जब मजबूत नेतृत्व हो, दृढ़ संकल्प हो, नीयत साफ हो और नीति की दिशा स्पष्ट हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम और मजबूत नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर आलोचकों को करारा जवाब दिया है। इस साल की अप्रैल-जून तिमाही में भारत के जीडीपी ग्रोथ (7.8 प्रतिशत) की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। वैश्विक स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के संकटों के बावजूद, देश के विकास ने अपनी रफ्तार कम नहीं होने दी है। भारत को ‘डेड इकॉनमी’ या सुस्त अर्थव्यवस्था बताने वालों को ये आंकड़े एक करारा तमाचा हैं। देश की विकास दर ने विरोधियों को बता दिया है कि भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

GDP ने दिया बड़ा सरप्राइज, सभी अनुमान को पीछे छोड़ा
पश्चिम एशिया में युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, महंगे तेल, सप्लाई चेन पर दबाव और वैश्विक अनिश्चितता—इन तमाम चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का एक और बड़ा प्रमाण पेश किया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। दरअसल, अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़कर 81.36 लाख करोड़ रुपये रही। एक साल पहले यह 75.46 लाख करोड़ रुपये थी। यह आंकड़ा न केवल पिछले साल की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से बेहतर है, बल्कि इंडिया रेटिंग्स ने 6.9 प्रतिशत, भारतीय स्टेट बैंक 8 प्रतिशत, RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से भी ऊपर है।

India’s exemplary GDP growth of 7.8% during Q1 of FY 2026-27 is a herculean feat.
The collective strength of our people ensured India delivered such growth despite oil price shocks and supply chain issues in the midst of global uncertainties.
Doomsayers were doomed and India…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2026
पीएम मोदी का स्वदेशी मंत्र, निराशावाद और झूठ की गूंज पर प्रहार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार 1 सितंबर, 2026 को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि देशवासियों की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक ताकत का नतीजा है। आइए, पढ़ते और सुनते हैं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो में क्या कहा है ?
देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई,
7.8 प्रतिशत ग्रोथ, देश खुशियों से भर गया है। लेकिन देशवासियों को बधाई देता हूं उनके संकल्प शक्ति के लिए, उनके पुरुषार्थ के लिए, एक सामूहिक शक्ति का प्रतिबिंब है।
दुनिया युद्ध में डूबी हुई है। चारों तरफ युद्ध की खबरें आ रही हैं। विश्व संकटों से घिरा हुआ है। सप्लाई चेन पूरी तरह डिस्टर्ब है। 2020 में कोविड काल से लेकर अब तक कहीं पर भी स्थिरता नजर नहीं आ रही है। उसके बावजूद भी भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है।
दूसरी तरफ, भारत के भीतर भी निराशा के गर्त में डूबे हुए लोग झूठ की गूंज, चारों तरफ निराशा फैलाने में लगे हैं। इन सारी चीजों को पार करते हुए, उन सभी बातों को चीर करके देश ने 7.8 प्रतिशत ग्रोथ हासिल किया है। हमें इस गति को बनाए रखना है।
हमें बढ़ना भी है और इसके लिए आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी है। स्वदेशी का मंत्र, वोकल फॉर लोकल—विदेशों की यात्राएं, अगर घूमने-फिरने जाते हैं, तो नहीं करना चाहिए। शादी-विवाह विदेशों में करते हैं, नहीं करना चाहिए। ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए और जरूरत न हो तो सोना भी नहीं खरीदना चाहिए।
हम जितना ज्यादा स्वदेशी पर बल देंगे, जितना आत्मनिर्भरता पर बल देंगे, मुझे पक्का विश्वास है जब आजादी के 100 साल होंगे, हम हमारी युवा पीढ़ी को विकसित भारत सुपुर्द करेंगे। हमारी युवा पीढ़ी के सपनों को हम आज अपने परिश्रम से साकार करके रहेंगे।
और इसलिए आइए देशवासियों, हम पुरुषार्थ में कोई कमी न रखें। हमारी नीति सही है। हमारी नीयत साफ है। और 140 करोड़ देशवासियों की शक्ति आज एकजुट होकर के देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
आइए, खुशियां भी मनाइए, संकल्प कीजिए और संकल्प को सिद्ध करने के लिए मेरे साथ चल पड़िए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत बधाई।
7.8% growth.
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026
अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही के शानदार आंकड़े
नामिनल जीडीपी (Nominal GDP): यह 10.3 प्रतिशत बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई। पिछले साल यह 8.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 80 लाख करोड़ रुपये थी।
नामिनल जीवीए (Nominal GVA): चालू कीमतों पर इसमें 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जो 72.24 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 80.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
वास्तविक जीवीए (Real GVA): स्थिर कीमतों पर इसमें 8.2 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 68.21 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वास्तविक जीवीए, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान सब्सिडी का प्रभाव अप्रत्यक्ष करों की तुलना में अधिक रहा।

