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Exposed: राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ बन रही ‘झूठे दावों की गूंज’

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कहावत है कि झूठ के पांव नहीं होते, लेकिन राजनीति में झूठ की उम्र तब और छोटी हो जाती है, जब सामने आंकड़े, दस्तावेज और तथ्यों की पड़ताल पर कई पैनी निगाहें लगी हों। राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इसी कसौटी पर अब कई असहज सवालों के घेरे में है। छात्रों और युवाओं के बीच जाकर उनसे जुड़े मुद्दे उठाना और बात है, लेकिन सवाल तब उठता है जब इन मुद्दों को धार देने के लिए इस्तेमाल किए गए आंकड़े ही कठघरे में खड़े हो जाएं। कोटा से शुरू हुई यह श्रृंखला देहरादून, प्रयागराज और पुणे तक पहुंची है। इन चार कार्यक्रमों में ही किए गए 40 दावों में तो झूठ की पोल खुल गई है। राहुल के इन दावों को सही और अकाट्य तथ्यों की रोशनी में परखा गया। गहन पड़ताल में 29 दावे बिल्कुल गलत और 11 दावे Gen Z को भ्रम में डालने वाले निकले। यही वह बिंदु है जहां राहुल गांधी के कमजोर भाषण और गलत फेक्ट्स के बीच झूठ बेबस खड़ा नजर आता है। मोदी सरकार के खिलाफ नैगेटिव नैरेटिव सेट करने निकले राहुल गांधी ने झूठे दावों से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

 

GenZ को राहुल ने कोटा, देहरादून, प्रयागराज,पुणे में झूठ परोसा
झूठ पर झूठ बोल रहे राहुल गांधी को शायद समझ नहीं आ रहा है कि आज युवा कितने बदल गए हैं। आज का युवा केवल भाषण सुनकर संतुष्ट होने वाला नहीं है। वह गूगल करता है। सरकारी वेबसाइट खोलता है। रिपोर्ट तलाशता है और सोशल मीडिया पर दावों की सच्चाई जांचकर तुलना करता है। राहलु के चार कार्यक्रमों के 40 दावों की पड़ताल को लेकर ‘झूठ की गूंज’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म सामने आया। मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि राहुल गांधी ने इन कार्यक्रमों में रोजगार, सरकारी भर्ती, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर दावे किए थे। देहरादून में उन्होंने NTA और विश्वविद्यालयों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने की बात कही, जबकि प्रयागराज में बेरोजगारी, भर्ती में देरी और पेपर लीक को प्रमुख मुद्दा बनाया। हालांकि चारों जगहों पर कई दावों को रिपीट भी किया। लेकिन किसी नेता के भाषण में उठाए गए गंभीर सवालों और उन्हें साबित करने के लिए पेश किए गए आंकड़ों में फर्क होता है। यही फर्क अब राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पर सवालिया निशान लगा रहा है।

आइए, जानते हैं कि छात्रों की गूंज कार्यक्रमों में क्या दावे किए गए और  पड़ताल में राहुल गांधी के दावों की धज्जियां कैसे उड़ीं….

दावा नंबर 1:
कोटा में 17 जून 2026 को हुए कार्यक्रम में कहा कि करीब 3000 बेहतरीन छात्रों की भीड़ में सिर्फ 1 IAS, 30 IIT और 180 डॉक्टर बन पाएंगे।
हकीकत – आंकड़ों के मुताबिक सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। असली तर्क यह है कि IAS, IIT और NEET के उम्मीदवारों के अलग-अलग applicant pools हैं। तीनों को एक ही 3,000 की भीड़ से जोड़ना ना तो सांख्यिकीय रूप से उचित नहीं और न ही इसे तार्किक रूप से ठीक ठहराया जा सकता है। फैक्ट्स यह हैं कि 2025 में ही IIT में 18,188 सीटें allotted हुईं हैं। इसके अलावा MBBS सीटें 2014 से 51,348 से बढ़कर 1,39,864 हुईं हैं।दावा नंबर 2:
राहुल के मुताबिक 1,000 बच्चे सिस्टम में आए तो केवल 36 को परमानेंट जॉब मिलेगी, 300 बेरोजगार रहेंगे और 700 गिग वर्कर्स बनेंगे।
हकीकत – 36+300+700 = 1,036, यानी राहुल गांधी का गणित ही 1,000 से बाहर चला जाता है। पीरिओडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) पर आधारित विश्लेषण बताता है कि 15 से 29 वर्ष के ग्रेजुएट्स में 26 प्रतिशत से अधिक रेगुलर सेलरी जॉब्स में हैं। मात्र 4.2 प्रतिशत ही बेरोजगार हैं।

