Home पोल खोल कर्नाटक: ‘पार्क बिल’ रद्द, 70% कमीशन और घोटालों पर घिरी कांग्रेस, बैकफुट...

कर्नाटक: ‘पार्क बिल’ रद्द, 70% कमीशन और घोटालों पर घिरी कांग्रेस, बैकफुट पर आई सरकार

SHARE

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के आक्रामक रुख तथा जनता के भारी आक्रोश के आगे कांग्रेस सरकार को घुटने टेकने पड़े हैं। बेंगलुरु की हरी-भरी पहचान और सार्वजनिक पार्कों को भू-माफिया के हवाले करने की मंशा से लाए गए ‘कर्नाटक गवर्नमेंट पार्क्स (प्रिजर्वेशन) अमेंडमेंट बिल’ को कैबिनेट ने जनदबाव में वापस ले लिया है। वहीं दूसरी तरफ, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार के ’70 प्रतिशत कमीशन मॉडल’ और संगठित ‘हफ्ता वसूली’ का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। इसके साथ ही, KPSC भर्ती धांधली, मंडियों में टोल वसूली, SC-ST फंड में हजारों करोड़ की हेराफेरी, वक्फ बोर्ड द्वारा जमीनों पर दावे, हिंदू मंदिरों पर टैक्स, सीबीआई पर पाबंदी, ठेकेदारों की तबाही और कानून-व्यवस्था की बदहाली को लेकर NDA गठबंधन ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी के दोहरे चरित्र पर सीधा प्रहार किया है।

जनहित और BJP के तेवर के सामने बैकफुट पर कांग्रेस: कैबिनेट को वापस लेना पड़ा जनविरोधी ‘पार्क बिल’
कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में बिना व्यापक चर्चा के पार्क संशोधन विधेयक पारित कराया था, जिसके तहत सार्वजनिक और सामुदायिक पार्कों की पांच प्रतिशत जमीन को निर्माण कार्यों के नाम पर अधिग्रहित करने की छूट दी गई थी। बेंगलुरु के ऐतिहासिक लालबाग और शहर के अन्य पार्कों को कंक्रीट के जंगल में बदलने के इस फैसले का BJP ने पुरजोर विरोध किया। BJP सांसद तेजस्वी सूर्या, प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और वरिष्ठ नेताओं ने जनता को साथ लेकर सड़कों पर मोर्चा खोल दिया। राज्यपाल से मिलने और व्यापक आंदोलन की चेतावनी मिलते ही कैबिनेट डर गई और आनन-फानन में बैठक बुलाकर इस विवादित बिल को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। यह बेंगलुरु की जनता और सजग विपक्ष के रूप में BJP की बहुत बड़ी जीत है।

अब सब्जी मंडियों में भी टोल वसूली: किसानों और छोटे व्यापारियों पर कांग्रेस का नया ‘जजिया कर’
लूट और उगाही की सारी सीमाएं लांघते हुए कांग्रेस सरकार ने अब सब्जी और फल मंडियों (APMC मार्केट यार्ड) तक में प्रवेश शुल्क और टोल वसूलने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। अपनी उपज बेचने आने वाले गरीब किसानों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों से मंडियों के प्रवेश द्वार पर जबरन टोल वसूला जा रहा है। BJP ने इस कदम का तीखा विरोध करते हुए इसे किसानों की कमर तोड़ने वाला फैसला बताया है। खजाना खाली होने के बाद अब अन्नदाताओं के पसीने की कमाई से टोल के नाम पर हफ्ता वसूली की जा रही है, जिससे मंडियों में आने वाली हरी सब्जियों और रोजमर्रा के सामानों के दाम और अधिक बढ़ गए हैं।

टनल रोड और मेगा प्रोजेक्ट्स के नाम पर लूट: निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश
पार्क संशोधन बिल केवल साधारण निर्माण का मामला नहीं था, बल्कि बेंगलुरु में प्रस्तावित भारी-भरकम बजट वाले विवादित ‘टनल रोड प्रोजेक्ट’ के लिए जमीन जुटाने का गुप्त खेल था। BJP ने पर्दाफाश किया कि कांग्रेस सरकार अरबों रुपये के टनल रोड प्रोजेक्ट के जरिए निजी कंपनियों और चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाना चाहती थी। ऐतिहासिक पार्कों की जमीन पर बुलडोजर चलाकर कमीशन जुटाने का यह ताना-बाना बुना गया था, जिसे BJP की सजगता ने समय रहते ध्वस्त कर दिया।

