देश में उच्च शिक्षा को हर मेधावी छात्र तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना उन लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है, जिनके सपनों के बीच सबसे बड़ी बाधा आर्थिक तंगी रही है। इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई सिर्फ इसलिए न रुके क्योंकि उसके परिवार के पास फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। यह महत्वाकांक्षी योजना देश के चुनिंदा गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश पाने वाले छात्रों को बिना किसी जमानत (Collateral) और बिना किसी गारंटर के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही पात्र छात्रों को ब्याज पर सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे उच्च शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
बढ़ रही है उच्च शिक्षा तक पहुंच
पिछले एक दशक में भारत में उच्च शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदली है। वर्ष 2014-15 में देश का सकल नामांकन अनुपात (GER) 23.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी बताती है कि पहले की तुलना में अब ज्यादा छात्र कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि, इस प्रगति के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों के सामने अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिलने के बाद भी कई छात्रों को फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य खर्चों के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी। कई छात्र शिक्षा ऋण लेते भी थे, लेकिन ऊंची ब्याज दरें और जमानत की शर्तें उनके लिए बड़ी बाधा बन जाती थीं। इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने 6 नवंबर 2024 को पीएम विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दी। इसे मिशन मोड में लागू किया गया ताकि देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को समय पर और आसानी से आर्थिक सहायता मिल सके।
PM Vidyalaxmi Scheme: Promoting Educational Inclusion in India
The Pradhan Mantri Vidyalaxmi Scheme is a flagship initiative of the Education Ministry that seeks to make quality higher education accessible to deserving students facing financial constraints.
The scheme provides… pic.twitter.com/eU2CJRbeNN
— PIB India (@PIB_India) July 31, 2026
क्या है पीएम विद्यालक्ष्मी योजना?
पीएम विद्यालक्ष्मी एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित शिक्षा ऋण कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से छात्र एक ही पोर्टल पर शिक्षा ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की स्थिति देख सकते हैं, ब्याज सब्सिडी के लिए दावा कर सकते हैं और किसी भी प्रकार की शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शिक्षा ऋण लेने के लिए किसी प्रकार की संपत्ति गिरवी रखने या किसी गारंटर की आवश्यकता नहीं होती। इससे उन परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलती है जिनके पास बैंक को देने के लिए कोई संपत्ति नहीं है।
किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने देश के निर्धारित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) में प्रतियोगी परीक्षा या मेरिट के आधार पर प्रवेश प्राप्त किया हो। मैनेजमेंट कोटा, एनआरआई कोटा या अन्य विशेष कोटे से प्रवेश लेने वाले छात्र इस योजना के पात्र नहीं होंगे। योजना के तहत वर्तमान में देश के 1,425 उच्च शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। इनमें केंद्र सरकार के संस्थान, राज्य सरकारों के प्रतिष्ठित संस्थान और निजी क्षेत्र के कई शीर्ष शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं। इन संस्थानों का चयन राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) के आधार पर किया गया है। सूची को समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है ताकि देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के छात्र इस योजना का लाभ उठा सकें।
बिना जमानत मिलेगा शिक्षा ऋण
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका कोलेटरल-फ्री एजुकेशन लोन है। यानी छात्र को किसी भी प्रकार की जमीन, मकान या अन्य संपत्ति बैंक में गिरवी नहीं रखनी होगी। इसके अलावा किसी तीसरे व्यक्ति की गारंटी भी नहीं देनी होगी। शिक्षा ऋण की अधिकतम राशि पर कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है। ऋण की राशि संबंधित संस्थान द्वारा निर्धारित फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों के आधार पर तय होगी। इसमें ट्यूशन फीस के अलावा हॉस्टल फीस, मेस शुल्क, अन्य रिफंडेबल और नॉन-रिफंडेबल फीस, पढ़ाई के लिए आवश्यक लैपटॉप तथा छात्र के रहने का उचित खर्च भी शामिल किया जा सकता है।
सरकार दे रही है बैंकों को भी सुरक्षा
इस योजना के तहत केवल छात्रों को ही नहीं बल्कि बैंकों को भी सुरक्षा दी गई है। यदि बैंक 7.5 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण देते हैं तो भारत सरकार उस ऋण पर 75 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और वे ज्यादा से ज्यादा छात्रों को आसानी से शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलता है क्योंकि ऋण स्वीकृत होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्याज पर भी राहत
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना की एक और बड़ी विशेषता ब्याज सब्सिडी है। जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर मोरेटोरियम अवधि के दौरान 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। मोरेटोरियम अवधि में पूरे कोर्स की अवधि और उसके बाद एक वर्ष का समय शामिल है। इससे छात्रों पर पढ़ाई पूरी होने तक अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। यदि किसी छात्र का शिक्षा ऋण 10 लाख रुपये से अधिक है, तब भी ब्याज सब्सिडी केवल 10 लाख रुपये तक की मूलधन राशि पर ही लागू होगी।
पहले से चल रही योजना का भी मिलेगा लाभ
जिन परिवारों की वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये तक है, उन्हें पहले से संचालित प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना (PM-USP CSIS) के तहत मोरेटोरियम अवधि में 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी मिलती रहेगी। पीएम विद्यालक्ष्मी योजना इस व्यवस्था की पूरक है। यानी जिन छात्रों को पहले से किसी अन्य सरकारी ब्याज सब्सिडी योजना का लाभ मिल रहा है, वे एक ही ऋण पर दोहरी सब्सिडी नहीं ले सकेंगे।
📚Focus on your dreams. We’ll support your journey.
