प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पड़ोस पहले’ (Neighbourhood First) नीति भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसका उद्देश्य अपने निकटतम पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और संकट के समय ‘पड़ोसी धर्म’ निभाना है। जब-जब पड़ोसी देशों में बाढ़, भूकंप या आर्थिक संकट आया, भारत ने बिना किसी स्वार्थ के ‘पड़ोसी धर्म’ निभाते हुए सबसे पहले चिकित्सा, राहत सामग्री और वित्तीय मदद पहुंचाई। हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से भारी जान और माल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर संकटमोचक बनकर आपदा प्रभावित पड़ोसी देश नेपाल की सहायता की है। भयंकर बाढ़ आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से टेलीफोन पर बात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में, भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं।
प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहसँग कुराकानी गरेँ र नेपालमा आएको बाढीका कारण ज्यान गुमाउनेहरूप्रति समवेदना व्यक्त गरेँ। यस कठिन समयमा भारतका जनता नेपालका आफ्ना दिदीबहिनी तथा दाजुभाइहरूसँग ऐक्यबद्ध भई साथै उभिएका छन्।
भारत नेपाललाई सम्भव भएसम्मका सबै प्रकारका मानवीय सहायता उपलब्ध…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
हिमस्खलन और बाढ़ से 919 लोगों की मौत, 4,200 से ज्यादा लापता
दरअसल, 26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमखंड के ढहने से हिमस्खलन हुआ, जिससे पानी, कीचड़ और मलबा तेजी से बह निकला। इससे तिब्बत (चीन) की भोटेकोशी नदी और नेपाल की त्रिशूली नदी में अचानक विनाशकारी बाढ़ आ गई। बुधवार को इसने कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और मध्य नेपाल में पनबिजली संयंत्रों को बहा ले गया। इस बाढ़ में अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले नेपाल में 903 मौतें हुई हैं, जबिक तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। 4,200 से ज्यादा लोग लापता हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 भारतीय नागरिक लापता हैं और अन्य देशों की नागरिकता वाले लगभग 128 भारतीय मूल के लोग भी लापता हैं।
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का एक और खौफनाक मंजर सामने आया है। तेज बहाव में कई घर देखते ही देखते तबाह हो गए। pic.twitter.com/0NbIfgJPMq
— Anjali Kumari (@AnjaliKumari009) August 28, 2026
संकट में नेपाल की मदद, भेजी गई राहत सामग्री
भारत ने वायुसेना के विमानों के जरिए नेपाल को करीब 68.5 टन राहत सामग्री (दवाइयाँ, खाने के पैकेट, कंबल, टेंट, तिरपाल, प्लास्टिक शीट, स्वच्छता किट (हाइजीन किट), सोलर लैंप, पोर्टेबल जनरेटर, और जल शोधन उपकरण) काठमांडू पहुंचाई है। भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर 30 अगस्त 2026 को काठमांडू पहुंचा। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को कहा कि भारत से राहत सामग्री लेकर चार विमान नेपाल पहुंच चुके हैं।
Standing with Nepal
The 4th flight carrying 11 tonnes of relief assistance landed in Nepal and relief material has been handed over.
It consists of a tunnel technical contingent along with equipment for search & rescue operations; a team of forensics experts for DNA analysis… pic.twitter.com/Ahei0Tmnkd
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 30, 2026
नेपाल पहुंचीं भारतीय विशेषज्ञ टीमें
विशेषज्ञ टीमें: सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने और बचाव कार्यों के लिए भारत ने टनल रेस्क्यू के तकनीकी विशेषज्ञ, रिकवरी/खोज दल, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीकी विशेषज्ञों की विशेष टीमें नेपाल भेजी हैं।
फोरेंसिक सहायता: डीएनए जांच और पहचान के लिए 19 सदस्यीय फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और उपकरण भेजे गए हैं। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू में इस भारतीय फोरेंसिक टीम से मुलाकात की और आपदा की इस घड़ी में नेपाल को हरसंभव सहायता जारी रखने का भरोसा दिया। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि बाढ़ में बरामद 600 से अधिक शवों की पहचान के लिए नेपाल भारत से फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और तेजी से डीएनए जांच में अतिरिक्त मदद की मांग की है।
The 4th flight from 🇮🇳 with 11 tonne assistance is now airborne. The @IAF_MCC C-130 aircraft is carrying:
➡️ A Tunnel technical contingent along with equipment for search & rescue operations.