विकास दर को गति देने वाले मुख्य प्रेरक क्षेत्र
तृतीयक (सेवा) क्षेत्र : इस बेहतरीन विकास दर को मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र ने गति दी है, जिसने स्थिर कीमतों पर 10.0 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। सेवा क्षेत्र के भीतर ‘वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाओं’ में सबसे अधिक 12.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
द्वितीयक क्षेत्र (मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन) : द्वितीयक क्षेत्र ने भी 8.6 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। अर्थव्यवस्था के उत्पादन पक्ष में भी व्यापक मजबूती दिखाई दी।
प्राथमिक क्षेत्र (कृषि और उससे जुड़े) : प्राथमिक क्षेत्र ने स्थिर कीमतों पर 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की है, जिसमें मुख्य योगदान ‘कृषि और उससे जुड़े’ क्षेत्र के प्रदर्शन का रहा, जिसने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

सकल अचल पूंजी निर्माण (GFCF) में दो अंकों में वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही: 11.9 प्रतिशत
वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही: 5.8 प्रतिशत
पहली तिमाही में GDP में GFCF का हिस्सा लगभग 34.3 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 31.4 प्रतिशत था।
इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था की गति केवल सरकारी खर्च या उपभोक्ता मांग के सहारे नहीं चल रही थी। निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गतिविधि भी मजबूत हुई।

घरेलू मांग बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत
वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय यानी PFCE में वास्तविक वृद्धि 7.1% रही। यही कारण है कि भारत बाहरी झटकों के बावजूद अमेरिका, यूरोप या चीन जैसी बाहरी मांग पर पूरी तरह निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत ज्यादा टिकाऊ दिखाई देता है। दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और सुस्ती के बावजूद घरेलू बाजार की मजबूती ने भारत की अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है। घरेलू स्तर पर मांग बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और सर्विस सेक्टर में जोरदार तेजी आई है।

क्यों अहम हैं अप्रैल-जून 2026 तिमाही के आंकड़े ?
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में महंगाई बढ़ गई है। आम तौर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों और महंगाई से आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ती हैं, लेकिन भारतीय इकोनॉमी ने इस दबाव के बीच भी 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की। विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में व्यापक मजबूती से संकेत मिलता है कि कंपनियां मजबूत मांग की उम्मीद में अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रही थीं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ इस बात का संकेत है कि घरेलू मांग और निवेश दोनों मजबूत हैं। पैसेंजर व्हीकल और हाउसहोल्ड व्हीकल रजिस्ट्रेशन में 13.9 प्रतिशत और 15.9 प्रतिशत की ग्रोथ यह दर्शाती है कि आम उपभोक्ता की खरीदारी क्षमता और विश्वास दोनों बने हुए हैं।

भारत GDP वृद्धि दर के मामले में विश्व में नंबर वन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई है, जिसके साथ भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बना हुआ है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। भारत की 7.8 प्रतिशत की यह वृद्धि दर चीन (लगभग 4.3%), अमेरिका (2.1%) और अन्य प्रमुख G20 देशों की तुलना में काफी आगे है। OECD और IMF जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल और ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे लचीला और तेज गति से बढ़ने वाला बताया है।

होर्मुज संकट का असर क्यों नहीं दिखा?
- मजबूत उपभोक्ता खर्च, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी (FMCG) की मांग तथा सेवा क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन ने वैश्विक झटकों के असर को काफी हद तक बेअसर कर दिया।
- विनिर्माण क्षेत्र में आई जबरदस्त तेजी ने साबित कर दिया है कि देश का औद्योगिक आधार मजबूत हो रहा है।
- सरकार के पूंजीगत व्यय (Capex) और बुनियादी ढांचे पर लगातार जोर देने से निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी बनी रही।
- भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के आयात के रास्ते बदले तथा खाड़ी देशों के अलावा अन्य स्रोतों (जैसे अमेरिका और वेनेजुएला) से आपूर्ति बढ़ाई।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार और नीति निर्माताओं ने घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं व उद्योगों को पूरी तरह से झटके से बचाने के लिए वित्तीय कुशन (Fiscal Cushion) और कर में राहत का उपयोग किया।
- भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दूरदर्शी नीतियों, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ने इस संकट के असर को बेअसर करने में अहम भूमिका निभाई।

