पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने लगातार दूसरी बार धमाकेदार अंदाज में अध्यक्ष पद जीतकर कैंपस की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। जीत के बाद प्रधान बने अंकित बिधान ने इसे Gen-Z की जीत बताया है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले एबीवीपी की इस जीत को कांग्रेस और आप दोनों के लिए जोरदार झटका माना जा रहा है। दरअसल, यह चुनाव परिणाम केवल कैंपस के भीतर छात्र प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश और विशेष रूप से पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति में आ रहे एक गहरे रणनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत है। एबीवीपी की दूसरी बार ऐतिहासिक जीत ने कैंपस की सियासत में ‘राइट विंग’ की पकड़ को न केवल अभेद्य बना दिया है, बल्कि इसे राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है। इस चुनाव में जिस प्रकार आरएसएस और शिरोमणि अकाली दल की छात्र विंग ने गठबंधन कर जीत का परचम लहराया, उसने पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। यह परिणाम सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह जीत विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले सामने आई है। पंजाब की बौद्धिक राजधानी माने जाने वाले इस परिसर से निकला यह जनादेश सीधे तौर पर राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने वाला है। 
एबीवीपी समर्थकों ने प्रतीक स्वरूप ‘झाड़ू’ तोड़ मनाया जश्न
एबीवीपी समर्थकों द्वारा जीत के तुरंत बाद प्रतीक स्वरूप ‘झाड़ू’ तोड़कर जश्न मनाना इस बात का खुला ऐलान है कि युवाओं का यह नया वर्ग वर्तमान सत्ता के तौर-तरीकों और उसके राजनीतिक दावों को सिरे से खारिज कर रहा है। खुद नवनिर्वाचित प्रधान अंकित बिधान ने अपनी इस शानदार और निर्णायक जीत को Gen-Z की जीत बताकर उस पारंपरिक धारणा को तोड़ दिया है, जिसके तहत युवा पीढ़ी को विचारधारा-मुक्त या केवल क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित मान लिया गया था। पंजाब यूनिवर्सिटी को पूरे सूबे के युवाओं के लिए बेहद अहम है। यहां की हवा जिस तरफ बहती है, पूरे पंजाब के युवा उसी दिशा में करवट लेने लगते हैं। अकाली दल की छात्र विंग एसओआई के समर्थन से हासिल की गई भारतीय जनता पार्टी समर्थित एबीवीपी की यह लगातार दूसरी विजय पंजाब की जटिल सियासत में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय ताकतों के एक नए सहज समन्वय की ओर इशारा करती है। यह स्पष्ट तौर पर संकेत दे रही है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में युवाओं की आकांक्षाएं, उनके मुद्दे और उनका झुकाव पुराने ढर्रे के राजनीतिक दलों की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
पीयू कैंपस में ‘लगातार दूसरी बार’ का ऐतिहासिक संदेश
पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास पर एक नजर डालें तो पता चलता है कि सत्ता विरोधी लहर या विभिन्न छात्र गुटों के आपसी बिखराव के कारण कोई भी संगठन लगातार शीर्ष पद पर काबिज नहीं रह पाता। लेकिन एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार प्रधान पद जीतकर इस मिथक को उलट दिया है। पिछले साल गौरव वीर सोहाल की जीत के बाद इस साल अंकित बिधान की यह विजय प्रमाणित करती है कि यह कोई तात्कालिक या संजोगवश मिली सफलता नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी