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मोदी राज में बम-बम इकोनॉमी: 2 लाख करोड़ के करीब GST कलेक्शन, रिकॉर्ड हाई पर मुद्रा भंडार, 7.8% GDP ग्रोथ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती का प्रदर्शन कर रही है। सितंबर की शुरुआत में सामने आए आर्थिक आंकड़े देश के लिए दोहरी नहीं, बल्कि चौतरफा खुशखबरी लेकर आए हैं। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, वहीं अगस्त 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन 14.8 प्रतिशत बढ़कर 1,99,853 करोड़ रुपये रहा। नेट प्रत्यक्ष कर संग्रह भी 23 प्रतिशत बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP 7.8 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ी है। इन आंकड़ों को मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, सुधारों, मजबूत राजकोषीय प्रबंधन और देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के सकारात्मक परिणाम के तौर पर देखा जा सकता है। यह संकेत है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी विकास यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।

GST कलेक्शन 14.8% बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये
अगस्त के महीने में देश का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़कर 1.99 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल अगस्त 2025 में 1.74 लाख करोड़ रुपये था। यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों और मांग में सुधार का संकेत देती है। घरेलू लेनदेन से लेकर आयात तक, सभी हिस्सों में टैक्स संग्रह मजबूत रहा। साथ ही GST रिफंड के बाद भी नेट रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई। यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था में खपत और कारोबार दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ रही हैं। अगस्त के दौरान केंद्रीय GST (CGST) संग्रह 38,413 करोड़ रुपये और राज्य GST (SGST) संग्रह 46,316 करोड़ रुपये रहा। वहीं, एकीकृत GST (IGST) संग्रह 1.15 लाख करोड़ रुपये रहा। आयात से प्राप्त IGST संग्रह में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त में यह 29 फीसदी बढ़कर 62,604 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। GST रिफंड भी अगस्त में 67.9 फीसदी बढ़कर 31,795 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध GST राजस्व लगभग 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 फीसदी अधिक है।

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शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23% बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मोर्चे पर लगातार अच्छी खबर आ रही है। अब टैक्सपेयर ने सरकार का खजाना भर दिया है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण चालू वित्त वर्ष में 10 अगस्त, 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23.09 प्रतिशत बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.59 लाख करोड़ रुपये था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.75 प्रतिशत बढ़कर 9.55 लाख करोड़ रुपये रहा और 1.43 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए। शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 2.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये, जबकि गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 4.11 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स से शुद्ध संग्रह भी 22,354 करोड़ रुपये से बढ़कर 33,824 करोड़ रुपये पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूती के साथ सरकार की राजस्व स्थिति भी लगातार बेहतर हो रही है।

कर संग्रह में उछाल मजबूत आर्थिक विकास का संकेत
भारत के कर संग्रह में लगातार वृद्धि देश के बढ़ते आधार और बेहतर अनुपालन उपायों को दर्शाता है। इसके साथ ही कर संग्रह में यह उछाल आय में वृद्धि, रोजगार और आय के बढ़ते स्तर को रेखांकित करता है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर संग्रह दोनों में मजबूत वृद्धि बताता है कि भारत का आर्थिक सुधार महत्वपूर्ण गति प्राप्त कर रहा है। भारत की आर्थिक मजबूती विकास को भी गति देने में कारगर साबित होगी। आखिरकार इसका लाभ टैक्सपेयर को ही मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश-प्रतिदिन नई उपलब्धियों को हासिल कर रहा है। आइए एक नजर डालते हैं प्रमुख उपलब्धियों पर…

पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8%
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से 0.9 प्रतिशत अधिक है और आरबीआई के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी बेहतर रही। इस तेज वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान तृतीयक क्षेत्र का रहा, जिसकी विकास दर 10 प्रतिशत रही और फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी व प्रोफेशनल सर्विसेज में 12.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं द्वितीयक क्षेत्र 8.6 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र 2.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही। निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर मजबूत रही और सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) की वृद्धि दर बढ़कर 11.9 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 5.8 प्रतिशत थी।

52.8 पर मैन्युफैक्चरिंग PMI
अगस्त, 2026 में HSBC India Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) 52.8 पर रहा। 50 से ऊपर का PMI बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ जारी है। इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह नए ऑर्डरों में तेजी और मजबूत घरेलू मांग रही। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नए बिजनेस के चलते उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को देखते हुए भारतीय कंपनियां किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए पहले से ही कच्चे माल और तैयार माल का अतिरिक्त स्टॉक जमा कर रही हैं।

