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CJP प्रदर्शनकारी- देश को नेपाल बना देंगे, नेपाली युवक- हमें मोदी जैसा नेता चाहिए!

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देश में छात्रों के नाम पर चल रहे तथाकथित आंदोलनों के पीछे एक बेहद खतरनाक और राष्ट्रविरोधी साजिश का खुलासा हुआ है। CJP और उसके समर्थक छात्र हित की आड़ में भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी हिंसा, अराजकता और ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) का एजेंडा चला रहे हैं। एक तरफ CJP प्रदर्शनकारी सड़को पर उतरकर “देश को नेपाल बना देंगे” की हिंसक धमकियाँ दे रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ खुद नेपाल का आम युवक चीख-चीख कर कह रहा है कि “हमें मोदी जैसा नेता चाहिए।” ये प्रदर्शनकारी कतई छात्र नहीं हैं, बल्कि विदेशी ताकतों और अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर नाचने वाले देशविरोधी तत्व हैं। इनका मकसद युवाओं के भविष्य की चिंता करना नहीं, बल्कि देश में दंगा-फसाद फैलाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त करना है।

संसद उखाड़ने और नेपाल बनाने की सीधी धमकी
CJP समर्थकों की आड़ में छिपे अराजक तत्वों की नीयत अब देश के सामने आ चुकी है। आंदोलन की आड़ में खुलेआम “संसद भवन उखाड़ देंगे, इसे नेपाल बना देंगे” जैसे भड़काऊ नारे लगाए जा रहे हैं। लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना और इस्तीफा माँगना एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन अगर विरोध के नाम पर भारत की संसद को चुनौती दी जाएगी और देश को नेपाल जैसा अराजक बनाने की धमकी दी जाएगी, तो इसे राष्ट्रद्रोही साजिश के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता।

बांग्लादेश जैसी हिंसा की धमकी और फुल-स्केल वॉयलेंस की साजिश
आंदोलन के नाम पर ज़हर उगलने वालों की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी है कि कश्मीरी ओवैस जैसे कट्टरपंथी अब भारत को बांग्लादेश जैसी भीषण हिंसा में झोंकने की धमकियाँ दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेकर सीधी चुनौती दी जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या ये उपद्रवी देश में ‘फुल स्केल वॉयलेंस’ भड़काने का ताना-बाना बुन रहे हैं? देश की शांति भंग करने की यह कोशिश युवाओं का आंदोलन नहीं, बल्कि गहरी राष्ट्रविरोधी साजिश है।

पत्थरों से हमला करने वाले देशप्रेमी छात्र नहीं हो सकते
सड़कों पर सरेआम पत्थर उठाते और हिंसा फैलाते युवाओं को देखकर कोई भी कह सकता है कि ये NEET या किसी परीक्षा की तैयारी करने वाले देशप्रेमी छात्र तो बिल्कुल नहीं हो सकते। जो वास्तविक छात्र हैं, वे दिन-रात मेहनत करके अपने और देश के सपनों को साकार कर रहे हैं। हिंसा और उपद्रव देखकर जश्न मनाने वाले अराजक तत्वों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के करोड़ों देशभक्त युवा अपनी आँखों के सामने देश को नेपाल या बांग्लादेश नहीं बनने देंगे। अगर यह गुंडागर्दी यूँ ही चलती रही, तो देशप्रेमी युवा भी इन देशविरोधियों को जवाब देने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

बांग्लादेश की ‘रिजीम चेंज’ प्लेबुक का भारत में कॉपी-पेस्ट
भारत में सत्ता परिवर्तन कराने के लिए ठीक वही मॉडल लागू किया जा रहा है जो बांग्लादेश में इस्तेमाल हुआ था। छात्रों को ढाल बनाया गया और गैर-राजनीतिक चेहरों को आगे रखकर हिंसा भड़काई गई ताकि बाद में खुद को ‘विक्टिम’ (पीड़ित) दिखाया जा सके। बांग्लादेश में जहाँ ‘जमात-ए-इस्लामी’ ने फुट सोल्जर की भूमिका निभाई थी, वहीं भारत में नीले झंडे थामे अराजक तत्व हिंसा और दंगे फैलाते नज़र आ रहे हैं। यह 5 रणनीतियों पर आधारित पूरी तरह से प्री-प्लान्ड साजिश है।