Watch this step-by-step guide to understand the loan application process under PM-Vidyalaxmi.
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— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) July 22, 2026
ब्याज दर भी रहेगी कम
योजना के तहत दिए जाने वाले शिक्षा ऋण की ब्याज दर संबंधित बैंक की एक्सटर्नली बेंचमार्क्ड लेंडिंग रेट (EBLR) में अधिकतम 0.5 प्रतिशत जोड़कर तय की जाएगी। यह दर सामान्य शिक्षा ऋणों की तुलना में कम होगी। यदि छात्र पढ़ाई के दौरान और मोरेटोरियम अवधि में नियमित रूप से ब्याज का भुगतान करते हैं, तो बैंक उन्हें अतिरिक्त 1 प्रतिशत तक ब्याज में छूट भी दे सकते हैं। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 80E के तहत शिक्षा ऋण पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स लाभ भी मिलेगा।
एक बार मिलेगा योजना का लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी का लाभ केवल एक बार ही मिलेगा। चाहे छात्र स्नातक, स्नातकोत्तर या एकीकृत पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर रहा हो, वह किसी एक कोर्स के लिए ही इस सुविधा का उपयोग कर सकेगा। इसके साथ ही छात्र को आधार के माध्यम से पंजीकरण करना होगा, पढ़ाई जारी रखनी होगी और संतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन बनाए रखना होगा। यदि छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है या अनुशासनात्मक कारणों से संस्थान से निष्कासित हो जाता है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
Why visit multiple banks when one portal can do the job?
Apply for an education loan through the PM-Vidyalaxmi Portal, a single-window platform integrated with participating Public Sector Banks, Private Banks, Regional Rural Banks and Cooperative Banks.…
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 20, 2026
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था है। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जहां छात्र घर बैठे शिक्षा ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं। अलग-अलग बैंकों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही मंच पर आवेदन, दस्तावेज अपलोड और बैंक का चयन जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पोर्टल पर आवेदन करने के बाद छात्र अपने आवेदन की स्थिति भी रियल टाइम में देख सकते हैं। यदि किसी दस्तावेज़ की कमी है या बैंक की ओर से कोई अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है तो उसकी सूचना भी ऑनलाइन मिल जाती है। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध बनती है। इसी पोर्टल के माध्यम से पात्र छात्र ब्याज सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है तो शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति जानने की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
Got into your dream college but worried about fees?🤔
PM-Vidyalaxmi has your back! 🎓
𝗩𝗶𝗱𝘆𝗮𝗿𝘁𝗵𝗶𝘆𝗼𝗻 𝗸𝗲 𝗹𝗶𝘆𝗲 𝗩𝗶𝗱𝘆𝗮𝗹𝗮𝘅𝗺𝗶! 📚#PMVidyalaxmi #VidyalaxmiForStudents#PMVidyalaxmiForHigherEducation@PMOIndia @EduMinOfIndia pic.twitter.com/yB2OuRvF7N
— PIB India (@PIB_India) July 9, 2026
डिजिटल रुपया वॉलेट से सीधे मिलेगा लाभ
सरकार ने योजना को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए इसे डिजिटल रुपया (CBDC) से भी जोड़ा है। शिक्षा ऋण स्वीकृत होने और राशि जारी होने के बाद पात्र छात्रों को ब्याज सब्सिडी सीधे पीएम विद्यालक्ष्मी डिजिटल रुपया ऐप (CBDC Wallet) में भेजी जाती है। इसके बाद यह राशि छात्र के शिक्षा ऋण खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है। इससे सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनती है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था से देरी कम हुई है और लाभ सीधे पात्र छात्रों तक पहुंच रहा है। 22 जुलाई 2026 तक इस व्यवस्था के तहत 35,777 सक्रिय डिजिटल वॉलेट बनाए जा चुके हैं। इनके माध्यम से 57.66 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी का वितरण संभव हो रहा है। यह दर्शाता है कि योजना धीरे-धीरे डिजिटल शिक्षा वित्त व्यवस्था का मजबूत माध्यम बनती जा रही है।
आवेदन और स्वीकृति के आंकड़े
पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल केवल आवेदन लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार को भी वास्तविक समय में पूरी व्यवस्था पर नजर रखने में मदद करता है। पोर्टल का डैशबोर्ड बताता है कि कितने आवेदन आए, कितने मंजूर हुए और कितने ऋण वितरित किए गए। वित्त वर्ष 2025-26 में सभी योजनाओं के तहत शिक्षा ऋण के लिए 6,45,514 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,10,667 आवेदन केवल पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के तहत आए। यह आंकड़ा बताता है कि योजना शुरू होने के बाद छात्रों में इसका भरोसा तेजी से बढ़ा है। इन आवेदनों में से 70,852 शिक्षा ऋण मंजूर किए जा चुके हैं, जबकि 67,728 छात्रों को ऋण की राशि भी वितरित की जा चुकी है। यह दर्शाता है कि योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर भी प्रभावी तरीके से लागू हो रही है।

ब्याज सब्सिडी से कम होगा आर्थिक बोझ
सरकार ने 2024-25 से 2030-31 तक इस योजना के लिए 3,600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। अनुमान है कि सात वर्षों में लगभग सात लाख नए छात्रों को ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2024-25 से जुड़े 4,14,844 ब्याज सब्सिडी दावे केनरा बैंक को प्राप्त हुए हैं। इन दावों की कुल राशि लगभग 892.81 करोड़ रुपये है। इससे स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा ऋण लेने वाले छात्रों पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए बड़े स्तर पर संसाधन उपलब्ध करा रही है।
महिलाओं और ट्रांसजेंडर छात्रों को भी बराबर अवसर
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देती है। योजना में महिला और ट्रांसजेंडर छात्रों को भी पुरुषों के समान अवसर दिए गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,68,742 पुरुषों और 2,76,764 महिलाओं ने शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया। इनमें से 2,03,438 पुरुषों और 1,58,629 महिलाओं के ऋण स्वीकृत किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र या छात्रा को केवल आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और समाज में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी।

हर वर्ग के छात्रों तक पहुंच रही योजना
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), नॉन-क्रीमी लेयर OBC, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांगजन (PwD) सहित सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों के छात्र इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं। यह व्यापक भागीदारी बताती है कि योजना किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर तबके तक पहुंच रही है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक समान अवसर उपलब्ध कराना है।
किन संस्थानों के लिए मिलेगा लाभ?
योजना के अंतर्गत उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है जो गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इनमें शिक्षा मंत्रालय की नवीनतम NIRF रैंकिंग में शीर्ष 100 संस्थान, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शीर्ष 200 संस्थान तथा भारत सरकार के अधीन संचालित अन्य उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के भारतीय परिसर, भारतीय संस्थानों के विदेशी परिसर तथा विदेशी विश्वविद्यालय इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किए गए हैं। वर्तमान में कुल 1,425 संस्थान इस योजना के लिए पात्र हैं।

एसडीजी-4 और नई शिक्षा नीति को मिलेगा बल
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) यानी सभी के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस उद्देश्य को भी मजबूत करती है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी मेधावी छात्र की शिक्षा केवल आर्थिक तंगी की वजह से नहीं रुकनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं देती, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों तक प्रतिभाशाली छात्रों की पहुंच आसान बनाकर यह योजना शिक्षा में समान अवसर, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रही है। आने वाले वर्षों में यदि इसका दायरा और व्यापक होता है, तो यह भारत को ज्ञान-आधारित, कुशल और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।










