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ममता बनर्जी ने हताशा में कैसे फैलाया बंगाल के लोगों में भ्रम- देखिए झूठ नंबर 30

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने बयानों के कारण हमेशा विवादों में रहती हैं। ममता बनर्जी के कई बयानों ने बड़े विवादों को जन्म दिया है। वह अक्सर ऐसे दावे करती हैं जिनका हकीकत से दूर-दूर तक नाता नहीं होता। उनके कई बयान तो लोगों में भारी भ्रम फैलाने वाले के साथ राजनीतिक बहस और विवाद का कारण बने हैं। राजनीतिक हताशा और लोगों को डराने की कोशिश में दिए गए उनके कई बयान इतने बड़े हो जाते हैं कि फैक्ट चेक करने पर साफ झूठ निकल आता है। आइए एक नजर डालते हैं ममता बनर्जी के उन बड़े दावों पर जो ‘भ्रामक’ या ‘झूठ’ साबित हुए हैं।

1. चाय में नींद की दवाई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आसन्न हार को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बौखला गई हैं। हार को निकट देखते हुए वह विपक्षी दलों पर झूठे आरोप तक लगाने से नहीं बच रही हैं। चुनावी रैलियों में तो उन्होंने बीजेपी पर एक के बाद एक बड़े आरोप लगाए। उम्मीदवारों को डराने से लेकर बंगाल को तीन टुकड़ों में बांटने की साजिश तक उन्होंने कई हताशा भरे बयान दिए। ममता ने लोगों को चेताते हुए कहा कि बीजेपी चुनाव के दिन लोगों को नींद की दवाई मिली चाय और मिठाई देने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि इसे खाने के बाद लोग सो जाएंगे और बीजेपी उनके वोट चुरा लेगी। ममता के इस बेसिर-पैर के बयान पर लोग दंग हैं।

2. मछली पर पाबंदी
सीएम ममता बनर्जी ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में मछली नहीं खाई जाती है। वहां का माहौल बिल्कुल अलग है। मैं आप सबको सावधान कर रही हूं कि अगर बंगाल में बीजेपी सत्ता में आ गई, तो आप लोग यहां चैन से मछली, मांस या अंडा भी नहीं खा पाएंगे। बीजेपी राज्यों को लेकर ममता का ये दावा भी सही नही है।

3. सेंट्रल फोर्सेज को बदनाम
बांकुरा जिले में चुनावी रैलियों को संबोधित करने पहुंची ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बल जांच के नाम पर महिलाओं का अपमान कर रही हैं। ममता के इस झूठे आरोप की निंदा हो रही है।

4. सब कुछ छीन लेगी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पूर्व बर्धमान जिले में एक चुनावी रैली में लोगों को भ्रामक जानकारी देते हुए डराने की कोशिश की। ममता ने कहा कि अगर इस बार चुनाव में बीजेपी सत्ता में आती है, तो राज्य में कई लोगों को अपना घर और आश्रय खोना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में लोगों के पास न कोई पता होगा, न घर और न ही परिवार। बीजेपी सब कुछ छीन लेगी। वो सत्ता में आकर बुलडोजर चलाएगी।

5. बंगाल को बांट देगी बीजेपी
ममता बनर्जी ने एक चुनावी सभा में भ्रम फैलाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार राज्य को तीन भागों में बांटने के लिए परिसीमन करना चाहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के कुछ हिस्सों का विलय बिहार या ओडिशा में किया जा सकता है, जिससे उन क्षेत्रों में रहने वाले बंगालियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

6. दिल्ली पर कब्जा करेंगे
एक चुनावी सभा में यह दावा करते हुए कि उनकी पार्टी लगातार चौथी बार राज्य में सत्ता में आएगी, ममता ने कहा कि एक बार चुनाव खत्म हो जाएं और हम पश्चिम बंगाल में जीत जाएं, तो हम सबको एकजुट करेंगे और पूरे देश के लोगों को साथ लेकर दिल्ली पर कब्जा करेंगे