‘गार्डन सिटी’ को कंक्रीट माफिया को सौंपने की साजिश: ब्रांड बेंगलुरु की साख पर कांग्रेस का हमला
बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली और हरित ‘गार्डन सिटी’ के रूप में वैश्विक पहचान हासिल है। पार्क संशोधन बिल लाकर कांग्रेस सरकार ने इस अंतरराष्ट्रीय साख पर सीधा बट्टा लगाने की कोशिश की थी। लालबाग और कब्बन पार्क जैसी ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास निर्माण की अनुमति देकर पर्यावरण को गंभीर खतरे में डाला जा रहा था। BJP ने इस कदम को सीधे तौर पर रियल एस्टेट और बिल्डर माफिया को उपकृत करने का कांग्रेस का गुप्त एजेंडा करार दिया। विपक्ष के मजबूत प्रतिरोध के चलते यह साजिश नाकाम हुई और बेंगलुरु के हरित फेफड़ों को विनाश से बचा लिया गया।

दलितों और आदिवासियों के हक पर डाका: SCSP-TSP फंड का हजारों करोड़ रुपया गारंटियों में डायवर्ट
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलावादी नारायणस्वामी और BJP नेताओं ने कांग्रेस के तथाकथित दलित प्रेम का पर्दाफाश करते हुए बड़ा खुलासा किया है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उत्थान और कल्याण के लिए तय ‘SCSP-TSP’ फंड से हजारों करोड़ रुपये काटकर चुनावी गारंटी योजनाओं में डायवर्ट कर दिए गए। वाल्मीकि निगम के 187 करोड़ रुपये के गबन के बाद पूरे दलित-आदिवासी समुदाय के बजट पर डाका डालकर कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि उसके लिए बाबा साहब आंबेडकर का संविधान और वंचितों का विकास सिर्फ दिखावा है।

किसानों और प्राचीन मठों की जमीन पर वक्फ की नजर: कांग्रेस के तुष्टिकरण पर BJP का तीखा प्रहार
कांग्रेस सरकार के तुष्टिकरण का सबसे खतरनाक चेहरा तब सामने आया जब वक्फ बोर्ड ने विजयपुरा और अन्य जिलों में पीढ़ियों से खेती कर रहे किसानों की पुश्तैनी जमीन, ऐतिहासिक मंदिरों और प्राचीन हिंदू मठों की संपत्तियों पर अपना दावा ठोकते हुए नोटिस जारी कर दिए। BJP ने इसे खुलेआम किसानों की जमीन हड़पने का सरकारी षड्यंत्र करार दिया। पार्क बिल से लेकर वक्फ नोटिस तक, यह साफ हो गया है कि कांग्रेस सरकार की नजर हर उस सार्वजनिक, धार्मिक और निजी जमीन पर है जिसे तुष्टिकरण या भू-माफिया के हित में इस्तेमाल किया जा सके।

हिंदू मंदिरों के चढ़ावे पर 10% टैक्स की कोशिश: सनातन विरोधी नीतियों का खुला प्रदर्शन
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने हिंदू धार्मिक संस्थानों पर डाका डालने के लिए ‘कर्नाटक हिंदू रिलीजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट्स अमेंडमेंट बिल’ लाकर अमीर मंदिरों के राजस्व से 10 प्रतिशत तक फंड सरकारी नियंत्रण में लेने का प्रयास किया। BJP ने इसे आधुनिक युग का ‘जजिया कर’ करार देकर सड़क से सदन तक घेराबंदी की। जनता और विपक्ष का सीधा सवाल है कि सरकार केवल हिंदू मंदिरों के चढ़ावे पर ही अपनी नजर क्यों गड़ाए हुए है, जबकि अन्य धर्मों के पूजा स्थलों को पूरी तरह स्वायत्तता और सरकारी अनुदान दिया जा रहा है।

हिंदू आस्था पर चोट: गणेश प्रतिमाओं का अपमान और त्योहारों पर पाबंदियों से आक्रोश
तुष्टिकरण की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब नागमंगला में भगवान गणेश की विसर्जन यात्रा पर असामाजिक तत्वों द्वारा पथराव किया गया और उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन लीपापोती में जुटा रहा। राजधानी बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा भगवान गणेश की प्रतिमा को सरकारी वाहन में लादकर ले जाने की तस्वीरों ने हर सनातनी को झकझोर कर रख दिया। हिंदू त्योहारों, डीजे और जुलूसों पर अनगिनत पाबंदियां थोपने वाली सरकार दंगाइयों के आगे पूरी तरह नतमस्तक दिखाई दी।