सर्विसस सेक्टर PMI 54.6 पर
अगस्त, 2026 में सेवा क्षेत्र में शानदार रिकवरी देखने को मिली। फ्लैश इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स अगस्त में सुधरकर 54.5 पर पहुंच गया, जो जुलाई में 53.3 था। ‘परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स’ (पीएमआई) का 50 से अधिक रहना गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे का आंकड़ा सुस्ती का संकेत है। एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा कि मजबूत सेवा गतिविधियों की मदद से कुल मिलाकर देश के प्राइवेट सेक्टर का उत्पादन काफी हद तक स्थिर बना हुआ है।

रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर विदेशी मुद्रा भंडार
देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.42 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 729.33 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। यह भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू इस अवधि में 9.48 अरब डॉलर बढ़कर 591.33 अरब डॉलर हो गई। वहीं, गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई और यह 2.80 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 114.22 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) की वैल्यू 11.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.85 अरब डॉलर हो गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की रिजर्व पोजिशन 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.925 अरब डॉलर हो गई।

भारत अब सबसे ज्यादा फॉरेक्स रिजर्व रखने वाले देशों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में चीन सबसे आगे है। उसके पास करीब 3.42 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। जापान करीब 1.29 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे और स्विट्जरलैंड करीब 1.09 ट्रिलियन डॉलर के रिजर्व के साथ तीसरे पायदान पर है। भारत की स्थिति इसलिए भी खास है क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका इस मामले में टॉप-10 में शामिल नहीं है। अमेरिका के पास करीब 253 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। यानी भारत का फॉरेक्स रिजर्व अमेरिका के मुकाबले करीब तीन गुना है। यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी मुद्रा के मामले में भारत की स्थिति कितनी मजबूत हुई है।।

देश का मुद्रा भंडार 27 सितंबर 2024 को समाप्त सप्ताह के दौरान 12.59 अरब डॉलर उछलकर 700 अरब डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 704.89 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। विदेशी मुद्रा भंडार ने 4 जून, 2021 को 6.842 अरब डॉलर बढ़कर 600 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार किया था। इसके पहले विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था। मोदी राज में विदेशी मुद्रा भंडार दो गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। मोदी राज में देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और इसी वजह से ये भंडार भी बढ़ता जा रहा है, जो हमारे देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करता है। जब देश के पास इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो हमारा पैसा भी मजबूत रहता है और व्यापार और निवेश के लिए अच्छा माहौल बनता है।

मोदी राज में सेंसेक्स भी शिखर पर
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय शेयर बाजार की रिकॉर्डतोड़ रफ्तार जारी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी रोज नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। 26 सितंबर, 2024 को सेंसेक्स और निफ्टी नए शिखर पर पहुंच गए। बाजार खुलने के कुछ देर बाद ही सेंसेक्स 85,425 पर पहुंच गया। इसके पहले बुधवार 25 सितंबर, 2024 को सेंसेक्स 85000 के ऐतिहासिक स्तर के पार 85,169 के स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले 20 सितंबर 2024 को सेंसेक्स 84000 के स्तर को पार कर 84544.31 पर बंद हुआ।

मार्केट बंद होने के हिसाब से अगर शेयर बाजार के रिकॉर्ड पर नजर डाला जाए तो सेंसेक्स पहली वार 17 सितंबर को 83 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 83, 079.66 पर बंद हुआ। 29 अगस्त 2024 को सेंसेक्स 82,134.61 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ। इसके पहले 18 जुलाई को सेंसेक्स 81000 का लेवल पार कर 81,343.46 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। इसी महीने 04 जुलाई, 2024 को सेंसेक्स 62.87 अंक मजबूत होकर 80,049.67 के स्तर पर बंद हुआ। 27 जून, 2024 को सेंसेक्स 79000 के लेवल को पार कर 79243 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 25 जून, 2024 को 78000 के लेवल को पार कर 78053 पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 18 जून, 2024 को 77,301 पर बंद हुआ। 3 जून, 2024 को बीएसई सेंसेक्स 76000 के स्तर को पार करते हुए 76,469 पर बंद हुआ। इसके पहले 10 अप्रैल, 2024 बीएसई का सेंसेक्स 75,000 के पार 75,038.15 पर बंद हुआ। इसके पहले 6 फरवरी को सेंसेक्स पहली बार 74000 के पार 74,085.99 के स्तर पर बंद हुआ।

