दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) के बहुचर्चित रविवार के संस्करण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक कूटनीति पर मुहर लगा दी है। रविवार के मुख्य विश्लेषण में अमेरिकी मीडिया ने स्पष्ट माना है कि दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, ईरान युद्ध और अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को पूरी मजबूती से अडिग रखा है। अखबार ने रेखांकित किया है कि अमेरिकी राजनीति और डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के बीच पीएम मोदी ने दुनियाभर में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों का ऐसा अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है जो भारत को किसी भी बाहरी दबाव से ऊपर रखता है। इसने यह भी सिद्ध कर दिया है कि रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और व्यापार के हर मोर्चे पर भारत अब किसी एक शक्ति का मोहताज नहीं, बल्कि अपने दम पर आत्मनिर्भर महाशक्ति बनकर उभर चुका है। बीते एक वर्ष में 20 से अधिक देशों की यात्राएं और 13 से अधिक वैश्विक राष्ट्राध्यक्षों का भारत आगमन केवल औपचारिक कूटनीति नहीं था, बल्कि बंद कमरों में हुई ठोस और कारोबारी वार्ताओं का ऐसा परिणाम था, जिसने भारत को वैश्विक मंच पर निर्णायक शक्ति बना दिया है।
2013 से 2026 : जब NYT को भी बदलना पड़ा अपना नजरिया
साल 2013 के उस दौर को याद करना जरूरी है जब अमेरिकी मीडिया का यही न्यूयॉर्क टाइम्स और उसका पूरा तंत्र नरेंद्र मोदी को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं खडी करने में जुटा रहता था। लेकिन एक दशक के भीतर प्रधानमंत्री मोदी के अटूट संकल्प और नीतिगत दृढता ने इतिहास का रुख पूरी तरह पलट दिया है। आज वही पश्चिमी मीडिया यह स्वीकार करने को विवश है कि नरेंद्र मोदी किसी भी महाशक्ति के दबाव या डर में नहीं आते।
Haha. The same New York Times and its ecosystem that were hell-bent on targeting Narendra Modi in 2013 are today acknowledging that he fears none.
For NaMo, every global leader is simply a platform and a mediator, useful insofar as it helps put India’s national interests first.… https://t.co/YK8eFlvhIR
— The Analyzer (News Updates🗞️) (@Indian_Analyzer) August 31, 2026
वैचारिक गुटों से परे ‘रणनीतिक संतुलन’: किसी कैंप का हिस्सा नहीं भारत
मोदी कूटनीति की सबसे अनूठी खूबी यह है कि भारत आज किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने के बजाय समान दूरी और स्वतंत्र दृष्टिकोण बनाए हुए है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए दुनिया का कोई भी राष्ट्राध्यक्ष केवल और केवल भारत के आर्थिक, तकनीकी और रक्षा हितों को आगे बढाने का एक व्यावहारिक माध्यम है। देश की विदेश नीति अब किसी बाहरी विचारधारा से नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों से तय हो रही है।
दबाव की कूटनीति हुई बेअसर: अपनी शर्तों पर समझौते कर रहा नया भारत
चाहे वाशिंगटन हो या यूरोपीय राजधानियां, आज दुनिया को यह स्पष्ट संदेश मिल चुका है कि भारत से कोई भी डील केवल तब संभव है जब उसमें देश का वास्तविक फायदा हो। टैरिफ, प्रतिबंधों या युद्ध के वैश्विक तनावों के बावजूद भारत ने अपने फैसले खुद लेकर साबित कर दिया है कि नए भारत की दिशा अब कोई विदेशी शक्ति तय नहीं कर सकती।
विदेश दौरों का हिसाब मांगने वाले आलोचकों को करारा जवाब
देश में दशकों तक विदेश दौरों के नाम पर केवल रस्मी मुलाकातों और अस्पष्ट बयानों की राजनीति होती रही है। जो आलोचक प्रधानमंत्री मोदी के दौरों पर सवाल उठाते थे, उन्हें न्यूयॉर्क टाइम्स के इस विश्लेषण को ध्यान से पढना चाहिए। अमेरिकी अखबार ने साफ अंतर स्पष्ट किया है कि पुराने दौर की शिखर बैठकों में लक्ष्य बहुत व्यापक, अस्पष्ट और दिशाहीन होते थे। इसके विपरीत, मोदी युग के दौरों में स्पष्ट लक्ष्य, निश्चित आंकडे, कारोबारी एजेंडा और ठोस आर्थिक परिणाम पहले से तय होते हैं। आज प्रधानमंत्री के हर दौरे से देश के लिए निवेश, तकनीक, रोजगार और रणनीतिक लाभ सीधे भारत पहुंच रहा है।

