पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले करप्शन के मामलों में मान सरकार घिरने लगी है। यहां तक कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार भ्रष्टाचार के जांच की आंच सीएम मान के कार्यालय तक पहुंच चुकी है। करप्शन के इस मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। यह मामला ED की ओर से पंजाब के DGP को भेजे गए तीन पत्रों से जुड़ा है। इन पत्रों में भ्रष्टाचार से संबंधित साक्ष्यों का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार सीएम ऑफिस से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। ईडी ने 200 पन्नों की रिपोर्ट सबूत के साथ हाईकोर्ट को सौंपी है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पंजाब पुलिस ने इस मामले में जांच के दौरान ईडी का सहयोग नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन पर भी आरोप हैं कि सीएम ऑफिस से पैसे का लेन देन हुआ है।
ईडी ने रेड मारी तो 21 लाख रुपए से भरा बैग बॉलकनी से फेंका
प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पंजाब पुलिस ने ED के तीन पत्र मिलने के बावजूद नितिन गोहल, जितिन गोहल, राजबीर सिंह घुमन, बीर दविंदर , रोमी राजा महाजन और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की। ED ने 7 मई 2026 से 10 मई 2026 तक पंजाब में अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य के परिसरों पर तलाशी ली थी। नितिन गोहल के घर से ED ने बालकनी से फेंका गया 21 लाख रुपयों से भरा बैग बरामद किया था। नितिन गोहल CM भगवंत मान के ताकतवर OSD राजबीर सिंह घुम्मन का दोस्त है। ईडी ने इन सब पर निजी फायदे के लिए आपराधिक साजिश रचने, ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए रिश्वत लेने और गोपनीय सरकारी जानकारी लीक करने के आरोप लगाए हैं। ईडी 30 जुलाई से पंजाब पुलिस को गोपनीय FIR दर्ज कर कॉपी भेजने के लिए कह रही है। जब पंजाब पुलिस ने एक्शन नहीं लिया तो पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। ED रिपोर्ट में बिचौलियों के माध्यम से पंजाब सरकार में भ्रष्टाचार पर बड़े खुलासे किए गए हैं।
पंजाब में ट्रांसफर-पोस्टिंग और टेंडर अलॉटमेंट का बड़ा खेल
ED ने कहा गोहल के घर से बरामद मोबाइल फ़ोन के चैट और दस्तावेजों से पंजाब CM ऑफिस में फैले भ्रष्टाचार का पता चला है। ED ने हाईकोर्ट को उसके सभी व्हॉट्स एप चैट की ट्रांसक्रिप्ट, जानकारियां और स्क्रीन शॉट्स भी सौंपे हैं। ED के रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं उसके अनुसार पंजाब में ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर अलॉटमेंट, बिल्डरों को CLU देने, पॉलिसी मैटर्स की शर्तें तय करने, आर्म्स लाइसेंस जारी करने में दख़लंदाजी और पैसे के लेनदेन का पता चला है। ED का दावा है कि नितिन गोहल के संबंध सीएम के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के साथ हैं। नितिन गोहल ने अपने करीबी की नियुक्ति CM ऑफिस में करवाई है।
WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड और बातचीत से खुल गई पोल
दरअसल, सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन से दोस्ती के चलते नितिन का सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में दखल है। रिपोर्ट में 21 ट्रांसफर और पोस्टिंग की टेली दी गई है। जांच के दौरान, नितिन गोहल के डिवाइस से मिली अलग-अलग WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड, डॉक्यूमेंट और बातचीत से पता चला कि वे कई सरकारी विभागों में ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे। रिकॉर्ड से पता चलता है कि नितिन गोहल इच्छुक अधिकारियों और राजबीर घुमन के बीच बिचौलिए का काम कर रहे थे, जबकि नितिन गोहल अपने पसंदीदा लोगों की पोस्टिंग पक्की करने के लिए ड्राफ्ट ऑर्डर बाहर निकालते थे। चैट से प्रस्तावित ट्रांसफर, पसंदीदा पोस्टिंग, अधिकारियों की आवाजाही, विभागीय बदलाव और ट्रांसफर से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक होने से पहले ही शेयर करने के बारे में बातचीत का भी पता चलता है।