➡️ A team of Forensics experts for DNA analysis along with Forensic equipment.
➡️… pic.twitter.com/XmUJQQ1muJ
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 29, 2026
बेली ब्रिज व मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में तकनीकी मदद
बाढ़ में टूटे रास्तों और पुलों को ठीक करने के लिए बेली ब्रिज व मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण में भी भारत तकनीकी मदद दे रहा है। 230 फुट लंबे एक लेन वाले मॉड्यूलर स्टील पुल के लिए उपकरण ले जा रहे 16 ट्रक वहां पहुंच चुके हैं। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए 42 बेली पुलों के निर्माण के लिए सहायता मांगी है। गौरतलब है कि बाढ़ और तेज बहाव के कारण बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। कंक्रीट के पुल, बेली ब्रिज और पैदल चलने वाले झूला पुल बह गए हैं। धादिंग और अन्य इलाकों में पुल टूटने और भूस्खलन होने से काठमांडू का सड़क संपर्क कई जगहों पर बाधित हो गया है। स्थानीय प्रशासन, सेना और तकनीकी टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ये कोई फिल्मी सीन नहीं, नेपाल में आई बाढ़ से होने वाली तबाही का नज़ारा है, जो बेहद ख़ौफ़नाक मंजर दिख रहा है,एक के बाद एक पुल टकराकर बह गए। pic.twitter.com/C0X7reumrO
— Ruksar_X (@Ruksar_X) August 26, 2026
नेपाली सेना के साथ मिलकर भारत चला रहा बचाव अभियान
आपदा में त्रिशुली जिल में 11 बिजली पनबिजली परियोजनाओं के प्रभावित होने की सूचना मिली है। इन सभी परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सुरंग में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।भारत की एक विशेष सुरंग खोज और बचाव दल ने रविवार 30 अगस्त को नेपाली सेना के साथ मिलकर नेपाल के चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में आपदा प्रभावित जलविद्युत सुरंग स्थलों पर गहन बचाव अभियान चलाया। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विशेष टीम को स्थानीय अभियानों में एकीकृत कर दिया गया है और वह जमीनी स्तर पर सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर लिखा, “भारत की सुरंग बचाव टीम आज चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में जलविद्युत सुरंग स्थलों पर खोज और बचाव अभियान में नेपाली सेना के साथ शामिल हो गई।”
The tunnel rescue team from India worked with the Nepali Army’s team to conduct search & rescue operations at hydropower tunnel sites in Chilime and Langtang area today. The team will continue to conduct search and rescue operations in close coordination with the Nepali Army.… https://t.co/H4uQnFOtDx
— IndiaInNepal (@IndiaInNepal) August 30, 2026
बाढ़ प्रभावित नेपाल से 149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया
विदेश मंत्रालय ने रविवार (30 अगस्त) को बताया कि बाढ़ प्रभावित नेपाल से 149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नवीनतम जानकारी साझा करते हुए बताया कि 30 अगस्त, 2026 को शाम 5:30 बजे तक 149 भारतीयों को बचा लिया गया था। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और बाढ़ में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए समन्वय प्रयास कर रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल-तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाली सेना द्वारा बचाए गए भारतीय तीर्थयात्रियों के एक समूह से मुलाकात की। जयशंकर ने नेपाल के लिए भारत की व्यापक राहत और बचाव सहायता की समीक्षा भी की, जिसमें मानवीय सामग्री, बेली ब्रिज, संभावित चिकित्सा सहायता और विशेष बचाव दल शामिल हैं। नेपाल में आई आपदा और बाढ़ के मद्देनजर भारत सरकार (विदेश मंत्रालय) और भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
Update on Indian Nationals rescued in Nepal as of 1730 hrs on 30 August, 2026
Indians rescued : 149
Please see names below ⬇️ pic.twitter.com/f5olP2chxa
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 30, 2026
भारत कर रहा नेपाल को राहत पैकेज देने पर विचार
भारत नेपाल को राहत पैकेज देने पर विचार कर रहा है। हालांकि अलग वित्तीय पैकेज की घोषणा अभी नहीं की गई है। नुकसान का पैमाना, पुनर्निर्माण की जरूरत और काठमांडू की मांग साफ होने के बाद ही अगला कदम तय होगा। कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिनके बचाव और पहचान का काम जारी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जरूरत पड़ी तो भारत पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए बड़ा पैकेज भी दे सकता है।

नेपाली वित्त मंत्री ने पीएम मोदी को बताया उदार शख्स, त्वरित मदद के लिए जताया आभार
