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हिंदुओं की विरोधी गहलोत सरकार, पुजारी की हत्या और ब्रज के संत को खुदकुशी के लिए मजबूर करने वाले कांग्रेस राज में ही अब राजसमंद में पुजारी दंपती को जिंदा जलाया

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राजस्थान की कांग्रेस सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता के चलते हिंदुओं पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और गहलोत सरकार बंद आंख से तमाशा देखने में लगी है। कांग्रेसी नेता उस बिल्ली की तरह आंखें मूंदे हैं, जो यह सोचती है कि उसे चोरी से दूध पीते कोई देख नहीं रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर राहुल-प्रियंका वाड्रा तक को भी अपनी सरकार के ‘पाप’ दिखाई नहीं दे रहे हैं। कुछ माह पहले ही बूंदी जिले में दिल को दहला देने वाली वारदात में मंदिर की मूर्ति चुराने आए बदमाशों ने पुजारी की बेरहमी से हत्या कर थी। इससे पहले भरतपुर में खनन माफिया के खिलाफ 551 दिन के अनशन की आवाज अनसुनी होने पर साधु ने सरकार से नाराज और मजबूर होकर आत्मदाह कर लिया। अब राजसमंद जिले के देवगढ़ इलाके में पुजारी दंपती को जिंदा जलाने की घटना हुई है। बेखौफ बदमाशों ने यहां पुजारी परिवार पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया गया। हमले में पुजारी और उसकी 80 फीसदी तक झुलस गए हैं और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।राजस्थान सरकार की ‘औरंगजेबी’ मानसिकता के चलते आस्था स्थल तोड़े जा रहे
हिंदू-विरोधी राजस्थान की ‘औरंगजेब’ सरकार की मानसिकता इससे भी झलकती है कि वह 300 साल पुराने शिवालय को बुलडोजर से ढहा देती है। सालासर बालाजी में राम दरबार को रात के अंधेरे में ध्वस्त करा देती है। सरकार की लापरवाह नीतियों से हिंदुओं में ही नहीं, दलितों और अन्य समाज के लोगों में भी रोष है। जालौर की घटना को अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, जिसमें मटकी का पानी पीने पर मासूम दलित छात्र की निर्मम हत्या कर दी गई। अलवर में एक बार फिर वहशी दरिंदों द्वारा मॉब लिंचिंग की वारदात को अंजाम दिया। सीएम की नाक के नीचे राजधानी में मासूम के सामने उसकी शिक्षिका मां को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। बेहद शर्मनाक और अफसोस की बात है कि इतनी सारी अक्षम्य घटनाओं के बावजूद कांग्रेस हाईकमान के मुंह से ‘उफ’ तक नहीं निकलती।

राजसमंद: खाना खा रहे पुजारी दंपती पर पेट्रोल बमों से हमला, जिंदा जलाने की कोशिश
हिंदुओं के दमन पर गहलोत सरकार की पुलिस द्वारा चुप्पी साधने का नया मामला राजसमंद से आया है। यहां पर एक पुजारी दंपती को जिंदा ही जला दिया गया। पुजारी के पुत्र मुकेश प्रजापत के मुताबिक उनका परिवार खाना खा रहा था। तभी करीब 8-10 बदमाश आए और उन्होंने पुजारी नवरत्न लाल (75) उनकी पत्नी जमना देवी (60) निवासी हीरा की बस्सी के ऊपर पेट्रोल बम फेंके और भाग गए। इससे तत्काल उनके कपड़ों ने आग पकड़ ली। घटना के बाद आग की लपटें उठने लगीं तो धुएं को देखकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी भाग चुके थे।शिकायत पर पुलिस सोती रही, अब आग लगने से पुजारी दंपती 80 प्रतिशत झुलसे
इसके बाद ग्रामीणों ने पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाई। पुलिस तथा 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। ग्रामीणों ने एम्बुलेंस की मदद से दोनों घायलों को हॉस्पिटल भेजा। गंभीर रूप से झुलसे पुजारी दंपती का राजसमंद के जिला अस्पताल में उपचार जारी है। पुजारी के पुत्र मुकेश के मुताबिक इन बदमाशों ने पहले भी जमीन के लिए विवाद किया था, उसको लेकर उन्होंने पहले ही कामली घाट चौकी पर रिपोर्ट भी दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। लेकिन पुलिस में शिकायत करने से नाराज होकर इन बदमाशों ने उनके घर जानलेवा हमला कर दिया। मुकेश के मुताबिक इतना बड़ा कांड होने के बाद पुलिस अब नींद से जागी है और आठ लोगों को पकड़ा है। यदि पुलिस ने पहले ही उनकी शिकायत पर एक्शन ले लिया होता तो अग्निकांड न होता।