दावा नंबर 3:
करीब 22 लाख NEET विद्यार्थी हर साल परिवारों से 1.32 लाख करोड़ रुपए दिलवाते हैं और यह रकम केंद्र के पूरे एजुकेशन बजट के बराबर है।
हकीकत – वास्तविकता यह है कि 1.32 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पूरे कोचिंग इंडस्ट्री के भविष्य के अनुमान से लिया गया है। सिर्फ NEET विद्यार्थियों से वसूली नहीं है और इसमें इंजीनियरिंग के साथ-साथ विभिन्न जॉब्स की परीक्षाओं की कोचिंग भी शामिल है। इसके साथ ही केंद्र के शिक्षा बजट को राज्यों के शिक्षा खर्च से अलग करके तुलना की गई है।

दावा नंबर 4:
भारत के करीब 80 प्रतिशत इंजीनियर बेरोजगार हैं।
हकीकत – यह पूरी तरह गलत आंकड़ा है। असल में 80 प्रतिशत का फिगर उस study का हिस्सा है, जिसमें कहा गया है कि वह “unemployable for certain knowledge-economy roles” है, unemployed नहीं। यानी skill-gap को बेरोजगारी में बदलकर युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की गई।

दावा नंबर 5:
भारत में paper leaks में conviction rate बिल्कुल zero है। किसी बड़े आरोपी को जेल ही नहीं हुई है।
हकीकत – देहरादून में 17 जुलाई 2026 को किया गया दावा बिल्कुल गलत है। जनवरी 2024 के CBI court मामले का उदाहरण सामने है, जिसमें दस आरोपियों को पांच वर्ष की rigorous imprisonment हुई, उनमें Railway Recruitment Board के पूर्व chairman भी शामिल थे। इसके अलावा कांग्रेस की गहलोत सरकार में हुए पेपर लीक्स के कई आरोपी इस समय जेल की हवा खा रहे हैं।

दावा नंबर 6:
Manufacturing, entrepreneurship, corporate employment और public sector बंद हैं। केवल सरकारी नौकरियां ही बची हैं।
हकीकत –  देश में manufacturing में 7.45 करोड़, self-employment में 34.62 करोड़ और regular salaried work में 14.54 करोड़ लोग कार्यरत हैं। राहुल गांधी ने पूरी तरह से मनगढ़ंत दावे किए हैं और असली फेक्ट्स से जान बूझकर आंखें मूंद ली हैं।

दावा नंबर 7:
छात्रों के हाथों में फोन और उनके शरीर पर पहनी शर्ट्स सभी चीन से आते हैं।
हकीकत – सभी जानते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile-phone manufacturer और net exporter बना है। 2025 में smartphones भारत का सबसे बड़ा export commodity बने हैं। गारमेंट्स यानी Ready-Made Garments (RMG) की बात करें तो भारत का वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपए, यानी करीब US$16.0 billion रहा है। यह 2024-25 के लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपए निर्यात से करीब 2.9 प्रतिशत अधिक ही है।

दावा नंबर 8:
भारत में 3, 4, 5 बड़े कारोबारियों ने ही banking money कब्जे में कर लिया है और आम entrepreneurs को loan नहीं मिलता है।
हकीकत – मोदी सरकार के राज में महिलाओं से लेकर युवाओं और गरीबों से लेकर रेहड़ी-पटरी वालों तक के लिए लोन की कई योजनाओं चल रही हैं। मार्च 2026 में scheduled commercial banks का कुल credit 212.9 लाख करोड़ रुपए था और micro/small industry credit में 33.1 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है।