कर्नाटक में चल रही गुंडा-राउडी सरकार, 100 में से 70 रुपये कमीशन में जा रहे
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर सीधा वार करते हुए कहा कि राज्य में विकास पूरी तरह ठप हो चुका है। उन्होंने कांग्रेस विधायक अशोक राय के पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य में 70 प्रतिशत कमीशन का खुला खेल चल रहा है। विकास कार्यों के लिए यदि 100 रुपये आते हैं, तो उसमें से 70 रुपये मंत्रियों और अफसरों की जेब में कमीशन के तौर पर जाते हैं और काम के लिए मात्र 30 रुपये बचते हैं। अशोक ने कहा कि यह सरकार केवल ‘हफ्ता वसूली’ करने में व्यस्त है, जहां ठेकेदारों और अधिकारियों को खुलेआम धमकाया जा रहा है।

33 हजार करोड़ का बकाया और कमीशनखोरी: कांग्रेस राज में भुखमरी की कगार पर पहुंचे ठेकेदार
कर्नाटक स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (KSCA) ने आधिकारिक तौर पर आरोप लगाया है कि कांग्रेस राज में कमीशनखोरी की दरें चरम पर पहुंच चुकी हैं। ठेकेदारों के 30 से 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बिल जानबूझकर रोके गए हैं। पुराने भुगतान जारी करने और नए टेंडर पास करने के नाम पर मंत्रियों द्वारा खुली उगाही की जा रही है। काम पूरा करने के बाद भी भुगतान न मिलने से छोटे ठेकेदार कर्ज और भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे कांग्रेस का तथाकथित भ्रष्टाचार विरोधी मुखौटा पूरी तरह उतर गया है।

घोटालों की जांच से डर: कर्नाटक में CBI की खुली एंट्री पर रोक और संस्थाओं से टकराव
जब MUDA जमीन घोटाले, वाल्मीकि निगम के गबन और शीर्ष मंत्रियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप अदालत तक पहुंचे, तो कांग्रेस सरकार ने बौखलाहट में राज्य में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की सामान्य सहमति (General Consent) ही वापस ले ली। BJP ने इसे ‘चोरी और ऊपर से सीनाजोरी’ करार देते हुए कहा कि जो सरकार खुद को पाक-साफ बताती है, वह केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्र जांच से क्यों भाग रही है? यह फैसला सिद्ध करता है कि कांग्रेस अपने मंत्रियों और घोटालों के सिंडिकेट को कानूनी शिकंजे से बचाना चाहती है।

KPSC भर्ती घोटाला: ढाई लाख पद खाली, रिसॉर्ट में बांटे गए पर्चे; BJP-JDS का तीखा प्रहार
कर्नाटक के लाखों युवाओं का भविष्य संवारने के बजाय कांग्रेस सरकार ने सरकारी भर्तियों को उगाही का साधन बना दिया है। KPSC द्वारा आयोजित सहायक कार्यकारी अभियंता (AEE) और पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षाओं में भारी धांधली, ओएमआर शीट में हेरफेर और प्रश्नपत्र लीक होने के संगीन मामले सामने आए हैं। सीआईडी जांच में खुलासा हुआ कि उम्मीदवारों से 40 से 80 लाख रुपये लेकर रिसॉर्ट और विला में बैठाकर पर्चे हल करवाए गए। केंद्रीय मंत्री और JDS नेता एच.डी. कुमारस्वामी तथा BJP नेताओं ने सीधे सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। राज्य में 2.5 लाख से अधिक सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन योग्यता के आधार पर भर्ती करने के बजाय युवाओं के सपनों की बोली लगाई जा रही है।

महर्षि वाल्मीकि से लेकर MUDA और KPSC तक: संस्थागत भ्रष्टाचार का कांग्रेस मॉडल
कर्नाटक में भ्रष्टाचार किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी सरकार की कार्यशैली बन चुका है। महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 180 करोड़ रुपये का गबन हुआ, जिसका पैसा दूसरे राज्यों के चुनाव में ट्रांसफर करने के खुलासे के बाद मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह MUDA भूखंड आवंटन में सत्ता के शीर्ष स्तर पर अपने परिजनों को फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया। अब KPSC भर्ती घोटाले ने यह साबित कर दिया है कि दलितों, आदिवासियों, युवाओं और आम जनता के हक का पैसा हड़पना कांग्रेस के डीएनए में शामिल है।