राहुल गांधी की भयंकर आर्थिक सुनामी की भविष्यवाणी फेल
GDP के इन आंकड़ों ने कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी और उन जैसे बेहद निराशावादी नेताओं को करारा तमाचा मारा है। राहुल गांधी ने जून 2026 में कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में पार्टी के आदिवासी विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में सुनामी आने की भविष्यवाणी की थी। राहुल गांधी ने कहा था, ‘देश में भयंकर आर्थिक सुनामी आ रही है। दूसरी तरफ देश की संस्थाओं के अंदर विद्रोह हो रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के संदेश मेरे पास आ रहे हैं। खुफिया व्यवस्था के प्रमुख, उच्च न्यायपालिका सब विद्रोह कर रहे हैं और हमें जानकारी दे रहे हैं। नियंत्रण की व्यवस्था अंदर से बिखर रही है। लोगों को दिख रहा है कि जनता का अब ऐसा भयंकर दबाव आएगा कि इस रास्ते पर हमारे लिए खतरा हो जाएगा।’
Economic tsunami
Rahul Gandhi declared the Indian economy “DEAD” in July 2025.
𝐎𝐧𝐞 𝐲𝐞𝐚𝐫 𝐥𝐚𝐭𝐞𝐫….
Q1 FY27 Real GDP Growth: 7.8%𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐢𝐬 𝐠𝐫𝐨𝐰𝐢𝐧𝐠, 𝐞𝐱𝐩𝐚𝐧𝐝𝐢𝐧𝐠 𝐚𝐧𝐝 𝐦𝐨𝐯𝐢𝐧𝐠 𝐟𝐨𝐫𝐰𝐚𝐫𝐝 𝐚𝐭 𝐚𝐧 𝐮𝐧𝐩𝐫𝐞𝐜𝐞𝐝𝐞𝐧𝐭𝐞𝐝 𝐬𝐩𝐞𝐞𝐝.… https://t.co/SZ2Yfbuhyn pic.twitter.com/dNuifvf9Nc
— Dr. Geet (@shiwani98765432) August 31, 2026
‘डेड इकॉनमी’ बताने वाले राहुल गांधी को करारा तमाचा
इससे पहले राहुल गांधी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ठहरी हुई या ‘डेड इकॉनमी’ के रूप में पेश किया था। जिन विदेशी या घरेलू नेताओं ने भारत की आर्थिक सेहत पर सवाल उठाए थे, उन्हें इन मजबूत आंकड़ों ने गलत साबित कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई भारतीय अर्थव्यवस्था की आलोचना को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को छोड़कर सभी जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था ‘मृत’ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने देश की आर्थिक, रक्षा और विदेश नीतियों को नष्ट कर दिया, जिससे भारत रसातल में पहुंच गया है।
राहुल गांधी: आर्थिक सुनामी आ रही है, सब खत्म हो जाएगा! 😭
इधर इंडियन इकॉनमी:
👉 FY 27 के Q1 में 7.8% GDP ग्रोथ दर
👉 FDI 15 साल के हाई पर
👉रिकॉर्ड ऑटो सेल्स और फॉरेक्स रिज़र्व
👉 क्रेडिट ग्रोथ 14 साल के टॉप परपब्लिक: “अच्छा जी, ऐसा है क्या?” 🤣🤣
कितने लोगों को लगता है कि… pic.twitter.com/482J3jtTQO
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 31, 2026
राहुल गांधी के आर्थिक गुरु रघुराम राजन की चेतावनी धरी रह गई
जून 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि 7 प्रतिशत से अधिक की आधिकारिक जीडीपी वृद्धि और जमीनी हकीकत मेल नहीं खाती है, यानी “कुछ तो गड़बड़ है” (something is off)। उन्होंने कहा था कि कंपनियों का निवेश से पीछे हटना यह संकेत देता है कि उन्हें बाजार की भविष्य की मांग पर उतना भरोसा नहीं है जितना आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग की धीमी रफ्तार और मध्य पूर्व के तनाव के कारण तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को भी नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी थी। लेकिन मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और सर्विस सेक्टर में जोरदार तेजी ने कांग्रेस समर्थक अर्थशास्त्री रघुराम राजन के आर्थिक समझ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मोदी सरकार ने सारी आशंकाओं को गलत साबित किया
CRISIL ने होर्मुज व्यवधान को ऊर्जा और सप्लाई चेन के लिए बड़ा झटका बताया था और अनुमान लगाया था कि लंबे समय तक व्यवधान रहने पर Brent crude की कीमतें काफी ऊंची रह सकती हैं। ICRA ने भी चेताया था कि पश्चिम एशिया भारत के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है और संकट लंबा खिंचने पर महंगे तेल, ऊंची माल ढुलाई और सप्लाई में देरी से GDP पर दबाव आ सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के संकट प्रबंधन ने सारी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक मोर्चे पर सफलता हासिल कर अपने आलोचकों को बता दिया है कि कोई भी चुनौती भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने से रोक नहीं सकती।










