कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेताओं के बारे में नए नए खुलासे हो रहे हैं। अब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में कई चौकाने वाले खुलासा किए हैं। उन्होंने कहा कि CJP के नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं और वे “संत नहीं हैं”। सोनम वांगचुक ने अपने बयान से यह साबित करने की कोशिश की है कि जिस तरह CJP नेताओं के गुरु अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का इस्तेमाल किया, उसी तरह CJP नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए उनका इस्तेमाल किया। छात्रों और शिक्षा सुधार को ढाल बनाकर अपनी सियासी रोटियां सेक रहे CJP नेताओं का मुखौटा धीरे-धीरे उतर रहा है।

CJP नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं- वांगचुक
दरअसल, सोनम वांगचुक ने प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए कहा कि CJP के संस्थापकों (अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका) की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि नेता भविष्य में किसी पार्टी से जुड़ सकते हैं या अपनी नई पार्टी बना सकते हैं, लेकिन उन्हें CJP जैसे छात्र और जन आंदोलन के मंच को किसी राजनीतिक दल का जरिया नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने उनसे मंच पर कहा था कि आप आप लोगों की भी राजनीतिक महात्वाकांक्षाएं हो सकती हैं, इसमें गलत नहीं है। लेकिन इस मंच को जिसे आपने राजनीतिक पार्टी के रूप में नहीं शुरू किया है, इसकी पवित्रता को बनाएं रखें। लोगों ने इसे छात्र आंदोलन के रूप में देखा है, इसे कोई राजनीतिक रंग देना अच्छा नहीं।
सोनम वांगचुक ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की असलियत सामने रखी।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। वे इस बात की गारंटी नहीं दे सकते कि वे आगे चलकर भ्रष्ट नहीं होंगे। pic.twitter.com/8motR5Lhsy
— Panchjanya (@epanchjanya) August 30, 2026
CJP नेता भविष्य में भ्रष्ट होंगे या नहीं इसकी गारंटी नहीं ले सकता- वांगचुक
26 दिनों तक अनशन करके कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन को मजबूती देने वाले सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगुचक ने कहा है कि कहा कि वह लिखकर नहीं व सकते कि भविष्य में ये लोग भ्रष्ट नहीं होंगे। वांगचुक ने कहा कि उनका अब तक का आकलन कि अभिजीत दीपके समेत अन्य सीजेपी नेता अच्छे युवा हैं, लेकिन भविष्य में भ्रष्ट होंगे या नहीं इसकी गारंटी नहीं ले सकते हैं। उन्होंने दीपके और अन्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें कुछ गलत भी नहीं है।
Sonam Wangchuk makes a revelation.
CJP folks definitely have political ambitions. They are not selfless as they claim.
And he cannot guarantee that they will not be corrupt in future. pic.twitter.com/USLDopDyAE
— 🍉 (@DelhiIsNotFar) August 30, 2026
भीड़ न जुटने के कारण CJP के नेताओं का मनोबल काफी गिर चुका था-वांगचुक
आंदोलन के 15वें-16वें दिन तक मैदान में उम्मीद के मुताबिक भीड़ न जुटने के कारण आयोजकों और CJP के नेताओं का मनोबल काफी गिर चुका था। आंदोलन की सफलता को लेकर गहराते संशय के बीच वे इस प्रदर्शन से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने (Graceful Exit) का रास्ता तलाश रहे थे। इसके कारण उनके टिकने या हटने को लेकर एक असमंजस का माहौल बना हुआ था। हालांकि, अगले दिन छात्रों के दोबारा जुटने पर आंदोलन फिर से खड़ा हो गया। वांगचुक ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा था कि उनको टिकने में मदद करूं या हटने में मदद करूं। मैं सोच रहा था कि हटने पर कहीं उनको बुरा नहीं लगे। तो मैंने पूछा कि आप लोग कितने दिन रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि हम लोग अब जाना चाहते हैं। हम लोग इस जगह को छोड़ना चाहते हैं।
सीजेपी की आड़ में राजनीति का खेल खेलने वालों का पर्दाफाश खुद सोनम वांगचुक ने कर दिया।
अभिजीत दीपके,सौरव दास और आशुतोष रांका को लेकर उन्होंने साफ कहा- इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं,मैंने इनका आकलन किया है।सीजेपी की कहानी ,सुनिए सोनम वांगचुक की जुबानी……👇 pic.twitter.com/CZ2L7XWpPC
— Dinesh Chaudhary (@dineshbjp09) August 30, 2026
सीजेपी के नेता आंदोलन खत्म करने का रास्ता तलाश रहे थे- वांगचुक
वांगचुक ने बताया कि 20 जुलाई को पुलिस की कार्रवाई के बाद CJP नेताओं का मनोबल बुरी तरह टूट गया था। वो आंदोलन खत्म करने का रास्ता तलाश रहे थे। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन का मंच हटा दिया गया था और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां से चले गए थे। मैंने उनसे ऐसा संदेश तैयार करने को कहा था, जिससे प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर छोड़कर घर लौटने के लिए कहा जा सके। वांगचुक ने कहा, ‘उन्होंने मुझसे कुछ ऐसा पोस्ट करने को कहा था कि अब आपको अच्छी तरह आराम करने की जरूरत है, घर जाकर सो जाइए, जंतर-मंतर पर मत रुकिए। कल देखेंगे कि क्या करना है।’ उन्होंने ऐसा संदेश तैयार भी किया था, लेकिन उसे पोस्ट नहीं किया गया।

अनशन समाप्त कराने के लिए राहुल गांधी से किया गया था संपर्क- वांगचुक
वांगचुक ने यह भी साझा किया कि आंदोलन से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संपर्क करके अनशन समाप्त कराने पर भी विचार किया गया था, हालांकि उनकी तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी योजना थी कि यदि सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आती है, तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाएं और आगे की जिम्मेदारी संसद को सौंप दी जाए। वांगचुक के अनुसार, उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने राहुल गांधी से कई बार संपर्क करने की कोशिश की थी, ताकि वे अनशन खत्म कराने में मदद कर सकें। राहुल गांधी की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब या प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे वे निराश हुए। इस खुलासे के बाद और कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाने के कारण वांगचुक की पत्नी को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
सोनम वांगचुक :- मैं आंदोलन से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलना चाहता था।
हमारी योजना 20 जुलाई को संसद तक मार्च करके आंदोलन वापस लेने और इस मुद्दे को विपक्ष को सौंपने की थी।
आशुतोष रांका ने कहा कि मार्च में 10000 लोग शामिल हो सकते हैं, जबकि सौरव दास ने कहा कि संख्या 15000 हो सकती… pic.twitter.com/0dWX22JUe5
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 30, 2026