पुजारी दंपती को जिंदा जलाना प्रदेश सरकार की मौत का परिचायक, शर्मनाक और वीभत्स-भाजपा
राजसमंद जिले के देवगढ़ की हीरा ग्राम पंचायत की बस्ती में मंदिर विवाद पर पुजारी दंपती को जिंदा जलाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के नेता भी मुखर होकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया और राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे गहलोत सरकार के लिए शर्मनाक बताया है। भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “एक पुजारी को यूं जिंदा जलाया जाना स्वयं प्रदेश सरकार की मौत का परिचायक है, शर्मनाक और विभत्स है, एक एफआईआर कानून व्यवस्था के गुमशुदा होने की भी दर्ज होनी चाहिए। राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी ने भी इस घटना की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि “राजसमंद के देवगढ़ में मंदिर के पुजारी को जिंदा जला देने के मामले की जितनी निंदा की जाए, जितना दुख जताया जाए कम है, राज्य सरकार को अब अपनी गहरी नींद को त्यागते हुए दोषियों को सख्त सजा दिलाकर परिवार को तुरंत न्याय देना चाहिए।

उदयपुर के तालिबानी मर्डर से लेकर जालौर में दलित बच्चे की हत्या तक सोनिया गांधी मौन
कांग्रेस हाईकमान ने तो तब भी होंठ सिले रखे थे, जबकि उदयपुर में हुए तालिबानी मर्डर ने देशभर को हिलाकर रख दिया था। बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए, जबकि राजस्थान के शहर-दर-शहर में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे और कांग्रेस के अलंबरदार इस पर चुप्पी साधे रहे। उदयपुर के तालिबानी मर्डर से लेकर दंगों तक राज्य की इंटेलिजेंस एजेंसियों के फेल्योर को देखकर सहज ही जेहन में यह सवाल उपजता है कि क्या आलाकमान की जिम्मेदारी सिर्फ अपनी पसंद का मुख्यमंत्री लगाने भर की ही है? प्रदेश को सांप्रदायिक हिंसा की आग के हवाले करने कि खतरनाक साजिश हो या मासूम दलित बच्चे की हत्या। तालिबानी मर्डर हो या फिर मासूम दलित बच्चे की छुआछूत की वजह से हत्या। महिला को जिंदा जलाने का मामला हो या महिलाओं की अस्मत लूटने में नंबर-वन राज्य बनने का तमगा। दिल दहलाने वाले इतने सारे मामलों के बावजूद भी सरकार की कुंभकर्णी नींद न टूटे, तो सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी किसकी है?सरकार की लगातार की विफलताओं पर आखिर कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहा हाईकमान
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर राहुल-प्रियंका से यह तो पूछा ही जाना चाहिए कि करौली से लेकर उदयपुर तक घोर सरकारी विफलता के खिलाफ उन्होंने क्या एक्शन लिया? जयपुर में एक बार फिर सीरियल ब्लास्ट करने की साजिश करने वालों के साथी रियाज मोहम्मद तक उनकी कांग्रेस सरकार और उसका सिस्टम पहले क्यों नहीं पहुंच पाया? ब्रज क्षेत्र में साधु को आत्मदाह के मजबूर करने के कुसूरवारों को कब सजा मिलेगी ? आखिर कब तक दलितों पर लगातार अत्याचार की कहानियों राजस्थान की जनता सुनती रहेगी? आखिर कब तक महिलाओं को जिंदा जलाया जाता रहेगा और मुख्यमंत्री गुजरात में जाकर अपने पूर्व मंत्री रघु शर्मा के पूछते मिलेंगे कि कहां पर किसको जला दिया ?

आइये राजस्थान के ताजा हालातों पर एक नजर डालते हैं, जहां शहर दर शहर लोंगों में न सिर्फ बढ़ती घटनाओं और पुलिस का इकबाल खत्म होने से खौफ है, बल्कि कोई ठोस एक्शन न लेने और ऐसी घटनाओं को रोक पाने में विफल रहने के लिए सरकार के खिलाफ गुस्सा और आक्रोश है…