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संकट के इस समय में त्वरित और उदार सहायता के लिए भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बहुत उदार शख्स बताया। उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने नेपाल की मदद के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। भारत ने पुनर्निर्माण के लिए भी बड़ी सहायता देने के संकेत दिए हैं। नेपाल को इस समय अपने पड़ोसी देशों से सहयोग मिल रहा है। भारत की मदद इसमें खास तौर पर अहम है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने 2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय भारत सरकार ने नेपाल की काफी सहायता की थी। मौजूदा संकट में भी भारत हमारा अहम साथी बना।
#WATCH त्रिशूली(नेपाल): नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने कहा, “उम्मीद है कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स में फंसे दर्जनों लोगों को रेस्क्यू कर लिया जाएगा। कोशिश जारी है। कुछ लोगों के जंगल में भी फंसे होने की आशंका है। 19 पुल बह जाने के कारण कई गांवों से संपर्क कट गया है।… pic.twitter.com/nLUSFJ3wd1
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 29, 2026
2015 का भूकंप : भारत ने ऑपरेशन मैत्री चलाकर की थी नेपाल की मदद
27 अप्रैल, 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। इस बार भी पड़ोसी पहले सिद्धांत के तहत भारत ने सबसे पहले मदद पहुंचाई। भूकंप के वक्त प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के अपने तत्कालीन समकक्ष सुशील कोइराला से फोन पर बात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। नेपाल में भारत के राहत और बचाव कार्यों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नजर बनाए हुए थे और निर्देश दे रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए।

नेपाल में सबसे पहले राहत टीम भेजने वाले देशों में भारत
भारत ने अपने देश के बाहर आपदा के बाद सबसे बड़ा अभियान नेपाल में शुरू किया था। तब भारत ने नेपाल की मदद के लिए ऑपरेशन मैत्री की शुरुआत की थी। 25 अप्रैल को आए भूकंप के चार घंटों के भीतर नेपाल में सबसे पहले अपनी राहत टीम भेजने वाले देशों में भारत ही था। काठमांडू में राहत सामग्री के साथ पहुंचने वाला सबसे पहला विमान भारतीय वायुसेना का ही था। भारत ने 24 घंटों के भीतर 10 राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ), एक आर्मी इंजीनियरिंग कार्यबल और सेना की 18 चिकित्सा इकाइयों को नेपाल के लिए भेजा था। भूकंप से राहत के तौर पर एक अरब डालर की मदद दी गई थी। इसके अलावा दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए भी एक अरब डालर की मदद दी गई थी। नेपाल में जिस तेजी से मदद पहुंचाई गई वो अद्भुत था। भारतीय आपदा प्रबंधन की टीम ने हजारों जानें बचाईं। सबसे खास रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय का नेपाल सरकार से बेहतरीन समन्वय रहा। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

नेपाल भूकंप-बाढ़, कोरोना महामारी समेत ऐसे कितने ही मौके आए, जबकि प्रधानमंत्री मोदी संकटमोचक के रूप में सामने आए…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन की वजह से आज दुनियाभर में भारत का मान बढ़ रहा है। दुनियाभर में बसे भारतीय प्रवासियों को ही नहीं, बल्कि कई देशों को भी भरोसा है कि जब वे किसी संकट में आएंगे, तो भारत सबसे पहले उनकी मदद के लिए आगे आएगा। प्रधानमंत्री मोदी कई बार यह साबित करके दिखा चुके हैं। वे संकटासन्न लोगों की मदद बिना किसी भेदभाव के करते हैं। वो चाहे कोरोनाकाल हो या कहीं कोई प्राकृतिक आपदा आई हो।
ईरान-इजरायल युद्ध : भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता, ईरान ने कहा-दयालु लोगों के प्रति हार्दिक आभार
युद्ध के समय या किसी विकट स्थिति में मानवीय तौर पर दूसरे देशों को मदद करने में भारत हमेशा आगे रहा है। जब ईरान 28 फरवरी,2026 को शुरू हुए अमेरिका-इजराइल के हमलों से जूझ रहा था, उस समय संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान में 1300 से अधिक लोग मारे गए थे और 7,000 से अधिक घायल हुए थे। मार्च 2026 में इजराइल और अमेरिका के हमले के बीच भारत ने ईरान को चिकित्सा सहायता दी थी। भारत में ईरानी दूतावास ने बताया कि यह खेप ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को प्राप्त हुई और उन्होंने भारत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा “भारत के सम्मानित लोगों की ओर से चिकित्सा सहायता की पहली खेप पहुंच गई है। हम भारत के दयालु लोगों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।”
Embassy of the Islamic Republic of Iran in India says, “The first shipment of medical aid from the esteemed people of India has been delivered to the Iranian Red Crescent Society. We sincerely thank the kind people of India.”