7. CAA से नागरिकता छिन जाएगी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का वह बयान जिसमें उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को सीधे तौर पर ‘आपकी नागरिकता छीनने का हथियार’ बताया, सबसे अधिक भ्रम फैलाने वाला साबित हुआ। ममता अक्सर दावा करती हैं कि CAA लागू होने से लोगों की नागरिकता छिन जाएगी और उन्हें डिटेंशन कैंप भेज दिया जाएगा। ममता के इस बयान ने विशेष रूप से शरणार्थी समुदायों (मतुआ और नमशूद्र) और अल्पसंख्यक वर्ग के बीच भारी डर पैदा किया, जबकि यह कानून सिर्फ नागरिकता देने के लिए है।

8. आयोग पर 90 लाख वोटरों के नाम कटने का आरोप
ममता बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बंगाल में 90 लाख वोटरों के नाम जानबूझकर काट दिए हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताया है। SIR विवाद के साथ ही ममता ने यह भी कहा कि अगर कोई वोट नहीं डालेगा तो उसका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा और उसकी नागरिकता भी चली जाएगी। यह बयान ग्रामीण इलाकों में डर पैदा कर गया। SIR से पात्र वोटरों को नहीं बल्कि गैर-नागरिकों को हटाया जाता है। चुनाव आयोग ने अदालत में कहा भी कि ममता बनर्जी ने SIR को लेकर गलत और भड़काऊ बातें कही हैं, जिससे लोगों में भ्रम फैला।

9. नीति आयोग मीटिंग में माइक बंद करने का दावा
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नीति आयोग की बैठक में उन्हें बोलने नहीं दिया गया, लेकिन सरकारी पक्ष ने इसे गलत बताया और कहा कि उनका माइक्रोफोन बंद नहीं किया गया था.

10. NIA को लेकर दावा निकला झूठा
भूपतिनगर मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि NIA ने छापे के बारे में स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं दी, लेकिन पुलिस बयान ने इस दावे को खारिज किया। पूरबा मेदिनीपुर के एसपी ने साफ कहा कि एनआईए की एक टीम भूपतिनगर थाने में आई थी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हरसंभव मदद की बात कही थी।

11. तूफान में मदद ना मिलने का दावा निकला झूठ
साइक्लोन अम्फान (2020) के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र से कोई मदद नहीं मिली। लेकिन केंद्र ने 1000 करोड़ एडवांस और NDRF के तहत 2700 करोड़ से ज्यादा राशि दी थी।

12. प्रतिमा तोड़ने को लेकर बोला झूठ
ममता बनर्जी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान विद्यासागर कॉलेज में प्रतिमा तोड़ने का आरोप बीजेपी पर लगाया। लेकिन जांच और वीडियो में टीएमसी कार्यकर्ताओं की भूमिका सामने आई। ममता ने एक घायल कार्यकर्ता का फेक वीडियो भी इस्तेमाल किया जो बाद में गलत साबित हुआ।

13. तख्तापलट को लेकर बोला झूठ
ममता बनर्जी ने 2016 में सेना की रूटीन ट्रेनिंग एक्सरसाइज को मिलिट्री कू यानी तख्तापलट की साजिश बताया और कहा कि बिना राज्य की अनुमति के सेना ने टोल प्लाजा पर कब्जा कर लिया। डिफेंस मिनिस्टर और आर्मी ने साफ किया कि यह सामान्य एक्सरसाइज थी जिसकी पहले से जानकारी थी।

