी ने 2 जनवरी 2025 को कहा कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) बांग्लादेशियों की घुसपैठ में मदद करती है, इसलिए बंगाल में अशांति फैल रही है। देश की सीमा सुरक्षा में तैनात एक केंद्रीय बल पर इस तरह के गंभीर आरोपों ने सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए और राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया। ममता ने बीएसएफ पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का आरोप भी मढ़ दिया। ममता ने कहा- BSF बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए तैनात है, लेकिन वह इस्लामपुर, सीताई और चोपड़ा बॉर्डर से बांग्लादेशियों को भारत में एंट्री की परमिशन दे रही है। BSF महिलाओं के खिलाफ भी अत्याचार कर रही है। ऐसे बयानों से न सिर्फ सुरक्षाबलों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के मुद्दों पर भ्रम की स्थिति भी पैदा होती है।

5. बांग्लादेश से घुसपैठ केंद्र सरकार का ब्लूप्रिंट : ममता
ममता बनर्जी ने 2 जनवरी 2025 को कहा कि बांग्लादेश से घुसपैठ कोई सामान्य समस्या नहीं, बल्कि इसके पीछे केंद्र सरकार और बीएसएफ की “सोची-समझी साजिश (ब्लूप्रिंट)” है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा पूरी तरह केंद्र के अधीन है, इसलिए घुसपैठ की जिम्मेदारी भी उसी की है। केंद्र सरकार और देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों पर इस तरह की अनर्गल बयानबाजी न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण करती है, बल्कि जनता के बीच अविश्वास का माहौल भी पैदा करती है। ऐसे बयान देश की एकता और अखंडता के लिए भी गंभीर खतरा माने जा सकते हैं।

6. CAA नागरिकों को विदेशी बनाने का जाल : ममता
ममता बनर्जी ने 31 मार्च 2024 को राज्य के कृष्णानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए CAA पर भड़काने वाला बयान दिया। उन्होंने CAA को लेकर लोगों के बीच आशंकाएं पैदा करते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बना दिया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल और अधिक ध्रुवीकृत हुआ। ममता ने कहा, “सीएए वैध नागरिकों को विदेशी बनाने का एक जाल है, जिसे वो स्वीकार नहीं करेंगी। हम पश्चिम बंगाल में न तो सीएए और न ही एनआरसी को लागू करने की अनुमति देंगे। सीएए, एनआरसी की वजह से लोग तनाव में हैं।” आलोचकों का मानना है कि इस तरह के बयान भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं और समाज में विभाजन की आशंका को बढ़ाते हैं, जो राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन सकता है।

7. राज्यपाल और संवैधानिक संस्थाओं से टकराव
Mamata Banerjee ने कई मौकों पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वर्ष 2022 में ममता का तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच टकराव इस कदर बढ़ गया कि विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल के खिलाफ प्रस्ताव लाने की भी तैयारी कर ली थी। ऐसे वाकयों से जहां संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा धूमिल होती है वहीं शासन के स्तर पर कामकाज प्रभावित होता है। इससे प्रदेश में अविश्वास का माहौल पैदा होता है और यह राष्ट्रीय एकता के लिए भी खतरा बन सकता है।

8. बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास
पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के अंदर बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस ने 16 नवंबर 2021 को विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव पास कराया, जबकि भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा से सटे क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए BSF को 50 किलोमीटर तक के दायरे में गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती के अधिकार देने का निर्णय लिया था, जिसका ममता बनर्जी ने विरोध किया। इस संवेदनशील मुद्दे पर बंगाल सरकार के रुख से समन्वय प्रभावित हो सकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा व एकता पर असर पड़ सकता है।

9. नागरिकता कानून लागू नहीं होगा : ममता
सीएए के खिलाफ कोलकाता में 11 दिन में पांच रैलियां करने वाली बनर्जी ने 28 दिसंबर 2019 को कहा, ‘जब तक मैं जीवित हूं तब तक बंगाल में सीएए लागू नहीं होगा। कोई भी देश या राज्य छोड़कर नहीं जाएगा। बंगाल में कोई हिरासत केन्द्र नहीं बनेगा।’ संवैधानिक रूप से पारित कानून को राज्य में लागू न होने देने की इस तरह की खुली घोषणा पर संघीय ढांचे और कानून के समान अनुपालन को लेकर सवाल उठते हैं। इससे देश में अराजकता फैलने की स्थिति में राष्ट्रीय एकता को गंभीर खतरा हो सकता है।

10. देश में छिड़ जाएगा गृह युद्ध : ममता
असम में NRC की कवायद के बीच 31 जुलाई 2018 को ममता बनर्जी ने कहा, ‘एनआरसी राजनैतिक उद्देश्यों से किया जा रहा है। हम ऐसा होने नहीं देंगे। वे (भाजपा) लोगों को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। इस स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. देश में गृह युद्ध, रक्तपात हो जाएगा।’ इतने संवेदनशील मुद्दे पर “गृह युद्ध” और “रक्तपात” जैसी भाषा का इस्तेमाल सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है और राष्ट्रीय एकता तथा सामंजस्य को क्षति पहुंचा सकता है।