(Video source: Embassy of the Islamic Republic of… pic.twitter.com/6LobbWCdmY
— ANI (@ANI) March 18, 2026
फिलिस्तीनी-इजरायल युद्ध : भारत ने फिलिस्तीनी लोगों को भेजी मानवीय सहायता
इससे पहले 19 अक्तूबर,2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से बात की थी और गाजा के अल अहली अस्पताल में नागरिकों की जान जाने पर गहरी संवेदना व्यक्त की थी। टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत फिलिस्तीनी लोगों को मानवीय सहायता भेजना जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने 22 अक्टूबर को जानकारी दी कि भारत ने फिलिस्तीन को मानवीय सहायता भेजी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया, “फिलिस्तीन के लोगों के लिए लगभग 6.5 टन चिकित्सा सहायता और 32 टन आपदा राहत सामग्री लेकर भारतीय वायु सेना का एक सी-17 विमान मिस्र के अल-अरिश हवाई अड्डे के लिए रवाना हुआ।” इस सामग्री में जीवन रक्षक दवाएं, शल्य चिकित्सा उपकरण, तंबू, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता उपकरण, जल शोधन की गोलियां और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 की सुबह-सुबह, रॉकेट हमलों के बाद, अनुमानित 3,000 हमास आतंकवादियों ने गाजा से इजरायल पर हमला किया था। इसके बाद इजरायल ने पलटवार किया था, जिसमें हमास के आतंकवादी और आम लोग मारे गए थे।

तुर्किये में भूकंप से 50 हजार की मौत, भारत ने चलाया ‘ऑपरेशन दोस्त’
6 फरवरी 2023 को तुर्किये और सीरिया में 7.8 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था। इस आपदा में 50 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। करीब 1.60 लाख इमारतें ढह गईं, जिससे करीब 15 लाख लोग बेघर हो गए। तब पीएम मोदी के निर्देश पर भारत फौरन तुर्किये की मदद को आगे आया और ‘ऑपरेशन दोस्त’ शुरू किया। इसके तहत तुर्किए की सहायता के लिए कई कदम उठाए गए। NDRF के 50 और भारतीय सेना के 250 जवानों की टीमें तुर्किये भेजीं। यह टीमें दिन-रात मलबे में फंसे लोगों को बचाने में लगी रहीं। इंडियन एयरफोर्स के 7 विमान भेजे। इनमें 6 C-17 में राहत सामग्री और 1 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान में मेडिकल उपकरण थे। भारत ने 140 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी। मरीजों के इलाज के लिए दवाइयां, सिरिंज पंप, ECG मशीनें, एक्स-रे मशीनें, वेंटिलेटर और सर्जरी का सामान भेजा। लेकिन तुर्किये के प्रधानमंत्री रिचप तैयब एर्दोगन दो साल में भारत के अहसान को भूल गए और ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान पाकिस्तान की मदद की।
अफगानिस्तान में आए भूकंप ने भारी तबाही, संकटमोचक बने पीएम मोदी
अफगानिस्तान में 2022 में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। चारों तरफ बर्बादी और तबाही का मंजर दिखाई दे रहा था। अफगानिस्तान के एक अधिकारी के मुताबिक, इस भूकंप में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 1500 से ज्यादा लोगों के घायल हो गए थे। ऐसी मुश्किल घड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संकटमोचक रूप में सामने आए। भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए प्रयास तेज कर दिए। अफगानिस्तान के लोगों के लिए सबसे पहले भारतीय वायुसेना के दो विमानों से करीब 27 टन आपात राहत सामग्री भेजी गई। भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि भारत सरकार ने सबसे पहले सहायता प्रदान करते हुए आपात राहत सामग्री काबुल भेजी, जिसमें तंबू, स्लीपिंग बैग, कंबल, चटाई आदि शामिल थे। गौरतलब है कि 22 जून,2022 को अफगानिस्तान के मध्य क्षेत्र में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र खोस्त शहर से करीब 44 किलोमीटर दूर था और 51 किलोमीटर की गहराई में था।
Press Release on Earthquake Relief Assistance for the people of Afghanistan ➡️ https://t.co/ZLyMFJPPMC pic.twitter.com/sZlg5z4ezm
— Arindam Bagchi (@MEAIndia) June 24, 2022
संकट में श्रीलंका का मददगार बना भारत