दावा नंबर 9:
AI ने IT jobs को इतना नुकसान पहुंचाया है कि corporate employment का दरवाजा बंद हो गया है।
हकीकत – Nomura analysis बताता है कि AI से प्रभावित क्षेत्र में नए-नए jobs बन भी रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी के इस दौर में नए जॉब रोल्स की बात करें तो AI services, cloud engineering, cybersecurity आदि नए क्षेत्र उभर रहे हैं। एआई जाब्स लेने से ज्यादा कॉरपोरेट कल्चर में युवाओं को टेक्नोलॉजी में और दक्ष बना रहा है।

दावा नंबर 10:
Privatizations ने युवाओं के लिए public-sector employment का रास्ता बंद कर दिया है।
हकीकत – यह दावा भी पूरी तरह से मिथ्या है। FY25 में CPSEs में करीब 15.42 लाख कर्मचारी थे और Rozgar Melas के जरिए लगभग 12 लाख नए एपोइंटमेंट लेटर जारी किए गए हैं। रोजगार मेलों के अलावा पीएम इंटर्न योजना , प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना ने भी युवाओं को पब्लिक सेक्टर में जॉब के नए दरवाजे खोले हैं।दावा नंबर 11:
Coaching centres, translators, printers, transporters, vendors, NTA और ministry officials मिलकर एक ही paper-leak structure चलाते हैं।
हकीकत – 1956 से लेकर 2014 तक का इतिहास इस बात का साक्षी है कि केंद्र में कांग्रेस राज के दौरान विभिन्न स्तरों की बोर्ड परीक्षाओं, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रशासनिक सेवाओं और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं तक के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। अलग-अलग स्तरों पर कुछ गड़बड़ियां हुई हैं, लेकिन इससे सभी संस्थाओं के एक coordinated criminal network होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।

दावा नंबर 12:
भारत 19वीं सदी की examination system इस्तेमाल करता है।
हकीकत – वास्तव में 2019 से मार्च 2026 तक NTA ने 275 से ज्यादा examination cycles कराए, जिनमें computer-based testing, biometric verification और encrypted transmission जैसी व्यवस्थाएं थीं। हमारी नई शिक्षा नीति ने एक्जाम पैटर्न को भी बदला है।

दावा नंबर 13:
भारत में हर परीक्षा एक ही दिन होती है। randomization से कई दिनों में परीक्षा हो सकती है।
हकीकत – राहुल के दावे की पोल खोलने के लिए  SSC CGL 2025 का उदाहरण ही काफी है। इसमें 45 shifts और 15 examination days हैं। इसके अलावा Railway NTPC की 19 दिनों में हुई परीक्षा भी राहुल के दावे की पोल खोलती है। 

दावा नंबर 14:
Competitive examinations की तैयारी में aspirants पांच साल में 9 लाख रुपए खर्च करते हैं।
हकीकत – प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर ऐसा कोई official national average उपलब्ध नहीं है। खर्च परीक्षा, शहर, coaching mode और तैयारी की अवधि के अनुसार बहुत बदलता रहता है। इससे साफ पता चलता है कि राहुल गांधी का यह फेक्ट भी मनगढ़ंत ही है।

दावा नंबर 15:
Competitive exams की तैयारी करने वाले 99 प्रतिशत उम्मीदवार गरीब या middle-class परिवारों से आते हैं।
हकीकत – Competitive exams हर वर्ग, जाति, अमीर-गरीब के लिए ओपन हैं। सभी प्रतियोगी परीक्षाएं देते हैं। वरिष्ठ अफसरों के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाएं देकर अधिकारी बने हैं, इसके हजारों उदाहरण हैं। ऐसा कोई official dataset नहीं है जो aspirants को poor/middle class में बांटकर 99 प्रतिशत का आंकड़ा देता हो।दावा नंबर 16:
देश में 9 करोड़ लोग government exams की तैयारी करते हैं और 6 लाख सफल होते हैं- यानी 150 में एक को नौकरी मिलती है।
हकीकत – वास्तविकता यह है कि 9 करोड़ का आंकड़ा unique individuals नहीं, बल्कि अलग-अलग परीक्षाओं के applications हो सकते हैं। राहुल गांधी और उनके सलाहकारों को शायद यह नहीं पता कि एक व्यक्ति कई-कई परीक्षाओं में आवेदन करता है। ऐसे में उनका मैथमैटिक्स फेल हो जाता है।