जालौर: नौ साल के मासूम इंद्र ने मटकी से पानी क्या पीया, दलित कहकर उसकी जान ही ले ली
राजस्थान के स्कूलों में बच्चों से मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन जालौर की घटना ने तो सारी हदें ही पार कर दीं। जालोर जिले में सरस्वती विद्या मंदिर के टीचर ने नौ साल के दलित छात्र इंद्र मेघवाल की पीट-पीटकर सिर्फ इसलिए ‘हत्या’ कर दी, क्योंकि छुआछूत के अंजान इस मासूम ने टीचर की मटकी से पानी पी लिया था। घटना के विरोध में प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हुए। कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल ने इस्तीफा दे दिया। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने इसके लिए अपनी सरकार पर सवाल भी उठाए। पायलट ने तो लगे हाथ याद दिला दिया कि इससे पहले भी मार्च में पाली में मूंछ रखने को लेकर एक दलित व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। अब इंसाफ न मिलने से असंतुष्ट सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी घटना को लेकर कांग्रेस हाईकमान की तरफ से न कोई बयान आया है और न ही मुख्यमंत्री से जवाबतलबी ही की गई है।जयपुर: शिक्षिका को छह साल के बेटे के सामने ही पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया
अपराधी-तत्वों के दिल से जब सिस्टम और पुलिस का खौफ खत्म हो जाता है, तो हालात ऐसे ही बन जाते हैं। सरकार की नाक के नीचे राजधानी जयपुर में ही एक महिला को जिंदा जलाने का सनसनीखेज मामला हो गया। यह महिला शिक्षिका है और इसने पैसे उधार दिए थे। जब वह अपने पैसे मांगने लगी तो शिक्षिका को पैसे देने बजाए वो उसे धमकाने लगे। शिक्षिका ने तीन बार इसकी रिपोर्ट जयपुर ग्रामीण इलाके के रायसर थाना में भी दी। लेकिन राजस्थान पुलिस कुंभकर्णी नींद सोती रही। गत दस अगस्त को शिक्षिका अनीता अपने छह साल के बेटे राजवीर को लेकर स्कूल में पढ़ाने जा रही थी तो बकायेदारों ने उसे रोका और पेट्रोल डालकर आग लगा दी। घटनास्थल से दो किलोमीटर ही दूर थाना था, लेकिन सुस्त पुलिस 20 मिनट बाद आई। तब तक आरोपी भाग गए। इधर उपचार के दौरान महिला की भी मौत हो गई।अलवर: फिर मॉब लिंचिंग, सब्जी विक्रेता को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला
मॉब लिंचिंग की घटनाओं के लिए कुख्यात हो चुके अलवर में एक बार फिर मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया। जिले के गोविंदगढ़ कस्बे के रामबास गांव में सब्जी विक्रेता चिरंजीलाल (45) की एक समुदाय के 20-25 लोगों ने 14 अगस्त को बुरी तरह से पिटाई की थी, सोमवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कथित रूप से आरोपियों का ट्रेक्टर चोरी हुआ था जो गोविंदगढ़ के रामबास की तरफ नाकेबन्दी में पकड़ा गया था। ट्रेक्टर और चोरों का पीछा कर रहे एक दर्जन से ज्यादा जाती विशेष के लोगों ने रविवार को सुबह करीब पांच बजे घर से शौच के लिए निकले चिरंजीलाल को चोर बताकर लाठी डंडों से हमला कर दिया। उसको इतना पीटा कि उसकी मौत ही हो गई। कभी अलवर में ही गौ तस्करी के लिए पहलू खान की पीट-पीट कर हत्या पर छाती पीटने वाले कांग्रेसी अब चिरंजीलाल की पीट पीटकर हुई हत्या पर मौन हैं, क्योंकि वो एक हिंदू हैं और पुलिस ने जिन्हें गिरफ्तार किया है, वो दूसरे समुदाय के हैं।भरतपुर: खनन माफिया के खिलाफ 551 दिन सोती रही सरकार, विरोध में साधु ने किया आत्मदाह

राजस्थान की ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग में आदिबद्री और कनकाचल पर्वतों में हो रहे अवैध खनन की जानकारी के बावजूद गहलोत सरकार 551 दिन तक सोती रही। अवैध खनन को रुकवाने के लिए यूपी के चुनाव के दौरान साधु-संत कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी से मिले थे। गहलोत-प्रियंका से गुहार लगाने के सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले, लेकिन अवैध खनन नहीं रुका। न ही कनकाचल और आदि बद्री क्षेत्र को वन क्षेत्र में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। आखिरकार 551 दिन से धरना दे रहे साधु-संतों के सब्र का बांध टूट गया। पशुपति नाथ मंदिर के महंत विजयदास बाबा (60) ने विरोध-स्वरूप खुद को आग लगा ली। वे राधे-राधे कहते हुए दौड़ने लगे। जब तक आग बुझाई, तब तक बाबा 80% झुलस गए और बाद में उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अब जयपुर में एक पुजारी ने आत्मदाह की कोशिश में खुद को आग लगा ली है। वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। 

 

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