14. केंद्र की योजनाओं को लेकर बोला झूठ
ममता ने बार-बार कहा कि मोदी सरकार ने बंगाल के लिए कुछ नहीं किया। जबकि राज्य में केंद्र की कई योजनाएं चल रही हैं, जिन्हें टीएमसी ने अपना नाम देकर प्रचारित किया। ममता बनर्जी केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को बंगाली नाम देकर चालाकी से उनका श्रेय खुद लेती रही हैं। टीएमसी सरकार ने ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ से “प्रधानमंत्री” शब्द हटा दिया। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का नाम बदलकर ‘बांग्लार आवास योजना’ कर दिया। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का नाम बदलकर ‘निर्मल बांग्ला’, ‘दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना’ का नाम ‘आनंदधारा’, ‘प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना’ का नाम ‘बांग्ला गृह प्रकल्प’ और ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ का नाम ‘सबार घरे आलो’ कर दिया

15. राशन कार्ड को लेकर झूठा दावा
ममता बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल में उनकी सरकार ने काफी संख्या में फर्जी राशन कार्ड रद्द कर दिए है। लेकिन असलियत यह है कि मोदी सरकार के नए कानून की वजह से फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 2019 में राशन में पारदर्शिता लाने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ (ONORC) योजना शुरू की, तो तृणमूल कांग्रेस ने इसका विरोध किया। टीएमसी ने इसके लागू होने में लगभग दो साल की देरी की। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ONORC के तहत आधार लिंक होने के महज आठ महीनों के भीतर ही, लगभग 1.14 करोड़ राशन कार्ड रद्द कर दिए गए। 2011 से सत्ता में रहने वाली ममता बनर्जी की सरकार के दौरान 1 करोड़ से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड थे जिसे ONORC आने के बाद 2022 में हटाए गए।

16. पीएचडी को लेकर गलतबयानी
ममता बनर्जी ने 1984-85 के आसपास दावा किया कि उन्होंने अमेरिका की “ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी” से पीएचडी की है। लेकिन यूनाइटेड स्टेट्स एजुकेशन फाउंडेशन इन इंडिया ने साफ कहा कि ऐसी कोई यूनिवर्सिटी कभी अस्तित्व में ही नहीं थी। बाद में उन्होंने डॉक्टर का टाइटल इस्तेमाल करना छोड़ दिया।

17. बर्दवान ब्लास्ट पर भ्रामक आरोप
ममता ने 2014 के बर्दवान ब्लास्ट मामले “स्टेज्ड” बताया और केंद्र सरकार व RAW पर इल्जाम लगाया कि यह साजिश है। लेकिन NIA जांच में बांग्लादेश के जेएमबी आतंकियों का हाथ निकला और मुख्य आरोपी को 29 साल की सजा हुई।

18. पार्क स्ट्रीट रेप मामले में झूठ
कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला के साथ चलती कार में पांच लोगों ने बलात्कार किया। ममता बनर्जी ने इसे मनगढ़ंत घटना बताते हुए कहा कि यह सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई साजिश थी। इतना ही नहीं एक टीएमसी सांसद ने तो पीड़िता के चरित्र पर सवाल उठाते हुए उसे ‘यौनकर्मी’ तक कह दिया और रेप की बात को सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन जनता के भारी विरोध के बाद ममता बनर्जी को अपने रुख से वापस लेना पड़ा और मामले के आरोपियों को गिरफ्तारी कर लिया गया

19. MGNREGA में नंबर वन का झूठा दावा
सीएम ममता बनर्जी ने कई बार दावा किया कि पश्चिम बंगाल MGNREGA में देश में नंबर वन है। लेकिन सरकारी आंकड़ों में राज्य 24वें या उससे नीचे रहा और 2019 में तो 35वें स्थान पर चला गया।

20. MGNREGA का पैसा रोकने पर झूठ
ममता बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र MGNREGA का पैसा नहीं दे रहा, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि बंगाल सरकार ने फंड के इस्तेमाल का हिसाब (UC) नहीं दिया है। इसके साथ ही केंद्र का कहना है कि राज्य ने भ्रष्टाचार की शिकायतों और ऑडिट रिपोर्ट का सही जवाब नहीं दिया।