दावा नंबर 17:
पिछले दस वर्षों में paper leaks ने 7.5 करोड़ छात्रों को प्रभावित किया है।
हकीकत – पेपर लीक की बात करते समय राहुल गांधी राज्यों में कांग्रेस सरकार के दौर में हुए पेपर लीक को भूल जाते हैं। पिछले एक दशक में यदि किसी एक राज्य में सर्वाधिक पेपर लीक हुए हैं, तो वह राजस्थान की गहलोत सरकार में हुए हैं। राहुल गांधी 7.5 करोड़ का आंकड़ा किस सोर्स या methodology से लाए हैं, यह उन्होंने खुद ही स्पष्ट नहीं किया। यह तक स्पष्ट नहीं कि affected में उन्होंने किन उम्मीदवारों को शामिल किया है।

दावा नंबर 18:
Demonetization और GST ने manufacturing को खत्म कर दिया। China, Vietnam का Made-in-country दिखता है, Made-in-India नहीं।
हकीकत – प्रयागराज में 8 अगस्त 2026 को किए गए फर्जी दावे की पोल मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया अभियान Make in India पूरी तरह से खोलता है। फेक्ट्स में बात करें तो electronics production 2014-15 के करीब 1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपए हुआ। इसी तरह  mobile-phone exports, Defense Export समेत कई सेक्टर में भारी वृद्धि हुई है।

दावा नंबर 19:
करीब 90 प्रतिशत small और medium businesses को bank loans नहीं मिलते।
हकीकत – यह बिल्कुल निराधार दावा है। MSME bank lending 8.5 लाख करोड़ से बढ़कर 27.3 लाख करोड़ रुपए हुई है और MUDRA के जरिए 57.79 करोड़ रुपए के loans sanctioned हुए हैं।

दावा नंबर 20:
देशभर में Entrepreneurship खत्म हो चुकी है।
हकीकत – पिछले 10 वर्षों में भारत में उद्यमिता (Entrepreneurship) में अभूतपूर्व उछाल आया है, जिससे देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। साल 2014 में देश में केवल 350 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स और 4 यूनिकॉर्न थे, वहीं अगस्त 2026 तक DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 2.23 लाख से अधिक और यूनिकॉर्न की संख्या 125 के पार पहुंच चुकी है। इस क्रांति ने देश में 23 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन किया है, जिसमें सबसे खास बात यह है कि लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप्स Tier-2 और Tier-3 शहरों से उभर रहे हैं और कुल स्टार्टअप्स में से करीब 48 प्रतिशत में महिला निदेशक शामिल हैं।दावा नंबर 21:
देशभर में 150 aspirants में केवल 1 को government job मिलती है।
हकीकत – यह युवाओं के लिए Misleading करने वाला दावा है। वेबसाइट के मुताबिक कि applications-per-post के आधार पर competition का ratio निकालना भ्रामक है। इसे 150 अलग-अलग लोगों में केवल एक को नौकरी कहना इसलिए भी गलत है, क्योंकि एक व्यक्ति कई exams में बैठ सकता है। एक व्यक्ति कई एक्जाम पास कर सकता है।

दावा नंबर 22:
Paper leaks ने government recruitment को बुरी तरह जकड़ रखा है।
हकीकत – 2014 से पहले सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से निपटने के लिए कोई विशेष केंद्रीय कानून नहीं था। मोदी सरकार ने पहली बार पेपर लीक के खिलाफ कानून बनाया। 2019 में NTA के तहत JEE मेन परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित कर दिया गया और 2027 तक NEET-UG को भी पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की योजना है। मोदी सरकार परीक्षा व्यवस्था को अधिक कड़ा और जवाबदेह बना रही है। 2026 के एंटी-पेपर-लीक कानून में पेपर लीक या अनुचित साधनों में शामिल लोगों के लिए 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जबकि संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