कर्नाटक बना 10 जनपथ का ‘एटीएम’: चुनाव फंड जुटाने के लिए जनता की जेब पर डाका
BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की वर्तमान कांग्रेस सरकार राज्य के विकास के लिए नहीं, बल्कि नई दिल्ली स्थित पार्टी हाईकमान के लिए ‘एटीएम’ की तरह काम कर रही है। देश भर के चुनावों के लिए फंड का इंतजाम करने की जिम्मेदारी कर्नाटक पर डाल दी गई है। 70 प्रतिशत कमीशन, भर्ती घोटालों, मंडी टोल और भूमि सौदों से लूटा गया धन सीधे हाईकमान की तिजोरी में भेजा जा रहा है। कर्नाटक की जनता की गाढ़ी कमाई से कांग्रेस अपने राष्ट्रीय चुनावी खर्चे निकालने में जुटी हुई है।

गारंटियों का झांसा, पीछे से जनता की जेब पर डाका: पेट्रोल-डीजल, दूध और बिजली के दाम बढ़ाए
कांग्रेस सरकार एक हाथ से गारंटी योजनाओं का ढोंग कर रही है और दूसरे हाथ से आम आदमी की जेब काट रही है। वित्तीय कुप्रबंधन के चलते सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ा दिया, नंदिनी दूध की कीमतों में बार-बार वृद्धि की, बिजली टैरिफ में इजाफा किया और प्रॉपर्टी गाइडेंस वैल्यू व स्टाम्प ड्यूटी बढ़ाकर मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी। मुफ्त योजनाओं का ढिंढोरा पीटकर जनता पर चौतरफा महंगाई का बोझ लाद दिया गया है।

राहुल गांधी का दोहरा चरित्र: दिल्ली में अडानी पर प्रहार, बेंगलुरु में रेड कार्पेट और निवेश बैठकें
BJP ने संसद और चुनावी रैलियों में राहुल गांधी के दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली और अन्य राज्यों में उद्योगपतियों और अडानी समूह के खिलाफ दिन-रात बयानबाजी करने वाले राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी की कर्नाटक सरकार उसी औद्योगिक समूह के साथ राज्य में निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए बैठकें करती है और समझौते करती है। यह दोहरापन साबित करता है कि कांग्रेस के लिए उद्योग विरोधी बातें केवल जनता को गुमराह करने का राजनीतिक ढोंग हैं, जबकि पर्दे के पीछे सांठगांठ का खेल बदस्तूर जारी है।

विफलता छिपाने के लिए जाति जनगणना का दांव: समाज में फूट डालने का खेल
जब भी सरकार घोटालों, कमीशनखोरी और प्रशासनिक विफलताओं से घिरती है, वह तुरंत ध्यान भटकाने के लिए पुरानी और विवादित कांतराज आयोग की जातिगत जनगणना रिपोर्ट का शिगूफा छोड़ देती है। बिना किसी पारदर्शी जमीनी सर्वेक्षण के तैयार की गई इस रिपोर्ट के जरिए लिंगायत, वोक्कालिगा और अन्य प्रमुख समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने की साजिश की जा रही है। BJP ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस विकास देने में पूरी तरह नाकाम रही है, इसलिए वह समाज को जातियों में बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है।

खजाना खाली, विकास शून्य: चुनावी रेवड़ियों के फेर में ठप हुए बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट
राज्य की आर्थिक स्थिति बदहाली की कगार पर पहुंच चुकी है। अनियोजित और बिना वित्तीय प्रबंधन वाली चुनावी रेवड़ियों के कारण राज्य का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है। विधायकों को विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिल पा रहा है। इस वित्तीय संकट की भरपाई करने के लिए जनता पर लगातार टैक्स और सेस का बोझ डाला जा रहा है, जिससे राज्य में नई सड़कों, पुलों और पेयजल परियोजनाओं का बुनियादी काम पूरी तरह ठप हो गया है।

केंद्र के पैसे पर अपनी ब्रांडिंग और मोदी सरकार की योजनाओं पर ब्रेक
BJP ने कांग्रेस सरकार की संकीर्ण मानसिकता पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्नाटक के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार उन पर कुंडली मारकर बैठी है। रेलवे दोहरीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, स्मार्ट सिटी और नम्मा मेट्रो फेज के विस्तार के लिए राज्य सरकार न तो समय पर भूमि अधिग्रहण कर रही है और न ही अपना अनिवार्य वित्तीय हिस्सा दे रही है। केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं पर अपना ठप्पा लगाने की होड़ में कांग्रेस राज्य के विकास को अटकाने का काम कर रही है।