श्रीलंका इस समय गंभीर आर्थिक संकट, ऐतिहासिक मंदी और भयानक महंगाई का सामना कर रहा है। लोगों को अब ईंधन और रोजाना की जरूरत की चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रह है। लोगों को खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संकटमोचक रूप में सामने आए हैं। श्रीलंका की सरकार और विपक्ष, दोनों मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर देख रहे थे। संकट काल में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद कर रहा है। भारत की ओर से 40 मिट्रिक टन डीजल और 50 हजार टन चावल श्रीलंका भेजा गया। भारत ने श्रीलंका को 1 अरब डॉलर की सहायता का वादा किया।
अफगानिस्तान संकट: तालिबान के कारण देश छोड़ने वालों को मिली मदद
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे बाद वहां भारी अफरातफरी का माहौल बन गया था। हवाई अड्डे पर लोगों की भारी भीड़ के कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में मोदी सरकार संकटमोचक बनकर अफगानिस्तान में फंसे अपने देश के नागरिकों को वहां से सुरक्षिक निकाल आई। वीजा नीति में बदलाव किया गया। e-Emergency X-Misc Visa कैटेगरी की शुरुआत की गई। इससे तालिबान से अपनी जान बचाने के लिए वहां से तुरंत निकलने की कोशिश में लगे लोगों को काफी मदद मिली।
सुनामी से प्रभावित टोंगा को 2 लाख डॉलर की सहायता
भारत ने सुनामी और ज्वालामुखी विस्फोट से प्रभावित टोंगा को तत्काल राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए 2 लाख डॉलर की आर्थिक सहायता दी। विदेश मंत्रालय ने टोंगा में सुनामी के कारण हुए नुकसान और विनाश के लिए सरकार और लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की। संकट की घड़ी में वहां के लोगों के साथ खड़ा हो कर मोदी सरकार ने फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। 2018 में चक्रवात गीता से हुई तबाही के समय भी भारत टोंगा के साथ मजबूती से खड़ा था। गौरतलब है कि 15 जनवरी, 2022 को टोंगा साम्राज्य ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी की चपेट में आ गया था। इससे देश की आबादी का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा था।
श्रीलंका को 90 करोड़ डॉलर का आर्थिक पैकेज
भारत ने संकट की घड़ी में श्रीलंका की मदद की। चीन ने पहले तो श्रीलंका को कर्ज देकर जाल में फंसाया फिर उसके हाल पर छोड़ दिया। जब श्रीलंका दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया, तो भारत ने श्रीलंका को 90 करोड़ डॉलर के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। श्रीलंका के प्रमुख अर्थशास्त्री और श्रीलंकाई सेंट्रल बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर डब्ल्यू विजेवर्धने ने भारत की इस मदद की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत के आर्थिक पैकेज ने अभी के लिए श्रीलंका की डूबती नैया को बचाने में बड़ी सहायता की है। उन्होंने कहा कि भारत के आर्थिक पैकेज ने 18 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड के निपटान के बाद आनेवाले एक तत्काल आर्थिक संकट को टाल दिया। समय पर भारत की सहायता ने श्रीलंकाई सरकार को दो महीने की राहत दी।
चीन के कर्ज के जाल से मालदीव को निकाला
भारत ने संकट की घड़ी में मालदीव की मदद की। चीन ने पहले तो मालदीव को कर्ज देकर जाल में फंसाया फिस कर्ज की वापसी के लिए नोटिस थमा दिया। ऐसे में भारत ने मालदीव को आर्थिक संकट से उबरने के लिए 25 करोड़ डॉलर (1840 करोड़ रपये) की आर्थिक सहायता दी। इस आर्थिक मदद पर वहां के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सालिह ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। राष्ट्रपति सालिह ने ट्वीट कर कहा कि जब भी मालदीव को किसी मित्र की जरूरत पड़ी, भारत हमेशा इस अवसर पर आगे आया है। वित्तीय सहायता के रूप में 25 करोड़ डॉलर के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार और जनता को मेरी ओर से दिल से धन्यवाद।
तूफान प्रभावित मोजाम्बिक में राहत अभियान