दावा नंबर 23:
PSU jobs लगभग 14 लाख से घटकर 7 लाख रह गए हैं।
हकीकत – इस दावे की वास्तविकता यह है कि मोदी सरकार आने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। 2014 से PSUs को मजबूत किया गया है। इनमें regular employees और contractual/casual workers अलग हो सकते हैं। SBI का मार्केट कैप FY16 के 1.51 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मुनाफा कमाने वाली केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (CPSEs) की संख्या FY15 के 157 से बढ़कर FY25 में 227 हो गई, जबकि घाटे में चलने वाली कंपनियां 77 से घटकर 63 रह गईं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा भी 2014 के 36,270 करोड़ रुपये से बढ़कर FY2025-26 में रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया है और वे लगातार चौथे वर्ष मुनाफे में रहे हैं।

दावा नंबर 24:
देश में Public schools, hospitals, BSNL, ports और airports का privatisation हो चुका है।
हकीकत – देश में निजीकरण की शुरुआत प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में हुआ। उन्हीं के राज में पहली बार सरकारी कंपनियों में मुख्यतः अल्पांश हिस्सेदारी बेची गई थी। स्कूल और हॉस्पीटल का प्राइवेटाइजेशन भी पहले से ही है। राहुल गांधी ने भ्रामक जानकारी दी है। उदाहरण के तौर पर Parliamentary Committee ने साफ तौर पर कहा कि BSNL अभी भी 100 प्रतिशत Government of India-owned PSU है।

दावा नंबर 25:
AI traditional corporate और back-office jobs खत्म कर रहा है।
हकीकत – दरअसल, routine/back-office work का automation हो रहा है, लेकिन jobs खत्म कहना transition और नए roles को नजरअंदाज करना है। Nomura analysis का हवाला देते हुए कहा कि AI से प्रभावित क्षेत्र में नए-नए jobs बन भी रहे हैं। एआई जाब्स लेने से ज्यादा कॉरपोरेट कल्चर में युवाओं को टेक्नोलॉजी में और दक्ष बना रहा है।दावा नंबर 26:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 60 प्रतिशत जॉब्स खत्म कर देगा।
हकीकत – यह दावा निराधार और फेक्ट्स से परे है। वेबसाइट के अनुसार IMF का 60 प्रतिशत आंकड़ा AI exposure का है, यानी jobs जिनके tasks AI से प्रभावित हो सकते हैं; इसका अर्थ 60 प्रतिशत jobs का समाप्त होना नहीं है, बल्कि इनमें एआई स्किल वाले युवाओं के लिए नई-नई संभावनाएं बनेंगी।

दावा नंबर 27:

भारतीय युवा रोज 8 घंटे Reels देखते हैं।
हकीकत – राहुल गांधी के इस दावे का कोई स्पष्ट source नहीं दिया गया है। screen time, internet use, smartphone use, social-media use तथा Reels viewing को एक ही चीज मान लिया गया है।

दावा नंबर 28:
कंपनियां युवाओं का data लेकर उसी data की मदद से उनकी jobs AI से replace करती हैं।
हकीकत – वेबसाइट के अनुसार दो अलग-अलग बातों- companies data collect करती हैं और AI कुछ jobs automate करता है। इसको जोड़कर एक causal conclusion बनाया गया है, जिसका प्रमाण नहीं दिया गया है।

दावा नंबर 29:
हर institution में एक RSS Pracharak है।
हकीकत –राहुल गांधी के सबसे ज्यादा मनगढ़ंत दावों में से यह एक है। वे खिसयानी बिल्ली की तरह जब-तब आरएसएस पर निशाना साधते रहते हैं, लेकिन आधारहीन आरोपों के कारण कभी इनका असर नहीं हुआ है। राहुल ने आरएसएस विरोध के इस अभियान में “हर संस्था” एक universal claim की तरह है। इसकी कोई सूची, नाम, संख्या, नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड या इसे साबित करने की कोई कार्यप्रणाली नहीं दी गई है। बिना प्रमाण के किसी आरोप को पुख्ता तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