सांगठनिक पैठ और कैंपस के भीतर तैयार किया गया मजबूत नैरेटिव है। भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए संजीवनी की तरह है क्योंकि पंजाब की धरती पर उसे हमेशा एक बाहरी पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिश की जाती रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जहां मालवा, माझा और दोआबा के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के सबसे प्रखर छात्र पढ़ते हैं, वहां राष्ट्रवाद और विकास के एजेंडे को लगातार दो बार स्वीकृति मिलना इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि पंजाब के युवाओं के बीच भाजपा की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
जीत का जश्न और ‘आप’ को सीधा राजनीतिक अल्टीमेटम
यह भी दिलचस्प है कि पीयू छात्र संघ के प्रधान बने अंकित बिधान की जीत की घोषणा के ठीक बाद कैंपस के स्टूडेंट सेंटर पर जो दृश्य दिखाई दिया, वह महज एक पारंपरिक विजय जुलूस नहीं लगा। एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘झाड़ू’ को तोड़कर हवा में लहराना एक गहरा राजनीतिक और आक्रामक संदेश बन गया। यह सीधा प्रहार पंजाब की सत्ता पर काबिज भगवंत मान सरकार और उनके छात्र संगठन ‘आसाप’ (ASAP) पर था, जो इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद पिछड़ गया। पिछले कुछ समय से पंजाब के युवाओं में रोजगार, कानून-व्यवस्था और वादों के पूरा न होने को लेकर जो आंतरिक असंतोष सुलग रहा था। इस चुनाव में वह एक सामूहिक गुस्से के रूप में फूट पड़ा। युवाओं ने इस प्रतीक के माध्यम से यह साफ कर दिया है कि वे केवल लोक-लुभावन नारों से बहलने वाले नहीं हैं, बल्कि वे धरातल पर ठोस परिणाम और एक मजबूत राष्ट्रवादी विकल्प की तलाश में हैं।
युवा छात्रों ने कांग्रेस के आत्मविश्वास की धज्जियां उड़ा दीं
पंजाब की राजनीति में खुद को पंजाबियों और सरदारों की स्वाभाविक पसंद बताने वाली कांग्रेस पार्टी और उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) के लिए भी यह चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक और आत्ममंथन को मजबूर करने वाला रहा। यहां लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस मानकर चल रही थी कि युवाओं का झुकाव उसकी तरफ बना हुआ है। लेकिन पीयू के छात्रों ने कांग्रेस के इस आत्मविश्वास की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। कैंपस में वैचारिक शून्यता और आंतरिक गुटबाजी के कारण कांग्रेस युवाओं को एक बेहतर विजन देने में पूरी तरह नाकाम रही। जब मुकाबला सीधे तौर पर एक तरफ मजबूत राष्ट्रवाद और दूसरी तरफ क्षेत्रीय दावों के बीच सिमट गया, तब कांग्रेस खुद को त्रिकोणीय मुकाबले में भी प्रभावी ढंग से स्थापित नहीं कर पाई। इससे आगामी विधानसभा चुनावों में भी उसकी राह और कठिन होने के संकेत मिलते हैं।
Gen-Z की आकांक्षाएं ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ
नवनिर्वाचित प्रधान अंकित बिधान द्वारा इस जीत को Gen-Z यानी इक्कीसवीं सदी की नई पीढ़ी की जीत बताना बेहद प्रासंगिक है। आज का युवा, जो साल 2000 के बाद पैदा हुआ है, वह अतीत के ऐतिहासिक दुराग्रहों, पंजाब के पुराने जख्मों और पारंपरिक राजनीति के बंधनों से मुक्त होकर सोचना चाहता है। उसे वैश्विक स्तर का बुनियादी ढांचा, पारदर्शी रोजगार व्यवस्था, उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर और एक सुरक्षित भविष्य चाहिए, जो कि उसे भाजपा सरकार ही दे सकती है। एबीवीपी ने डिजिटल माध्यमों, सीधा संवाद और युवाओं की आधुनिक भाषा में अपनी बात रखकर इस वर्ग को यह भरोसा दिलाया कि वह उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है। यह जीत दिखाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और देश को वैश्विक पटल पर मजबूत देखने की चाह का असर पंजाब के युवाओं के दिलों में भी गहराई से उतर चुका है।