आज दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आने पर भारत से मदद की उम्मीद की जाती है। भारत ने खतरनाक चक्रवाती तूफान का सामना कर रहे मोजांबिक में 192 से ज्यादा लोगों को बचाया। तूफान प्रभावित अफ्रीकी देश मोजाम्बिक में नौसेना के जवानों ने देवदूत बनकर वहां के लोगों की मदद की। इसके अलावा 1,381 लोगों का मेडिकल कैंपों में इलाज किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार इडाई तूफान ने मोजाम्बिक, जिंबाब्वे और मलावी में भारी तबाही मचाई। मोजाम्बिक के अनुरोध पर भारत ने तत्काल नौसेना के तीन जहाजों को मदद के लिए रवाना किया। आईएनएस सुजाता, आसीजीएस सारथी और आईएनएस शार्दुल ने तत्काल तूफान प्रभावित देश में लोगों को मानवीय सहायता मुहैया कराई।
इंडोनेशिया में ऑपरेशन समुद्र मैत्री
अक्तूबर 2019 में इंडोनेशिया में आए भूकंप और सुनामी के कारण भारी तबाही हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद भारत ने वहां ऑपरेशन ‘समुद्र मैत्री’ शुरू किया था। भारत ने वहां भूकंप और सुनामी पीड़ितों की सहायता के लिए दो विमान और नौसेना के तीन पोत भेजे थें। इन विमानों में सी-130 जे और सी-17 शामिल हैं। सी-130 जे विमान से तंबुओं और उपकरणों के साथ एक मेडिकल टीम भेजी गई थी। सी-17 विमान से तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए दवाएं, जेनरेटर, तंबू और पानी आदि सामग्री भेजी गई थी।
भारत से भेजे गए हैवी फ्लडपंप से निकाला गया था गुफा का पानी
थाईलैंड में थैल लुआंग गुफा में अंडर-16 फुटबाल टीम के 12 बच्चे और कोच के फंसने के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। दुनिया में अब तक के सबसे जोखिम भरे राहत और बचाव अभियान में ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, अमेरिका समेत तमाम देशों ने अपने विशेषज्ञ भेजे, पर इनसे कोई बात नहीं बनी तो थाईलैंड की सरकार ने भारत की मोदी सरकार से मदद की गुहार की। मोदी सरकार ने बगैर समय गंवाए भारतीय इंजीनियरों को मदद करने का निर्देश दिया। भारत सरकार के आदेश पर केबीएस का हैवी फ्लडपंप महाराष्ट्र के सांगली जिले स्थित किर्लोस्कर समूह की कंपनी से भेजा गया। भारत से हैवी कैबीएस फ्लडपंप थाईलैंड पहुंचने के बाद, गुफा में पानी का स्तर कम किया गया। पानी का स्तर कम होने के बाद ही गोताखोरों का काम आसान हुआ और तीन दिनों के कठिन ऑपरेशन के बाद सभी बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
यमन संकट के दौरान विश्व ने माना भारत का लोहा
जुलाई 2015 में यमन गृहयुद्ध की चपेट में था और सुलगते यमन में पांच हजार से ज्यादा भारतीय फंसे हुए थे। बम गोलों और गोलियों के बीच हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को सुरक्षित निकालना मुश्किल लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व और विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह के सम्यक प्रबंधन और अगुआई ने कमाल कर दिया। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय से भारत के करीब पांच हजार नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया वहीं 25 देशों के 232 नागरिकों की भी जान बचाने में भारत को कामयाबी मिली। इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए सबको मजबूर कर दिया।
मालदीव के लोगों की प्यास बुझाई
दिसंबर 2014 में मालदीव का वाटर प्लांट जल गया और पूरे देश में पीने के पानी की किल्लत हो गई। वहां त्राहिमाम मच गया और आपातकाल की घोषणा कर दी गई। तब भारत ने पड़ोसी का फर्ज अदा किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने त्वरित फैसला लिया। मालदीव को पानी भेजने का निर्णय कर लिया गया और इंडियन एयर फोर्स के 5 विमान और नेवी शिप के जरिये पानी पहुंचाया जाने लगा।
अफगानिस्तान में भूकंप में राहत
अक्टूबर 2015 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 7.5 तीव्रता के भूकंप के चलते 300 लोगों के मौत हो गई। पीएम मोदी ने तत्काल दोनों देशों को मदद की पेशकश की। अफगानिस्तान में भारतीय राहत टीम को बिना देर किए रवाना किया गया और मलबे में फंसे सैकड़ों लोगों को निकालने में सफलता पायी।
बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए भेजी राहत
सितंबर 2017 में भारत ने बांग्लादेश में म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए राहत सामग्री भेजी थी। बांग्लादेश के मदद मांगने पर बिना देर किए भारत ने चावल, गेहूं, दाल, चीनी, नमक, खाद्य तेल, नूड्ल्स, बिस्किट, मच्छरदानी वगैरह की पहली खेप के साथ वायु सेना का विमान भेज दिया। विदेश मंत्रालय की निगरानी में ‘ऑपरेशन इंसानियत’ नाम से वहां राहत कार्यक्रम चलाया गया।
श्रीलंका ईंधन संकट: संकटमोचक बनी मोदी सरकार
श्रीलंका को नवंबर 2017 में पेट्रोल और डीजल की जबरदस्त किल्लत का सामना करना पड़ा। श्रीलंका में ईंधन की कमी के बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बताया कि भारत, श्रीलंका को अतिरिक्त ईंधन भेज रहा है और विकास में सहयोग के लिए भारत के सतत समर्थन का भरोसा भी दिलाया। इसके पहले मई 2017 में प्रधानमंत्री मोदी ने संकटग्रस्त श्रीलंका के लिए राहत भेजी थी। यहां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने भारी तबाही मचायी थी, जिसमें 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे और 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
श्रीलंका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए बनाए घर
भारत ने हाल ही में श्रीलंका के चाय बागान में काम कर रहे भारतीय मूल के लोगों के लिए बनाए गए 404 घर उनको सौंप दिए। इसपर करीब 350 मिलियन अमेरीकी डॉलर की लागत आई है। भारत द्वारा किसी भी देश में यह सबसे बड़ी घर परियोजना था श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल अधिकतर चाय और रबड़ बागानों में काम करते हैं और उनके पास उचित घरों का अभाव है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने हमेशा से शांत, सुरक्षित और समृद्ध श्रीलंका का सपना देखा है जहां सब की प्रगति और विकास की आंकक्षाएं पूरी हों। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी नेबरहुड फर्स्ट नीति में श्रीलंका को एक विशेष स्थान पर बनाए रखेगा।
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी कोरोना संकट काल में भी पूरी दुनिया के लिए संकटमोचक बने हैं। आइए डालते हैं एक नजर-
6 पड़ोसियों सहित 100 से अधिक देशों को वैक्सीन सप्लाई
कोरोना संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी संकटमोचक बन कर सामने आए हैं। भारत ने भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स को अनुदान सहायता के तहत 20 जनवरी, 2021 से कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति शुरू क थी। कोविशील्ड वैक्सीन की 1.5 लाख डोज वाली पहली खेप भूटान के लिए रवाना हुई। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भूटान की राजधानी थिम्पू के लिए वैक्सीन की पहली खेप रवाना हुई। इसके बाद 100 से अधिक देशों को कोरोना वैक्सीन की 6 करोड़ से अधिक की डोज भेजी गई।
पीटरसन ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की
अफ्रीकी देशों में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के सामने आने के बाद कई देशों में यहां आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी। ऐसे में भारत ने आगे आकर अफ्रीकी देशों की मदद की। इसी को लेकर अफ्रीकी मूल के पीटरसन ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। इससे पहले केविन पीटरसन ने फरवरी, 2021 में अफ्रीका को वैक्सीन भेजने पर भारत की तारीफ करते हुए लिखा था कि भारत की उदारता और दयालुता लगातार बढ़ती जा रही है। प्यारा देश। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत अफ्रीकी देशों में मेड इन इंडिया वैक्सीन, जरूरी दवाइयां, टेस्ट किट, पीपीई किट्स और वेंटिलेटर सहित दूसरे मेडिकल सामान सप्लाई करने को तैयार है। भारत ने अभी तक अफ्रीका में 41 देशों को 2.5 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की सप्लाई की है। जिसमें करीब 16 देशों को 1 करोड़ डोज मदद के रूप में और 33 देशों को कोवैक्स के जरिए 1.6 करोड़ डोज शामिल है।