दावा नंबर 30:
हर साल करीब 4 लाख बच्चियां जन्म से पहले मार दी जाती हैं।
हकीकत – पुणे में 22 अगस्त 2026 को किया यह दावा फिर से युवाओं को भ्रमित करने वाला है। लगभग 4.6 लाख का estimate वास्तविक UNFPA estimate से आता है, लेकिन वह 2013–17 के पुराने आंकड़ों पर आधारित है और आज की स्थिति बताने के लिए उसे वर्तमान आंकड़े की तरह पेश करना भ्रामक है।दावा नंबर 31:
देश में 80 प्रतिशत महिलाएं harassment का सामना करती हैं।
हकीकत – राजस्थान में जब कांग्रेस की सरकार थी तो यह राज्य देशभर में महिलाओं के रेप के मामले में नंबर वन था। इस पर भाजपा द्वारा सवाल करने पर तब के संसदीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति धारीवाल ने बेशर्मी से कहा था- क्या करें राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश है। एक बात और 79 प्रतिशत वाला आंकड़ा 2016 के एक छोटे से survey में 502 महिलाओं से आया था। इसे अब एक दशक के बाद पूरे भारत की महिलाओं का वर्तमान national figure बताना कैसे जायज ठहराया जा सकता है।

दावा नंबर 32:
करीब 29-30 प्रतिशत महिलाएं physical violence का सामना करती हैं।
हकीकत – पुराने फेक्ट्स पर झूठ की इमारत बनाना विपक्ष और राहुल गांधी का पसंदीदा शौक रहा है। बता दें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) का आयोजन वर्ष 2019 से 2021 के बीच दो चरणों में किया गया था। 29.3% का आंकड़ा NFHS-5 का ही है। नवीन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में comparable figure घटकर 22.3 प्रतिशत रह गया है, लेकिन राहुल गांधी और उनके सलाहकारों को यह नजर नहीं आता।

दावा नंबर 33:
भारत में हर 100 में 6 महिलाओं के साथ rape होता है।
हकीकत – सबसे पहले, राहुल गांधी के बताए गए 100 में से 6 आंकड़े का कोई स्रोत ही स्पष्ट नहीं है। उन्हें बताना चाहिए कि यह आंकड़ा कहां से आया, क्योंकि नवीनतम NCRB आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते। मई 2026 में जारी NCRB की Crime in India 2024 रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देशभर में बलात्कार के 29,536 मामले दर्ज हुए। इनमें 28,950 पीड़ित वयस्क (18 वर्ष या उससे अधिक) थे, जबकि 784 पीड़ित 18 वर्ष से कम उम्र के थे। NCRB के 2024 के आंकड़ों के अनुसार बलात्कार की दर प्रति एक लाख महिलाओं पर लगभग 4.3 मामले है, न कि 100 महिलाओं में 6 है। राहुल गांधी का रेप से संबंधित फेक्ट वास्तविकता से एकदम परे है।

दावा नंबर 34:
देश में 50 प्रतिशत महिलाएं safety concerns के कारण work/education छोड़ती हैं। महिलाएं सेफ्टी पर 17,000 अतिरिक्त खर्च करती है।
हकीकत – राहुल गांधी के यह दोनों ही आंकड़े भ्रामक हैं। दरअसल, इसके पीछे जिस ORF–Youth Ki Awaaz के 2021 के सर्वेक्षण Women on the Move: The Impact of Safety Concerns on Women’s Mobility का इस्तेमाल किया गया है, उसमें दिसंबर 2019 से सितंबर 2020 के बीच भारत के 140 शहरों की मात्र 4,262 महिलाओं को शामिल किया गया था। यह सर्वेक्षण पूरे देश की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वे नहीं था। इसमें ग्रामीण महिलाओं का समान प्रतिनिधित्व नहीं था। इसलिए इसके निष्कर्षों को भारत की सभी महिलाओं की स्थिति बताना एकदम गलत है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि राहुल गांधी इस दावे को UPA के दौर के संदर्भ में नहीं देखते हैं। PHD Chamber of Commerce and Industry की 2014 की रिपोर्ट Women Safety in Delhi: A Study में पाया गया था कि कामकाजी महिलाओं में 64 प्रतिशत ने कहा था कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों का उनकी उत्पादकता पर असर पड़ा, क्योंकि वे देर तक अपने कार्यस्थल पर रुकने में हिचकिचाती थीं।