अकाली-भाजपा छात्र विंग गठबंधन, नए राजनीतिक संकेत
इस छात्रसंघ चुनाव का एक टर्निंग पॉइंट यह भी रहा कि शिरोमणि अकाली दल की छात्र इकाई एसओआई (SOI) ने एबीवीपी को बिना शर्त समर्थन देने का एलान कर दिया। अकाली दल के छात्र गुट के उम्मीदवार का नामांकन तकनीकी कारणों से रद्द होने के बाद दोनों संगठनों ने रणनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया। इस गठबंधन ने पंजाब की पारंपरिक और पंथक राजनीति को एक नया आयाम दे दिया है। ऐतिहासिक रूप से अकाली दल और भाजपा का पुराना राजनीतिक गठबंधन पंजाब में सामाजिक सौहार्द और हिंदू-सिख एकता का प्रतीक माना जाता रहा है। किसान आंदोलन के दौर में आई खटास के बाद इस छात्र चुनाव के जरिए दोनों ताकतों का अनौपचारिक रूप से फिर से एक साथ आना यह संकेत देता है कि राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में भी बहुत जल्द बड़े राजनीतिक उलटफेर और नए गठबंधनों की जमीन तैयार हो सकती है।
आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव पर सकारात्मक और दूरगामी असर
सिटी ब्यूटीफुल यानि चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है। फरवरी में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के ठीक पहले आए इन नतीजों का मनोवैज्ञानिक असर पूरे राज्य के मतदाताओं पर पड़ना तय है। भाजपा, जो पंजाब में खुद को एक स्वतंत्र और मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर रही है, उसे इस जीत से एक बड़ा नैतिक बल मिला है। पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले और यहां से पास आउट होने वाले छात्र राज्य के कोने-कोने में जाते हैं और वे समाज में ओपिनियन मेकर्स की भूमिका निभाते हैं। जब यह संदेश गांवों और कस्बों तक जाएगा कि पंजाब के सबसे पढ़े-लिखे और जागरूक युवाओं ने भाजपा समर्थित संगठन को चुना है, तो भाजपा के प्रति ग्रामीण इलाकों में व्याप्त समर्थन मिलेगा। कांग्रेस और आप ने इसके खिलाफ जो नकारात्मक नैरेटिव बनाया है, वह स्वतः ही कमजोर होने लगेगा। यह जीत पंजाब के चुनावों में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए एक मजबूत लॉन्चपैड साबित हो सकती है।
एबीवीपी की जीत की आंधी पूरे पंजाब के युवाओं को झकझोरेगी
पंजाब यूनिवर्सिटी महज एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है; इसे पूरे मालवा, माझा और दोआबा क्षेत्र का दिल कहा जा सकता है। यहां पंजाब के सबसे प्रभावशाली, राजनीतिक रूप से जागरूक और सुदूर गांवों से लेकर संभ्रांत परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। पीयू के छात्रसंघ चुनावों के नतीजों का असर राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों, क्षेत्रीय केंद्रों और निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों पर सीधे तौर पर पड़ता है। यहां से तय होने वाला ट्रेंड पूरे राज्य के युवा वोट बैंक को प्रभावित करता है। चूंकि पंजाब की कुल आबादी में युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या बहुत बड़ी है, इसलिए पीयू कैंपस में एबीवीपी की यह आंधी पूरे पंजाब के युवा मानस में एक बड़े वैचारिक बदलाव केलिए आगे आने के लिए प्रेरित करेगी।