विकास ठप, कानून-व्यवस्था ध्वस्त: दंगाइयों और असामाजिक तत्वों को खुला संरक्षण
राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। कांग्रेस सरकार पर वोट बैंक साधने के लिए तुष्टिकरण की नीति पर चलने और असामाजिक तत्वों पर नरम रुख अपनाने के गंभीर आरोप हैं। हुबली से लेकर बेंगलुरु तक, दंगाइयों पर दर्ज केस वापस लेने और जांच को कमजोर करने की कोशिशों ने राज्य की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। आम नागरिक, व्यापारी और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन का राजनीतिक इस्तेमाल केवल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।

कुर्सी की खींचतान में पिसती कर्नाटक की जनता: कैबिनेट के भीतर सिर-फुटौव्वल
कर्नाटक में सरकार जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय केवल अपने अंदरूनी सत्ता संघर्ष को संभालने में उलझी हुई है। मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता के विकेंद्रीकरण को लेकर कैबिनेट के भीतर भारी अंतर्कलह और गुटबाजी चल रही है। मंत्रियों के बीच शक्ति संतुलन की लड़ाई में राज्य का प्रशासन पंगु हो चुका है। पार्क बिल जैसे विवादित फैसले भी इसी प्रशासनिक अराजकता का नतीजा थे, जिसे भारी फजीहत और हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद वापस लेना पड़ा।

BJP-JDS की अटूट एकता: विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस के अहंकार पर भारी पड़ा एनडीए
सदन से लेकर सड़क तक BJP और JDS का संयुक्त मोर्चा पूरी ताकत के साथ कांग्रेस के कुशासन के खिलाफ दीवार बनकर खड़ा है। फ्लोर कोऑर्डिनेशन के जरिए विपक्ष ने सरकार को हर मोर्चे पर बैकफुट पर धकेल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, आर. अशोक और एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व में NDA के दोनों घटक दलों ने यह साबित कर दिया है कि वे जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने दो टूक कहा है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक भ्रष्ट कांग्रेस सरकार की राज्य से पूरी तरह विदाई नहीं हो जाती।

‘हाथ में संविधान लेकर घूमने वाले राहुल गांधी युवाओं के शोषण पर मौन क्यों?’
विपक्ष ने इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पाखंड को कटघरे में खड़ा किया है। देश भर में संविधान की प्रति लेकर छात्रों और युवाओं के हितैषी बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी कर्नाटक के पीड़ित अभ्यर्थियों के आंसुओं पर पूरी तरह मौन हैं। जब कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकार युवाओं के भविष्य को नीलाम कर रही है और दलितों का बजट छीन रही है, तब राहुल गांधी बेंगलुरु आकर पीड़ितों से मिलने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाते? यह चुप्पी साबित करती है कि कांग्रेस के लिए युवा और वंचित वर्ग केवल चुनावी मोहरे हैं, जबकि हकीकत में उनका हित सिर्फ लूट और उगाही से जुड़ा है।

कांग्रेस के कुशासन और जनविरोधी नीतियों का अंत तय
कर्नाटक में कांग्रेस का जनविरोधी, तुष्टिकरण से भरा और आकंठ भ्रष्ट रवैया पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। एक तरफ पार्कों, किसानों की जमीनों और हिंदू मठों पर नजर थी, तो दूसरी तरफ 70 प्रतिशत कमीशन, मंडियों में टोल वसूली, एससी-एसटी बजट की लूट, सीबीआई पर पाबंदी, ठेकेदारों की बर्बादी और भर्ती परीक्षाओं में संस्थागत धांधली का तंत्र खड़ा कर दिया गया है। पार्क बिल की वापसी यह दर्शाती है कि जब सजग विपक्ष के रूप में BJP और NDA गठबंधन जनता के हक के लिए आवाज उठाता है, तो अहंकारी सरकार को भी घुटने टेकने पड़ते हैं। कर्नाटक की जनता अब इस लूट और छलावे को भली-भांति समझ चुकी है। युवाओं, किसानों और गरीबों के साथ हुए धोखे के खिलाफ यह संयुक्त आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक भ्रष्टाचारियों को सजा और जनता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता।

Leave a Reply