पॉलिसी से जुड़े कामों और सरकारी फायदों के लिए सिस्टम
यह भी पता चला है कि सरकारी काम के लिए मिले पेमेंट, किकबैक और दूसरे फायदे के 11 मामलों की लिस्ट तैयार की गई है। रिकवर की गई चैट और डिजिटल सबूतों से पता चलता है कि नितिन गोहल और उनके साथी कथित तौर पर पैसे ले रहे थे, पेमेंट का इंतजाम कर रहे थे। फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में मदद कर रहे थे और यात्रा की बुकिंग कर रहे थे। जमीनों की लेन-देन, पॉलिसी से जुड़े कामों और सरकारी फायदों के बदले दूसरी सुविधाएं दे रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार बातचीत के तरीके से एक व्यवस्थित सिस्टम का पता चलता है, जिसमें सरकारी अधिकारियों तक पहुंच और उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके आर्थिक फायदा उठाया जाता था।
हथियार लाइसेंस के मामलों में नितिन गोहल की भूमिका
इसके अलावा रिपोर्ट में 18 ऐसे मामलों का भी जिक्र है, जिनमें लैंड डील्स, पॉलिसी मैटर, सरकारी गोपनीय जानकारी तक अनधिकृत पहुंच और उसका लीक होना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच से पता चला है कि नितिन गोहल और उनके सहयोगियों के पास ट्रांसफर प्रस्तावों, पोस्टिंग ऑर्डर, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स, प्रशासनिक मंजूरी और अन्य आंतरिक सरकारी संचार से जुड़ी गोपनीय जानकारी मौजूद थी, जबकि यह जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई थी। इससे संकेत मिलता है कि आधिकारिक रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच हो सकती है और ऐसे रिकॉर्ड तक पहुंच रखने वाले लोगों द्वारा संवेदनशील सरकारी जानकारी लीक की गई हो सकती है। जांच में हथियार लाइसेंस के मामलों, सिफारिशों, मंजूरियों, नवीनीकरण और अन्य संबंधित कार्यों से जुड़ी कई बातचीत सामने आई हैं। नितिन गोहल सरकारी तंत्र में आधिकारिक पदों और प्रभाव रखने वाले लोगों के माध्यम से ऐसे मामलों में मदद और समन्वय कर रहे थे।
अभी तक पंजाब ने ईडी की रिपोर्ट के आधार पर नहीं की FIR दर्ज
पंजाब पुलिस द्वारा ईडी की रिपोर्ट के बाद भी मामले में किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं करने से उसकी मिलीभगत की मंशा भी नजर आती है। इनमें नितिन गोहल, जितिन गोहल, राजबीर सिंह घुमन, बीर दविंदर, रोमी राजा महाजन और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में निजी हित के लिए क्रिमिनल साजिश रचने, ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए रिश्वत लेने और गोपनीय सरकारी जानकारी लीक करने के आरोप लगाया है। वहीं, ईडी 30 जुलाई से लगातार पंजाब पुलिस से FIR दर्ज कर कॉपी भेजने के लिए कह रही है, लेकिन जब पंजाब पुलिस की तरफ से किसी तरह का एक्शन नहीं लिया गया तो पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली गई है।
जमीन घोटाला: ईडी कर रही 200 करोड़ रुपये के घपले की जांच
पंजाब के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा और कंवल प्रीत बराड़ भी ईडी की उस जांच के केंद्र में हैं, जिसमें सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स परियोजनाओं में 200 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसी उनके संबंधित कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रशासनिक निर्णयों और आधिकारिक अभिलेखों की जांच कर रही है। जांच के तहत, ईडी ने वर्मा को तलब किया था, लेकिन वह पहले समन पर उपस्थित नहीं हुए। ईडी सूत्रों ने बताया कि एजेंसी भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमतियों और जांच के तहत रियल एस्टेट परियोजनाओं के अनुमोदित लेआउट में बाद में किए गए परिवर्तनों के प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि इन मामलों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर जाली भूस्वामी सहमति पत्रों की शिकायतों के बावजूद विभाग द्वारा कार्रवाई न करने के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा है। 
प्लॉट आवंटन घोटाला: PSIEC के 4 करोड़ फ्रीज, लाखों जब्त
पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) में अवैध औद्योगिक प्लॉट आवंटन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने पिछले माह तीन दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई। तलाशी के दौरान ईडी टीमों ने 12.15 लाख रुपए की अघोषित नकदी, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद कर जब्त किए। इसके अलावा पीएसआईईसी के दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब 4.01 करोड़ रुपए की राशि फ्रीज की गई है। ईडी के अनुसार, तलाशी अभियान चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना स्थित 11 परिसरों में चलाया गया। इसके साथ ही एजेंसी ने पीएसआईईसी के कार्यालय में सर्वे भी किया। कार्रवाई के दौरान विभिन्न परिसरों से महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। इनमें डिजिटल डेटा से संबंधित डिवाइस भी शामिल हैं, जिनकी जांच के जरिए कथित लेन-देन और प्लॉट आवंटन से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
जीएसटी घोटाला: मंत्री पर 100 करोड़ की नकली GST खरीद का आरोप
पंजाब में AAP की सरकार के संसदीय कार्य और उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने पकड़ा है। आरोप है कि उन्होंने 100 करोड़ रुपये की नकली GST खरीद का काम किया और विदेश से पैसे भारत में लाए। सूत्रों का दावा है कि ईडी की टीम अरोड़ा से लंबे समय तक पूछताछ करती रही और उन्हें आगे की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जा सकता है। ईडी की टीमों ने चंडीगढ़ स्थित उनके सेक्टर-2 स्थित आवास समेत दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य ठिकानों पर एक साथ छापामारी शुरू की थी। कार्रवाई के दौरान सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के जवान भी सुरक्षा में तैनात रहे। टीमों ने कई घंटों तक वित्तीय दस्तावेजों, कारोबारी लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की।
सियासी घमासान, अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर उठाए सवाल
पंजाब में करप्शन और प्रवर्तन निदेशालय के एक्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने आम आदमी पार्टी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें भ्रष्टाचार का पर्याय बताया है। भाटिया ने ED की ओर से हाईकोर्ट के सामने रखे गए तथ्यों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों और गोपनीय सूचनाओं से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर बिचौलियों तक पहुंच रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ED की ओर से भेजे गए तीन पत्रों के बावजूद पंजाब पुलिस ने कुछ नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित नेटवर्क का ‘किंगपिन’ अरविंद केजरीवाल हैं या फिर भगवंत मान हैं। भाटिया ने आरोप लगाया कि जिस तरह का मॉडल दिल्ली में अपनाए जाने का वह दावा करते हैं, उसी मॉडल को पंजाब में लागू किया जा रहा है और कथित बिचौलियों को खुली छूट मिली हुई है।
भगवंत मान भ्रष्टाचार के पर्याय, तत्काल इस्तीफा दें-भाजपा
भाजपा नेता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता अपनी ईमानदारी और मेहनत के लिए जानी जाती है, लेकिन उनके मुताबिक पंजाब की धरती को कथित तौर पर दलाली का प्रदेश बनाने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें यह बताना होगा कि क्या उनकी सरकार कथित भ्रष्टाचारियों और बिचौलियों को संरक्षण नहीं दे रही है। भाटिया ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजवीर सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि ED की रिपोर्ट में कथित तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ा ‘रेट कार्ड’ सामने आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गोपनीय जानकारियों का आदान-प्रदान होता है, लेकिन ऐसी सूचनाएं कथित तौर पर बिचौलियों तक पहुंच रही हैं। भाटिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह के आरोपों के बीच कोई मुख्यमंत्री पद पर बना रहता है तो जनता की कमाई के गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है।