ABVP ने पंजाब विश्वविद्यालय कैंपस छात्र परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया।
पंजाब में राजनीतिक हवाएं स्पष्ट रूप से बदल रही हैं।
क्या यह पंजाब में भाजपा के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है? 🚩🔥 pic.twitter.com/guPbC04sTU
— Indian🇮🇳 (@singh31919) August 31, 2026
पंजाबियत और एबीवीपी की राष्ट्रवाद की विचारधारा का संगम
दरअसल, बीते कुछ वर्षों में कुछ नकारात्मक ताकतों द्वारा पंजाब को राष्ट्रीय मुख्यधारा से अलग-थलग करने और युवाओं को कट्टरपंथ या अलगाववादी सोच की तरफ धकेलने के कुत्सित प्रयास किए गए हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी के इन नतीजों ने उन सभी ताकतों को करारा जवाब दिया है। छात्रों ने यह साफ कर दिया है कि वे क्षेत्रीय अस्मिता का सम्मान करते हैं, लेकिन वे देश की मुख्यधारा और राष्ट्रीय प्रगति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं। अकाली दल (एसओआई) की पंजाबियत और एबीवीपी की राष्ट्रवाद की विचारधारा का यह संगम दिखाता है कि पंजाब का युवा अब एक ऐसे संतुलित विचारों के साथ खड़ा है, जहां राज्य के विकास और राष्ट्र की सुरक्षा दोनों को समान महत्व है।
कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और आप का बिखरता किला
पंजाब यूनिवर्सिटी का यह चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की सांगठनिक कमजोरियों को भी उजागर करता है। ‘आप’ ने सत्ता में होने के बावजूद सरकारी मशीनरी और जनसंपर्क का पूरा जोर लगाया, लेकिन वे युवाओं की जमीनी हकीकत को नहीं भांप सके। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस के भीतर की अंतहीन कलह और स्पष्ट दिशा का अभाव उनके पतन का कारण बना। विपक्ष की इस वैचारिक कंगाली और सांगठनिक बिखराव का सीधा फायदा एबीवीपी को मिला, जिसने एक अनुशासित कैडर और स्पष्ट नेतृत्व के साथ अपनी पकड़ को ढीला नहीं होने दिया। युवाओं ने यह संदेश दे दिया है कि वे केवल विरोध की राजनीति को पसंद नहीं करते, उन्हें एक स्थिर और सक्षम नेतृत्व चाहिए।
विधानसभा चुनाव से पहले एक नए पंजाब की शुरुआत का शंखनाद
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के ये नतीजे केवल एक छात्र नेता की जीत या किसी संगठन के जश्न तक सीमित नहीं हैं। यह पंजाब की राजनीति में आने वाले एक बड़े और व्यापक तूफान से पहले की दस्तक है। अंकित बिधान की जीत, कांग्रेस की अंतहीन कलह और आप सरकार के प्रति युवाओं का आक्रोश इस बात का प्रतीक है कि पंजाब का युवा अब प्रयोगों की राजनीति से थक चुका है। वह एक ठोस, राष्ट्रवादी और विकासोन्मुखी सरकार के विकल्प की ओर बढ़ रहा है। अकाली दल और भाजपा समर्थित ताकतों का यह अनकहा समन्वय यदि आगामी महीनों में धरातल पर मजबूत गठबंधन का रूप लेता है, तो अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के परिणाम बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं। पीयू के इस जनादेश ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पंजाब की सियासत का ऊंट अब किस करवट बैठने जा रहा है।
Panjab University has chosen ABVP with an overwhelming mandate, electing Ankit Bidhan as the President of the Panjab University Campus Students’ Council.