21. आयुष्मान भारत योजना पर झूठ
केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना से बाहर निकलते समय ममता बनर्जी ने झूठा दावा किया था कि आयुष्मान योजना के लिए 40 प्रतिशत फंड मरीजों को खुद ही देना होगा। ममता ने इसके लिए एक ऐसी मनगढ़ंत कहानी बनाई जो सच से कोसों दूर थी। जबकि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) यानी आयुष्मान भारत योजना देश के गरीब और वंचित परिवारों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा देती है। इस योजना के तहत प्रीमियम में केंद्र और राज्य के योगदान का अनुपात 90:10 का है। इसका मतलब है कि ममता का यह दावा कि 40 प्रतिशत प्रीमियम मरीजों को देना होगा, बिल्कुल बेबुनियाद है। ममता ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना आयुष्मान भारत से बेहतर है, लेकिन यह योजना कई बड़े अस्पतालों में मान्य ही नहीं है।

22. फ्री राशन का सारा क्रेडिट
ममता बनर्जी दावा करती है कि उनकी सरकार अपनी जेब से लोगों को फ्री राशन दे रही है, लेकिन हकीकत में इसका बड़ा हिस्सा केंद्र की PMGKAY योजना के तहत आता है।

23. फोन टैपिंग का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार दावा किया कि केंद्र उनका फोन टैप कर रहा है। ममता ने तो अपनी रैलियों में फोन पर टेप चिपका कर कहा कि “सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा है”। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जांच में इस बात के कोई ठोस सबूत नहीं मिले।

24. केंद्र पर लगाया शिकागो यात्रा रद्द करने का झूठा आरोप
ममता बनर्जी मे 2018 में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कहने पर रामकृष्ण मिशन ने स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर उनकी शिकागो की यात्रा रद्द कर दिया। बाद में उनके अपने ही दफ्तर ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया। ऑफिस ने कहा कि बेलूर मठ के एक भिक्षु की अचानक मृत्यु के कारण रामकृष्ण मिशन ने खुद ही वह कार्यक्रम रद्द कर दिया था। इसके साथ ही MEA ने कहा कि उनकी यात्रा की मंजूरी के लिए कोई अनुरोध ही नहीं किया गया था।

25. अन्ना के साथ रैली पर झूठ
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को 2014 में उस वक्त भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब दिल्ली के रामलीला मैदान में उनके और अन्ना हजारे के संयुक्त शक्ति प्रदर्शन की योजना पूरी तरह धराशायी हो गई। गांधीवादी नेता अन्ना हजारे ने खराब सेहत का हवाला देते हुए ऐन वक्त पर रैली से किनारा कर लिया, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि रैली में 4,000 लोग भी नहीं पहुंचे थे और उन्हें गुमराह किया गया था। अपनी साख बचाने के लिए ममता ने इसे पूरी तरह अन्ना हजारे की रैली करार देते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की, मगर जल्द ही दिल्ली नगर निगम की वह रसीद सामने आ गई जिसने उनकी पोल खोल दी; इस रसीद ने साफ कर दिया कि मैदान की बुकिंग स्वयं तृणमूल कांग्रेस ने ही कराई थी, जिससे मुख्यमंत्री के दावों की सच्चाई पूरी तरह उजागर हो गई।

26. CPI-M के कार्यालय पर कब्जा नहीं का झूठ
ममता बनर्जी का यह दावा कि उनके शासनकाल में टीएमसी ने CPI-M के एक भी कार्यालय पर कब्जा नहीं किया, उस वक्त पूरी तरह बेनकाब हो गया जब 2019 के चुनावों के बाद वामपंथियों ने अपने 150 से अधिक दफ्तरों को वापस अपने नियंत्रण में ले लिया। साल 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में माकपा के कार्यालयों पर जबरन तृणमूल का झंडा फहरा दिया गया था और दीवारों पर पार्टी के प्रतीक पेंट कर दिए गए थे।