दावा नंबर 35:
देश की 60 प्रतिशत लड़कियां अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं।
हकीकत – राहुल गांधी देर रात तक शहरों में सड़कों पर घूमने वाली जैन जी को उसके ही झूठ से भरमा रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का मूल सवाल तीन खास जगहों, market, health facility और village/community से बाहर अकेले जाने की अनुमति पर है। इसे सामान्य “घर से बाहर नहीं जा सकतीं” में बदलना इसके अर्थ पूरी तरह से बदल देता है।

दावा नंबर 36:
भारत में 45 प्रतिशत लड़कियां marriage या housework के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं।
हकीकत – आज नारी शक्ति स्टार्टअप से लेकर स्पेस तक, खेत से लेकर चिप बनाने तक और घर से लेकर कंपनियों को संभालने में नित-नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। UDISE के मुताबिक 2025-26 में girls’ secondary dropout rate केवल 8 प्रतिशत था। ऐसे में 45 प्रतिशत कोई current official measure नहीं है।

दावा नंबर 37:
केवल 8 प्रतिशत महिलाओं के पास independently owned property है।
हकीकत – दरअसल, 8.3 प्रतिशत वाला आंकड़ा 15-49 वर्ष की उन महिलाओं का है, जो अकेले land own करती हैं। Joint property या broader household property ownership को जोड़ने पर आंकड़ा अलग है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में 18.8 प्रतिशत का broader measure बताती है।

दावा नंबर 38:
अभी 15-29 साल की औसत महिला रोज 5.5 घंटे घर का काम करती है, जबकि लड़का केवल 30 मिनट काम करता है।
हकीकत – पुणे में राहुल गांधी ने मिसलीड करने वाले दावे ही ज्यादा किए हैं। unpaid domestic work में कुछ gender gap है, लेकिन राहुल गांधी ने 5.5 घंटे बनाम 30 मिनट आंकड़ों का कोई स्पष्ट named time-use source नहीं दिया है।

दावा नंबर 39:
Sexual violence, rape और molestation के 99 प्रतिशत मामले report ही नहीं होते।
हकीकत – वास्तविकता यह है कि 99 प्रतिशत वाला आंकड़ा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के पुराने data की एक media analysis से आया था। अब कोई official government estimate नहीं है और उसमें rape, molestation और अन्य sexual offences को अलग-अलग नहीं किया गया है।

दावा नंबर 40:
लड़के age limit के बाद भी कई बार exam दे सकते हैं, लेकिन महिलाओं की marriage age 23 है।
हकीकत – राहुल गांधी का एक और स्पष्ट रूप से भ्रामक दावा। महिलाओं के लिए 23 वर्ष की कोई कानूनी विवाह आयु नहीं है। मोदी सरकार से पहले लागू कानून के अनुसार महिलाओं की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और पुरुषों की 21 वर्ष थी। UPA सरकार के दौरान बनाए गए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में भी यही अंतर बरकरार रखा गया था। दूसरे शब्दों में, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के समय के कानून में भी पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु अलग-अलग थी। पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष। मोदी सरकार ने इस अंतर को खत्म करने की पहल की। बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 में महिलाओं की न्यूनतम विवाह आयु 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया था, ताकि यह पुरुषों के बराबर हो जाए। इसलिए राहुल गांधी का बयान दो स्तरों पर भ्रामक है। पहला, महिलाओं की विवाह आयु 23 वर्ष नहीं है। दूसरा, जिस UPA सरकार का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उसके समय कानून में महिलाओं और पुरुषों की विवाह आयु 18 और 21 वर्ष अलग-अलग थी, जबकि मोदी सरकार ने दोनों के लिए कानूनी आयु 21 वर्ष करने का प्रस्ताव किया।

 

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