खालिस्तानी गुटों की एंट्री और विपक्ष की साजिश
भारत में शांति और सौहार्द को आग लगाने के इस खेल में अब खालिस्तानी तत्व भी दंगा करने उतर आए हैं। पूरा विपक्ष और उनके समर्थक मिलकर भारत में नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं। देश विरोधी ताकतों और राजनीतिक दलों की यह जुगलबंदी साफ दर्शाती है कि इनका मकसद छात्रों के मुद्दे सुलझाना नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता पर हमला करना है।

इंस्टाग्राम रील से खुली साजिश: दीवारें तोड़कर जुटाए गए पत्थर
सलमान नामक शख्स की एक इंस्टाग्राम रील ने इस कथित ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ का सारा सच बेनकाब कर दिया। जंतर-मंतर की दीवारों को तोड़कर पत्थर इकट्ठा किए गए और फिर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल किया गया। पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ मचाने के बाद योजनाबद्ध तरीके से “नेपाल जैसे हालात” का फर्जी नैरेटिव सोशल मीडिया पर वायरल कराया गया।

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ का ढोंग: “आग लगा दो, नेपाल बना दो” के नारे
राहुल गांधी और विपक्ष के नेता जिस आंदोलन को ‘शांतिपूर्ण’ बताकर समर्थन दे रहे थे, उसकी असलियत बेहद भयानक है। प्रदर्शनकारी पुलिस जवानों पर पत्थर और चप्पलें फेंक रहे हैं और चिल्ला रहे हैं— “नेपाल बना दो भाई, आग लगा दो।” सुरक्षाबलों पर पथराव और हिंसा करना क्या यही विपक्ष का ‘पीसफुल प्रोटेस्ट’ है? यह शांति नहीं, बल्कि देश को सुलगाने की सीधी साजिश है।

“आर या पार”: भारत को दंगे में झोंकने की खुली धमकी
आंदोलनकारियों द्वारा खुलेआम “आर या पार” की लड़ाई लड़ने और “नेपाल बना देंगे” की धमकियाँ दी जा रही हैं। यह कोई अधिकार माँगने की भाषा नहीं, बल्कि राष्ट्र को ब्लैकमेल करने का तरीका है। देश को अस्थिर करने के लिए हर सीमा पार की जा रही है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

क्या भारत को नेपाल मॉडल चाहिए? देश के लिए गंभीर चेतावनी
नेपाल में हुए ‘जन-जी’ (Gen-Z) हिंसक उपद्रव के मॉडल को भारत में कॉपी करने की कोशिश देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जो लोग नेपाल के हालात से प्रेरणा लेकर भारत की सड़कों को रक्तरंजित करना चाहते हैं, वे भारत के लोकतंत्र और विकास को गर्त में ढकेलने का एजेंडा चला रहे हैं।

टुकड़े-टुकड़े गैंग का असली एजेंडा: आर्टिकल 370 से लेकर रिजीम चेंज
संसद तक निकाले गए तथाकथित ‘पीस मार्च’ के दौरान वही सब हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी। पुलिसकर्मियों से मारपीट, पथराव, और “नेपाल बना देंगे” के हिंसक नारों के बीच जंतर-मंतर पर ‘ब्रेक इंडिया गैंग’ (टुकड़े-टुकड़े गैंग) पूरी तरह हावी दिखा। इस पूरे प्रदर्शन में किसी को पेपर लीक या छात्रों की चिंता नहीं थी, बल्कि आर्टिकल 370 की वापसी से लेकर ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता बदलने) की बातें हो रही थीं। इस्तीफा माँगना तो बस इस दंगे का लाइसेंस हासिल करने का बहाना मात्र था।

नेपाल के लोग चाहते हैं मोदी जैसा नेता और भारत के उपद्रवी दे रहे धमकी
एक तरफ भारत के ये उपद्रवी और उपदेश देने वाले तत्व “नेपाल बना देंगे” का घटिया नैरेटिव चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद नेपाल के नागरिक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे सशक्त और मजबूत नेतृत्व की कामना कर रहे हैं। यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि देश में अराजकता फैलाने की कोशिश करने वाले यह उपद्रवी जमीनी हकीकत से कितने कटे हुए हैं और सिर्फ विदेशी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं।

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