हालांकि, ममता बनर्जी इन दावों को नकारती रहीं, लेकिन बांकुड़ा, पुरुलिया और हुगली जैसे जिलों में माकपा कैडरों द्वारा अपने दफ्तरों को फिर से हासिल करने और वहां लाल झंडा फहराने की तस्वीरों ने मुख्यमंत्री के ‘सफेद झूठ’ की सच्चाई सार्वजनिक कर दी।

27. भुखमरी से मौत पर झूठ
पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में सबर समुदाय के लोगों की मौत पर ममता बनर्जी का ‘क्लीन चिट’ वाला दावा झूठ निकला। साल 2018 में भुखमरी से हुई मौतों की खबरों को विधानसभा में सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे ‘अत्यधिक शराब’ और ‘बुढ़ापे’ का परिणाम बताया था, लेकिन तत्कालीन सर्वेक्षण रिपोर्ट ने उनके इन दावों की पोल खोल दी। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के लगभग 31 प्रतिशत आदिवासी परिवार भीषण खाद्य संकट और कुपोषण से जूझ रहे थे। चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि सर्वे के दौरान हुई 52 मौतों में से 48 लोग समय से पहले (Premature death) काल के गाल में समा गए थे।

28. कोरोना वैक्सीन को लेकर झूठ
2021 चुनाव से पहले ममता बनर्जी का ‘वैक्सीन कार्ड’ उस वक्त नाकाम हो गया जब केंद्र ने आंकड़ों के जरिए उनके आरोपों की पोल खोल दी। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि केंद्र सरकार उन्हें वैक्सीन उपलब्ध नहीं करा रही है, जबकि हकीकत यह थी कि राज्य को मिली 52.9 लाख से अधिक डोज में से करीब 22 लाख डोज उस समय तक बिना इस्तेमाल के पड़ी थीं। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए केंद्र पर ठीकरा फोड़ने की यह कोशिश सरकारी आंकड़ों के सामने महज एक सियासी झूठ साबित हुई।

29. डेंगू या मलेरिया के टीके पर झूठ
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान झाड़ग्राम की एक रैली में ममता बनर्जी उस वक्त हास्य का पात्र बन गईं, जब उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए दावा कर दिया कि बंगाल सरकार डेंगू और मलेरिया के टीके मुफ्त देती है। मुख्यमंत्री ने कोरोना वैक्सीन की मांग करते हुए कहा कि जैसे वह राज्य में पोलियो, डेंगू और मलेरिया के टीके मुफ्त बांटती हैं, वैसे ही कोरोना का टीका भी बांटेंगी। ममता बनर्जी का यह दावा एक बड़ा ‘ब्लंडर’ साबित हुआ, क्योंकि उस समय तक दुनिया की किसी भी सरकार के पास डेंगू या मलेरिया का कोई टीका उपलब्ध नहीं था जो किसी टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा हो।

30. ‘कोरोना एक्सप्रेस’ का भ्रामक बयान
कोरोना के समय ममता बनर्जी ने प्रवासी मजदूरों को वापस लाने वाली ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेनों’ को ‘कोरोना एक्सप्रेस’ बताकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि इन ट्रेनों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और एक-एक सीट पर दो-तीन लोगों को बैठाया जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा है। भारतीय रेलवे के आंकड़ों और गाइडलाइंस ने उनके इस दावे को ‘फेक न्यूज’ करार दिया। नियमों के मुताबिक ये ट्रेनें 90 प्रतिशत क्षमता और मिडिल बर्थ खाली रखकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ चलाई जा रही थीं। राजनीतिक विरोध के चलते एक जनहित सेवा को ‘कोरोना एक्सप्रेस’ का नाम देने पर ममता बनर्जी को न सिर्फ रेलवे बल्कि आम जनता की आलोचना का भी सामना करना पड़ा। ममता बाद में अपने बयान से पलट गई।

 

 

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