This is not just a victory at the ballot box—it is a powerful expression of students’ faith in ABVP’s commitment to student… pic.twitter.com/D07hAZt9OX
— ABVP (@ABVPVoice) August 31, 2026

पंजाब के युवा आखिर मान सरकार से खासे नाराज क्यों हैं? इसके पीछे बेरोजगारी और पेपर लीक बिग इश्यू हैं। आइए, जानते हैं कि आप सरकार के दौरान किन-किन परीक्षाओं के पेपर लीक हुए…
1.फॉर्मेसी का पेपर लीक, कीमत 3.5 लाख से 13 लाख रुपये
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत 454 फार्मेसी अफसरों की भर्ती के लिए हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) द्वारा परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें करीब 7,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। ये परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस और पुलिस की फ्लाइंग टीमों ने फरीदकोट, फिरोजपुर और कोट कपूरा के सेंटरों पर छापेमारी की। इसमें 28 उम्मीदवारों सहित कुल 35 लोगों को धर दबोचा। अभ्यर्थी पगड़ी, जुराबों और अंडरगारमेंट्स में बटन और छोटे वायरलेस ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर लाए थे। फिरोजपुर के एक सेंटर से पेन कैमरे से प्रश्नपत्र स्कैन कर व्हाट्सएप पर लीक करके भेजा गया, जहां हरियाणा और राजस्थान से ऑपरेट हो रहे कंट्रोल रूम से अभ्यर्थियों को उत्तर बोले जा रहे थे। खबरों के मुताबिक ये गैंग प्रति कैंडिडेट 3.5 लाख से 13 लाख रुपये वसूल रहा था। इस भारी सुरक्षा चूक और धांधली के बाद स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग उठना बेहद लाजिमी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ हुआ एक खिलवाड़ है।

2.कृषि विकास अधिकारी (ADO) भर्ती: अन्नदाताओं से छल
पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां कृषि विकास अधिकारी (ADO) की भर्ती सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र मानी जानी चाहिए थी, वहां भी धांधली की दीमक ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया। परीक्षा के आयोजन से लेकर उसके प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने में पंजाब का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ। जब इस परीक्षा के पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर की खबरें आम हुईं, तो योग्य उम्मीदवारों का मनोबल पूरी तरह टूट गया। आम आदमी पार्टी जो ‘बदलाव’ के बड़े-बड़े दावे कर सत्ता में आई थी, उसकी नाक के नीचे कृषि विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली इस परीक्षा का सौदा हो गया, लेकिन सरकार आज भी जांच के नाम पर लीपापोती करने में व्यस्त है। विपक्ष ने इसे सीधा पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी करार देते हुए राज्य के जिम्मेदार मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

3.नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा: प्रशासनिक साख पर बट्टा
राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक, नायब तहसीलदार की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होना पंजाब सरकार के माथे पर एक गहरा कलंक है। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा केंद्रों से ब्लूटूथ के जरिए नकल के तार सीधे तौर पर बड़े रसूखदारों से जुड़े पाए गए थे। इस घोटाले ने यह साबित कर दिया कि पंजाब में पीपीएससी (PPSC) जैसी संवैधानिक संस्थाओं की गोपनीयता को भी बड़े सिंडिकेट्स ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके बावजूद जिम्मेदार मंत्रियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी व्यवस्था को ढंकने की पुरजोर कोशिश की गई, जो सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
4.PSTET बोर्ड परीक्षा: खुद ही नकल की थाली परोसी
पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) 2023 के दौरान जो ऐतिहासिक ब्लंडर सामने आया, उसने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के सभी दावों की धज्जियां उड़ा दी थीं। परीक्षा में सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र में 50 से अधिक प्रश्नों के सही उत्तर पहले से ही बोल्ड अक्षरों में छाप दिए गए थे। यह किसी पेपर लीक से भी बदतर प्रशासनिक अक्षमता का उदाहरण था, जहां पेपर सेट करने वालों ने खुद ही नकल की थाली परोस दी थी। इस भयंकर लापरवाही के बाद पूरी परीक्षा को रद्द करना पड़ा, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हुए, लेकिन इस ब्लंडर के मुख्य राजनीतिक जिम्मेदार आज भी अपने पदों पर शान से बरकरार हैं।