दुनिया खुद चलकर आ रही है भारत के द्वार
न्यूयॉर्क टाइम्स इस बात से हैरान है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक स्तर पर साझेदारियों का दायरा तेजी से विस्तृत किया है। इन यात्राओं का विशाल हिस्सा बंद कमरों में हुई उच्चस्तरीय कारोबारी बैठकों का था, जहां भारत के हितों को सर्वोच्च रखते हुए फैसले लिए गए। आज स्थिति यह है कि भारत को दुनिया के पीछे भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि दुनिया के ताकतवर देश भारत की तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था और विशाल बाजार को देखकर खुद आगे आकर रिश्ते मजबूत करने की पहल कर रहे हैं।
ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता: भारतीय वस्त्र उद्योग को मिली नई गति
15 जुलाई 2026 से लागू हुआ भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के घरेलू उद्योगों के लिए ऐतिहासिक अवसर बनकर उभरा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने भारत के वस्त्र, परिधान, चर्म और जूते जैसे प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों पर टैरिफ को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जिससे भारत के लाखों बुनकरों और कामगारों को भारी लाभ मिला है। वहीं, भारत ने स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ को 150 प्रतिशत से घटाकर पहले 75 प्रतिशत और आगे 40 प्रतिशत करने का संतुलित कदम उठाया। इस समझौते से दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार में 25.5 बिलियन पाउंड की भारी वृद्धि तय हुई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही है।
यूरोपीय संघ के साथ दो दशक का गतिरोध समाप्त: 118 अरब यूरो का विशाल व्यापार तंत्र
जिस यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार समझौते की फाइलें लगभग बीस साल तक धूल फांक रही थीं, उसे प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक नेतृत्व ने 27 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कराया। यूरोपीय संघ 118 अरब यूरो के वस्तु व्यापार के साथ भारत का तीसरा सबसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। 27 यूरोपीय देशों के साथ इस समझौते ने भारतीय कारोबारियों, निर्यातकों और पेशेवरों के लिए यूरोप के सबसे विशाल बाजार के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं।

फ्रांस के साथ एआई क्रांति और भारतीय छात्रों के लिए वीजा
प्रधानमंत्री मोदी के विजन ने तकनीक और युवा शक्ति को विदेश नीति के केंद्र में रखा है। भारत और फ्रांस ने अपने संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का रूप दिया है। दोनों देशों ने पेरिस में एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में 100 से अधिक ठोस कदमों पर सहमति बनाई। इसके साथ ही, फ्रांस ने भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए वीजा नियमों को बेहद सुगम और व्यापक बनाया है, जिससे भारत की युवा प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर पर नए अवसर मिल रहे हैं।
10 लाख नौकरियों की पक्की गारंटी
नॉर्वे और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुआ ऐतिहासिक आर्थिक समझौता मोदी सरकार की नीतिगत सफलता का प्रामाणिक उदाहरण है। इस समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने भारत में 15 वर्षों के भीतर 100 अरब डॉलर का भारी निवेश करने और देश के युवाओं के लिए 10 लाख नए रोजगार पैदा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। यह भारत की आर्थिक नीतियों में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों के अटूट भरोसे को दर्शाता है।
PM Modi का ऐलान India–EU FTA FINAL 🔥
25% Global GDP + 1/3rd Global TradeIndia-EU Trade Deal is Mother of all deals!