इसके पहले 15 जनवरी, 2024 को बीएसई का सेंसेक्स पहली बार 73,000 के पार 73,327 पर बंद हुआ। 27 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 72,000 के पार निकल 72,038 अंक पर बंद हुआ। 15 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 71,483 के लेवल पर, जबकि एक दिन पहले ही 14 दिसंबर को सेंसेक्स 70000 का लेवल पार करते हुए 70514 पर बंद हुआ। इसके पहले 5 दिसंबर, 2023 को सेंसेक्स 69,000 के लेवल को पार कर 69,168 के स्तर पर खुला।

इसके पहले सेंसेक्स 4 दिसंबर, 2023 को 68 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 68865.12 पर बंद हुआ। इससे पहले 19 जुलाई, 2023 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 67,097.44 के स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले सेंसेक्स 14 जुलाई, 2023 को 66 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 66060.90 पर बंद हुआ। इसके पहले सेंसेक्स 3 जुलाई, 2023 को 65 हजार का आंकड़ा पार करते हुए 65, 205.05 पर बंद हुआ था और 30 जून, 2023 को 64 हजार के पार पहुंच 64,718.56 के लेवल पर बंद हुआ। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास पर नजर डालें तो सेंसेक्स पहली बार 30 नवंबर, 2022 को 63000 के पार बंद हुआ। यह 24 नवंबर,2022 को 62000 के आंकड़े के पार जाकर बंद हुआ है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने 01 नवंबर, 2022 को नया रिकॉर्ड कायम करते हुए 61 हजार के ऊपर बंद हुआ। इसके पहले 24 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स 60,000 के पार, 16 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स 59,000 के पार, 03 सितंबर, 2021 को 58,000 और 31 अगस्त, 2021 को 57,000 के पार गया था।

इसके पहले सेंसेक्स ने 18 अगस्त 2021 को 56,000 और 13 अगस्त, 2021 को 55,000 अंक के स्तर के पार किया। सेंसेक्स इसी महीने 4 अगस्त को पहली बार 54000 के आंकड़े को पार किया। यह 22 जून को 53,000 के लेवल को पार कर नए शिखर पर पहुंचा था। इसके पहले 15 फरवरी, 2021 को शेयर बाजार के बीएसई सेंसेक्स ने 52,000 के लेवल को पार कर रिकॉर्ड बनाया था। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सेंसेक्स ने जून 2014 में पहली बार 25 हजार के स्तर को छुआ था। मोदी राज में पिछले 6 साल में 25 हजार से 50 हजार तक के सफर तय कर सेंसेक्स दो गुना हो गया है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

रोज रिकॉर्ड तोड़ता शेयर बाजार इस बात का सबूत है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है, उससे तमाम क्षेत्रों की कंपनियों में विश्वास जगा है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कदम उठाने के बाद कोरोना काल में भी आर्थिक जगत में मोदी सरकार की साख मजबूत हुई है, और कंपनियां, शेयर बाजार, आम लोग सभी सरकार की नीतियों पर भरोसा कर रहे हैं। जाहिर है यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।

वैश्विक बाजारों में भारतीय शेयर बाजार मार्केट के लिहाज से अब अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथे स्थान पर है। अब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। लगभग 50.86 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा इक्विटी बाजार है। इसके बाद 8.44 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन दूसरे और 6.36 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे स्थान पर है।

23 करोड़ अधिक हुई डीमैट खातों की संख्या
भारत में शेयर बाजार और निवेश को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर डीमैट खातों की संख्या पर भी दिख रहा है। देश में डीमैट खातों की कुल संख्या अब 23 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जो बताता है कि बड़ी संख्या में लोग अब सीधे शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों से जुड़ रहे हैं। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 के अंत तक देश में करीब 23.44 करोड़ डीमैट खाते थे। अकेले जुलाई में करीब 29 लाख नए खाते जुड़े। जून के मुकाबले खातों की संख्या में करीब 1.25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। देश की दो प्रमुख डिपॉजिटरी में से CDSL के पास करीब 18.83 करोड़ डीमैट खाते थे, जबकि NSDL के पास करीब 4.62 करोड़ खाते दर्ज किए गए। यानी कुल खातों में CDSL की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। डीमैट अकाउंट शेयरों और दूसरी प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने के लिए जरूरी होता है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता, निवेश के प्रति बढ़ती जागरूकता और छोटे निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने नए डीमैट खाते खोलने की रफ्तार को बढ़ाया है। आंकड़ों से साफ है कि अब शेयर बाजार सिर्फ बड़े निवेशकों तक सीमित नहीं रह गया है। युवा और पहली बार निवेश करने वाले लोग भी तेजी से बाजार से जुड़ रहे हैं। बाजार की बेहतर स्थिति का असर भी नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार पर देखने को मिल रहा है।