वैक्सीन भेजने पर बारबाडोस की पीएम ने की पीएम मोदी की तारीफ
बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने कोरोना वैक्सीन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। मिया मोटली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैक्सीन मैत्री के तहत कोविशिल्ड का पहला डोज भेजकर उदारता का वास्तविक प्रदर्शन किया है। आपके कारण बारबाडोस में 40 हजार और अन्य जगहों पर हजारों लोगों का टीकाकरण संभव हो पाया है। धन्यवाद के साथ हम आपके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- आपकी वजह से 60 देशों में टीकाकरण
कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भारत की भूमिका को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की। गेब्रेयसस ने प्रधानमंत्री मोदी को वैक्सीन इक्विटी को सपोर्ट करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि COVAX के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और कोरोना वैक्सीन की खुराक को साझा करने से 60 से अधिक देशों को अपने स्वास्थ्य कर्मचारियों और अन्य प्राथमिकता समूह का टीकाकरण शुरू करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि बाकी देश भी आपके इस उदाहरण को फॉलो करेंगे।
यूएन ने भारत को बताया ग्लोबल लीडर
कोरोना संकट काल में दुनिया भर को वैक्सीन उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाने पर संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की जमकर तारीफ की। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कोरोना संकटकाल में भारत एक ग्लोबल लीडर के तौर पर सामने आया है। भारतीय नेतृत्व के मानवीय दृष्टिकोण और वैक्सीन की सहायता पर आभार जताते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने कहा कि कोरोना की जंग में भारत ने ग्लोबल लीडर की भूमिका निभाई है।
ब्राजील के राष्ट्रपति ने की प्रभु हनुमान से की पीएम मोदी की तुलना
ब्राजील के राष्ट्रपति जायर एम बोल्सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने लिखा कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी की पीएम मोदी की तारीफ
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को महान बताया और कहा कि वो भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो भारतीय पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। निर्यात पर ढील देने के बाद अमेरिका को अब यह दवा मिल सकेगी।
नेपाल ने दवाएं भेजने के लिए कहा शुक्रिया
भारत ने कोरोना से मुकाबले के लिए अप्रैल में नेपाल को मदद के तौर पर 23 टन आवश्यक दवाएं दी। दवा की यह खेप भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्र ने नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री भानुभक्त धाकल को सौंपी। इसमें कोरोना के खिलाफ अहम मानी जा रही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के अलावा पैरासिटामॉल व अन्य दवाएं शामिल हैं। संकट के समय भारत सरकार की इस मदद पर नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। कोरोना संक्रमण से निपटने को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच इस महीने टेलीफोन पर बात हुई थी। इससे पहले कोरोना के खिलाफ मिलकर प्रयास करने की पीएम मोदी की अपील पर 15 मार्च को सार्क देशों की बैठक में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी।
मॉरीशस के पीएम ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार
कोरोना संकट के बीच भारत से मिली मदद के लिए मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि मैं एयर इंडिया की एक विशेष उड़ान से कल बुधवार15 अप्रैल को मॉरिशस पहुंची भारत सरकार की चिकित्सा मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत आभारी हूं। यह भारत और मॉरिशस के बीच के धनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।