EU के साथ हुआ Free Trade Agreement
ब्रिटेन और EFTA समझौतों को भी करेगा मज़बूती से कॉम्प्लीमेंट।
🇮🇳🤝🇪🇺 pic.twitter.com/HjoYF42AYS— BhanuPriya (@Kashyap_Priyu) January 27, 2026
दक्षिण कोरिया बनाएगा भारत में विशाल जहाज
आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति देते हुए दक्षिण कोरिया ने भारत के साथ जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) के क्षेत्र में विशाल निवेश और तकनीकी हस्तांतरण का समझौता किया है। दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञता और भारतीय शिपयार्ड मिलकर देश को 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण राष्ट्रों की कतार में स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। यह कदम भारत के भारी विनिर्माण और समुद्री लॉजिस्टिक्स को आत्मनिर्भर बनाएगा।
जर्मनी से अत्याधुनिक पनडुब्बी तकनीक: राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता का सबसे ज्वलंत प्रमाण जर्मनी के साथ हुआ रक्षा समझौता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि भारत की कूटनीतिक पहुंच के कारण जर्मनी से अत्याधुनिक पनडुब्बी तकनीक प्राप्त हो रही है। यह भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना विस्तार देकर समुद्र में भारत के दबदबे को मजबूत करेगा।
न्यूजीलैंड, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ हिंद-प्रशांत की अभेद्य सुरक्षा
भारत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी स्थिति को अत्यंत सशक्त बनाया है। जहां जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं न्यूजीलैंड के साथ रक्षा सहयोग ढांचे को गति देते हुए समुद्री सुरक्षा और व्यापार पर ठोस समझौते किए गए हैं। इससे हिंद महासागर में देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पूरी तरह चाक-चौबंद हो चुकी है।
नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीति: पडोस में भारत का अभेद्य रणनीतिक सुरक्षा घेरा
प्रधानमंत्री मोदी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों ने दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के प्रभाव को नए शिखर पर पहुंचा दिया है। संकट के समय श्रीलंका को आर्थिक संबल देकर उबारना हो या फिर नेपाल और भूटान के साथ सीमा पार बिजली व रेल कनेक्टिविटी के ऐतिहासिक समझौते—भारत आज पडोसियों का सबसे भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। मॉरीशस और मालदीव में रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति को बेहद मजबूत किया है, जिससे भारतीय सीमा के पास विदेशी विस्तारवादी ताकतों के प्रभाव को पूरी तरह सीमित कर दिया गया है।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंक की घेराबंदी
भारत की कूटनीति ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर विश्व मंच पर निर्णायक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट रुख के चलते दुनिया भर में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर सहमति बनी है। भारत द्वारा आयोजित ‘नो मनी फॉर टेरर’ सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारतीय पहलों के जरिए आतंकी संगठनों के वित्तीय स्रोतों पर वैश्विक नकेल कसी गई है। आज दुनिया आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ मजबूती से खडी दिखाई देती है।
रक्षा निर्यातक बना भारत: दुनिया खरीद रही ‘मेक इन इंडिया’ हथियार
कभी दुनिया का सबसे प्रमुख हथियार आयातक कहलाने वाला भारत आज प्रधानमंत्री मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत 90 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आर्टिलरी गन जैसे अत्याधुनिक भारतीय हथियार अब कई देशों की सेनाओं का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत अब केवल हथियार खरीदता नहीं है, बल्कि विश्वस्तरीय हथियारों का निर्माण और निर्यात भी कर रहा है।
India’s Defence Production Quadruples to ₹1.80 Lakh Crore, Exports Surge to ₹39,000 Crore 🇮🇳😱
India’s defence manufacturing ecosystem has expanded sharply over the past decade, with domestic production rising from around ₹46,000 crore in 2014 to approximately ₹1.80 lakh… pic.twitter.com/fl1S4zWfZ1
— The Tathya (@_TheTathya) August 28, 2026
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये की धमक: डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की ऐतिहासिक पहल
मोदी सरकार ने आर्थिक कूटनीति का एक और मास्टरस्ट्रोक चलते हुए रूस, यूएई और कई अन्य देशों के साथ स्थानीय मुद्रा (रुपये) में द्विपक्षीय व्यापार शुरू कर दिया है। यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक डॉलर संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने की दिशा में एक बहुत महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला है। दुनिया अब व्यापार के लिए भारतीय रुपये को स्वीकार कर रही है, जो आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत की स्वतंत्र और मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।