5.पंजाब बोर्ड का 12वीं कक्षा का अंग्रेजी विषय का पेपर लीक
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की 12वीं कक्षा की अंग्रेजी (अनिवार्य) परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से ऐन पहले लीक हो गया था। इस पेपर लीक में पंजाब बोर्ड मुख्य प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। यह परीक्षा दोपहर 2:00 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सोशल मीडिया (व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स) पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद परीक्षा शुरू होने से महज एक से डेढ़ घंटा पहले इसे रद्द कर दिया गया। इसके चलते लाखों छात्र प्रभावित हुए। परीक्षा केंद्रों पर पहुंच चुके लगभग 3 लाख छात्रों को ऐन वक्त पर मायूस होकर लौटना पड़ा था। परीक्षा रद्द होने के बाद भी बोर्ड की एक और शर्मनाक लापरवाही सामने आई। लुधियाना और फिरोजपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर स्टाफ ने नया प्रश्नपत्र देने के बजाय गलती से बैंक लॉकर से पुराना लीक हो चुका प्रश्नपत्र ही दोबारा बांट दिया। इसके चलते उन केंद्रों के छात्रों को तीसरी बार परीक्षा में बैठना पड़ा था।
6.पंजाब एक्साइज एंड टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती में फर्जीवाड़ा
पंजाब एक्साइज एंड टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती (197 पद) की मेरिट लिस्ट में गंभीर और तकनीकी विसंगतियां सामने आने के बाद यह पूरी भर्ती प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) द्वारा जारी की गई आधिकारिक मेरिट लिस्ट में भारी प्रशासनिक लापरवाही और फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। विपक्षी नेताओं और उम्मीदवारों द्वारा उजागर किए गए तथ्यों के अनुसार, मेरिट लिस्ट में अभ्यर्थियों के असली नामों की जगह SBI, GIPS और यहां तक कि Photo जैसे फर्जी नाम दर्ज पाए गए। इस डेटाबेस विसंगति, पारदर्शिता की कमी और व्यापक धांधली के खिलाफ उम्मीदवारों (अलका और अन्य) ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत में चौतरफा घिरने के बाद, पंजाब सरकार को हाई कोर्ट में अंडरटेकिंग (लिखित आश्वासन) देना पड़ा कि वे फिलहाल इस आबकारी निरीक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएंगे और इस पर रोक लगा दी गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के स्थानीय विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की ‘आम आदमी पार्टी’ सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब में मेरिट पर नौकरी देने के दावे पूरी तरह खोखले हैं और यह सीधे तौर पर होनहार युवाओं के भविष्य के साथ हुआ एक बड़ा ‘सिस्टमैटिक विश्वासघात’ है।

7.PSSSB की ग्रुप-बी संयुक्त भर्ती परीक्षा गंभीर धांधलियां
पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की दो परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे। (PSSSB) द्वारा आयोजित ग्रुप-बी (Group-B) संयुक्त भर्ती परीक्षा गंभीर धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के कारण बड़े विवाद में है। यह कंबाइंड परीक्षा 408 उच्च पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य के लगभग 1 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। इस भर्ती की कई धांधलियों में से एक बठिंडा से असामान्य टॉपर लिस्ट रही। परीक्षा के नतीजे जारी होने के बाद सबसे बड़ा विवाद इसके मेरिट पैटर्न को लेकर हुआ। राज्य की अंतिम टॉप-100 उम्मीदवारों की सूची में से 22 अभ्यर्थी अकेले बठिंडा क्षेत्र से थे। इस संदेहास्पद सूची में एक ही परिवार के करीबी रिश्तेदार (पति-पत्नी, भाई-बहन और चचेरे भाई-बहन) एक साथ टॉपर लिस्ट में चयनित हुए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पेपर परीक्षा से एक दिन पहले ही बठिंडा में लीक होकर चुनिंदा सेंटरों तक पहुंच गया था। बठिंडा के परीक्षा केंद्रों से यह गंभीर शिकायत सामने आई कि उम्मीदवारों को बांटे जाने से पहले ही प्रश्नपत्रों और सील में व्हाइटनर लगाकर बदलाव किए गए थे। दिलचस्प तथ्य यह भी रहा कि इसकी पूर्व की परीक्षाओं में फेल छात्र अब टॉपर बन गए थे। चौतरफा विरोध और मुख्यमंत्री भगवंत मान तक मामला पहुंचने के बाद, चयन बोर्ड (SSSB) ने खुद पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को पत्र लिखकर इस महाघोटाले की उच्च स्तरीय जांच सौंप दी।