भारत में निवेश करना चाहते हैं दुनिया भर को अरबपति
अमेरिका-ईरान- इजरायल और रूस-यूक्रेन संकट के कारण जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था डांवाडोल हाल में है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था तमाम चुनौतियों के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है, जिससे विदेशी निवेशकों की भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। दुनिया भर के अरबपतियों के लिए भारत एक प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हाल ही में आई यूबीएस बिलियनेर एंबिशंस रिपोर्ट के अनुसार भारत जल्द ही निवेश का एक गढ़ बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के अरबपति लोग अपना ज्यादा से ज्यादा पैसा भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में लगाना चाहते हैं क्योंकि यहां की अर्थव्यवास्था मजबूत होने के साथ उनके अनुकूल है। स्विस बैंक की यह रिपोर्ट 75 बाजारों में 2,500 से अधिक अरबपतियों के सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें 58 प्रतिशत अरबपतियों ने निवेश के लिए अपने चुने हुए बाजारों के रूप में भारत और दक्षिण पूर्व एशिया को चुना।

दुनिया पर मंडरा रही मंदी की आशंका, लेकिन भारत को खतरा नहीं- ब्लूमबर्ग
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए ताजा सर्वे के अनुसार अगले एक साल में दुनिया के कई देशों के सामने मंदी का संकट मंडरा रहा है। सर्वे की माने तो एशियाई देशों के साथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है। ईरान संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका, जापान और चीन जैसे देशों में मंदी का खतरा कहीं ज्‍यादा है। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत को मंदी के खतरे से पूरी तरह बाहर बताया गया है। ब्लूमबर्ग सर्वे के अनुसार भारत ही ऐसा देश है जहां, मंदी की संभावना शून्य यानी नहीं के बराबर है।

बैंकों का एनपीए कई दशकों के निचले स्तर पर
मोदी सरकार के बैंकिंग सुधारों, फंसे कर्ज की पहचान और समाधान की रणनीति का असर अब बैंकिंग क्षेत्र की मजबूत होती बैलेंस शीट में साफ दिखाई दे रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जून 2026 में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात घटकर महज 1.8 प्रतिशत रह गया, जो कई दशकों का सबसे निचला स्तर है। वहीं शुद्ध NPA अनुपात भी घटकर 0.4 प्रतिशत पर आ गया है। बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती खास तौर पर सरकारी बैंकों के प्रदर्शन में भी नजर आती है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल NPA अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत और शुद्ध NPA अनुपात 0.39 प्रतिशत के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। सरकार के मुताबिक, NPA की पहचान, फंसे खातों के समाधान, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण और बैंकिंग क्षेत्र में किए गए लगातार सुधारों से बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

विदेशी निवेशकों का भरोसा कायम, FDI पहुंचा रिकॉर्ड 94.53 अरब डॉलर
मोदी सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, आर्थिक सुधारों और कारोबार को आसान बनाने की कोशिशों के बीच भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह लगातार मजबूत हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में ग्रॉस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 94.53 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 80.62 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत अधिक है। इस तरह भारत ने अब तक का अपना सबसे ज्यादा सालाना ग्रॉस FDI दर्ज किया है। मोदी सरकार के पिछले 11 वित्त वर्षों यानी 2014-15 से 2024-25 के दौरान भारत में कुल 748.78 अरब डॉलर का FDI आया, जो 2003-04 से 2013-14 के बीच आए 308.38 अरब डॉलर से 143 प्रतिशत अधिक है। सरकार के मुताबिक, निवेश नीति में सुधार, अधिकांश क्षेत्रों को ऑटोमैटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत FDI के लिए खोलना और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भारत की वैश्विक निवेश आकर्षण क्षमता को मजबूत किया है।

सर्विसेज के साथ मैन्युफैक्चरिंग में भी बढ़ा निवेश
विदेशी निवेश के मामले में सर्विसेज सेक्टर लगातार सबसे आगे बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल FDI इक्विटी इनफ्लो में सर्विसेज सेक्टर की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रही। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की 16 प्रतिशत तथा ट्रेडिंग की 8 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। सर्विसेज सेक्टर में FDI इक्विटी इनफ्लो 6.64 अरब डॉलर से बढ़कर 9.35 अरब डॉलर हो गया, यानी इसमें 40.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी विदेशी निवेश की दिलचस्पी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में मैन्युफैक्चरिंग FDI 18 प्रतिशत बढ़कर 19.04 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 16.12 अरब डॉलर था। यह बदलाव बताता है कि भारत अब केवल सर्विसेज और आईटी के लिए ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और रणनीतिक क्षेत्रों में भी वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

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