सेमीकंडक्टर क्रांति: ग्लोबल चिप सप्लाई चेन का नया केंद्र बना भारत
प्रधानमंत्री मोदी के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ ने भारत को वैश्विक तकनीकी नक्शे पर स्थापित कर दिया है। जापान, अमेरिका और ताइवान जैसे अग्रणी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी करके भारत में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर फैब और टेस्टिंग यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं। जिस चिप निर्माण तकनीक पर कुछ ही देशों का एकाधिकार था, आज वैश्विक कंपनियां भारत के बुनियादी ढांचे और प्रतिभा पर भरोसा करते हुए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। इससे भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की हार्डवेयर तकनीक का वैश्विक निर्माता बन रहा है।
अंतरिक्ष कूटनीति में भारत का परचम: नासा और प्रमुख स्पेस एजेंसियों के साथ ऐतिहासिक साझेदारियां
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता और गगनयान मिशन की तैयारियों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को महाशक्ति बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की स्पेस डिप्लोमेसी के चलते आज अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA), यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान की जाक्सा (JAXA) जैसी दिग्गज संस्थाएं इसरो के साथ संयुक्त उपग्रह मिशन और अंतरिक्ष अनुसंधान पर काम कर रही हैं। भारत का स्पेस-टेक सेक्टर न केवल देश का मान बढा रहा है, बल्कि किफायती और भरोसेमंद लॉन्च सेवाओं के जरिए दुनिया भर के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजकर भारी विदेशी मुद्रा भी अर्जित कर रहा है।
हरित ऊर्जा और पर्यावरण में विश्व का नेतृत्व: सौर और बायोफ्यूल्स अलायंस से नई क्रांति
जलवायु परिवर्तन के समाधान में भारत केवल भाषण नहीं दे रहा, बल्कि ठोस नेतृत्व प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर स्थापित ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) से आज दुनिया के 100 से अधिक देश जुड चुके हैं। इसके साथ ही ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस’ के जरिए भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प तैयार करने में दुनिया की अगुवाई की है। यह पर्यावरण कूटनीति भारत को सतत विकास और ग्रीन टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र बना रही है।
वैश्विक संकटमोचक भारत: तिरंगे की ताकत से सुरक्षित स्वदेश वापसी
दुनिया में जहां भी युद्ध या भयंकर संकट आया (चाहे वह यूक्रेन हो, यमन हो या सूडान), मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन गंगा’ और ‘ऑपरेशन कावेरी’ जैसे अभियानों के जरिए अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाला। तिरंगे की ताकत आज इतनी विस्तृत हो गई है कि युद्धरत देश भी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकलने का रास्ता देते हैं। यही नहीं, भारत ने अन्य देशों के नागरिकों की भी मदद करके दुनिया के सामने ‘विश्वबंधु’ और मजबूत नेतृत्व की जो साख पेश की है, उसकी मिसाल मिलना बहुत कठिन है।
ऊर्जा सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स: भविष्य के संसाधनों की अभेद्य घेराबंदी
वैश्विक युद्धों और तेल आपूर्ति के गंभीर संकटों के बीच भी मोदी सरकार की चतुराई भरी कूटनीति ने देशवासियों पर कभी ईंधन का संकट नहीं आने दिया। इसके साथ ही, भविष्य की हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को सुरक्षित करने के लिए भारत ने ऑस्ट्रेलिया, लैटिन अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारियां की हैं। यह कदम साबित करता है कि मोदी सरकार देश के वर्तमान के साथ-साथ आने वाले दशकों की ऊर्जा जरूरतों के प्रति पूरी तरह सजग है।
यूपीआई का वैश्विक डंका: डिजिटल भारत बना दुनिया का मार्गदर्शक
भारत के स्वदेशी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और यूपीआई (UPI) ने वैश्विक वित्तीय तंत्र में तहलका मचा दिया है। आज फ्रांस के एफिल टावर से लेकर यूएई, सिंगापुर, श्रीलंका और मॉरीशस तक भारतीय यूपीआई से सीधा भुगतान हो रहा है। पश्चिमी वित्तीय एकाधिकार को चुनौती देते हुए भारत का यह डिजिटल मॉडल अब कई विकसित और विकासशील देशों द्वारा अपनाया जा रहा है, जो भारत की तकनीकी और वित्तीय संप्रभुता का प्रतीक बन चुका है।
🇮🇳 *UPI@10: Transforming India’s Payment Landscape*
📱 *Digital Revolution* : UPI has transformed the way India transacts through simple, secure and real-time digital payments.
📈 *Unprecedented Growth* : Annual transactions volume increased ~12,000-fold between FY 2016-17 and… pic.twitter.com/suihLyTRHo
— SansadTV (@sansad_tv) August 25, 2026
आईमैक कॉरिडोर: स्वेज संकट के बीच भारत-यूरोप व्यापार का सुरक्षित हाईवे
लाल सागर और स्वेज नहर के भू-राजनीतिक तनावों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर शुरू हुआ ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ (IMEC) गेमचेंजर साबित हो रहा है। यह गलियारा भारत को गल्फ देशों और यूरोप के साथ सीधे संपर्क में लाता है। चीन के कर्ज जाल वाले प्रोजेक्ट्स के विपरीत, यह एक पारदर्शी, टिकाऊ और सुरक्षित वैश्विक व्यापार मार्ग है जो भारत को एशिया और यूरोप के व्यापार का प्रमुख केंद्र बना रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर: देश की प्राचीन धरोहरों की ससम्मान वापसी
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति केवल कारोबारी समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के खोए हुए गौरव को पुनर्स्थापित करने का भी सशक्त माध्यम है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों से भारत की चोरी हुई अनेक प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों को ससम्मान वापस लाया जा रहा है। इसके साथ ही, ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ और आयुर्वेद के माध्यम से भारतीय संस्कृति ने विश्व पटल पर जो पहचान बनाई है, वह भारत की असीम ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रतीक बन चुकी है।
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: 100 से अधिक देशों की बुलंद आवाज बना भारत
भारत अब केवल अपने हितों की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि विकासशील और गरीब देशों (ग्लोबल साउथ) का सबसे सशक्त पैरोकार बनकर उभरा है। जी-20 में अफ्रीकी संघ को स्थाई सदस्यता दिलाकर भारत ने सिद्ध किया कि उसकी कूटनीति में सबका साथ और सबका विकास शामिल है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खाद्य सुरक्षा, जलवायु न्याय और आर्थिक समानता की बात को भारत जिस मजबूती से रख रहा है, उसने नई दिल्ली को दुनिया के 100 से अधिक देशों का स्वाभाविक मार्गदर्शक बना दिया है।
प्रवासी भारतीयों की असीम ताकत: विश्व पटल पर भारत के ब्रांड एंबेसडर
अमेरिका के ‘मैडिसन स्क्वायर’ से लेकर सिडनी और दुबई तक, प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में बसे लाखों-करोडों भारतीयों को देश की विकास यात्रा में सीधे शामिल किया है। मोदी सरकार ने डायस्पोरा को केवल दर्शक नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति का सबसे मजबूत स्तंभ और ब्रांड एंबेसडर बना दिया है। आज प्रवासी भारतीय न केवल विदेशी निवेश लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि उन देशों की नीतियों को भी भारत के पक्ष में प्रभावित करने की ताकत रखते हैं।
मेलोडी टॉफी से लेकर व्यक्तिगत आत्मीयता: मोदी की अनूठी कूटनीतिक शैली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति केवल आधिकारिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यक्तिगत संपर्क और भारतीय आत्मीयता से वैश्विक नेताओं का दिल जीतते हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी भेंट करने जैसी सहज और अनूठी पहल की चर्चा न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी प्रमुखता से की है। यह दिखाता है कि भारत का नेतृत्व वैश्विक मंचों पर कितने आत्मविश्वास और सहजता के साथ देश का प्रतिनिधित्व करता है।

अमेरिकी टैरिफ और ईरान युद्ध के बीच भी सामान्य रहा भारत: मजबूत नेतृत्व की मिसाल
मौजूदा समय में जहां पूरी दुनिया युद्ध, आपूर्ति श्रृंखला के संकट और व्यापारिक टैरिफ की मार से जूझ रही है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल आर्थिक प्रबंधन के चलते भारत में सब कुछ पूरी तरह सामान्य और स्थिर बना हुआ है। अमेरिका द्वारा लगाए गए सख्त टैरिफ और ईरान युद्ध के वैश्विक तनाव के बावजूद भारत अपने हितों पर बिना डिगे स्थित रहा। यह साबित करता है कि देश की बागडोर एक ऐसे नेतृत्व के हाथ में है जो किसी भी बाहरी शक्ति के दबाव में नहीं झुकता।
वैश्विक डंके के साथ घरेलू मोर्चे पर भी मोदी का जलवा: ‘मूड ऑफ द नेशन’ में 326 सीटों के साथ अटूट जनविश्वास
केवल अंतरराष्ट्रीय मंच और विदेशी मीडिया ही नहीं, बल्कि देश की जनता का भरोसा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर पूरी तरह अडिग है। हाल ही में सामने आए ‘इंडिया टुडे’ के बहुचर्चित ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) सर्वे ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी आज भी देशवासियों की पहली और निर्विवाद पसंद बने हुए हैं। सर्वे के अनुसार एनडीए को 326 सीटें और अकेले बीजेपी को 261 सीटें मिलने का अनुमान है। लगातार एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी इस स्तर का भारी जनसमर्थन यह सिद्ध करता है कि जनता को केवल और केवल मोदी सरकार की स्थिरता, विकास कार्यों और राष्ट्र-हितैषी नीतियों पर पूरा भरोसा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत किसी एक शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय व्यापार, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा, शिक्षा और विनिर्माण के हर क्षेत्र में अपने विकल्प खुले रखे। आज संपूर्ण भारतवासियों के लिए यह गर्व का क्षण है कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली महाशक्ति का मीडिया भी मान रहा है कि भारत अब किसी के चयन का मोहताज नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपने दम पर अपना स्वर्णिम भविष्य खुद लिख रहा है।










